सिखों के सर्वोच्च श्री अकाल तख्त ने पंजाब के CM भगवंत मान को तलब किया है। उन्हें 15 जनवरी को अकाल तख्त के सचिवालय में पेश होने को कहा गया है। CM मान ने भी कहा कि वह एक विनम्र सिख की तरह नंगे पैर अकाल तख्त पर पेश होंगे। जहां वे अकाल तख्त जत्थेदार की तरफ से उठाए सवालों के बारे में स्पष्टीकरण देंगे। अकाल तख्त में तलब होने वाले CM भगवंत मान तीसरे मुख्यमंत्री होंगे। इससे पहले दिवंगत भीम सेन सच्चर, सुरजीत सिंह बरनाला, प्रकाश सिंह बादल को भी अकाल तख्त में तलब किया जा चुका है। इससे पहले शिरोमणि अकाली दल के प्रधान और पूर्व डिप्टी CM सुखबीर बादल ये सजा भुगत चुके हैं। आप सरकार के मंत्री तरुणप्रीत सौंध सोमवार को ही नंगे पैर अकाल तख्त पर पेश हुए। पंजाब के अब तक के इतिहास में सबसे बड़ा नाम महाराजा रणजीत सिंह भी अकाल तख्त पर धार्मिक सजा भुगत चुके हैं। अकाल तख्त साहिब से उनको कोड़े मारने की सजा मिली थी। इस पर रणजीत सिंह ने कहा था कि मुझे सजा मंजूर है, लेकिन उनको कोड़े नहीं मारे गए थे। अकाल तख्त क्या है, किसने क्यों स्थापना की, धार्मिक सजा कैसे तय होती है, किसे अकाल तख्त पर तलब किया जा सकता है तमाम सवालों के जवाब ढूंढने के लिए SGPC मेंबर भाई मंजीत सिंह से दैनिक भास्कर एप टीम ने बात की, पूरी रिपोर्ट पढ़ें… पहले जानें श्री अकाल तख्त क्या है?
SGPC मेंबर भाई मंजीत सिंह ने बताया कि श्री अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च राजनीतिक और न्यायिक संस्था है। इसका काम सिख समुदाय के सांसारिक और धार्मिक मामलों पर कौम का मार्गदर्शन करना और निर्णय लेना है। अकाल तख्त की स्थापना 5वें पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव के बेटे गुरु श्री हरगोबिंद पातशाह ने 1606 में की। उन्होंने देखा कि दुनिया में बहुत बड़ा जुल्म हो रहा था। इस पर उन्होंने दो तलवारें अपनाने का सिद्धांत बनाया। एक मीरी और दूसरी पीरी। इसका मतलब ये था कि धर्म और सियासत पर फैसले एक मंच से लिए जाएंगे। श्री अकाल तख्त अमृतसर में हरमंदिर साहिब के ठीक सामने अकाल तख्त स्थित है। अकाल तख्त का मतलब काल रहित परमात्मा का सिंहासन है। यह सिखों के 5 तख्तों में सबसे सर्वोच्च और पुराना है। सिख धर्म या समुदाय से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण विषय या विवाद पर यहां से हुक्मनामा जारी किया जाता है। यह हुक्मनामा पूरी दुनिया के सिखों के लिए मानना जरूरी होता है। दाढ़ी-केस कटाने वाले को सेक्रेटेरिएट में मिलती है सजा
SGPC मेंबर भाई मंजीत सिंह ने बताया कि अकाल तख्त की फसील पर वही पेश हो सकता है जो गुरु का पूर्ण सिख हो। अमृत छका हो और सभी सिख सिद्धांतों के अनुरूप हो। जिस आदमी ने दाढ़ी कटवाई हो या अमृत न छका हो तो उसे अकाल तख्त तलब कर सकता है। मगर उसको अकाल तख्त पर पेश करते सजा नहीं सुनाई जाती। ऐसे व्यक्ति को अकाल तख्त के सेक्रेटेरिएट में सजा सुनाई जाती है। सुजा सुनाने के लिए 5 सिंह साहिबान फैसला लेते हैं और सजा तय करते हैं। सजा के लिए तलब जत्थेदार करते हैं। अब तक इन बड़े राजनेताओं को तलब किया जा चुका… महाराजा रणजीत सिंह को डांस कराने पर मिली कोड़ों की सजा
