दिल्ली ब्लास्ट केस में डॉक्टर-इमाम ही नहीं, अब पेशेंट मॉड्यूल भी सामने आ रहा है। जिसमें डॉ. मुजम्मिल, लेडी डॉ. शाहीन और डॉ. उमर नबी मरीजों की मदद के बहाने ऐसे शिकार ढूंढते थे, जिनका वो जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल कर सकें। ये डॉक्टर मरीजों के घर तक पहुंच जाते थे। वहां परिवार को बारीकी से जायजा लेते। फिर अहसान में दबाते। ऐसे 3 केस सामने आ चुके हैं। ऐसे पेशेंट भी अब जांच एजेंसियों की रडार पर हैं। दिल्ली ब्लास्ट में खुद को उड़ाने वाले डॉ. उमर नबी की लाल रंग की ईको स्पोर्ट्स कार को छिपाने वाला बाशिद इसी मॉड्यूल का हिस्सा है। डॉ. मुजम्मिल ने उसके पिता का ट्रीटमेंट किया था। उसके बाद डॉ. शाहीन व डॉ. उमर नबी से मुलाकात कराई। उसे डॉ. शाहीन के अधीन अल फलाह यूनिवर्सिटी में नौकरी दिलवाई। फिर उससे संदिग्ध सामान इधर से उधर कराने लगे। ऐसे ही नूंह के एक इमाम के बेटे के ट्रीटमेंट के बहाने संपर्क बढ़ाए। धौज मस्जिद के इमाम इश्तियाक से भी डॉ. मुजम्मिल ने यूं ही संपर्क बढ़ाया और फिर उसका कमरा किराए पर लेकर वहां विस्फोटक छिपाया। जांच एजेंसी से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में भी आतंकियों का डॉक्टर-मौलवी मॉड्यूल सामने आया था। अल-फलाह के मामले में तो इसमें पेशेंट भी जुड़ गए। सबसे पहले पढ़िये…लाल ईको स्पोर्ट्स को छिपाने में मदद करने वाले बाशिद की कहानी पिता पैरालाइज हुआ, डॉ. मुजम्मिल ट्रीटमेंट के बहाने घर आया
दैनिक भास्कर एप की टीम धौज गांव में बाशिद के घर पहुंची। बाशिद को जांच एजेंसियां पकड़ चुकी हैं। उस पर आतंकी डॉक्टरों की मदद का आरोप है। दिल्ली लाल किले के सामने खुद को आई-20 कार समेत उड़ाने वाले डॉ. उमर नबी की रेड ईको स्पोर्ट्स कार बाशिद ने ही अपनी बहन के घर छिपाई थी। बाशिद का परिवार कैमरे के सामने आने को तैयार नहीं हुआ। हालांकि, ऑफ कैमरा सारी कहानी बताई। उन्होंने कहा- करीब डेढ़ साल पहले बाशिद के पिता राशिद पैरालाइज हो गए। बाशिद पिता को अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में लेकर गया। जहां इमरजेंसी में डॉ. मुजम्मिल से मुलाकात हुई। राशिद कई दिन यहां भर्ती रहे। इसके बाद मुजम्मिल और बाशिद की मुलाकात रोजाना होने लगी। पिता को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी डॉ. मुजम्मिल के संपर्क में रहा। मुजम्मिल इलाज करने घर आने लगा। बाशिद के परिवार के दूसरे लोग भी डॉ. मुजम्मिल को जान गए थे। डॉ. शाहीन से मुलाकात कराई, नौकरी दिलवाई
परिवार ने बताया कि करीब एक साल पहले डॉ. मुजम्मिल ने बाशिद को अस्पताल में मेडिसिन डिपार्टमेंट की HOD डॉ. शाहीन सईद से मिलवाया। डॉ. शाहीन सईद ने दिल्ली ब्लास्ट में मारे गए आतंकी डॉ. उमर नबी से पहचान कराई। डॉ. उमर नबी के कहने पर डॉ. शाहीन ने उसे मेडिसन डिपार्टमेंट में ही क्लर्क की पोस्ट पर लगवा दिया। इसके बाद तीनों बाशिद से अपना काम निकलवाने लगे। अस्पताल में नौकरी लगने से पहले बाशिद एक निजी कंपनी में काम करता था। पिता के बीमार होने के कारण उसे नौकरी छोड़नी पड़ी थी। जिसका फायदा उठाकर डॉ. मुजम्मिल ने बाशिद को नौकरी दिलवाकर अपने नेटवर्क में शामिल कर लिया। रेड ईको स्पोर्ट्स कार यूज करने के लिए दी
