दुलारचंद यादव के शरीर पर 3 जगह गाड़ी चढ़ाई गई। पसलियों की हड्डियां इतनी जगह टूटी कि डॉक्टर भी फ्रैक्चर नहीं गिन पाए। हड्डियां टूटकर फेफड़े के दोनों साइड आर-पार हो गईं। फेफड़ा दोनों साइड से पंचर हो गया था। गाड़ी का वजन इतना ज्यादा था कि, हार्ट पूरी तरह से चपटा हो गया था। हार्ट के वाल्ब बाहर निकल गए थे, जिससे उसमें जरा सा भी ब्लड नहीं था। बाएं शोल्डर की हड्डी उखड़ गई थी, उनका हाथ चारों तरफ घूम जा रहा था। दोनों जांघ और एक तरफ का कूल्हा टूटा था, कमर से नीचे का हिस्सा पूरी तरह से फ्री हो गया था। बाएं पैर की एड़ी में गोली मारी गई थी, जो सीधे आर-पार हो गई थी। रिपोर्ट के अनुसार मौत के बाद करीब से ये गोली मारी गई है। यह खुलासा दुलारचंद यादव की डेड बॉडी की चीरफाड़ करने वाले पोस्टमॉर्टम कर्मचारी महिपाल ने किया है। महिपाल ने ही दुलारचंद का ब्रेन से लेकर पेट तक खोला और मेजरमेंट कर डॉक्टर को एक-एक पॉइंट बताया। महिपाल ने जो खुलासा किया है, वह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी नहीं है। 30 अक्टूबर को मोकामा में RJD नेता दुलारचंद की हत्या हुई थी। वे जनसुराज के कैंडिडेट के साथ प्रचार कर रहे थे। देखिए और पढ़िए दुलारचंद यादव मर्डर मिस्ट्री पर अब तक की सबसे बड़ी इन्वेस्टिगेशन… डेड बॉडी की चीरफाड़ करने वाले का खुलासा दैनिक भास्कर की टीम पटना से 100 किलोमीटर दूर मोकामा पहुंची। मर्डर मिस्ट्री दो बाहुबलियों के बीच उलझी हुई है, इसलिए ऑन कैमरा कोई भी मुंह खोलने को तैयार नहीं था। पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर भी खुलकर कुछ नहीं बोले। अब हमारे लिए सबसे बड़ा चैलेंज दुलारचंद यादव की डेडबॉडी की एक्सटर्नल और इंटरनल एग्जामिनेशन के चश्मदीद को ढूंढना था। बाढ़ अनुमंडलीय में पोस्टमॉर्टम हाउस से डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ सब गायब थे। लगभग 5 घंटे की मशक्कत के बाद हमने दुलारचंद की डेडबॉडी की चीरफाड़ करने वाले महिपाल को ढूंढ निकाला। भास्कर के खुफिया कैमरे पर महिपाल का चौंकाने वाला खुलासा देखिए… पसली की दोनों तरफ से हड्डियां टूटी हुई थीं। दोनों तरफ 12-12 हड्डियां होती हैं। दुलारचंद की दाएं साइड पसली की सभी हड्डियां कई टुकड़ों में टूट गई थीं, जबकि बाएं साइड की 8 हड्डियां टूटी थीं। दोनों तरफ की हड्डियां इतनी जगह से टूटी थी, गिनना मुश्किल था। पसली की हड्डियां जगह-जगह टूटकर अंदर की तरफ जहां-तहां शरीर में ही धंस गई थीं। पसली की हड्डियां फेफड़े के दोनों साइड आर-पार होकर पंचर कर दी थी। पेल्विस यानि कमर टूटी हुई थी। दोनों जंघा टूटा हुआ था। पसली की हड्डी टूटी तो फेफड़े को पंचर किया हार्ट चपटा हो गया था। ब्रेन में क्लॉटिंग हो गई थी, चेस्ट पर गाड़ी चढ़ने से ज्यादा नुकसान हुआ। स्पॉट डेथ थी, चेस्ट पर गाड़ी चढ़ने के कारण हुई होगी। गोली भी एड़ी में लगी थी, सीधा पार हुई थी। क्रॉस नहीं होना, यह बताता है कि गिरने के बाद सीधी मारी गई होगी या मौत के बाद गोली मारी गई। पोस्टमॉर्टम के दौरान मौजूद शव वाहन के ड्राइवर का खुलासा भास्कर की टीम ने शव वाहन के ड्राइवर को भी ढूंढ निकाला जो पोस्टमॉर्टम के दौरान अंदर