सिख साम्राज्य के सबसे शक्तिशाली शासक महाराजा रणजीत सिंह को भी अकाल तख्त तलब कर चुका है। उन्हें जत्थेदार अकाली फूला सिंह ने मर्यादा उल्लंघन के लिए तलब किया था। महाराजा रणजीत सिंह पर अपने दरबार में नर्तकियों का डांस करवाने का आरोप लगा था। इसे सिख मर्यादा का उल्लंघन माना गया था। इस पर अकाल तख्त से 5 सिंहों ने एकमत होकर कोड़े मारने की सजा सुनाई थी। महाराजा ने नतमस्तक होकर इसे स्वीकार किया था। SGPC मेंबर भाई मंजीत सिंह ने बताया कि रणजीत सिंह के नम्रतापूर्वक सजा स्वीकार करने पर कोड़े नहीं मारे गए थे। उनको जिस इमली के पेड़ के साथ बांधने की सजा मिली थी वो आज भी अकाल तख्त साहिब के पास है। पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने माफी मांगी
1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय राष्ट्रपति होने के नाते उन्हें पंथ विरोधी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार माना गया। बाद में उन्होंने अकाल तख्त पर पेश होकर माफी मांगी और सेवा की। पूर्व गृह मंत्री बूटा सिंह काे पंथ से निकाला
ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद हरमंदिर साहिब के फिर से निर्माण में सरकारी तौर पर भूमिका निभाने के कारण उन्हें पंथ से निष्कासित कर दिया गया था। कई वर्षों बाद उन्होंने अकाल तख्त पर पेश होकर बर्तन मांजने और जूते साफ करने की धार्मिक सजा पूरी की थी। बूटा सिंह 8 बार लोकसभा के सांसद बने। वह देश के गृह और रक्षा मंत्री भी रहे। इसके बाद बिहार के राज्यपाल और SC आयोग के चेयरमैन भी बने। सच्चर अकाल तख्त पर पेश होने वाले पहले मुख्यमंत्री थे
साल 1955 में भीम सेन सच्चर आजाद भारत में अकाल तख्त पर पेश होने वाले पहले मुख्यमंत्री थे। इसकी वजह ये थी कि जुलाई 1955 में ‘पंजाबी सूबा आंदोलन’ के दौरान पुलिस स्वर्ण मंदिर परिसर के अंदर दाखिल हुई थी। सिखों के कड़े विरोध के बाद, भीम सेन सच्चर ने अकाल तख्त पर जाकर अपनी गलती मानी और माफी मांगी थी। सच्चर संयुक्त पंजाब में 3 बार मुख्यमंत्री बने थे। पूर्व सीएम सुरजीत सिंह बरनाला तनखैया घोषित
1986 में मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला को अकाल तख्त ने तलब किया था। उन्हें ऑपरेशन ब्लैक थंडर के वक्त गोल्डन टेंपल के अंदर पुलिस भेजने को लेकर तलब किया गया था। बरनाला को ‘तनखैया’ घोषित कर पंथ से निकाल दिया गया था। उन्होंने पद पर रहते हुए ही अकाल तख्त के सामने घुटने टेके और गले में तख्ती लटकाकर जूते साफ करने की धार्मिक सजा पूरी की। प्रकाश सिंह बादल बेअदबी केस में तलब हुए
