सुप्रीम कोर्ट ने आबादी से बाहर फीडिंग स्थल बनने का आदेश दिया था। एनीमल लवर्स के अनुसार, इससे फीडिंग स्थल पर एक ही जगह पर कुत्ते में खाने को लेकर संघर्ष बढ़ेगा। यह आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने या जनता को कुत्तों के काटने से बचाने में कारगर नहीं होगा, जिससे समस्या जस की तस बनी रहेगी। फीडिंग स्थल को आबादी से बाहर होने के कारण, आवारा कुत्तों को खाना पाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे उन तक भोजन पहुंचाने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी और टीकाकरण करने के बाद उन्हें वापस उनके स्थान पर छोड़ने का आदेश दिया है। मगर आबादी से दूर होने के कारण, इससे आवारा कुत्तों की संख्या पर कोई खास नियंत्रण नहीं होगा। वे आबादी वाले इलाकों में घूमते रहेंगे। यदि फीडिंग स्थल आबादी से बहुत दूर हैं, तो वहां तक पहुंचने वाले कुत्तों की संख्या सीमित हो सकती है। इससे कुत्तों की आबादी पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। यह स्थिति कुत्तों और इंसानों के बीच संघर्ष का कारण बनी रहेगी। फीडिंग पॉइंट के लिए सरकारी फंडिंग हो
एमसीडी के निर्माण समिति के पूर्व अध्यक्ष जगदीप ममगांई कहते है कि फीडिंग स्थल की व्यवस्था सरकारी फंड से होनी चाहिए। फीडिंग क्षेत्र को सार्वजनिक सड़क, पैदल यात्रियों द्वारा नियमित रुप से आवागमन के लिए उपयोग किए जाने वाले रास्तों व फुटपाथों से दूर होना चाहिए। प्रवेश-निकास द्वार और सीढ़ीयों से दूर हो। खाने की जगह बच्चों के खेल के मैदान से दूर और ऐसी जगह पर होनी चाहिए, जहां बच्चों और बुजुर्गों के मौजूद होने की संभावना कम हो। ममगांई कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी दी कि निगम वार्ड में फीडिंग स्थल आवारा कुत्तों की जनसंख्या और एकाग्रता को ध्यान में रखते हुए बनाया जाएगा, इसके लिए एमसीडी को सबसे पहले निगम वार्ड के अनुसार आवारा कुत्तों की गणना हेतु सर्वे करा सही आंकड़े जानने चाहिए। जगदीश ममगांई ने कहा कि सुरक्षा के सभी मानकों के अनुरुप फीडिंग स्थल चिह्नित करना अपने आप में टेढ़ी खीर है। कुत्तों का भोजन वितरण इस प्रकार हो कि वे आसपास के वातावरण को दूषित व स्थानीय लोगों को परेशान न करें। साथ ही आपस में न लड़ें और लड़ें तो नियंत्रण के लिए कर्मी हों। फीडिंग पॉइंट पर कुत्तों में संघर्ष होता हैं
वसुंधरा इन्क्लेव में कुत्तों को भोजन खिलाने वाले पशु प्रेमी रोहित पुष्कर और संध्या शर्मा का कहना है कि एक कुत्ते दूसरे कुत्ते को अपने सामने से नहीं निकलने देते। एक कुत्ते पर कुत्तों का झुंड टूट पड़ता है। ऐसे में एमसीडी जहां पर फीडिंग प्वांइट बनाएगी, वहां तक मौजूदा कुत्तों में संघर्ष होता रहेगा। वहीं, रोहित पुष्कर और संध्या शर्मा सहित कई पशु प्रेमियों ने बताया कि न्यायपालिका अपनी सोच से अच्छा से अच्छा निर्णय ले रही है। मगर इस मामले में दिल्ली के 10 लाख बेजुबानों के जीवन को लेकर कोर्ट को स्वयं अपनी निगरानी में आदेश पालन करने करवाना होगा। ———————– ये खबर भी पढ़ें… आवारा कुत्तों पर विवाद के बीच PM मोदी बोले: एनिमल लवर्स गाय को जानवर नहीं मानते देश भर में आवारा कुत्तों पर विवाद के बीच PM मोदी ने एनिमल लवर्स पर चुटकी ली। उन्होंने 12 सितंबर को दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि मैं पिछले दिनों कुछ एनिमल लवर्स से मिला। हमारे देश में ऐसे बहुत एनिमल लवर्स हैं और विशेषता है कि वे गाय को एनिमल नहीं मानते। पूरी खबर पढ़ें…
