इंदौर में प्राइवेट अस्पताल भी मरीजों का सौदा करते हैं। पेशेंट लाने के एवज में ये एम्बुलेंस ड्राइवरों को कमीशन देते हैं। एम्बुलेंस ड्राइवर बनकर पहुंचे दैनिक भास्कर रिपोर्टर से इंदौर के तीन प्राइवेट अस्पतालों में कमीशन की डील हुई। अस्पताल स्टाफ रिपोर्टर को आयुष्मान भारत योजना के पेशेंट लाने के लिए 10 से 20 प्रतिशत कमीशन देने को तैयार हो गया। आपने कल दैनिक भास्कर इन्वेस्टिगेशन के पार्ट-1 में पढ़ा था कि मध्यप्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवाय के डॉक्टर, प्राइवेट अस्पताल और 108 एम्बुलेंस ड्राइवर के साथ गठजोड़ कर कमीशन के लिए पेशेंट को जबरन रेफर कर रहे हैं। पार्ट-2 में पढ़िए इस रैकेट में प्राइवेट अस्पताल से जुड़े लोग और एजेंट किस तरह मरीजों का सौदा करते हैं…? अब सिलसिलेवार जानते हैं किसने किस तरह मरीजों का सौदा किया… 1. इंदौर ट्रॉमा सेंटर का डॉक्टर: हम भी 30% कर देंगे, आप कहेंगे तो एम्बुलेंस भेज दूंगा
भास्कर रिपोर्टर खंडवा रोड स्थित इंदौर ट्रॉमा सेंटर अस्पताल के डॉक्टर तुलसी पाटिल से एम्बुलेंस ड्राइवर बनकर मिला.. रिपोर्टर : मैं पीथमपुर में एम्बुलेंस चलाता हूं, मरीजों को भेजने के पर कमीशन की बात करनी थी।
डॉ. तुलसी: हां बताइए। अभी तक मरीज कहां भेजते थे?
रिपोर्टर: एक प्राइवेट अस्पताल को देता था। वहां रुपए फंस गए हैं, इसलिए आप बताओ।
डॉ. तुलसी: मैं भी देखता हूं, हमारे पीआरओ हैं प्रकाश साहू, वे भी देखते हैं। रिपोर्टर: कितना क्या देते हैं मरीज लाने वाले को?
डॉ. तुलसी: आयुष्मान पर 10 प्रतिशत देते हैं और कैश वालों पर 20 से 25 प्रतिशत। हम तो सभी को पैसे देते हैं।
रिपोर्टर: आप बताइए बस, मैं एमवाय की बजाय आपके यहां शिफ्ट कर दूंगा।
डॉ. तुलसी: आपके पास मेरा नंबर है।
रिपोर्टर: नहीं है।
डॉ. तुलसी: मेरा नंबर नोट कर लो, 9826491522
रिपोर्टर: कौन-कौन से पेशेंट ला सकते हैं।
डॉ. तुलसी: हड्डी, प्रोस्टेट, स्टोन के हैं, ये सभी आयुष्मान योजना में कर देंगे?
रिपोर्टर: नकद वालों में और कुछ ऊपर-नीचे नहीं हो सकता है।
डॉ. तुलसी: पेशेंट यदि उस तरह का रहेगा तो हम भी 30 प्रतिशत कर देंगे। आप कहोगे तो तेजाजी नगर एम्बुलेंस भेज दूंगा। पीआरओ ने कहा- मेरा साफ-सुथरा काम है, इधर दो, उधर लो इंदौर ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टर से मिलने के बाद पीआरओ प्रकाश साहू से मुलाकात की तो कई और निजी अस्पतालों के नाम सामने आए… पढ़िए बातचीत… प्रकाश: शुरुआत करो, मैं तीन हॉस्पिटल दे रहा हूं। हड्डी और न्यूरो का कोई पेशेंट हो तो इंदौर ट्रॉमा सेंटर है, वहां आयुष्मान है।
प्रकाश: आपकी डॉ. तुलसी से बात हुई थी, कितना प्रतिशत बताया।
रिपोर्टर: उन्होंने 30 प्रतिशत बोला है।
प्रकाश: वो 20 देगा 30 नहीं देगा। आयुष्मान में 30 करवा देंगे, जो योजना के अलावा ऊपर से लेते हैं। कार्डियक में 7000 रुपए दूंगा एंजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टी मिलाकर आयुष्मान योजना से।
रिपोर्टर: बस इतना ही।
प्रकाश: मेरा साफ सुथरा काम है, इधर दो उधर लो। 30 साल से इस लाइन में हूं। फार्मासिस्ट हूं। रिपोर्टर: कहीं से भी मरीज ले आऊं?