1979 में प्रकाश सिंह बादल मुख्यमंत्री की दूसरी टर्म में अकाल तख्त में पेश हुए थे। इसके पीछे की वजह 1978 के निरंकारी कांड और उसके बाद पैदा हुए राजनीतिक हालातों के कारण पंथक विवाद पैदा हुआ था। बादल 4 अक्टूबर 1979 को वे जत्थेदार साधु सिंह भौरा के सामने पेश हुए थे। जिसके बाद वह अकाल तख्त पर पेश हुए थे। सुखबीर सिंह बादल को धार्मिक सजा मिली
शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बाद भी अकाल तख्त पर पेश हो चुके हैं। पहली बार उनको प्रकाश सिंह बादल के साथ तलब किया गया था। तब सरकार में गृह मंत्री रहते पावन स्वरूपों की बेअदबी न रोक पाने के आरोप लगे थे। दूसरी बार दिसंबर 2024 में अकाल तख्त के 5 सिंह साहिबान ने सुखबीर सिंह बादल को तनखैया घोषित किया। उन्हें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को माफी और बेअदबी मामले में सजा के तौर पर पहरा देने, श्रद्धालुओं के जूते साफ करने और हाथ जोड़कर माफी मांगने का आदेश दिया गया। इस दौरान 4 दिसंबर 2024 को उनके ऊपर गोली चलाई गई थी, जिसमें वह बच गए थे। CM को सजा सुनाने के धार्मिक और राजनीतिक मायने
श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब करने को लेकर CM भगवंत मान ने कहा है कि श्री अकाल तख्त साहिब से आया हुक्म सिर-मत्थे, दास मुख्यमंत्री नहीं बल्कि एक विनम्र सिख की तरह नंगे पैर चलकर हाजिर होगा। 15 जनवरी को राष्ट्रपति गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर में कान्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए आ रही हैं, उस दिन के लिए माफी मांगता हूं। भगवंत मान सरकार से इस वक्त अकाल तख्त कई मसलों पर नाराज है। इसमें प्रमुख बेअदबी कांड के आरोपियों को सजा नहीं मिला पाना है और दूसरा पंजाब से नशा खत्म नहीं हो पाना है। अगले साल 2027 में विधानसभा चुनाव है। पंथक राजनीति को लेकर सुखबीर बादल कमबैक कर रहे हैं। समिति चुनाव में अकाली दल ने अपने प्रदर्शन से चौंकाया है। इसके अलावा अकाली दल तीसरे या चौथे स्थान की अटकलों के बावजूद तरनतारन उप चुनाव में दूसरे नंबर पर रहा था। भगवंत मान की आम आदमी पार्टी की सरकार भी चुनावी साल में पंथ की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती। अगर सीएम पेश नहीं होते तो ये पंथ के खिलाफ जाता और पेश होने पर वह विरोधियों को जवाब दे सकते हैं। धार्मिक सजा का राजनीतिक और धार्मिक तौर पर क्या असर
सिख राजनीति का अनुभव रखने वाले बताते हैं कि इसका इमेज के अलावा कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ता। अगर कोई श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब होता है और धार्मिक सजा को पूरा करता है तो उसकी कौम में पॉजिटिव इमेज बनती है। लोगों को लगता है कि सजा पाने वाले व्यक्ति ने धर्म, सिख मर्यादा, गुरु के हुक्म और अकाल तख्त को सर्वोच्च माना है। इसका राजनीतिक तौर पर उतना असर नहीं होता। वोटिंग के वक्त लोग अलग तरह से निर्णय लेते हैं और धर्म के मसले पर अलग तरह से सोचते हैं। अकाल तख्त पर पेश होने से लेकर सजा की पूरी प्रक्रिया