इस दौरान तीनों अपने निजी काम करवाने के लिए बाशिद को अपनी गाड़ी देकर भेजते रहते थे। दिल्ली ब्लास्ट से करीब पांच महीने पहले से बाशिद से नूंह से सामान मंगवाने का सिलसिला शुरू किया गया। जिसमें कई बार डॉ. उमर भी उसके साथ नूंह तक सामान लेने गया। परिवार ने बताया कि कई बार उसे अकेले ही सामान लेने के लिए भेज दिया जाता था। अक्सर उमर की कार बाशिद के पास रहती थी। उमर ने यूनिवर्सिटी आना छोड़ा तो कार बाशिद के पास रही
इसी बीच जम्मू-कश्मीर में डॉक्टर-मौलवी मॉड्यूल पकड़ में आया। जिसके तार फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ रहे थे। 30 अक्टूबर के बाद डॉ. उमर ने यूनिवर्सिटी आना छोड़ दिया। तब से रेड ईको कार बाशिद के पास ही रही। जब डॉ. मुजम्मिल को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के चलते अल-फलाह यूनिवर्सिटी के अस्पताल से गिरफ्तार किया तब इको स्पोर्टस कार यूनिवर्सिटी में ही थी। दिल्ली में ब्लास्ट होने के बाद लाल रंग की ईको स्पोर्ट्स कार की तलाश शुरू हुई तो 10 नवंबर को बाशिद यह कार गांव खंदावली में अपनी बहन के घर छोड़ा आया। साथ ही लैपटॉप व दूसरा सामान घर पर रखकर फरार हो गया। बाद में बाशिद ने फोन कर अपने परिवार के लोगों को सारी जानकारी दी। परिवार को बताया-डॉक्टरों ने इस्तेमाल किया
परिवार के अनुसार बाशिद ने उन्हें बताया कि उसे फंसाने के लिए डॉ. मुजम्मिल और डॉ. नबी ने उसका इस्तेमाल किया है। वे उससे उनकी गाड़ी में कुछ गलत सामान मंगवाते हैं। बाशिद ने परिवार को बताया कि डॉ. मुजम्मिल को पुलिस ने पकड़ लिया है। डॉ. उमर की कार उसके पास है और उसे अब डर लग रहा है। वहीं परिवार के लोगों के अनुसार पुलिस को उन्होंने ही लाल कार के बारे में सूचना दी थी। 24 घंटे से ज्यादा चली कार की जांच
12 नवंबर की शाम को गांव खंदावली में एनएसजी कमांडो, एनएसजी बॉम्ब स्क्वॉड टीम, एनआईए, सीएफएसएल और हरियाणा पुलिस की टीमों ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की। 24 घंटे की लगातार जांच के बाद कार को फरीदाबाद पुलिस के हवाले किया। अब कार को फरीदाबाद के सेक्टर 58 के थाने में रखा गया है। एफएसएल जांच में इस कार में विस्फोटक ढोए जाने के कुछ प्रमाण मिले हैं। अब जानिए…कैसे मदद के बहाने इमाम को मॉड्यूल में शामिल किया डॉ. मुज्जिमल ने यूनिवर्सिटी की मस्जिद के इमाम मोहम्मद इश्तियाक और नूंह के इमाम इमामुद्दीन को भी मदद के बहाने की फंसाया। इश्तियाक का तो आतंक की नर्सरी तैयार करने के मकसद से भी इस्तेमाल किया। साथ ही उसका घर किराये पर लेकर विस्फोटक रखा। मस्जिद में नमाज के वक्त इश्तियाक से संपर्क बढ़ाया