प्रकाश: कहीं से भी ले आओ, अपने को तो बस मरीज ले आओ।
रिपोर्टर: 108 एम्बुलेंस वाले नहीं हैं क्या कोई?
प्रकाश: अपने 250 लोग हैं 108 वाले। पहले पूरा गेम ही 108 पर चलता था।
रिपोर्टर: अब नहीं करते।
प्रकाश: नई कंपनी आई है, उसमें ज्यादा पेंच है। पहले हम लोग 15 दिन में 108 के ईएमटी पायलट को दारू पार्टी देते थे। 6 जिलों के सीएल की पार्टी अलग होती थी। इनके रीजनल मैनेजर को अलग से 50 हजार रुपए देते थे। खिलाते-पिलाते थे तो काम अच्छा चलता था। बांटोगे तो काम चलेगा, नहीं बांटोगे तो काम नहीं चलेगा। नेटवर्क जितना बढ़ाकर रखोगे उतना फायदा है।
रिपोर्टर: दूसरे अस्पताल (आरके) वालों को तो 108 वाले मरीज देते हैं।
प्रकाश: सब देते हैं। गुना से लेकर सेंधवा तक और मंदसौर से लेकर होशंगाबाद तक के क्षेत्र में कोई गांव या सिटी नहीं जहां मैं नहीं गया। 66 हजार डॉक्टरों के नंबर हैं, इनमें से कुछ जिंदा हैं कुछ मर गए।
रिपोर्टर: आप करवा देना। और कौन से अस्पताल में कर सकते हैं?
प्रकाश: मरीज लाओ मुझे फोन कर देना। चार अस्पताल हैं, बता दूंगा। 2. आरके हॉस्पिटल का कर्मचारी: 108 वालों का फोन आता है तो हम रास्ते से क्रॉसिंग करा देते हैं
भास्कर रिपोर्टर ने आरके अस्पताल के कर्मचारी आकाश से मुलाकात की…
आकाश: जितने भी लोग हैं, एक बार हम मीटिंग करवा देते हैं।
रिपोर्टर: ठीक है।
आकाश: सीटी स्केन और आयुष्मान, आर्थो और कैंसर भी आ रहा है। जनरल, न्यूरो, प्लास्टिक सर्जरी के अलावा भी बहुत कुछ आ रहा है। रिपोर्टर: सरकारी अस्पताल में लाते हैं तो उसे रास्ते से ही डायवर्ट कर देते हैं।
आकाश: 108 वालों का फोन आता है तो हम भी रास्ते से ही क्रॉसिंग करा देते हैं। पेशेंट मानना चाहिए।
रिपोर्टर: हां वो तो पेशेंट के मानने पर होता है।
आकाश: सरकारी में सुविधाएं तो सब हैं, लेकिन पेशेंट को पचना (परेशान होना) ही पड़ता है।
रिपोर्टर: आपका कमीशन नहीं होता क्या?
आकाश: नहीं हम नौकरी वाले हैं, अस्पताल सैलरी दे रहा है। हमारे और आपके संबंध बन रहे हैं। आयुष्मान वालों को 20 प्रतिशत कमीशन देते हैं
गोलू: आप सरकारी डॉक्टर से मिलो, जो भी होगा वो बांध देंगे जो भी लेता है।
रिपोर्टर: आप मुलाकात करा दो।
गोलू: व्यापार अलग है…जहां आपका दो रुपए का फायदा हो रहा, पेशेंट को वहां छोड़ो। रिपोर्टर: आयुष्मान पर कितना दे रहे हो?