अकाल तख्त साहिब पर धार्मिक सजा को तनखैया करार करना कहा जाता है। सजा सुनाने की प्रक्रिया बहुत ही मर्यादित और स्टैप बाय स्टैप होती है। यह प्रक्रिया किसी व्यक्ति को नीचा दिखाने के लिए नहीं, बल्कि उसके अहंकार को मिटाकर उसे गुरु की राह पर लाने के लिए अपनाई जाती है। इसमें सबसे पहले मामले का संज्ञान लिया जाता है और उस मुद्दे को लेक बैठक की जाती है। शिकायत पर अकाल तख्त के जत्थेदार विचार करते हैं। इसके बाद पांच सिंह साहिबान की गुप्त बैठक होती है। इसमें आरोपों की गंभीरता और सबूतों की जांच की जाती है। तलब करना और स्पष्टीकरण
दोषी पाए जाने की संभावना होने पर व्यक्ति को तलब किया जाता है। उसे डेट और टाइम दिया जाता है। तलब होने पर आरोपों पर स्पष्टीकरण देता है। यदि वह अपनी गलती मान लेता है, तो उसे धार्मिक अपराधी घोषित कर दिया जाता है। सजा क्या होगी इसका निर्णय सिंह साहिबान लेते हैं। निर्णय लेने के बाद पंज प्यारे तख्त की फसील पर आते हैं। अकाल तख्त की बॉलकनी से जत्थेदार पूरी संगत की मौजूदगी में सजा सुनाते हैं। ——————————– ये खबर भी पढ़ें :- अकाल तख्त पर नंगे पैर हाजिर होंगे CM भगवंत मान:बोले- मेरे लिए सर्वोच्च, राष्ट्रपति का प्रोग्राम कैंसिल किया; जत्थेदार ने 15 जनवरी को तलब किया सिखों के सर्वोच्च श्री अकाल तख्त ने पंजाब के सीएम भगवंत मान को तलब किया है। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि सीएम भगवंत मान ने सिख विरोधी मानसिकता प्रकट की। अकाल तख्त की सर्वोच्चता और गुरु साहिब की तरफ से बख्शे दसवंध के सिद्धांत यानी गुरु की गोलक को लेकर बयान दिया। पढ़ें पूरी खबर…
सिखों के सर्वोच्च श्री अकाल तख्त ने पंजाब के CM भगवंत मान को तलब किया है। उन्हें 15 जनवरी को अकाल तख्त के सचिवालय में पेश होने को कहा गया है। CM मान ने भी कहा कि वह एक विनम्र सिख की तरह नंगे पैर अकाल तख्त पर पेश होंगे। जहां वे अकाल तख्त जत्थेदार की तरफ से उठाए सवालों के बारे में स्पष्टीकरण देंगे। अकाल तख्त में तलब होने वाले CM भगवंत मान तीसरे मुख्यमंत्री होंगे। इससे पहले दिवंगत भीम सेन सच्चर, सुरजीत सिंह बरनाला, प्रकाश सिंह बादल को भी अकाल तख्त में तलब किया जा चुका है। इससे पहले शिरोमणि अकाली दल के प्रधान और पूर्व डिप्टी CM सुखबीर बादल ये सजा भुगत चुके हैं। आप सरकार के मंत्री तरुणप्रीत सौंध सोमवार को ही नंगे पैर अकाल तख्त पर पेश हुए। पंजाब के अब तक के इतिहास में सबसे बड़ा नाम महाराजा रणजीत सिंह भी अकाल तख्त पर धार्मिक सजा भुगत चुके हैं। अकाल तख्त साहिब से उनको कोड़े मारने की सजा मिली थी। इस पर रणजीत सिंह ने कहा था कि मुझे सजा मंजूर है, लेकिन उनको कोड़े नहीं मारे गए थे। अकाल तख्त क्या है, किसने क्यों स्थापना की, धार्मिक सजा कैसे तय होती है, किसे अकाल तख्त पर तलब किया जा सकता है तमाम सवालों के जवाब ढूंढने के लिए SGPC मेंबर भाई मंजीत सिंह से दैनिक भास्कर एप टीम ने बात की, पूरी रिपोर्ट पढ़ें… पहले जानें श्री अकाल तख्त क्या है?
