केदारनाथ धाम में मौसम ने एक बार फिर अचानक करवट ले ली। सोमवार दोपहर करीब साढ़े 3 बजे से धाम में बर्फबारी शुरू हुई। बर्फ गिरते ही केदारनाथ और आसपास की पूरी घाटी सफेद चादर में ढक गई और अब पूरी नगरी पूरी तरह से सफेद दिख रही है। जनवरी 2026 में यह केदारनाथ में दूसरी बार बर्फबारी दर्ज की गई है। इससे पहले 2 जनवरी को इस सीजन की पहली बर्फबारी हुई थी। लगातार गिरती बर्फ के कारण धाम में ठंड और ज्यादा बढ़ गई है और तापमान माइनस 17 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। दिलचस्प यह है कि आमतौर पर केदारनाथ में दिसंबर से ही नियमित बर्फबारी का नजारा दिखने लगता था, लेकिन इस बार पूरा दिसंबर लगभग सूखा रहा। अब जनवरी में बर्फ गिरने से मौसम के बदले हुए मिजाज की तस्वीर और साफ हो गई है। केदार नगरी की PHOTOS… साढ़े 3 बजे बदला मौसम, घाटी हुई सफेद मिली जानकारी के अनुसार सोमवार दोपहर अचानक मौसम बदला और करीब साढ़े 3 बजे केदारनाथ धाम में बर्फ गिरनी शुरू हो गई थी। कुछ ही देर में बर्फबारी तेज हो गई और देर शाम तक रुक-रुक कर जारी रही। लगातार बर्फ गिरने से धाम का शीतकालीन स्वरूप एक बार फिर लौट आया है। बर्फबारी के कारण केदारनाथ मंदिर परिसर, आसपास की पहाड़ियां और घाटी पूरी तरह सफेद नजर आने लगी हैं। ठंड बढ़ने से यहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय स्टाफ को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। 2026 में दूसरी बार बर्फबारी, दिसंबर रहा लगभग सूखा यह बर्फबारी साल 2026 की दूसरी बर्फबारी मानी जा रही है। इससे पहले 2 जनवरी को हल्की बर्फ गिरी थी, जबकि दिसंबर महीने में केदारनाथ लगभग बर्फ विहीन रहा। जबकि सामान्य तौर पर दिसंबर से ही यहां लगातार बर्फबारी शुरू हो जाती थी। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव बीते कुछ वर्षों से साफ नजर आ रहा है। ऊंचाई वाले इलाकों में जहां पहले समय पर बर्फ जम जाती थी, वहां अब बर्फबारी देरी से और कम अवधि के लिए हो रही है। ऊपरी हिमालय लंबे समय तक रहा बर्फ विहीन बीते करीब एक महीने तक केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, तुंगनाथ और औली जैसे ऊपरी हिमालयी क्षेत्र लगभग बर्फ विहीन बने रहे। अक्टूबर और नवंबर में दो-तीन बार हल्की बर्फबारी जरूर हुई, लेकिन वह ज्यादा देर टिक नहीं पाई। केदारनाथ में अक्टूबर-नवंबर की हल्की बर्फबारी के दौरान करीब डेढ़ फीट तक बर्फ जमी थी, लेकिन मौसम साफ होते ही वह दो दिनों में पिघल गई। इसके बाद नवंबर से जनवरी की शुरुआत तक लंबा अंतराल बिना बर्फबारी के बीता। दुर्लभ जड़ी-बूटियों और नमी पर असर हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुदीप सेमवाल के अनुसार ऊपरी हिमालय में समय पर बर्फ न गिरना मौसम चक्र में बड़े बदलाव का संकेत है। बर्फ की कमी से जमीन में नमी घट रही है, जिसका असर जटामासी, कुटकी और अतीश जैसी दुर्लभ जड़ी-बूटियों पर पड़ सकता है। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान के वैज्ञानिक भी मानते हैं कि लगातार कम होती बर्फबारी से हिमालयी वनस्पतियों का प्राकृतिक जीवन चक्र प्रभावित हो रहा है। चार साल में पूरी तरह बदल गया बर्फबारी का पैटर्न आंकड़ों के मुताबिक बीते चार वर्षों में अक्टूबर से फरवरी के बीच केदारनाथ में बर्फबारी लगातार कम हुई है। इसके उलट फरवरी से अप्रैल और मई-जून के दौरान बर्फ गिरने की घटनाएं बढ़ी हैं, जो पहले सामान्य नहीं थीं। 2023-24 में अक्टूबर से जनवरी के बीच कई दिनों तक बर्फबारी दर्ज हुई थी, लेकिन 2024 में अक्टूबर से दिसंबर तक एक भी दिन बर्फ नहीं गिरी। जनवरी में भी केवल दो दिन बर्फबारी हुई। वैज्ञानिकों के अनुसार यह बदलाव ग्लेशियरों के लिए खतरे की घंटी है। ———— ये खबर भी पढ़ें… गंगोत्री स्विट्जरलैंड से तीन गुना ज्यादा ठंडा:7 शहरों में पेयजल लाइन जमी, 5 जिलों में होगी बारिश-बर्फबारी; निचले इलाके में कोहरे का यलो अलर्ट उत्तराखंड के उत्तरकाशी में स्थित गंगोत्री में स्विट्जरलैंड से तीन गुना ज्यादा ठंड हो रही है। स्विट्जरलैंड में पारा -7°C है, लेकिन गंगोत्री में तापमान -21°C है, जिससे यहां नदी-नाले जम गए है। इसके साथ ही गंगोत्री नेशनल पार्क के छह और पुलिस के दो कर्मचारी सहित गंगोत्री मंदिर समिति के कर्मचारी तैनात हैं, जिससे उन्हें भी काफी दिक्कतें हो रही है। (पढ़ें पूरे खबर)
केदारनाथ धाम में मौसम ने एक बार फिर अचानक करवट ले ली। सोमवार दोपहर करीब साढ़े 3 बजे से धाम में बर्फबारी शुरू हुई। बर्फ गिरते ही केदारनाथ और आसपास की पूरी घाटी सफेद चादर में ढक गई और अब पूरी नगरी पूरी तरह से सफेद दिख रही है। जनवरी 2026 में यह केदारनाथ में दूसरी बार बर्फबारी दर्ज की गई है। इससे पहले 2 जनवरी को इस सीजन की पहली बर्फबारी हुई थी। लगातार गिरती बर्फ के कारण धाम में ठंड और ज्यादा बढ़ गई है और तापमान माइनस 17 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। दिलचस्प यह है कि आमतौर पर केदारनाथ में दिसंबर से ही नियमित बर्फबारी का नजारा दिखने लगता था, लेकिन इस बार पूरा दिसंबर लगभग सूखा रहा। अब जनवरी में बर्फ गिरने से मौसम के बदले हुए मिजाज की तस्वीर और साफ हो गई है। केदार नगरी की PHOTOS… साढ़े 3 बजे बदला मौसम, घाटी हुई सफेद मिली जानकारी के अनुसार सोमवार दोपहर अचानक मौसम बदला और करीब साढ़े 3 बजे केदारनाथ धाम में बर्फ गिरनी शुरू हो गई थी। कुछ ही देर में बर्फबारी तेज हो गई और देर शाम तक रुक-रुक कर जारी रही। लगातार बर्फ गिरने से धाम का शीतकालीन स्वरूप एक बार फिर लौट आया है। बर्फबारी के कारण केदारनाथ मंदिर परिसर, आसपास की पहाड़ियां और घाटी पूरी तरह सफेद नजर आने लगी हैं। ठंड बढ़ने से यहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और स्थानीय स्टाफ को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। 