डॉ. मुजम्मिल व डॉ. उमर अल फलाह यूनिवर्सिटी में बनी मस्जिद में पांचों वक्त नमाज अदा करने आते थे। इसी दौरान मस्जिद के इमाम मोहम्मद इश्तियाक से संपर्क बढ़ाया और उसका भरोसा जीता। डॉक्टर उसके घर दावत पर भी आने लगे थे। इश्तियाक की बीवी हसीना ने दैनिक भास्कर एप से बातचीत में बताया कि डॉ. मुजम्मिल कई बार उनके घर आता था। अक्सर मदद भी करता था। कई डॉक्टरों को दूध भी इमाम के घर से ही जाता था। दोस्त का सामान रखने के बहाने घर किराये पर लिया
हसीना के मुताबिक, डॉ. मुजम्मिल ने यह कहकर उनका फतेहपुरा तगा वाला घर किराये पर लिया था कि दोस्त का सामान रखना है। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक इश्तियाक खुद भी सामान रखवाने डॉ. मुजम्मिल के साथ गया था। तब पड़ोसियों को यही बताया था कि ये खाद के थैले हैं। जो बाद में विस्फोटक सामग्री निकली। ऐसे ही धौज में भी एक कमरा किराये पर लिया था। वहां भी यही कहा था कि बस सामान ही रखना है। अंडरग्राउंड मदरसा बनाने में फंडिंग की
यूनिवर्सिटी से करीब 700 मीटर दूरी पर 4-5 महीने से एक इमारत बनाई जा रही थी। कुछ दूरी पर मदरसे का बोर्ड लगाया गया था। इस मदरसे में इमाम इश्तियाक को चेहरा बनाया गया जबकि फंडिंग डॉ. मुजम्मिल कर रहा था। बोरवेल लगाने के लिए 35 हजार रुपए की ट्रांजेक्शन भी सामने आई है। इमाम यहां रोजाना 2 घंटे आकर 15-20 बच्चों को दीनी तालीम दे रहा था। अंदेशा है कि बच्चों का ब्रेन वॉश कर स्लीपर सेल बनाया जा रहा था। पत्नी के इलाज को लेकर संपर्क में आया इमाम
डॉ मुजम्मिल के संपर्क को लेकर सिरोही गांव की मस्जिद के इमाम इमामुद्दीन को भी NIA ने हिरासत में लिया है। गांव खोइरी निवासी इमामुद्दीन करीब दो साल पहले डॉ मुजम्मिल के संपर्क में आया था। वह अपनी पत्नी का इलाज कराने अल फलाह यूनिवर्सिटी में गया था। जहां पर इमाम डॉ मुजम्मिल के संपर्क में आया। इमामुद्दीन के बेटे मुहम्मद जुनैद ने बताया कि उसके पैर का ऑपरेशन भी उसने अल फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल से ही कराया था। उसके बाद से ही उसके पिता डॉ. मुजम्मिल से दवाओं के लिए बात करते थे। उसने यह भी बताया था कि उनके पास कुछ पैसे की ट्रांजेक्शन दवाओं को लेकर की गई थी। उसने बताया कि उनके घर पर कई बार डॉ मुजम्मिल इलाज करने के लिए आया था। ॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… अल-फलाह यूनिवर्सिटी को आतंकियों ने अड्डा बनाया:छिपने-योजना बनाने के लिए इस्तेमाल की; मुजम्मिल-शाहीन को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ होगी दिल्ली ब्लास्ट केस में जांच एजेंसियों का केंद्र फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी बन गई है। यूनिवर्सिटी के डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद ने पूछताछ में बताया कि आतंकी मॉड्यूल ने यूनिवर्सिटी को रेडिकलाइजेशन और लॉजिस्टिक कवर के तौर पर इस्तेमाल किया, यानी यूनिवर्सिटी आतंकियों के छिपने और योजना बनाने में इस्तेमाल हो रही थी। पूरी खबर पढ़ें…