ही था। प्रशासन ने सरकारी शव वाहन को लगाया था, लेकिन समर्थक दुलारचंद का शव ट्रैक्टर ट्रॉली से लेकर पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे थे। शव वाहन ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ-साथ पोस्टमॉर्टम हाउस तक पहुंचा था। अब जानिए शव वाहन के ड्राइवर शंकर ने हमें क्या बताया… पोस्टमॉर्टम के समय मैं भी अंदर ही मौजूद था। मैं पोस्टमॉर्टम करने वाले कर्मचारी महिपाल का दोस्त हूं। पोस्टमॉर्टम का काम बहुत जल्दीबाजी में किया गया। पोस्टमॉर्टम होने के बाद तेजी में रिपोर्ट बना कर पटना भेज दिया गया। इसलिए 4 से 5 डॉक्टर को लगाया गया था। पैर में गोली आरपार हो गई थी। गोली से नहीं मरे हैं, गाड़ी चढ़ने से पसलियां टूटकर धंस गई थी, कई पसलियां टूटी हैं। उसी से मौत हो गई। हार्ट चपटा होकर पूरी तरह से ब्लॉक हो गया था। दुलारचंद की हत्या के बाद से ही अस्पताल भी अलर्ट मोड पर था। हॉस्पिटल में डॉक्टरों की पूरी टीम और कर्मचारी बैठे रहे। इंतजार किया जा रहा था कि कभी भी डेडबॉडी पोस्टमॉर्टम के लिए आ सकती है। हॉस्पिटल को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। बिजली की अतिरिक्त व्यवस्था कर दी गई थी। अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की पड़ताल पोस्टमॉर्टम के लिए गठित मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों ने 2 पेज की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाई है। एक पेज में दुलारचंद यादव की बेसिक जानकारी है, जबकि दूसरे पेज में एक्सटर्नल और इंटरनल एक्जामिन है। डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में 37 लाइन में दुलारचंद यादव की मौत की पूरी फाइंडिंग की है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने मेडिकल टर्म और कंडीशन के हिसाब से शब्दों का प्रयोग किया है, जो आम लोगों की समझ में नहीं आता। सिर से पांव तक एक्सटर्नल और इंटरनल पड़ताल मेडिकल रिपोर्ट की पड़ताल के लिए दैनिक भास्कर ने 4 एक्सपर्ट डॉक्टरों का पैनल बनाया। एक्सपर्ट से पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के हर एक बिंदु को बारीकी से समझा और जाना। कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर अभिषेक, फिजीशियन डॉक्टर राणा एसपी सिंह रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर आशीष अग्रहरि और ऑर्थो सर्जन डॉक्टर निशिकांत कुमार की पड़ताल में क्या आया अब वो जानिए। अब जानिए फाइनल काज ऑफ डेथ कार्डियो रेस्पिरी फैलियर बताया गया है। ऐसा हाइपो वोल्मिक शॉक के कारण हुआ है। ब्लड अधिक लास होने की वजह से बॉडी शॉक में चली गई। इसके बाद हार्ट और लंग्स फेल हो गए। सिर, हाथ, पैर, कमर और पैर में गोली लगने से मौत नहीं हुई है। फेफड़ा फटने और हार्ट के चिपटा होने से ही दोनों ऑर्गन फेल हो गए हैं। लंग्स में क्रश इंज्युरी मौत का एक बड़ा कारण बना है। भास्कर के मेडिकल पैनलिस्ट (भास्कर मेडिकल पैनलिस्ट ओपिनियन) 1. डॉक्टर अभिषेक, कार्डियोलॉजिस्ट मैंने पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट को काफी गहनता से देखा है। इसमें मल्टीपल इंज्युरी है। सिर के