दुनिया में जारी खून-खराबे और हिंसा के लिए हम खुद काफी हद तक जिम्मेदार हैं। भारत के पास शांति और एकात्म का संदेश है, लेकिन हम उसे दुनिया तक प्रभावी ढंग से पहुंचा नहीं पाए। यह बात बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने जबलपुर में आयोजित चौथे वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में कही। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही हिंसा को निंदनीय बताते हुए कहा कि यह मानव संवेदना और करुणा का मामला है। इससे पहले राज्यपाल के आगमन पर मानस भवन में राम-राम भजन से उनका स्वागत किया गया। उन्होंने मंचासीन संत कल्याणदास जी महाराज के चरण स्पर्श किए। राष्ट्रगान के बाद संतों के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। मानव प्रतिष्ठा ही शांति की बुनियाद
राज्यपाल ने कहा कि पूरी दुनिया शांति चाहती है, लेकिन इतिहास बताता है कि हर दौर में इंसानी खून सस्ता समझा गया। वर्ष 1948 में मानवाधिकारों की अवधारणा आई, जिसमें मानव प्रतिष्ठा को मूल आधार माना गया, लेकिन व्यवहार में हम आज भी खुद को दूसरों से श्रेष्ठ मानते हैं। “मैं सही हूं, बाकी सब गलत”—यही सोच हिंसा को जन्म देती है। ये भी बोले आरिफ मोहम्मद
दुनिया में जारी खून-खराबे और हिंसा के लिए हम खुद काफी हद तक जिम्मेदार हैं। भारत के पास शांति और एकात्म का संदेश है, लेकिन हम उसे दुनिया तक प्रभावी ढंग से पहुंचा नहीं पाए। यह बात बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने जबलपुर में आयोजित चौथे वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में कही। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रही हिंसा को निंदनीय बताते हुए कहा कि यह मानव संवेदना और करुणा का मामला है। इससे पहले राज्यपाल के आगमन पर मानस भवन में राम-राम भजन से उनका स्वागत किया गया। उन्होंने मंचासीन संत कल्याणदास जी महाराज के चरण स्पर्श किए। राष्ट्रगान के बाद संतों के साथ दीप प्रज्ज्वलन कर सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। मानव प्रतिष्ठा ही शांति की बुनियाद
राज्यपाल ने कहा कि पूरी दुनिया शांति चाहती है, लेकिन इतिहास बताता है कि हर दौर में इंसानी खून सस्ता समझा गया। वर्ष 1948 में मानवाधिकारों की अवधारणा आई, जिसमें मानव प्रतिष्ठा को मूल आधार माना गया, लेकिन व्यवहार में हम आज भी खुद को दूसरों से श्रेष्ठ मानते हैं। “मैं सही हूं, बाकी सब गलत”—यही सोच हिंसा को जन्म देती है। ये भी बोले आरिफ मोहम्मद