दिल्ली ब्लास्ट केस में डॉक्टर-इमाम ही नहीं, अब पेशेंट मॉड्यूल भी सामने आ रहा है। जिसमें डॉ. मुजम्मिल, लेडी डॉ. शाहीन और डॉ. उमर नबी मरीजों की मदद के बहाने ऐसे शिकार ढूंढते थे, जिनका वो जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल कर सकें। ये डॉक्टर मरीजों के घर तक पहुंच जाते थे। वहां परिवार को बारीकी से जायजा लेते। फिर अहसान में दबाते। ऐसे 3 केस सामने आ चुके हैं। ऐसे पेशेंट भी अब जांच एजेंसियों की रडार पर हैं। दिल्ली ब्लास्ट में खुद को उड़ाने वाले डॉ. उमर नबी की लाल रंग की ईको स्पोर्ट्स कार को छिपाने वाला बाशिद इसी मॉड्यूल का हिस्सा है। डॉ. मुजम्मिल ने उसके पिता का ट्रीटमेंट किया था। उसके बाद डॉ. शाहीन व डॉ. उमर नबी से मुलाकात कराई। उसे डॉ. शाहीन के अधीन अल फलाह यूनिवर्सिटी में नौकरी दिलवाई। फिर उससे संदिग्ध सामान इधर से उधर कराने लगे। ऐसे ही नूंह के एक इमाम के बेटे के ट्रीटमेंट के बहाने संपर्क बढ़ाए। धौज मस्जिद के इमाम इश्तियाक से भी डॉ. मुजम्मिल ने यूं ही संपर्क बढ़ाया और फिर उसका कमरा किराए पर लेकर वहां विस्फोटक छिपाया। जांच एजेंसी से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में भी आतंकियों का डॉक्टर-मौलवी मॉड्यूल सामने आया था। अल-फलाह के मामले में तो इसमें पेशेंट भी जुड़ गए। सबसे पहले पढ़िये…लाल ईको स्पोर्ट्स को छिपाने में मदद करने वाले बाशिद की कहानी पिता पैरालाइज हुआ, डॉ. मुजम्मिल ट्रीटमेंट के बहाने घर आया
दैनिक भास्कर एप की टीम धौज गांव में बाशिद के घर पहुंची। बाशिद को जांच एजेंसियां पकड़ चुकी हैं। उस पर आतंकी डॉक्टरों की मदद का आरोप है। दिल्ली लाल किले के सामने खुद को आई-20 कार समेत उड़ाने वाले डॉ. उमर नबी की रेड ईको स्पोर्ट्स कार बाशिद ने ही अपनी बहन के घर छिपाई थी। बाशिद का परिवार कैमरे के सामने आने को तैयार नहीं हुआ। हालांकि, ऑफ कैमरा सारी कहानी बताई। उन्होंने कहा- करीब डेढ़ साल पहले बाशिद के पिता राशिद पैरालाइज हो गए। बाशिद पिता को अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में लेकर गया। जहां इमरजेंसी में डॉ. मुजम्मिल से मुलाकात हुई। राशिद कई दिन यहां भर्ती रहे। इसके बाद मुजम्मिल और बाशिद की मुलाकात रोजाना होने लगी। पिता को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी डॉ. मुजम्मिल के संपर्क में रहा। मुजम्मिल इलाज करने घर आने लगा। बाशिद के परिवार के दूसरे लोग भी डॉ. मुजम्मिल को जान गए थे। डॉ. शाहीन से मुलाकात कराई, नौकरी दिलवाई
परिवार ने बताया कि करीब एक साल पहले डॉ. मुजम्मिल ने बाशिद को अस्पताल में मेडिसिन डिपार्टमेंट की HOD डॉ. शाहीन सईद से मिलवाया। डॉ. शाहीन सईद ने दिल्ली ब्लास्ट में मारे गए आतंकी डॉ. उमर नबी से पहचान कराई। डॉ. उमर नबी के कहने पर डॉ. शाहीन ने उसे मेडिसन डिपार्टमेंट में ही क्लर्क की पोस्ट पर लगवा दिया। इसके बाद तीनों बाशिद से अपना काम निकलवाने लगे। अस्पताल में नौकरी लगने से पहले बाशिद एक निजी कंपनी में काम करता था। पिता के बीमार होने के कारण उसे नौकरी छोड़नी पड़ी थी। जिसका फायदा उठाकर डॉ. मुजम्मिल ने बाशिद को नौकरी दिलवाकर अपने नेटवर्क में शामिल कर लिया। रेड ईको स्पोर्ट्स कार यूज करने के लिए दी