गोलू : 20 प्रतिशत। फाइनेंशियल में तीन महीने में पेमेंट अप्रूव होता है।
रिपोर्टर: ठीक है।
गोलू: पेशेंट को बोलते हैं कि एमवाय में जाना है तो जाओ, वहां पड़े रहना जाकर। एमवाय में तो हालत खराब हो जाती है।
रिपोर्टर: आपका काम करवा देंगे, तुम तो आओ।
गोलू: शाम को आकाश भइया आएंगे, तब बैठते हैं।
रिपोर्टर: ठीक है। 3. एवीपी हॉस्पिटल का कर्मचारी: आप तो बस पेशेंट लाओ, पूरा कमीशन आपका
एमवाय अस्पताल का दलाल दीपक वर्मा पेशेंट को एवीपी अस्पताल लाता है। भास्कर रिपोर्टर एवीपी अस्पताल पहुंचा। यहां एम्बुलेंस कोआर्डिनेशन का काम पुनीत चड्ढा देखते हैं। रिपोर्टर चड्ढा के केबिन में उनसे बातचीत की.. रिपोर्टर: मैं विपिन एम्बुलेंस चलाता हूं।
चड्ढा: हां बताओ?
रिपोर्टर: कितना कमीशन देते हैं?
चड्ढा: पूरा ले लेना यार, अभी गाड़ी लाए क्या?
रिपोर्टर: नहीं अभी नहीं लाए, कल से शुरू करना है। आपका नंबर नहीं था।
चड्ढा: नंबर लिखो 9893812388, पुनीत चड्ढा। रिपोर्टर: आप क्या देखते हैं?
चड्ढा: मैं यहीं अस्पताल में हूं। आपकी कितनी गाड़ी हैं?
रिपोर्टर: चार गाड़ियां हैं। एक 108 भी देखता हूं।
चड्ढा: आप स्टार्ट करो।
रिपोर्टर: आप कमीशन बताओ?
चड्ढा: पूरा आपका। पेशेंट सेटिस्फेक्शन जरूरी है। आप तो पेशेंट लाओ। 4. सेवालय अस्पताल का कर्मचारी: ओपन बिलिंग में 30% देते हैं, आयुष्मान में आधा
भास्कर रिपोर्टर को पता चला कि सेवालय अस्पताल के कर्मचारी भी मरीजों को ट्रांसफर करने की डील करते हैं। अस्पताल के कर्मचारी ने बताया कि एम्बुलेंस का काम सुभाष गुर्जर देखते हैं, लेकिन वे बाहर हैं। रिपोर्टर ने सुभाष गुर्जर के नंबर 6264899299 पर बात की..
रिपोर्टर: मैं धनगांव में एम्बुलेंस चलाता हूं, आपसे मिलने आया था। अपने अस्पताल में कौन सा इलाज होता है?
सुभाष : ओपन बिलिंग में 30 प्रतिशत देते हैं। आयुष्मान में आधा-आधा कर लेते हैं, जो भी ऊपर से लेते हैं, यदि ऊपर से नहीं लिया तो कुछ भी नहीं देते हैं।
रिपोर्टर: भरोसा होना चाहिए आप पर।
सुभाष : 100 टका भरोसा… एक बार सेवा का मौका दो आप खुश हो जाओगे। जैसा आप बोलोगे वैसा करवा देंगे।
रिपोर्टर: कई बार पैसे अटक जाते हैं।
सुभाष: बड़ी मशक्कत करना पड़ती है, तब जाकर पेशेंट अस्पताल तक आ पाते हैं। बहुत लोग काटने वाले होते हैं।
रिपोर्टर: बीमा में कितना क्या रहता है?
सुभाष: सभी बीमा में करवा देते हैं। यदि हेड इंज्युरी रही तो सीएम से भी पास करवा देते हैं।
रिपोर्टर: कौन सी योजना में?
सुभाष: सीएम राहत कोष वाला करवा देते हैं। इसके लिए केवल विधायक का लेटर लेकर आना है। कुछ प्रतिशत एक एजेंट लेता है, तो करवा देते हैं।
रिपोर्टर: तो उसमें से कमीशन नहीं मिलता होगा?