सुप्रीम कोर्ट ने आबादी से बाहर फीडिंग स्थल बनने का आदेश दिया था। एनीमल लवर्स के अनुसार, इससे फीडिंग स्थल पर एक ही जगह पर कुत्ते में खाने को लेकर संघर्ष बढ़ेगा। यह आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने या जनता को कुत्तों के काटने से बचाने में कारगर नहीं होगा, जिससे समस्या जस की तस बनी रहेगी। फीडिंग स्थल को आबादी से बाहर होने के कारण, आवारा कुत्तों को खाना पाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे उन तक भोजन पहुंचाने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी और टीकाकरण करने के बाद उन्हें वापस उनके स्थान पर छोड़ने का आदेश दिया है। मगर आबादी से दूर होने के कारण, इससे आवारा कुत्तों की संख्या पर कोई खास नियंत्रण नहीं होगा। वे आबादी वाले इलाकों में घूमते रहेंगे। यदि फीडिंग स्थल आबादी से बहुत दूर हैं, तो वहां तक पहुंचने वाले कुत्तों की संख्या सीमित हो सकती है। इससे कुत्तों की आबादी पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। यह स्थिति कुत्तों और इंसानों के बीच संघर्ष का कारण बनी रहेगी। फीडिंग पॉइंट के लिए सरकारी फंडिंग हो
एमसीडी के निर्माण समिति के पूर्व अध्यक्ष जगदीप ममगांई कहते है कि फीडिंग स्थल की व्यवस्था सरकारी फंड से होनी चाहिए। फीडिंग क्षेत्र को सार्वजनिक सड़क, पैदल यात्रियों द्वारा नियमित रुप से आवागमन के लिए उपयोग किए जाने वाले रास्तों व फुटपाथों से दूर होना चाहिए। प्रवेश-निकास द्वार और सीढ़ीयों से दूर हो। खाने की जगह बच्चों के खेल के मैदान से दूर और ऐसी जगह पर होनी चाहिए, जहां बच्चों और बुजुर्गों के मौजूद होने की संभावना कम हो। ममगांई कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी दी कि निगम वार्ड में फीडिंग स्थल आवारा कुत्तों की जनसंख्या और एकाग्रता को ध्यान में रखते हुए बनाया जाएगा, इसके लिए एमसीडी को सबसे पहले निगम वार्ड के अनुसार आवारा कुत्तों की गणना हेतु सर्वे करा सही आंकड़े जानने चाहिए। जगदीश ममगांई ने कहा कि सुरक्षा के सभी मानकों के अनुरुप फीडिंग स्थल चिह्नित करना अपने आप में टेढ़ी खीर है। कुत्तों का भोजन वितरण इस प्रकार हो कि वे आसपास के वातावरण को दूषित व स्थानीय लोगों को परेशान न करें। साथ ही आपस में न लड़ें और लड़ें तो नियंत्रण के लिए कर्मी हों। फीडिंग पॉइंट पर कुत्तों में संघर्ष होता हैं
वसुंधरा इन्क्लेव में कुत्तों को भोजन खिलाने वाले पशु प्रेमी रोहित पुष्कर और संध्या शर्मा का कहना है कि एक कुत्ते दूसरे कुत्ते को अपने सामने से नहीं निकलने देते। एक कुत्ते पर कुत्तों का झुंड टूट पड़ता है। ऐसे में एमसीडी जहां पर फीडिंग प्वांइट बनाएगी, वहां तक मौजूदा कुत्तों में संघर्ष होता रहेगा। वहीं, रोहित पुष्कर और संध्या शर्मा सहित कई पशु प्रेमियों ने बताया कि न्यायपालिका अपनी सोच से अच्छा से अच्छा निर्णय ले रही है। मगर इस मामले में दिल्ली के 10 लाख बेजुबानों के जीवन को लेकर कोर्ट को स्वयं अपनी निगरानी में आदेश पालन करने करवाना होगा। ———————– ये खबर भी पढ़ें… आवारा कुत्तों पर विवाद के बीच PM मोदी बोले: एनिमल लवर्स गाय को जानवर नहीं मानते देश भर में आवारा कुत्तों पर विवाद के बीच PM मोदी ने एनिमल लवर्स पर चुटकी ली। उन्होंने 12 सितंबर को दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि मैं पिछले दिनों कुछ एनिमल लवर्स से मिला। हमारे देश में ऐसे बहुत एनिमल लवर्स हैं और विशेषता है कि वे गाय को एनिमल नहीं मानते। पूरी खबर पढ़ें…