इस दौरान तीनों अपने निजी काम करवाने के लिए बाशिद को अपनी गाड़ी देकर भेजते रहते थे। दिल्ली ब्लास्ट से करीब पांच महीने पहले से बाशिद से नूंह से सामान मंगवाने का सिलसिला शुरू किया गया। जिसमें कई बार डॉ. उमर भी उसके साथ नूंह तक सामान लेने गया। परिवार ने बताया कि कई बार उसे अकेले ही सामान लेने के लिए भेज दिया जाता था। अक्सर उमर की कार बाशिद के पास रहती थी। उमर ने यूनिवर्सिटी आना छोड़ा तो कार बाशिद के पास रही
इसी बीच जम्मू-कश्मीर में डॉक्टर-मौलवी मॉड्यूल पकड़ में आया। जिसके तार फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ रहे थे। 30 अक्टूबर के बाद डॉ. उमर ने यूनिवर्सिटी आना छोड़ दिया। तब से रेड ईको कार बाशिद के पास ही रही। जब डॉ. मुजम्मिल को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के चलते अल-फलाह यूनिवर्सिटी के अस्पताल से गिरफ्तार किया तब इको स्पोर्टस कार यूनिवर्सिटी में ही थी। दिल्ली में ब्लास्ट होने के बाद लाल रंग की ईको स्पोर्ट्स कार की तलाश शुरू हुई तो 10 नवंबर को बाशिद यह कार गांव खंदावली में अपनी बहन के घर छोड़ा आया। साथ ही लैपटॉप व दूसरा सामान घर पर रखकर फरार हो गया। बाद में बाशिद ने फोन कर अपने परिवार के लोगों को सारी जानकारी दी। परिवार को बताया-डॉक्टरों ने इस्तेमाल किया
परिवार के अनुसार बाशिद ने उन्हें बताया कि उसे फंसाने के लिए डॉ. मुजम्मिल और डॉ. नबी ने उसका इस्तेमाल किया है। वे उससे उनकी गाड़ी में कुछ गलत सामान मंगवाते हैं। बाशिद ने परिवार को बताया कि डॉ. मुजम्मिल को पुलिस ने पकड़ लिया है। डॉ. उमर की कार उसके पास है और उसे अब डर लग रहा है। वहीं परिवार के लोगों के अनुसार पुलिस को उन्होंने ही लाल कार के बारे में सूचना दी थी। 24 घंटे से ज्यादा चली कार की जांच
12 नवंबर की शाम को गांव खंदावली में एनएसजी कमांडो, एनएसजी बॉम्ब स्क्वॉड टीम, एनआईए, सीएफएसएल और हरियाणा पुलिस की टीमों ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की। 24 घंटे की लगातार जांच के बाद कार को फरीदाबाद पुलिस के हवाले किया। अब कार को फरीदाबाद के सेक्टर 58 के थाने में रखा गया है। एफएसएल जांच में इस कार में विस्फोटक ढोए जाने के कुछ प्रमाण मिले हैं। अब जानिए…कैसे मदद के बहाने इमाम को मॉड्यूल में शामिल किया डॉ. मुज्जिमल ने यूनिवर्सिटी की मस्जिद के इमाम मोहम्मद इश्तियाक और नूंह के इमाम इमामुद्दीन को भी मदद के बहाने की फंसाया। इश्तियाक का तो आतंक की नर्सरी तैयार करने के मकसद से भी इस्तेमाल किया। साथ ही उसका घर किराये पर लेकर विस्फोटक रखा। मस्जिद में नमाज के वक्त इश्तियाक से संपर्क बढ़ाया