SGPC मेंबर भाई मंजीत सिंह ने बताया कि श्री अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च राजनीतिक और न्यायिक संस्था है। इसका काम सिख समुदाय के सांसारिक और धार्मिक मामलों पर कौम का मार्गदर्शन करना और निर्णय लेना है। अकाल तख्त की स्थापना 5वें पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव के बेटे गुरु श्री हरगोबिंद पातशाह ने 1606 में की। उन्होंने देखा कि दुनिया में बहुत बड़ा जुल्म हो रहा था। इस पर उन्होंने दो तलवारें अपनाने का सिद्धांत बनाया। एक मीरी और दूसरी पीरी। इसका मतलब ये था कि धर्म और सियासत पर फैसले एक मंच से लिए जाएंगे। श्री अकाल तख्त अमृतसर में हरमंदिर साहिब के ठीक सामने अकाल तख्त स्थित है। अकाल तख्त का मतलब काल रहित परमात्मा का सिंहासन है। यह सिखों के 5 तख्तों में सबसे सर्वोच्च और पुराना है। सिख धर्म या समुदाय से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण विषय या विवाद पर यहां से हुक्मनामा जारी किया जाता है। यह हुक्मनामा पूरी दुनिया के सिखों के लिए मानना जरूरी होता है। दाढ़ी-केस कटाने वाले को सेक्रेटेरिएट में मिलती है सजा
SGPC मेंबर भाई मंजीत सिंह ने बताया कि अकाल तख्त की फसील पर वही पेश हो सकता है जो गुरु का पूर्ण सिख हो। अमृत छका हो और सभी सिख सिद्धांतों के अनुरूप हो। जिस आदमी ने दाढ़ी कटवाई हो या अमृत न छका हो तो उसे अकाल तख्त तलब कर सकता है। मगर उसको अकाल तख्त पर पेश करते सजा नहीं सुनाई जाती। ऐसे व्यक्ति को अकाल तख्त के सेक्रेटेरिएट में सजा सुनाई जाती है। सुजा सुनाने के लिए 5 सिंह साहिबान फैसला लेते हैं और सजा तय करते हैं। सजा के लिए तलब जत्थेदार करते हैं। अब तक इन बड़े राजनेताओं को तलब किया जा चुका… महाराजा रणजीत सिंह को डांस कराने पर मिली कोड़ों की सजा
सिख साम्राज्य के सबसे शक्तिशाली शासक महाराजा रणजीत सिंह को भी अकाल तख्त तलब कर चुका है। उन्हें जत्थेदार अकाली फूला सिंह ने मर्यादा उल्लंघन के लिए तलब किया था। महाराजा रणजीत सिंह पर अपने दरबार में नर्तकियों का डांस करवाने का आरोप लगा था। इसे सिख मर्यादा का उल्लंघन माना गया था। इस पर अकाल तख्त से 5 सिंहों ने एकमत होकर कोड़े मारने की सजा सुनाई थी। महाराजा ने नतमस्तक होकर इसे स्वीकार किया था। SGPC मेंबर भाई मंजीत सिंह ने बताया कि रणजीत सिंह के नम्रतापूर्वक सजा स्वीकार करने पर कोड़े नहीं मारे गए थे। उनको जिस इमली के पेड़ के साथ बांधने की सजा मिली थी वो आज भी अकाल तख्त साहिब के पास है। पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने माफी मांगी
1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय राष्ट्रपति होने के नाते उन्हें पंथ विरोधी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार माना गया। बाद में उन्होंने अकाल तख्त पर पेश होकर माफी मांगी और सेवा की। पूर्व गृह मंत्री बूटा सिंह काे पंथ से निकाला
ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद हरमंदिर साहिब के फिर से निर्माण में सरकारी तौर पर भूमिका निभाने के कारण उन्हें पंथ से निष्कासित कर दिया गया था। कई वर्षों बाद उन्होंने अकाल तख्त पर पेश होकर बर्तन मांजने और जूते साफ करने की धार्मिक सजा पूरी की थी। बूटा सिंह 8 बार लोकसभा के सांसद बने। वह देश के गृह और रक्षा मंत्री भी रहे। इसके बाद बिहार के राज्यपाल और SC आयोग के चेयरमैन भी बने। सच्चर अकाल तख्त पर पेश होने वाले पहले मुख्यमंत्री थे
साल 1955 में भीम सेन सच्चर आजाद भारत में अकाल तख्त पर पेश होने वाले पहले मुख्यमंत्री थे। इसकी वजह ये थी कि जुलाई 1955 में ‘पंजाबी सूबा आंदोलन’ के दौरान पुलिस स्वर्ण मंदिर परिसर के अंदर दाखिल हुई थी। सिखों के कड़े विरोध के बाद, भीम सेन सच्चर ने अकाल तख्त पर जाकर अपनी गलती मानी और माफी मांगी थी। सच्चर संयुक्त पंजाब में 3 बार मुख्यमंत्री बने थे। पूर्व सीएम सुरजीत सिंह बरनाला तनखैया घोषित
1986 में मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला को अकाल तख्त ने तलब किया था। उन्हें ऑपरेशन ब्लैक थंडर के वक्त गोल्डन टेंपल के अंदर पुलिस भेजने को लेकर तलब किया गया था। बरनाला को ‘तनखैया’ घोषित कर पंथ से निकाल दिया गया था। उन्होंने पद पर रहते हुए ही अकाल तख्त के सामने घुटने टेके और गले में तख्ती लटकाकर जूते साफ करने की धार्मिक सजा पूरी की। प्रकाश सिंह बादल बेअदबी केस में तलब हुए
1979 में प्रकाश सिंह बादल मुख्यमंत्री की दूसरी टर्म में अकाल तख्त में पेश हुए थे। इसके पीछे की वजह 1978 के निरंकारी कांड और उसके बाद पैदा हुए राजनीतिक हालातों के कारण पंथक विवाद पैदा हुआ था। बादल 4 अक्टूबर 1979 को वे जत्थेदार साधु सिंह भौरा के सामने पेश हुए थे। जिसके बाद वह अकाल तख्त पर पेश हुए थे। सुखबीर सिंह बादल को धार्मिक सजा मिली
शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बाद भी अकाल तख्त पर पेश हो चुके हैं। पहली बार उनको प्रकाश सिंह बादल के साथ तलब किया गया था। तब सरकार में गृह मंत्री रहते पावन स्वरूपों की बेअदबी न रोक पाने के आरोप लगे थे। दूसरी बार दिसंबर 2024 में अकाल तख्त के 5 सिंह साहिबान ने सुखबीर सिंह बादल को तनखैया घोषित किया। उन्हें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को माफी और बेअदबी मामले में सजा के तौर पर पहरा देने, श्रद्धालुओं के जूते साफ करने और हाथ जोड़कर माफी मांगने का आदेश दिया गया। इस दौरान 4 दिसंबर 2024 को उनके ऊपर गोली चलाई गई थी, जिसमें वह बच गए थे। CM को सजा सुनाने के धार्मिक और राजनीतिक मायने
श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब करने को लेकर CM भगवंत मान ने कहा है कि श्री अकाल तख्त साहिब से आया हुक्म सिर-मत्थे, दास मुख्यमंत्री नहीं बल्कि एक विनम्र सिख की तरह नंगे पैर चलकर हाजिर होगा। 