पीछे में चोट है। दाहिने हाथ में भी चोट है। सिर के पीछे अंदर गहरा घाव है। हाथों में फ्रैक्चर है। बाकी बॉडी के मल्टीपल पार्ट में चोट आई है। दोनों चेस्ट की रिब का मल्टीपल लेबल पर फ्रैक्चर है। इस कारण से पूरा चेस्ट धंसा हुआ है। चेस्ट की हड्डी टूटकर धंसने के कारण अंदर लंग्स नुकीली हड्डियों से पंचर हो गया है। हार्ट के चैंबर को भी हड्डियों ने डैमेज कर दिया है। रिपोर्ट में लिखा गया है कि जब चेस्ट को देखा गया तो हड्डियां ज्यादातर टूटकर अंदर की तरफ धंसी हुई थी। लंग्स के चारों तरफ से सिक्योरिटी होती है, वह हिस्सा क्लॉट से भरा हुआ था। जो कॉज ऑफ डेथ लिखा हुआ है, उसमें कार्डियो रेस्पिरेटरी फेल्योर है। उसका कारण हाईपो वोलोमिक्स शॉक हुआ है। हाईपो वोलिमिक्स शॉक तब होता है, जब चोट के बाद अचानक से बहुत ब्लीडिंग होने लगती है। लंग्स और हार्ट बहुत डैमेज हुआ है, जिससे ब्लीडिंग बहुत हुई है। इसमें खून के अधिक बहने से बीपी तेजी से डाउन हुई है, जिससे मौत हो गई। रिपोर्ट में क्रश इंज्युरी का जिक्र है, यह तब होता है जब भारी सामान ऊपर गिर गाए। गाड़ी से कोई दब जाए। इस कारण से हार्ट और लंग्स का कंप्रेशन हो जाता है। 2. डॉक्टर राणा एसपी सिंह, फिजिशियन 78 साल के दुलारचंद की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को काफी गहनता से छानबीन किया है। इसमें एक्सटर्नल एक्जामिन में लिखा गया है कि सिर के पिछले भाग में 3X1 इंच का गहरा घाव है। दाएं कंधे पर भी घाव है। कंधे में फ्रैक्चर है। दाएं हाथ की कोहनी में भी चोट के निशान हैं। घुटने पर 2X1 इंच का घाव है। चेस्ट के ऊपरी हिस्से पर घाव हैं। दाएं टखने के नीचे 2 इंच गोलाकार व्यास में घाव है। वहीं इंटरनल एक्जामिन में आंतरिक झिल्ली सुरक्षित है। फेफड़े दोनों साइड से अनेक जगह चोट से पूरी तरह से डैमेज हो गए हैं। फेफड़े के दोनों साइड में क्लॉटिंग काफी अधिक है। हार्ट चिपटा है, यह पूरी तरह से खाली है। अमूमन ऐसा नहीं होता है। वॉल्ब निकल जाने से यह खून से खाली हो गया है। पेट पूरी तरह से खाली था, आंतें भी सामान्य दिखी। यूरिन ब्लेडर भी पूरी तरह से खाली था। मृत्यु का कारण जो बताया गया है, वह ब्लीडिंग अधिक होने के कारण कार्डियक रेस्पिरेटरी सिस्टम के फेल होने से बताया गया है। ब्लीडिंग अधिक होने से कार्डियक रेस्पिरेटरी फेल्योर की स्थिति बनती है। हृदय और फेफड़ा पूरी तरह से डैमेज होने और गोली लगने के कारण अधिक रक्तस्राव हुआ है। 3. डॉक्टर आशीष अग्रहरि, रेडियोलॉजिस्ट मैने पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों की रिपोर्ट को बारीकी से देखा है। इसमें सिर में पीछे की तरफ चोट लगने से ब्रेन में क्लॉटिंग है। लेफ्ट शोल्डर डिस लोकेट होने से हाथ पूरी तरह फ्री हो गया है। लेफ्ट आर्म में भी कई जगह फ्रैक्चर है। चेस्ट पर टायर एब्रेशन यानी गाड़ी के पहिए के निशान हैं। चेस्ट के राइट साइड में 6X5 इंच और लेफ्ट साइड में 6.5X5.5 इंच के टायर के निशान हैं। चेस्ट वॉल पूरी तरह से डैमेज है। चेस्ट का पूरा चैंबर टूटकर अंदर की तरफ धंसा है। इंटीरियर चेस्ट वाल पूरी तरह से डैमेज है। हड्डियां टूटकर कई हिस्सों हो गई और अंदर की ओर धंसकर