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नई दिल्ली:दिल्ली में 26 साल से विपक्ष में बैठी बीजेपी ने 2024 में आम आदमी पार्टी (AAP) को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा। बीजेपी ने केजरीवाल सरकार पर प्रशासन और उसकी कमियों को लेकर जमकर हमला बोला। इसमें उन्हें एक अप्रत्याशित सहयोगी भी मिला,उपराज्यपाल (LG)। दिल्ली के विशिष्ट शक्ति व्यवस्था के कारण,LG ही शहर के वास्तविक प्रशासक हैं। उन्होंने लगातार AAP सरकार पर सवाल उठाए। इस लेख में बीजेपी के AAP पर हमलों, LG की भूमिका और दिल्ली की राजनीति के भविष्य पर चर्चा की गई है।लोकसभा चुनाव वाला प्रदर्शन दोहराना चाहती है बीजेपीबीजेपी का कहना है कि लोकसभा चुनाव में सभी सात सीटों पर जीत मिलना सिर्फ मोदी की नीतियों का नतीजा नहीं बल्कि AAP सरकार के कामकाज पर जनमत संग्रह भी है। अब विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी इसी प्रदर्शन को दोहराने की उमीद कर रही है। दिल्ली में बीजेपी आखिरी बार 1993 में सत्ता में आई थी। 1998 में कांग्रेस की जीत हुई और शीला दीक्षित मुख्यमंत्री बनीं। 15 साल बाद कांग्रेस की हार के बाद AAP का उदय हुआ, जो अब 10 साल से दिल्ली चला रही है। 2024 में बीजेपी ने AAP सरकार की कमियों को उजागर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।केंद्र शासित प्रदेशों में LG आमतौर पर राष्ट्रपति के प्रति जवाबदेह होते हैं और उनकी भूमिका संवैधानिक होती है। लेकिन दिल्ली में LG की भूमिका प्रशासन में काफी सक्रिय होती है,खासकर सेवाओं और सतर्कता से जुड़े मामलों में। पिछले ढाई सालों में बीजेपी को AAP पर हमला करने का ज्यादातर मौका LG द्वारा उठाए गए मुद्दों, दिए गए आदेशों और मांगी गई रिपोर्टों से ही मिला।आबकारी मामले के बहाने घेरने की तैयारीआबकारी नीति में कथित अनियमितताओं का मामला,जिसमें केजरीवाल,मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसे AAP के शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी हुई, एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना। यह मामला तब गरमाया जब शहर में लगभग दो महीने पुराने LG वी.के.सक्सेना ने CBI को आबकारी नीति की जांच के लिए भेजा। बीजेपी आज भी इस मुद्दे पर AAP को घेरती रहती है।6 फ्लैगस्टाफ रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास के निर्माण में कथित अनियमितताएं और अधिक खर्च, अस्पतालों के निर्माण में देरी, विधानसभा में CAG रिपोर्ट पेश न करना, और नियमों के विरुद्ध कथित तौर पर बस मार्शलों के रूप में नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों की नियुक्ति, जिसके कारण उन्हें हटाया गया, ये कुछ ऐसे मुद्दे थे जिन्हें LG ने विभिन्न आधिकारिक मामलों से निपटते हुए उठाया। ये मुद्दे बाद में राजनीतिक विवाद का कारण बने। 2024 में बीजेपी की अधिकांश प्रेस कॉन्फ्रेंस, वरिष्ठ पदाधिकारियों के बयान और विरोध प्रदर्शन इन्हीं मुद्दों पर केंद्रित रहे।दिल्ली की बदहाली पर भी खींचा ध्यानबीजेपी विधायकों ने न केवल विधानसभा में CAG रिपोर्ट पेश न करने के मुद्दे को उठायाबल्कि इस पर दिल्ली उच्च न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया। 2024 में LG ने शहर के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया और स्वच्छता की कमी,टूटी सड़कों और खराब नागरिक स्थिति पर प्रकाश डाला। बीजेपी ने बाद में इन मुद्दों का इस्तेमाल AAP सरकार पर हमला करने के लिए किया। इससे साफ है कि LG की भूमिका दिल्ली की राजनीति में कितनी महत्वपूर्ण है।दिल्ली के अनोखे प्रशासनिक ढांचे में LG की भूमिका को लेकर बहस जारी है। जहां AAP सरकार LG के हस्तक्षेप को अपनी शक्तियों में अतिक्रमण मानती है, वहीं बीजेपी LG के कदमों को प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी बताती है। आने वाले विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा एक अहम भूमिका निभा सकता है। देखना होगा कि दिल्ली की जनता किसके पक्ष में फैसला सुनाती है।बीजेपी का मानना है कि जनता मोदी सरकार के काम से खुश है। इसलिए दिल्ली की जनता AAP को नकारकर बीजेपी को मौका देगी। दूसरी तरफ AAP का दावा है कि दिल्ली में उसका काम बोलता है। उसने शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली जैसे क्षेत्रों में बेहतरीन काम किया है। जनता इसे समझती है और AAP को ही दोबारा चुनेगी। आने वाला समय बताएगा कि दिल्ली की जनता किसके साथ है।
Delhi Elections: भाजपा ने 2024 में केजरीवाल सरकार पर विभिन्न मुद्दों पर हमला किया। एलजी ने कई मुद्दों पर जांच की और रिपोर्ट्स मांगी। भाजपा ने लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी सीटें जीतीं और विधानसभा चुनाव में भी सफलता की उम्मीद की।