शास्त्रीय संगीत के जाने-माने कलाकार और पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र शनिवार रात से BHU के अस्पताल में एडमिट हैं। गुरुवार यानी 11 सितंबर को मिर्जापुर में बेटी के घर उनकी तबीयत बिगड़ी थी। उन्हें सीने में दर्द होने लगा। बेटी प्रो. नम्रता मिश्र ने तत्काल वहां के रामकृष्ण सेवाश्रम हॉस्पिटल में एडमिट कराया। फिर वहां से BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल लाया गया था। यहां उन्हें सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के ICU में भर्ती कराया गया। वह इस समय नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर (बाइपैप मशीन) सपोर्ट पर हैं। सेप्टिसीमिया यानी खून के संक्रमण से पीड़ित हैं। सभी मेडिकल जांच रिपोर्ट आ गई है। दो दिन से कुछ खाया-पीया नहीं
मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टरों ने बताया- पंडित छन्नूलाल को एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) है, फेफड़ों की गंभीर सूजन है। उन्हें टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, ऑस्टियोआर्थराइटिस और प्रोस्टेट बढ़ा है। पिछले 7 महीनों से अस्वस्थ रहने के कारण उन्हें बेड सोर की समस्या हो गई, जिससे संक्रमण बढ़कर सेप्टिसीमिया हो गया है। दो दिन से उन्होंने कुछ खाया-पीया नहीं। जांच में हार्ट अटैक के संकेत नहीं मिले
IMS BHU के डायरेक्टर प्रो. एसएन संखवार के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम उनके इलाज और स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, फिलहाल उनके जीवनरक्षक पैरामीटर्स स्थिर हैं। दिल की ईसीजी और टू-डी ईको जांच में हृदयाघात (हार्ट अटैक) के कोई संकेत नहीं मिले हैं। गुरुवार रात सांस लेने में तकलीफ और तेज बुखार के कारण उन्हें मिर्जापुर के रामकृष्ण सेवाश्रम हॉस्पिटल से हार्ट अटैक की आशंका में BHU रेफर किया गया था। उनकी बेटी प्रो. नम्रता मिश्र उन्हें लेकर BHU अस्पताल पहुंचीं। यहां उन्हें तत्काल इमरजेंसी से मेडिसिन विभाग के ICU में एडमिट किया गया। मंत्री ने सरकार की तरफ से मदद का भरोसा दिया
डॉक्टर उन्हें बाइपैप मशीन सपोर्ट, एंटीबायोटिक थेरेपी, इंसुलिन और अन्य इलाज दे रहे हैं। पंडित छन्नूलाल की गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार से लेकर स्थानीय प्रशासन तक सतर्क हो गया है। रविवार को आयुष, खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ अस्पताल पहुंचे। पंडित छन्नूलाल की बेटी नम्रता मिश्र से मिलकर सरकार की ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि पंडित छन्नूलाल मिश्र न केवल काशी, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर हैं। आजमगढ़ के हरिहरपुर में जन्मे छन्नूलाल
पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म 3 अगस्त 1936 को यूपी के आजमगढ़ स्थित हरिहरपुर में हुआ। उनके दादा गुदई महाराज शांता प्रसाद एक प्रसिद्ध तबला वादक थे। छन्नूलाल ने छह साल की उम्र में ही अपने पिता बद्री प्रसाद मिश्र से संगीत की बारीकियां सीखी। छन्नूलाल को 9 साल की उम्र में उनके पहले गुरु उस्ताद गनी अली साहब ने खयाल सिखाया। उन्होंने पहले अपने पिता बद्री प्रसाद मिश्रा के साथ संगीत सीखा और तब किराना घराने के ‘उस्ताद अब्दुल गनी खान’ ने उन्हें शिक्षित किया। इसके बाद ठाकुर जयदेव सिंह ने उन्हें प्रशिक्षित किया। बिहार में सांगीतिक पढ़ाई, 4 दशक पहले वाराणसी आए