बॉडी के कई ऑर्गन को नुकसान पहुंचाया है। दाएं हाथ पर धारदार चीज से चोट के निशान हैं, जिससे घाव हुआ है। दाहिने हाथ की कोहनी में भी घाव है। दाएं हाथ में एल्बो और फोर आर्म पर आगे के हिस्से में 7.5X2.5 इंच का घाव है। दाहिने पैर के घुटने में भी 7X7 इंच के घाव हैं। बाएं पैर की एड़ी में गोली के निशान है, जो आरपार हो गई है। एंकल जॉइंट के ऊपर गोली का एंट्री पॉइंट का साइज 2 इंच है। सीने की हड्डियां टूटने से फेफड़ा और हार्ट पूरी तरह से डैमेज हुए हैं। हार्ट चिपककर पूरी तरह से ड्राई हो गए हैं। कार्डियो रेस्पिरेटरी फैलियर के कारण मौत हुई है। 4. डॉक्टर निशिकांत कुमार, ऑर्थो सर्जन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में फ्रैक्चर और घाव तो कई जगह हैं, लेकिन सबसे घातक उनकी चेस्ट की रिब टूटना है। उनकी रिब डिप्रेश हैं यानी रिब की हड्डियां टूटकर अंदर की तरफ धंस गई हैं। अमूमन एक्सीडेंट में ऐसा नहीं होता है। बहुत ही कोई भीषण हादसा हो तभी ये स्थिति देखने को मिलती है। चेस्ट की हड्डियों का टूटकर लंग्स में घुसना काफी घातक हो गया। इस कारण से लंग्स का दोनों साइड फटा है। चोट इस कदर लगी है कि हार्ट के चैंबर का पूरा हिस्सा डैमेज हो गया है। यहां भी काफी क्लॉटिंग देखने को मिली है। ऐसी कंडीशन में मरीज का सरवाई करना मुमकिन ही नहीं हो पाता है। लंग्स का फटना और वहां क्लॉटिंग होना, हार्ट का चैंबर क्षतिग्रस्त होना बहुत ही गंभीर स्थिति में पहुंचा देता है। इसी कारण दुलारचंद की मौत भी स्पॉट पर हो गई, उन्हें इलाज का भी मौका नहीं मिला।
दुलारचंद यादव के शरीर पर 3 जगह गाड़ी चढ़ाई गई। पसलियों की हड्डियां इतनी जगह टूटी कि डॉक्टर भी फ्रैक्चर नहीं गिन पाए। हड्डियां टूटकर फेफड़े के दोनों साइड आर-पार हो गईं। फेफड़ा दोनों साइड से पंचर हो गया था। गाड़ी का वजन इतना ज्यादा था कि, हार्ट पूरी तरह से चपटा हो गया था। हार्ट के वाल्ब बाहर निकल गए थे, जिससे उसमें जरा सा भी ब्लड नहीं था। बाएं शोल्डर की हड्डी उखड़ गई थी, उनका हाथ चारों तरफ घूम जा रहा था। दोनों जांघ और एक तरफ का कूल्हा टूटा था, कमर से नीचे का हिस्सा पूरी तरह से फ्री हो गया था। बाएं पैर की एड़ी में गोली मारी गई थी, जो सीधे आर-पार हो गई थी। रिपोर्ट के अनुसार मौत के बाद करीब से ये गोली मारी गई है। यह खुलासा दुलारचंद यादव की डेड बॉडी की चीरफाड़ करने वाले पोस्टमॉर्टम कर्मचारी महिपाल ने किया है। महिपाल ने ही दुलारचंद का ब्रेन से लेकर पेट तक खोला और मेजरमेंट कर डॉक्टर को एक-एक पॉइंट बताया। महिपाल ने जो खुलासा किया है, वह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी नहीं है। 30 अक्टूबर को मोकामा में RJD नेता दुलारचंद की हत्या हुई थी। वे जनसुराज के कैंडिडेट के साथ प्रचार कर रहे थे। देखिए और पढ़िए दुलारचंद यादव मर्डर मिस्ट्री पर अब तक की सबसे बड़ी इन्वेस्टिगेशन… डेड बॉडी की चीरफाड़ करने वाले का खुलासा दैनिक भास्कर की टीम पटना से 100 किलोमीटर दूर मोकामा पहुंची। मर्डर मिस्ट्री दो बाहुबलियों के बीच उलझी हुई है, इसलिए ऑन कैमरा कोई भी मुंह खोलने को तैयार नहीं था। पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर भी खुलकर कुछ नहीं बोले। अब हमारे लिए सबसे बड़ा चैलेंज दुलारचंद यादव की डेडबॉडी की एक्सटर्नल और इंटरनल एग्जामिनेशन के चश्मदीद को ढूंढना था। बाढ़ अनुमंडलीय में पोस्टमॉर्टम हाउस से डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ सब गायब थे। लगभग 5 घंटे की मशक्कत के बाद हमने दुलारचंद की डेडबॉडी की चीरफाड़ करने वाले महिपाल को ढूंढ निकाला। भास्कर के खुफिया कैमरे पर महिपाल का चौंकाने वाला खुलासा देखिए… पसली की दोनों तरफ से हड्डियां टूटी हुई थीं। दोनों तरफ 12-12 हड्डियां होती हैं। दुलारचंद की दाएं साइड पसली की सभी हड्डियां कई टुकड़ों में टूट गई थीं, जबकि बाएं साइड की 8 हड्डियां टूटी थीं। दोनों तरफ की हड्डियां इतनी जगह से टूटी थी, गिनना मुश्किल था। पसली की हड्डियां जगह-जगह टूटकर अंदर की तरफ जहां-तहां शरीर में ही धंस गई थीं। पसली की हड्डियां फेफड़े के दोनों साइड आर-पार होकर पंचर कर दी थी। पेल्विस यानि कमर टूटी हुई थी। दोनों जंघा टूटा हुआ था। पसली की हड्डी टूटी तो फेफड़े को पंचर किया हार्ट चपटा हो गया था। ब्रेन में क्लॉटिंग हो गई थी, चेस्ट पर गाड़ी चढ़ने से ज्यादा नुकसान हुआ। स्पॉट डेथ थी, चेस्ट पर गाड़ी चढ़ने के कारण हुई होगी। गोली भी एड़ी में लगी थी, सीधा पार हुई थी। क्रॉस नहीं होना, यह बताता है कि गिरने के बाद सीधी मारी गई होगी या मौत के बाद गोली मारी गई। पोस्टमॉर्टम के दौरान मौजूद शव वाहन के ड्राइवर का खुलासा भास्कर की टीम ने शव वाहन के ड्राइवर को भी ढूंढ निकाला जो पोस्टमॉर्टम के दौरान अंदर ही था। प्रशासन ने सरकारी शव वाहन को लगाया था, लेकिन समर्थक दुलारचंद का शव ट्रैक्टर ट्रॉली से लेकर पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे थे। शव वाहन ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ-साथ पोस्टमॉर्टम हाउस तक पहुंचा था। अब जानिए शव वाहन के ड्राइवर शंकर ने हमें क्या बताया… पोस्टमॉर्टम के समय मैं भी अंदर ही मौजूद था। मैं पोस्टमॉर्टम करने वाले कर्मचारी महिपाल का दोस्त हूं। पोस्टमॉर्टम का काम बहुत जल्दीबाजी में किया गया। पोस्टमॉर्टम होने के बाद तेजी में रिपोर्ट बना कर पटना भेज दिया गया। इसलिए 4 से 5 डॉक्टर को लगाया गया था। पैर में गोली आरपार हो गई थी। गोली से नहीं मरे हैं, गाड़ी चढ़ने से पसलियां टूटकर धंस गई थी, कई पसलियां टूटी हैं। उसी से मौत हो गई। हार्ट चपटा होकर पूरी तरह से ब्लॉक हो गया था। दुलारचंद की हत्या के बाद से ही अस्पताल भी अलर्ट मोड पर था। हॉस्पिटल में डॉक्टरों की पूरी टीम और कर्मचारी बैठे रहे। इंतजार किया जा रहा था कि कभी भी डेडबॉडी पोस्टमॉर्टम के लिए आ सकती है। हॉस्पिटल को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। बिजली की अतिरिक्त व्यवस्था कर दी गई थी। अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की पड़ताल पोस्टमॉर्टम के लिए गठित मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों ने 2 पेज की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाई है। एक पेज में दुलारचंद यादव की बेसिक जानकारी है, जबकि दूसरे पेज में एक्सटर्नल और इंटरनल