लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीताांजलि अंग्मो ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उनके पति को हिरासत में लेने के फैसले में अधिकारियों ने ठीक से सोच-विचार नहीं किया। उन्हें बेकार व गैर-जरूरी बातों के आधार पर नजरबंद किया गया। अंग्मो की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच में दावा किया कि जिन चार वीडियो के आधार पर नजरबंदी की गई वे सोनम वांगचुक को दिए ही नहीं गए। इससे उनका अपना बचाव में सही ढंग से बात रखने का अधिकार छिन गया। वीडियो नहीं देने से वांगचुक का सलाहकार बोर्ड और सरकार के सामने अपनी बात रखने का अधिकार प्रभावित हुआ है। SSP की सिफारिश कॉपी-पेस्ट कर दिया सिब्बल ने यह भी कहा कि लद्दाख के जिला मजिस्ट्रेट ने खुद से विचार नहीं किया, बल्कि लद्दाख के SSP की सिफारिश को सीधे कॉपी-पेस्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि नजरबंदी के कारणों का नजरबंदी आदेश से सीधा संबंध होना चाहिए था, लेकिन यहां ऐसे तथ्यों का इस्तेमाल किया गया जो जरूरी नहीं थे। इस मामले की 13 जनवरी को फिर सुनवाई होगी। अंग्मो ने पहले भी अदालत में कहा था कि लेह में उनके पति का भाषण हिंसा फैलाने के लिए नहीं, बल्कि हिंसा रोकने के लिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर उन्हें अपराधी बताया जा रहा है।
NSA के तहत हिरासत में लिया गया था सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई लेह में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद की गई थी। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हुई थी और 90 लोग घायल हुए थे। सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने इस हिंसा को भड़काया। NSA सरकार को ऐसे लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है, जिनसे देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो। इसके तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है। अंग्मो ने कहा कि 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा का सोनम वांगचुक के बयानों या कामों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने बताया कि वांगचुक ने खुद सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की थी और कहा था कि हिंसा से लद्दाख का शांतिपूर्ण आंदोलन विफल हो जाएगा।
सोनम की गिरफ्तारी के बाद पत्नी के 3 रिएक्शन… ये खबर भी पढ़ें: वांगचुक की पत्नी बोलीं- वे हिंसा नहीं फैला रहे थे:SC में कहा- तथ्य तोड़े-मरोड़े और अपराधी बता दिया; सोनम 3 महीने से जेल में हैं लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उनके पति का भाषण हिंसा फैलाने के लिए नहीं, बल्कि हिंसा को रोकने के लिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और वांगचुक को अपराधी की तरह दिखाने की कोशिश की जा रही है। पढ़ें पूरी खबर…
लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीताांजलि अंग्मो ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उनके पति को हिरासत में लेने के फैसले में अधिकारियों ने ठीक से सोच-विचार नहीं किया। उन्हें बेकार व गैर-जरूरी बातों के आधार पर नजरबंद किया गया। अंग्मो की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच में दावा किया कि जिन चार वीडियो के आधार पर नजरबंदी की गई वे सोनम वांगचुक को दिए ही नहीं गए। इससे उनका अपना बचाव में सही ढंग से बात रखने का अधिकार छिन गया। वीडियो नहीं देने से वांगचुक का सलाहकार बोर्ड और सरकार के सामने अपनी बात रखने का अधिकार प्रभावित हुआ है। SSP की सिफारिश कॉपी-पेस्ट कर दिया सिब्बल ने यह भी कहा कि लद्दाख के जिला मजिस्ट्रेट ने खुद से विचार नहीं किया, बल्कि लद्दाख के SSP की सिफारिश को सीधे कॉपी-पेस्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि नजरबंदी के कारणों का नजरबंदी आदेश से सीधा संबंध होना चाहिए था, लेकिन यहां ऐसे तथ्यों का इस्तेमाल किया गया जो जरूरी नहीं थे। इस मामले की 13 जनवरी को फिर सुनवाई होगी। अंग्मो ने पहले भी अदालत में कहा था कि लेह में उनके पति का भाषण हिंसा फैलाने के लिए नहीं, बल्कि हिंसा रोकने के लिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर उन्हें अपराधी बताया जा रहा है।
NSA के तहत हिरासत में लिया गया था सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई लेह में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद की गई थी। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हुई थी और 90 लोग घायल हुए थे। सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने इस हिंसा को भड़काया। NSA सरकार को ऐसे लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है, जिनसे देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो। इसके तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है। अंग्मो ने कहा कि 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा का सोनम वांगचुक के बयानों या कामों से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने बताया कि वांगचुक ने खुद सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की थी और कहा था कि हिंसा से लद्दाख का शांतिपूर्ण आंदोलन विफल हो जाएगा।
सोनम की गिरफ्तारी के बाद पत्नी के 3 रिएक्शन… ये खबर भी पढ़ें: वांगचुक की पत्नी बोलीं- वे हिंसा नहीं फैला रहे थे:SC में कहा- तथ्य तोड़े-मरोड़े और अपराधी बता दिया; सोनम 3 महीने से जेल में हैं लद्दाख के एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उनके पति का भाषण हिंसा फैलाने के लिए नहीं, बल्कि हिंसा को रोकने के लिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और वांगचुक को अपराधी की तरह दिखाने की कोशिश की जा रही है। पढ़ें पूरी खबर…