2026 में दूसरी बार बर्फबारी, दिसंबर रहा लगभग सूखा यह बर्फबारी साल 2026 की दूसरी बर्फबारी मानी जा रही है। इससे पहले 2 जनवरी को हल्की बर्फ गिरी थी, जबकि दिसंबर महीने में केदारनाथ लगभग बर्फ विहीन रहा। जबकि सामान्य तौर पर दिसंबर से ही यहां लगातार बर्फबारी शुरू हो जाती थी। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव बीते कुछ वर्षों से साफ नजर आ रहा है। ऊंचाई वाले इलाकों में जहां पहले समय पर बर्फ जम जाती थी, वहां अब बर्फबारी देरी से और कम अवधि के लिए हो रही है। ऊपरी हिमालय लंबे समय तक रहा बर्फ विहीन बीते करीब एक महीने तक केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, तुंगनाथ और औली जैसे ऊपरी हिमालयी क्षेत्र लगभग बर्फ विहीन बने रहे। अक्टूबर और नवंबर में दो-तीन बार हल्की बर्फबारी जरूर हुई, लेकिन वह ज्यादा देर टिक नहीं पाई। केदारनाथ में अक्टूबर-नवंबर की हल्की बर्फबारी के दौरान करीब डेढ़ फीट तक बर्फ जमी थी, लेकिन मौसम साफ होते ही वह दो दिनों में पिघल गई। इसके बाद नवंबर से जनवरी की शुरुआत तक लंबा अंतराल बिना बर्फबारी के बीता। दुर्लभ जड़ी-बूटियों और नमी पर असर हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुदीप सेमवाल के अनुसार ऊपरी हिमालय में समय पर बर्फ न गिरना मौसम चक्र में बड़े बदलाव का संकेत है। बर्फ की कमी से जमीन में नमी घट रही है, जिसका असर जटामासी, कुटकी और अतीश जैसी दुर्लभ जड़ी-बूटियों पर पड़ सकता है। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान के वैज्ञानिक भी मानते हैं कि लगातार कम होती बर्फबारी से हिमालयी वनस्पतियों का प्राकृतिक जीवन चक्र प्रभावित हो रहा है। चार साल में पूरी तरह बदल गया बर्फबारी का पैटर्न आंकड़ों के मुताबिक बीते चार वर्षों में अक्टूबर से फरवरी के बीच केदारनाथ में बर्फबारी लगातार कम हुई है। इसके उलट फरवरी से अप्रैल और मई-जून के दौरान बर्फ गिरने की घटनाएं बढ़ी हैं, जो पहले सामान्य नहीं थीं। 2023-24 में अक्टूबर से जनवरी के बीच कई दिनों तक बर्फबारी दर्ज हुई थी, लेकिन 2024 में अक्टूबर से दिसंबर तक एक भी दिन बर्फ नहीं गिरी। जनवरी में भी केवल दो दिन बर्फबारी हुई। वैज्ञानिकों के अनुसार यह बदलाव ग्लेशियरों के लिए खतरे की घंटी है। ———— ये खबर भी पढ़ें… गंगोत्री स्विट्जरलैंड से तीन गुना ज्यादा ठंडा:7 शहरों में पेयजल लाइन जमी, 5 जिलों में होगी बारिश-बर्फबारी; निचले इलाके में कोहरे का यलो अलर्ट उत्तराखंड के उत्तरकाशी में स्थित गंगोत्री में स्विट्जरलैंड से तीन गुना ज्यादा ठंड हो रही है। स्विट्जरलैंड में पारा -7°C है, लेकिन गंगोत्री में तापमान -21°C है, जिससे यहां नदी-नाले जम गए है। इसके साथ ही गंगोत्री नेशनल पार्क के छह और पुलिस के दो कर्मचारी सहित गंगोत्री मंदिर समिति के कर्मचारी तैनात हैं, जिससे उन्हें भी काफी दिक्कतें हो रही है। (पढ़ें पूरे खबर)