एक्जामिन है। डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में 37 लाइन में दुलारचंद यादव की मौत की पूरी फाइंडिंग की है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने मेडिकल टर्म और कंडीशन के हिसाब से शब्दों का प्रयोग किया है, जो आम लोगों की समझ में नहीं आता। सिर से पांव तक एक्सटर्नल और इंटरनल पड़ताल मेडिकल रिपोर्ट की पड़ताल के लिए दैनिक भास्कर ने 4 एक्सपर्ट डॉक्टरों का पैनल बनाया। एक्सपर्ट से पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के हर एक बिंदु को बारीकी से समझा और जाना। कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर अभिषेक, फिजीशियन डॉक्टर राणा एसपी सिंह रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर आशीष अग्रहरि और ऑर्थो सर्जन डॉक्टर निशिकांत कुमार की पड़ताल में क्या आया अब वो जानिए। अब जानिए फाइनल काज ऑफ डेथ कार्डियो रेस्पिरी फैलियर बताया गया है। ऐसा हाइपो वोल्मिक शॉक के कारण हुआ है। ब्लड अधिक लास होने की वजह से बॉडी शॉक में चली गई। इसके बाद हार्ट और लंग्स फेल हो गए। सिर, हाथ, पैर, कमर और पैर में गोली लगने से मौत नहीं हुई है। फेफड़ा फटने और हार्ट के चिपटा होने से ही दोनों ऑर्गन फेल हो गए हैं। लंग्स में क्रश इंज्युरी मौत का एक बड़ा कारण बना है। भास्कर के मेडिकल पैनलिस्ट (भास्कर मेडिकल पैनलिस्ट ओपिनियन) 1. डॉक्टर अभिषेक, कार्डियोलॉजिस्ट मैंने पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट को काफी गहनता से देखा है। इसमें मल्टीपल इंज्युरी है। सिर के पीछे में चोट है। दाहिने हाथ में भी चोट है। सिर के पीछे अंदर गहरा घाव है। हाथों में फ्रैक्चर है। बाकी बॉडी के मल्टीपल पार्ट में चोट आई है। दोनों चेस्ट की रिब का मल्टीपल लेबल पर फ्रैक्चर है। इस कारण से पूरा चेस्ट धंसा हुआ है। चेस्ट की हड्डी टूटकर धंसने के कारण अंदर लंग्स नुकीली हड्डियों से पंचर हो गया है। हार्ट के चैंबर को भी हड्डियों ने डैमेज कर दिया है। रिपोर्ट में लिखा गया है कि जब चेस्ट को देखा गया तो हड्डियां ज्यादातर टूटकर अंदर की तरफ धंसी हुई थी। लंग्स के चारों तरफ से सिक्योरिटी होती है, वह हिस्सा क्लॉट से भरा हुआ था। जो कॉज ऑफ डेथ लिखा हुआ है, उसमें कार्डियो रेस्पिरेटरी फेल्योर है। उसका कारण हाईपो वोलोमिक्स शॉक हुआ है। हाईपो वोलिमिक्स शॉक तब होता है, जब चोट के बाद अचानक से बहुत ब्लीडिंग होने लगती है। लंग्स और हार्ट बहुत डैमेज हुआ है, जिससे ब्लीडिंग बहुत हुई है। इसमें खून के अधिक बहने से बीपी तेजी से डाउन हुई है, जिससे मौत हो गई। रिपोर्ट में क्रश इंज्युरी का जिक्र है, यह तब होता है जब भारी सामान ऊपर गिर गाए। गाड़ी से कोई दब जाए। इस कारण से हार्ट और लंग्स का कंप्रेशन हो जाता है। 