सुभाष: नहीं, बिल के जो रुपए मिलेंगे, उसमें से 30 प्रतिशत मिलता है।
रिपोर्टर: आपके पास कोई एम्बुलेंस है या नहीं। रास्ते में मरीज ट्रांसफर करने के लिए।
सुभाष: हां करवा देंगे, आप बता देना हम एम्बुलेंस पहुंचा देंगे। क्या बोले प्राइवेट अस्पतालों के जिम्मेदार डॉ. तुलसी हमारे यहां ड्यूटी डॉक्टर हैं और प्रकाश साहू पीआरओ हैं। इन्हें हमने कभी नहीं कहा कि कमीशन पर मरीज लाओ। मैं उनसे बात करूंगा, यदि ऐसा है तो उनकी सेवाएं समाप्त कर दूंगा। हम किसी भी एम्बुलेंस वालों से इस तरह की बात नहीं करते। डॉ. राहुल चौधरी, संचालक, इंदौर ट्रॉमा सेंटर, इंदौर मैं पूरा काम देखता हूं, पुनीत चड्ढा एवीपी अस्पताल के मालिक हैं, हमारे यहां कोई एम्बुलेंस वाला पेशेंट नहीं लाता और न ही हम किसी को कमीशन देते हैं। नरेंद्र मिश्रा, कोऑर्डिनेटर, एवीपी अस्पताल, इंदौर पहले सुभाष गुर्जर हमारे यहां एम्बुलेंस का काम देखते थे, लेकिन अब उन्होंने नौकरी छोड़ दी है। अब मैं ही देखता हूं। मरीज के बदले कमीशन के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। शक्ति सिंह, मैनेजर सेवालय अस्पताल आकाश पीआरओ हैं और गोलू ने कई दिनों पहले ही नौकरी छोड़ दी है। ये दोनों अपने स्तर पर कमीशन का कोई काम करते होंगे, लेकिन हमारे अस्पताल में ऐसा नहीं होता है। डॉ. गिरीश गुप्ता, संचालक, आरके अस्पताल पढ़ें, दैनिक भास्कर इन्वेस्टिगेशन का पार्ट-1
एमपी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में कमीशनखोरी का खेल मध्यप्रदेश के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल महाराजा यशवंतराव (एमवाय) अस्पताल इंदौर के कुछ डॉक्टर, एम्बुलेंस ड्राइवर और एजेंट मिलकर मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में भेज रहे हैं। इसके बदले वे 30 प्रतिशत तक कमीशन लेते हैं। पढ़ें पूरी खबर… इंदौर में एमवाय के दो कमीशनखोर डॉक्टर सस्पेंड, जांच बैठाई मध्यप्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में कमीशन लेकर मरीजों को प्राइवेट अस्पताल भेजने की दैनिक भास्कर की खबर का बड़ा असर हुआ है। मामला सामने आने के बाद इंदौर में एमवाय हॉस्पिटल के दो डॉक्टरों को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन ने सस्पेंड कर दिया है। पढ़ें पूरी खबर…
इंदौर में प्राइवेट अस्पताल भी मरीजों का सौदा करते हैं। पेशेंट लाने के एवज में ये एम्बुलेंस ड्राइवरों को कमीशन देते हैं। एम्बुलेंस ड्राइवर बनकर पहुंचे दैनिक भास्कर रिपोर्टर से इंदौर के तीन प्राइवेट अस्पतालों में कमीशन की डील हुई। अस्पताल स्टाफ रिपोर्टर को आयुष्मान भारत योजना के पेशेंट लाने के लिए 10 से 20 प्रतिशत कमीशन देने को तैयार हो गया। आपने कल दैनिक भास्कर इन्वेस्टिगेशन के पार्ट-1 में पढ़ा था कि मध्यप्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवाय के डॉक्टर, प्राइवेट अस्पताल और 108 एम्बुलेंस ड्राइवर के साथ गठजोड़ कर कमीशन के लिए पेशेंट को जबरन रेफर कर रहे हैं। पार्ट-2 में पढ़िए इस रैकेट में प्राइवेट अस्पताल से जुड़े लोग और एजेंट किस तरह मरीजों का सौदा करते हैं…? अब सिलसिलेवार जानते हैं किसने किस तरह मरीजों का सौदा किया… 1. इंदौर ट्रॉमा सेंटर का डॉक्टर: हम भी 30% कर देंगे, आप कहेंगे तो एम्बुलेंस भेज दूंगा
भास्कर रिपोर्टर खंडवा रोड स्थित इंदौर ट्रॉमा सेंटर अस्पताल के डॉक्टर तुलसी पाटिल से एम्बुलेंस ड्राइवर बनकर मिला.. रिपोर्टर : मैं पीथमपुर में एम्बुलेंस चलाता हूं, मरीजों को भेजने के पर कमीशन की बात करनी थी।
डॉ. तुलसी: हां बताइए। अभी तक मरीज कहां भेजते थे?
रिपोर्टर: एक प्राइवेट अस्पताल को देता था। वहां रुपए फंस गए हैं, इसलिए आप बताओ।
डॉ. तुलसी: मैं भी देखता हूं, हमारे पीआरओ हैं प्रकाश साहू, वे भी देखते हैं। रिपोर्टर: कितना क्या देते हैं मरीज लाने वाले को?