डॉ. मुजम्मिल व डॉ. उमर अल फलाह यूनिवर्सिटी में बनी मस्जिद में पांचों वक्त नमाज अदा करने आते थे। इसी दौरान मस्जिद के इमाम मोहम्मद इश्तियाक से संपर्क बढ़ाया और उसका भरोसा जीता। डॉक्टर उसके घर दावत पर भी आने लगे थे। इश्तियाक की बीवी हसीना ने दैनिक भास्कर एप से बातचीत में बताया कि डॉ. मुजम्मिल कई बार उनके घर आता था। अक्सर मदद भी करता था। कई डॉक्टरों को दूध भी इमाम के घर से ही जाता था। दोस्त का सामान रखने के बहाने घर किराये पर लिया
हसीना के मुताबिक, डॉ. मुजम्मिल ने यह कहकर उनका फतेहपुरा तगा वाला घर किराये पर लिया था कि दोस्त का सामान रखना है। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक इश्तियाक खुद भी सामान रखवाने डॉ. मुजम्मिल के साथ गया था। तब पड़ोसियों को यही बताया था कि ये खाद के थैले हैं। जो बाद में विस्फोटक सामग्री निकली। ऐसे ही धौज में भी एक कमरा किराये पर लिया था। वहां भी यही कहा था कि बस सामान ही रखना है। अंडरग्राउंड मदरसा बनाने में फंडिंग की
यूनिवर्सिटी से करीब 700 मीटर दूरी पर 4-5 महीने से एक इमारत बनाई जा रही थी। कुछ दूरी पर मदरसे का बोर्ड लगाया गया था। इस मदरसे में इमाम इश्तियाक को चेहरा बनाया गया जबकि फंडिंग डॉ. मुजम्मिल कर रहा था। बोरवेल लगाने के लिए 35 हजार रुपए की ट्रांजेक्शन भी सामने आई है। इमाम यहां रोजाना 2 घंटे आकर 15-20 बच्चों को दीनी तालीम दे रहा था। अंदेशा है कि बच्चों का ब्रेन वॉश कर स्लीपर सेल बनाया जा रहा था। पत्नी के इलाज को लेकर संपर्क में आया इमाम
डॉ मुजम्मिल के संपर्क को लेकर सिरोही गांव की मस्जिद के इमाम इमामुद्दीन को भी NIA ने हिरासत में लिया है। गांव खोइरी निवासी इमामुद्दीन करीब दो साल पहले डॉ मुजम्मिल के संपर्क में आया था। वह अपनी पत्नी का इलाज कराने अल फलाह यूनिवर्सिटी में गया था। जहां पर इमाम डॉ मुजम्मिल के संपर्क में आया। इमामुद्दीन के बेटे मुहम्मद जुनैद ने बताया कि उसके पैर का ऑपरेशन भी उसने अल फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल से ही कराया था। उसके बाद से ही उसके पिता डॉ. मुजम्मिल से दवाओं के लिए बात करते थे। उसने यह भी बताया था कि उनके पास कुछ पैसे की ट्रांजेक्शन दवाओं को लेकर की गई थी। उसने बताया कि उनके घर पर कई बार डॉ मुजम्मिल इलाज करने के लिए आया था। ॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… अल-फलाह यूनिवर्सिटी को आतंकियों ने अड्डा बनाया:छिपने-योजना बनाने के लिए इस्तेमाल की; मुजम्मिल-शाहीन को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ होगी दिल्ली ब्लास्ट केस में जांच एजेंसियों का केंद्र फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी बन गई है। यूनिवर्सिटी के डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन सईद ने पूछताछ में बताया कि आतंकी मॉड्यूल ने यूनिवर्सिटी को रेडिकलाइजेशन और लॉजिस्टिक कवर के तौर पर इस्तेमाल किया, यानी यूनिवर्सिटी आतंकियों के छिपने और योजना बनाने में इस्तेमाल हो रही थी। पूरी खबर पढ़ें…