2. डॉक्टर राणा एसपी सिंह, फिजिशियन 78 साल के दुलारचंद की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को काफी गहनता से छानबीन किया है। इसमें एक्सटर्नल एक्जामिन में लिखा गया है कि सिर के पिछले भाग में 3X1 इंच का गहरा घाव है। दाएं कंधे पर भी घाव है। कंधे में फ्रैक्चर है। दाएं हाथ की कोहनी में भी चोट के निशान हैं। घुटने पर 2X1 इंच का घाव है। चेस्ट के ऊपरी हिस्से पर घाव हैं। दाएं टखने के नीचे 2 इंच गोलाकार व्यास में घाव है। वहीं इंटरनल एक्जामिन में आंतरिक झिल्ली सुरक्षित है। फेफड़े दोनों साइड से अनेक जगह चोट से पूरी तरह से डैमेज हो गए हैं। फेफड़े के दोनों साइड में क्लॉटिंग काफी अधिक है। हार्ट चिपटा है, यह पूरी तरह से खाली है। अमूमन ऐसा नहीं होता है। वॉल्ब निकल जाने से यह खून से खाली हो गया है। पेट पूरी तरह से खाली था, आंतें भी सामान्य दिखी। यूरिन ब्लेडर भी पूरी तरह से खाली था। मृत्यु का कारण जो बताया गया है, वह ब्लीडिंग अधिक होने के कारण कार्डियक रेस्पिरेटरी सिस्टम के फेल होने से बताया गया है। ब्लीडिंग अधिक होने से कार्डियक रेस्पिरेटरी फेल्योर की स्थिति बनती है। हृदय और फेफड़ा पूरी तरह से डैमेज होने और गोली लगने के कारण अधिक रक्तस्राव हुआ है। 3. डॉक्टर आशीष अग्रहरि, रेडियोलॉजिस्ट मैने पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों की रिपोर्ट को बारीकी से देखा है। इसमें सिर में पीछे की तरफ चोट लगने से ब्रेन में क्लॉटिंग है। लेफ्ट शोल्डर डिस लोकेट होने से हाथ पूरी तरह फ्री हो गया है। लेफ्ट आर्म में भी कई जगह फ्रैक्चर है। चेस्ट पर टायर एब्रेशन यानी गाड़ी के पहिए के निशान हैं। चेस्ट के राइट साइड में 6X5 इंच और लेफ्ट साइड में 6.5X5.5 इंच के टायर के निशान हैं। चेस्ट वॉल पूरी तरह से डैमेज है। चेस्ट का पूरा चैंबर टूटकर अंदर की तरफ धंसा है। इंटीरियर चेस्ट वाल पूरी तरह से डैमेज है। हड्डियां टूटकर कई हिस्सों हो गई और अंदर की ओर धंसकर बॉडी के कई ऑर्गन को नुकसान पहुंचाया है। दाएं हाथ पर धारदार चीज से चोट के निशान हैं, जिससे घाव हुआ है। दाहिने हाथ की कोहनी में भी घाव है। दाएं हाथ में एल्बो और फोर आर्म पर आगे के हिस्से में 7.5X2.5 इंच का घाव है। दाहिने पैर के घुटने में भी 7X7 इंच के घाव हैं। बाएं पैर की एड़ी में गोली के निशान है, जो आरपार हो गई है। एंकल जॉइंट के ऊपर गोली का एंट्री पॉइंट का साइज 2 इंच है। सीने की हड्डियां टूटने से फेफड़ा और हार्ट पूरी तरह से डैमेज हुए हैं। हार्ट चिपककर पूरी तरह से ड्राई हो गए हैं। कार्डियो रेस्पिरेटरी फैलियर के कारण मौत हुई है। 4. डॉक्टर निशिकांत कुमार, ऑर्थो सर्जन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में फ्रैक्चर और घाव तो कई जगह हैं, लेकिन सबसे घातक उनकी चेस्ट की रिब टूटना है। उनकी रिब डिप्रेश हैं यानी रिब की हड्डियां टूटकर अंदर की तरफ धंस गई हैं। अमूमन एक्सीडेंट में ऐसा नहीं होता है। बहुत ही कोई भीषण हादसा हो तभी ये स्थिति देखने को मिलती है। चेस्ट की हड्डियों का टूटकर लंग्स में घुसना काफी घातक हो गया। इस कारण से लंग्स का दोनों साइड फटा है। चोट इस कदर लगी है कि हार्ट के चैंबर का पूरा हिस्सा डैमेज हो गया है। यहां भी काफी क्लॉटिंग देखने को मिली है। ऐसी कंडीशन में मरीज का सरवाई करना मुमकिन ही नहीं हो पाता है। लंग्स का फटना और वहां क्लॉटिंग होना, हार्ट का चैंबर क्षतिग्रस्त होना बहुत ही गंभीर स्थिति में पहुंचा देता है। इसी कारण दुलारचंद की मौत भी स्पॉट पर हो गई, उन्हें इलाज का भी मौका नहीं मिला।