डॉ. तुलसी: आयुष्मान पर 10 प्रतिशत देते हैं और कैश वालों पर 20 से 25 प्रतिशत। हम तो सभी को पैसे देते हैं।
रिपोर्टर: आप बताइए बस, मैं एमवाय की बजाय आपके यहां शिफ्ट कर दूंगा।
डॉ. तुलसी: आपके पास मेरा नंबर है।
रिपोर्टर: नहीं है।
डॉ. तुलसी: मेरा नंबर नोट कर लो, 9826491522
रिपोर्टर: कौन-कौन से पेशेंट ला सकते हैं।
डॉ. तुलसी: हड्डी, प्रोस्टेट, स्टोन के हैं, ये सभी आयुष्मान योजना में कर देंगे?
रिपोर्टर: नकद वालों में और कुछ ऊपर-नीचे नहीं हो सकता है।
डॉ. तुलसी: पेशेंट यदि उस तरह का रहेगा तो हम भी 30 प्रतिशत कर देंगे। आप कहोगे तो तेजाजी नगर एम्बुलेंस भेज दूंगा। पीआरओ ने कहा- मेरा साफ-सुथरा काम है, इधर दो, उधर लो इंदौर ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टर से मिलने के बाद पीआरओ प्रकाश साहू से मुलाकात की तो कई और निजी अस्पतालों के नाम सामने आए… पढ़िए बातचीत… प्रकाश: शुरुआत करो, मैं तीन हॉस्पिटल दे रहा हूं। हड्डी और न्यूरो का कोई पेशेंट हो तो इंदौर ट्रॉमा सेंटर है, वहां आयुष्मान है।
प्रकाश: आपकी डॉ. तुलसी से बात हुई थी, कितना प्रतिशत बताया।
रिपोर्टर: उन्होंने 30 प्रतिशत बोला है।
प्रकाश: वो 20 देगा 30 नहीं देगा। आयुष्मान में 30 करवा देंगे, जो योजना के अलावा ऊपर से लेते हैं। कार्डियक में 7000 रुपए दूंगा एंजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टी मिलाकर आयुष्मान योजना से।
रिपोर्टर: बस इतना ही।
प्रकाश: मेरा साफ सुथरा काम है, इधर दो उधर लो। 30 साल से इस लाइन में हूं। फार्मासिस्ट हूं। रिपोर्टर: कहीं से भी मरीज ले आऊं?
प्रकाश: कहीं से भी ले आओ, अपने को तो बस मरीज ले आओ।
रिपोर्टर: 108 एम्बुलेंस वाले नहीं हैं क्या कोई?
प्रकाश: अपने 250 लोग हैं 108 वाले। पहले पूरा गेम ही 108 पर चलता था।
रिपोर्टर: अब नहीं करते।
प्रकाश: नई कंपनी आई है, उसमें ज्यादा पेंच है। पहले हम लोग 15 दिन में 108 के ईएमटी पायलट को दारू पार्टी देते थे। 6 जिलों के सीएल की पार्टी अलग होती थी। इनके रीजनल मैनेजर को अलग से 50 हजार रुपए देते थे। खिलाते-पिलाते थे तो काम अच्छा चलता था। बांटोगे तो काम चलेगा, नहीं बांटोगे तो काम नहीं चलेगा। नेटवर्क जितना बढ़ाकर रखोगे उतना फायदा है।
रिपोर्टर: दूसरे अस्पताल (आरके) वालों को तो 108 वाले मरीज देते हैं।
प्रकाश: सब देते हैं। गुना से लेकर सेंधवा तक और मंदसौर से लेकर होशंगाबाद तक के क्षेत्र में कोई गांव या सिटी नहीं जहां मैं नहीं गया। 66 हजार डॉक्टरों के नंबर हैं, इनमें से कुछ जिंदा हैं कुछ मर गए।
रिपोर्टर: आप करवा देना। और कौन से अस्पताल में कर सकते हैं?