पंडित छन्नूलाल को खयाल, ठुमरी, भजन, दादरा, कजरी और चैती के लिए जाना जाता है। इनकी सांगीतिक शिक्षा बिहार के मुजफ्फरपुर में हुई। करीब 4 दशक पहले पंडित छन्नूलाल वाराणसी चले आए। यहां अपनी संगीत साधना की धार को और तेज किया। ठुमरी, दादरा, कजरी, चैती जैसी शास्त्रीय-लोक विधाओं के अनूठे संगम के लिए देश-विदेश में विख्यात हैं। मोदी के प्रस्तावक रहे, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित हुए
पंडित छन्नूलाल मिश्र ने धर्म नगरी काशी को अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने यहीं रहकर शास्त्रीय संगीत में महारथ हासिल की। वर्ष 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2010 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। फिर 2014 में वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक बने। वहीं 2020 में उन्हें पद्मविभूषण सम्मान से नवाजा गया। खेले मसाने में होली… संगीत छन्नूलाल का
शास्त्रीय संगीत से पं. छन्नूलाल मिश्र ने लोगों के दिलों में जगह बनाई। उनका खेले मसाने में होली का गीत आज भी हर किसी की जुबां पर है। बीते 2 साल से वह गुमनामी की जिदंगी जीने के लिए मजबूर हैं। वजह उनके द्वारा बनाई गई संपत्ति है। 4 बेटियों में बड़ी बेटी संगीता का कोरोना के समय निधन हो चुका है। अनिता और ममता मिश्र की शादी हो गई है। सबसे छोटी बेटी नम्रता मिश्र केबीपीजी कॉलेज में संगीत विभाग में प्रोफेसर हैं। पंडित छन्नूलाल मिश्र मिर्जापुर में सबसे छोटी बेटी नम्रता के घर पर ही रह रहे हैं। बहनों और इकलौते भाई रामकुमार में प्रॉपर्टी को लेकर विवाद चल रहा है। 4 दिन में कोरोना से पत्नी और बेटी ने दम तोड़ा था
पंडित छन्नूलाल मिश्रा की पत्नी मनोरमा मिश्रा की मौत 26 अप्रैल 2021 को हुई थी। वह कोरोना संक्रमित थीं और वाराणसी के एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं। इसके बाद 29 अप्रैल 2021 को बड़ी बेटी संगीता मिश्रा की मौत मैदागिन स्थित निजी अस्पताल में हुई। संगीता भी कोरोना संक्रमित थीं और 7 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहीं। छन्नूलाल ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। —————————— ये खबर भी पढ़िए- यूपी में दांत-हड्डी के डॉक्टर उगा रहे बाल: दो मौतों के बाद भी जान से खिलवाड़, जज-अफसरों का भी हेयर ट्रांसप्लांट किया ‘पॉलिटिशियन, जज, एसीपी, डीसीपी समेत कई अफसरों के बाल लगाए हैं। डरने की कोई बात नहीं, महीने में 30 से 40 केस करते हैं।’ ये दावा है हड्डियों के डॉक्टर वीके सिंह का। यूपी में ये हाल तब है, जब कानपुर में हेयर ट्रांसप्लांट के बाद 2 लोगों की मौत हो चुकी है। क्या हेयर ट्रांसप्लांट सुरक्षित तरीके से और काबिल डॉक्टर ही कर रहे हैं? यह जानने के लिए दैनिक भास्कर ने कानपुर में एक महीने तक 10 क्लिनिक और अस्पतालों की सर्चिंग की। इनमें सामने आया कि डेंटिस्ट, हड्डियों के डॉक्टर और ब्यूटीपार्लर चलाने वाले कस्टमर फंसा रहे हैं। पढ़िए, पूरा इन्वेस्टिगेशन…