15 जनवरी को राष्ट्रपति गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर में कान्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए आ रही हैं, उस दिन के लिए माफी मांगता हूं। भगवंत मान सरकार से इस वक्त अकाल तख्त कई मसलों पर नाराज है। इसमें प्रमुख बेअदबी कांड के आरोपियों को सजा नहीं मिला पाना है और दूसरा पंजाब से नशा खत्म नहीं हो पाना है। अगले साल 2027 में विधानसभा चुनाव है। पंथक राजनीति को लेकर सुखबीर बादल कमबैक कर रहे हैं। समिति चुनाव में अकाली दल ने अपने प्रदर्शन से चौंकाया है। इसके अलावा अकाली दल तीसरे या चौथे स्थान की अटकलों के बावजूद तरनतारन उप चुनाव में दूसरे नंबर पर रहा था। भगवंत मान की आम आदमी पार्टी की सरकार भी चुनावी साल में पंथ की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती। अगर सीएम पेश नहीं होते तो ये पंथ के खिलाफ जाता और पेश होने पर वह विरोधियों को जवाब दे सकते हैं। धार्मिक सजा का राजनीतिक और धार्मिक तौर पर क्या असर
सिख राजनीति का अनुभव रखने वाले बताते हैं कि इसका इमेज के अलावा कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ता। अगर कोई श्री अकाल तख्त साहिब पर तलब होता है और धार्मिक सजा को पूरा करता है तो उसकी कौम में पॉजिटिव इमेज बनती है। लोगों को लगता है कि सजा पाने वाले व्यक्ति ने धर्म, सिख मर्यादा, गुरु के हुक्म और अकाल तख्त को सर्वोच्च माना है। इसका राजनीतिक तौर पर उतना असर नहीं होता। वोटिंग के वक्त लोग अलग तरह से निर्णय लेते हैं और धर्म के मसले पर अलग तरह से सोचते हैं। अकाल तख्त पर पेश होने से लेकर सजा की पूरी प्रक्रिया
अकाल तख्त साहिब पर धार्मिक सजा को तनखैया करार करना कहा जाता है। सजा सुनाने की प्रक्रिया बहुत ही मर्यादित और स्टैप बाय स्टैप होती है। यह प्रक्रिया किसी व्यक्ति को नीचा दिखाने के लिए नहीं, बल्कि उसके अहंकार को मिटाकर उसे गुरु की राह पर लाने के लिए अपनाई जाती है। इसमें सबसे पहले मामले का संज्ञान लिया जाता है और उस मुद्दे को लेक बैठक की जाती है। शिकायत पर अकाल तख्त के जत्थेदार विचार करते हैं। इसके बाद पांच सिंह साहिबान की गुप्त बैठक होती है। इसमें आरोपों की गंभीरता और सबूतों की जांच की जाती है। तलब करना और स्पष्टीकरण
दोषी पाए जाने की संभावना होने पर व्यक्ति को तलब किया जाता है। उसे डेट और टाइम दिया जाता है। तलब होने पर आरोपों पर स्पष्टीकरण देता है। यदि वह अपनी गलती मान लेता है, तो उसे धार्मिक अपराधी घोषित कर दिया जाता है। सजा क्या होगी इसका निर्णय सिंह साहिबान लेते हैं। निर्णय लेने के बाद पंज प्यारे तख्त की फसील पर आते हैं। अकाल तख्त की बॉलकनी से जत्थेदार पूरी संगत की मौजूदगी में सजा सुनाते हैं। ——————————– ये खबर भी पढ़ें :- अकाल तख्त पर नंगे पैर हाजिर होंगे CM भगवंत मान:बोले- मेरे लिए सर्वोच्च, राष्ट्रपति का प्रोग्राम कैंसिल किया; जत्थेदार ने 15 जनवरी को तलब किया सिखों के सर्वोच्च श्री अकाल तख्त ने पंजाब के सीएम भगवंत मान को तलब किया है। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि सीएम भगवंत मान ने सिख विरोधी मानसिकता प्रकट की। अकाल तख्त की सर्वोच्चता और गुरु साहिब की तरफ से बख्शे दसवंध के सिद्धांत यानी गुरु की गोलक को लेकर बयान दिया। पढ़ें पूरी खबर…