प्रकाश: मरीज लाओ मुझे फोन कर देना। चार अस्पताल हैं, बता दूंगा। 2. आरके हॉस्पिटल का कर्मचारी: 108 वालों का फोन आता है तो हम रास्ते से क्रॉसिंग करा देते हैं
भास्कर रिपोर्टर ने आरके अस्पताल के कर्मचारी आकाश से मुलाकात की…
आकाश: जितने भी लोग हैं, एक बार हम मीटिंग करवा देते हैं।
रिपोर्टर: ठीक है।
आकाश: सीटी स्केन और आयुष्मान, आर्थो और कैंसर भी आ रहा है। जनरल, न्यूरो, प्लास्टिक सर्जरी के अलावा भी बहुत कुछ आ रहा है। रिपोर्टर: सरकारी अस्पताल में लाते हैं तो उसे रास्ते से ही डायवर्ट कर देते हैं।
आकाश: 108 वालों का फोन आता है तो हम भी रास्ते से ही क्रॉसिंग करा देते हैं। पेशेंट मानना चाहिए।
रिपोर्टर: हां वो तो पेशेंट के मानने पर होता है।
आकाश: सरकारी में सुविधाएं तो सब हैं, लेकिन पेशेंट को पचना (परेशान होना) ही पड़ता है।
रिपोर्टर: आपका कमीशन नहीं होता क्या?
आकाश: नहीं हम नौकरी वाले हैं, अस्पताल सैलरी दे रहा है। हमारे और आपके संबंध बन रहे हैं। आयुष्मान वालों को 20 प्रतिशत कमीशन देते हैं
गोलू: आप सरकारी डॉक्टर से मिलो, जो भी होगा वो बांध देंगे जो भी लेता है।
रिपोर्टर: आप मुलाकात करा दो।
गोलू: व्यापार अलग है…जहां आपका दो रुपए का फायदा हो रहा, पेशेंट को वहां छोड़ो। रिपोर्टर: आयुष्मान पर कितना दे रहे हो?
गोलू : 20 प्रतिशत। फाइनेंशियल में तीन महीने में पेमेंट अप्रूव होता है।
रिपोर्टर: ठीक है।
गोलू: पेशेंट को बोलते हैं कि एमवाय में जाना है तो जाओ, वहां पड़े रहना जाकर। एमवाय में तो हालत खराब हो जाती है।
रिपोर्टर: आपका काम करवा देंगे, तुम तो आओ।
गोलू: शाम को आकाश भइया आएंगे, तब बैठते हैं।
रिपोर्टर: ठीक है। 3. एवीपी हॉस्पिटल का कर्मचारी: आप तो बस पेशेंट लाओ, पूरा कमीशन आपका
एमवाय अस्पताल का दलाल दीपक वर्मा पेशेंट को एवीपी अस्पताल लाता है। भास्कर रिपोर्टर एवीपी अस्पताल पहुंचा। यहां एम्बुलेंस कोआर्डिनेशन का काम पुनीत चड्ढा देखते हैं। रिपोर्टर चड्ढा के केबिन में उनसे बातचीत की.. रिपोर्टर: मैं विपिन एम्बुलेंस चलाता हूं।
चड्ढा: हां बताओ?
रिपोर्टर: कितना कमीशन देते हैं?
चड्ढा: पूरा ले लेना यार, अभी गाड़ी लाए क्या?
रिपोर्टर: नहीं अभी नहीं लाए, कल से शुरू करना है। आपका नंबर नहीं था।
चड्ढा: नंबर लिखो 9893812388, पुनीत चड्ढा। रिपोर्टर: आप क्या देखते हैं?
चड्ढा: मैं यहीं अस्पताल में हूं। आपकी कितनी गाड़ी हैं?
रिपोर्टर: चार गाड़ियां हैं। एक 108 भी देखता हूं।
चड्ढा: आप स्टार्ट करो।
रिपोर्टर: आप कमीशन बताओ?
चड्ढा: पूरा आपका। पेशेंट सेटिस्फेक्शन जरूरी है। आप तो पेशेंट लाओ। 4. सेवालय अस्पताल का कर्मचारी: ओपन बिलिंग में 30% देते हैं, आयुष्मान में आधा
भास्कर रिपोर्टर को पता चला कि सेवालय अस्पताल के कर्मचारी भी मरीजों को ट्रांसफर करने की डील करते हैं। अस्पताल के कर्मचारी ने बताया कि एम्बुलेंस का काम सुभाष गुर्जर देखते हैं, लेकिन वे बाहर हैं। रिपोर्टर ने सुभाष गुर्जर के नंबर 6264899299 पर बात की..
रिपोर्टर: मैं धनगांव में एम्बुलेंस चलाता हूं, आपसे मिलने आया था। अपने अस्पताल में कौन सा इलाज होता है?