शास्त्रीय संगीत के जाने-माने कलाकार और पद्मविभूषण पंडित छन्नूलाल मिश्र शनिवार रात से BHU के अस्पताल में एडमिट हैं। गुरुवार यानी 11 सितंबर को मिर्जापुर में बेटी के घर उनकी तबीयत बिगड़ी थी। उन्हें सीने में दर्द होने लगा। बेटी प्रो. नम्रता मिश्र ने तत्काल वहां के रामकृष्ण सेवाश्रम हॉस्पिटल में एडमिट कराया। फिर वहां से BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल लाया गया था। यहां उन्हें सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के ICU में भर्ती कराया गया। वह इस समय नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर (बाइपैप मशीन) सपोर्ट पर हैं। सेप्टिसीमिया यानी खून के संक्रमण से पीड़ित हैं। सभी मेडिकल जांच रिपोर्ट आ गई है। दो दिन से कुछ खाया-पीया नहीं
मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टरों ने बताया- पंडित छन्नूलाल को एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) है, फेफड़ों की गंभीर सूजन है। उन्हें टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, ऑस्टियोआर्थराइटिस और प्रोस्टेट बढ़ा है। पिछले 7 महीनों से अस्वस्थ रहने के कारण उन्हें बेड सोर की समस्या हो गई, जिससे संक्रमण बढ़कर सेप्टिसीमिया हो गया है। दो दिन से उन्होंने कुछ खाया-पीया नहीं। जांच में हार्ट अटैक के संकेत नहीं मिले
IMS BHU के डायरेक्टर प्रो. एसएन संखवार के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम उनके इलाज और स्वास्थ्य की लगातार निगरानी कर रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, फिलहाल उनके जीवनरक्षक पैरामीटर्स स्थिर हैं। दिल की ईसीजी और टू-डी ईको जांच में हृदयाघात (हार्ट अटैक) के कोई संकेत नहीं मिले हैं। गुरुवार रात सांस लेने में तकलीफ और तेज बुखार के कारण उन्हें मिर्जापुर के रामकृष्ण सेवाश्रम हॉस्पिटल से हार्ट अटैक की आशंका में BHU रेफर किया गया था। उनकी बेटी प्रो. नम्रता मिश्र उन्हें लेकर BHU अस्पताल पहुंचीं। यहां उन्हें तत्काल इमरजेंसी से मेडिसिन विभाग के ICU में एडमिट किया गया। मंत्री ने सरकार की तरफ से मदद का भरोसा दिया
डॉक्टर उन्हें बाइपैप मशीन सपोर्ट, एंटीबायोटिक थेरेपी, इंसुलिन और अन्य इलाज दे रहे हैं। पंडित छन्नूलाल की गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार से लेकर स्थानीय प्रशासन तक सतर्क हो गया है। रविवार को आयुष, खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ अस्पताल पहुंचे। पंडित छन्नूलाल की बेटी नम्रता मिश्र से मिलकर सरकार की ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि पंडित छन्नूलाल मिश्र न केवल काशी, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक धरोहर हैं। आजमगढ़ के हरिहरपुर में जन्मे छन्नूलाल
पंडित छन्नूलाल मिश्र का जन्म 3 अगस्त 1936 को यूपी के आजमगढ़ स्थित हरिहरपुर में हुआ। उनके दादा गुदई महाराज शांता प्रसाद एक प्रसिद्ध तबला वादक थे। छन्नूलाल ने छह साल की उम्र में ही अपने पिता बद्री प्रसाद मिश्र से संगीत की बारीकियां सीखी। छन्नूलाल को 9 साल की उम्र में उनके पहले गुरु उस्ताद गनी अली साहब ने खयाल सिखाया। उन्होंने पहले अपने पिता बद्री प्रसाद मिश्रा के साथ संगीत सीखा और तब किराना घराने के ‘उस्ताद अब्दुल गनी खान’ ने उन्हें शिक्षित किया। इसके बाद ठाकुर जयदेव सिंह ने उन्हें प्रशिक्षित किया। बिहार में सांगीतिक पढ़ाई, 4 दशक पहले वाराणसी आए