सुभाष : ओपन बिलिंग में 30 प्रतिशत देते हैं। आयुष्मान में आधा-आधा कर लेते हैं, जो भी ऊपर से लेते हैं, यदि ऊपर से नहीं लिया तो कुछ भी नहीं देते हैं।
रिपोर्टर: भरोसा होना चाहिए आप पर।
सुभाष : 100 टका भरोसा… एक बार सेवा का मौका दो आप खुश हो जाओगे। जैसा आप बोलोगे वैसा करवा देंगे।
रिपोर्टर: कई बार पैसे अटक जाते हैं।
सुभाष: बड़ी मशक्कत करना पड़ती है, तब जाकर पेशेंट अस्पताल तक आ पाते हैं। बहुत लोग काटने वाले होते हैं।
रिपोर्टर: बीमा में कितना क्या रहता है?
सुभाष: सभी बीमा में करवा देते हैं। यदि हेड इंज्युरी रही तो सीएम से भी पास करवा देते हैं।
रिपोर्टर: कौन सी योजना में?
सुभाष: सीएम राहत कोष वाला करवा देते हैं। इसके लिए केवल विधायक का लेटर लेकर आना है। कुछ प्रतिशत एक एजेंट लेता है, तो करवा देते हैं।
रिपोर्टर: तो उसमें से कमीशन नहीं मिलता होगा?
सुभाष: नहीं, बिल के जो रुपए मिलेंगे, उसमें से 30 प्रतिशत मिलता है।
रिपोर्टर: आपके पास कोई एम्बुलेंस है या नहीं। रास्ते में मरीज ट्रांसफर करने के लिए।
सुभाष: हां करवा देंगे, आप बता देना हम एम्बुलेंस पहुंचा देंगे। क्या बोले प्राइवेट अस्पतालों के जिम्मेदार डॉ. तुलसी हमारे यहां ड्यूटी डॉक्टर हैं और प्रकाश साहू पीआरओ हैं। इन्हें हमने कभी नहीं कहा कि कमीशन पर मरीज लाओ। मैं उनसे बात करूंगा, यदि ऐसा है तो उनकी सेवाएं समाप्त कर दूंगा। हम किसी भी एम्बुलेंस वालों से इस तरह की बात नहीं करते। डॉ. राहुल चौधरी, संचालक, इंदौर ट्रॉमा सेंटर, इंदौर मैं पूरा काम देखता हूं, पुनीत चड्ढा एवीपी अस्पताल के मालिक हैं, हमारे यहां कोई एम्बुलेंस वाला पेशेंट नहीं लाता और न ही हम किसी को कमीशन देते हैं। नरेंद्र मिश्रा, कोऑर्डिनेटर, एवीपी अस्पताल, इंदौर पहले सुभाष गुर्जर हमारे यहां एम्बुलेंस का काम देखते थे, लेकिन अब उन्होंने नौकरी छोड़ दी है। अब मैं ही देखता हूं। मरीज के बदले कमीशन के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। शक्ति सिंह, मैनेजर सेवालय अस्पताल आकाश पीआरओ हैं और गोलू ने कई दिनों पहले ही नौकरी छोड़ दी है। ये दोनों अपने स्तर पर कमीशन का कोई काम करते होंगे, लेकिन हमारे अस्पताल में ऐसा नहीं होता है। डॉ. गिरीश गुप्ता, संचालक, आरके अस्पताल पढ़ें, दैनिक भास्कर इन्वेस्टिगेशन का पार्ट-1
एमपी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में कमीशनखोरी का खेल मध्यप्रदेश के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल महाराजा यशवंतराव (एमवाय) अस्पताल इंदौर के कुछ डॉक्टर, एम्बुलेंस ड्राइवर और एजेंट मिलकर मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में भेज रहे हैं। इसके बदले वे 30 प्रतिशत तक कमीशन लेते हैं। पढ़ें पूरी खबर… इंदौर में एमवाय के दो कमीशनखोर डॉक्टर सस्पेंड, जांच बैठाई मध्यप्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में कमीशन लेकर मरीजों को प्राइवेट अस्पताल भेजने की दैनिक भास्कर की खबर का बड़ा असर हुआ है। मामला सामने आने के बाद इंदौर में एमवाय हॉस्पिटल के दो डॉक्टरों को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन ने सस्पेंड कर दिया है। पढ़ें पूरी खबर…