पंडित छन्नूलाल को खयाल, ठुमरी, भजन, दादरा, कजरी और चैती के लिए जाना जाता है। इनकी सांगीतिक शिक्षा बिहार के मुजफ्फरपुर में हुई। करीब 4 दशक पहले पंडित छन्नूलाल वाराणसी चले आए। यहां अपनी संगीत साधना की धार को और तेज किया। ठुमरी, दादरा, कजरी, चैती जैसी शास्त्रीय-लोक विधाओं के अनूठे संगम के लिए देश-विदेश में विख्यात हैं। मोदी के प्रस्तावक रहे, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से सम्मानित हुए
पंडित छन्नूलाल मिश्र ने धर्म नगरी काशी को अपनी कर्मभूमि बनाया। उन्होंने यहीं रहकर शास्त्रीय संगीत में महारथ हासिल की। वर्ष 2000 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 2010 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। फिर 2014 में वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक बने। वहीं 2020 में उन्हें पद्मविभूषण सम्मान से नवाजा गया। खेले मसाने में होली… संगीत छन्नूलाल का
शास्त्रीय संगीत से पं. छन्नूलाल मिश्र ने लोगों के दिलों में जगह बनाई। उनका खेले मसाने में होली का गीत आज भी हर किसी की जुबां पर है। बीते 2 साल से वह गुमनामी की जिदंगी जीने के लिए मजबूर हैं। वजह उनके द्वारा बनाई गई संपत्ति है। 4 बेटियों में बड़ी बेटी संगीता का कोरोना के समय निधन हो चुका है। अनिता और ममता मिश्र की शादी हो गई है। सबसे छोटी बेटी नम्रता मिश्र केबीपीजी कॉलेज में संगीत विभाग में प्रोफेसर हैं। पंडित छन्नूलाल मिश्र मिर्जापुर में सबसे छोटी बेटी नम्रता के घर पर ही रह रहे हैं। बहनों और इकलौते भाई रामकुमार में प्रॉपर्टी को लेकर विवाद चल रहा है। 4 दिन में कोरोना से पत्नी और बेटी ने दम तोड़ा था
पंडित छन्नूलाल मिश्रा की पत्नी मनोरमा मिश्रा की मौत 26 अप्रैल 2021 को हुई थी। वह कोरोना संक्रमित थीं और वाराणसी के एक निजी अस्पताल में भर्ती थीं। इसके बाद 29 अप्रैल 2021 को बड़ी बेटी संगीता मिश्रा की मौत मैदागिन स्थित निजी अस्पताल में हुई। संगीता भी कोरोना संक्रमित थीं और 7 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहीं। छन्नूलाल ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। —————————— ये खबर भी पढ़िए- यूपी में दांत-हड्डी के डॉक्टर उगा रहे बाल: दो मौतों के बाद भी जान से खिलवाड़, जज-अफसरों का भी हेयर ट्रांसप्लांट किया ‘पॉलिटिशियन, जज, एसीपी, डीसीपी समेत कई अफसरों के बाल लगाए हैं। डरने की कोई बात नहीं, महीने में 30 से 40 केस करते हैं।’ ये दावा है हड्डियों के डॉक्टर वीके सिंह का। यूपी में ये हाल तब है, जब कानपुर में हेयर ट्रांसप्लांट के बाद 2 लोगों की मौत हो चुकी है। क्या हेयर ट्रांसप्लांट सुरक्षित तरीके से और काबिल डॉक्टर ही कर रहे हैं? यह जानने के लिए दैनिक भास्कर ने कानपुर में एक महीने तक 10 क्लिनिक और अस्पतालों की सर्चिंग की। इनमें सामने आया कि डेंटिस्ट, हड्डियों के डॉक्टर और ब्यूटीपार्लर चलाने वाले कस्टमर फंसा रहे हैं। पढ़िए, पूरा इन्वेस्टिगेशन…