हरियाणा में सिरसा के नाथूसरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला गांव नहराणा। यहां चिट्टे के नशे से 24 साल के प्रदीप की मौत हो गई। मरने से पहले उसने मां को फोन पर कहा- “मम्मी, मनै छोड़ कोणी रहे, चाबी कोनी देवै। मैं आऊं कुकर?… मनै बचा लो।” मां सुमेश लता बागड़ी बोली में कहती हैं- “फोन सुण मैं घणी भाजी, वो पाया कोनी। मैं जद गई, आगे वो पूरा हो रहा था।” (फोन सुनकर मैं खूब भागी, वह मिला नहीं। जब मैं गई, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।) सुमेश आगे कहती हैं- “वो टीका (नशे का इंजेक्शन) लगा लेता था, पर जल्दी घर आ जाता था। उस दिन उसका फोन आया कि ये छोड़ नहीं रहे।” जब मौके पर पहुंची तो वहां ठंडे (कोल्ड ड्रिंक) की 2 बोतल व 3 ग्लास थे। उसके ऐसा सुआ (सिरिंज) लगा रखा था, जिससे वह बहुत तड़पा। सुमेश ने बताया- “उस दिन उसके साथ कौन थे, जो नशा देते हैं, उनके नाम-गांव पुलिस को पता हैं। हमने भी पुलिस को नाम बताए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। हमारे बेटे का मोबाइल भी नहीं मिला। हमारा बेटा तो चला गया, बाकियों की जिंदगी सुधरनी चाहिए। छोटे-छोटे बच्चे भी नशा करना सीख रहे हैं। पुलिस कुछ नहीं कर रही। 6 बार पुलिस के पास गए। पुलिस उसका फोन भी नहीं दे रही।” सिरसा में चिट्टे से हुई मौतों के बाद SHO से लेकर SP तक बदले जा चुके हैं, लेकिन लोगों का कहना है कि हालात अभी भी वही बने हुए हैं। 24 घंटे में 2 मौत के बाद सरकार एक्शन में आई
सिरसा में रानियां थाने के ओटू गांव में 24 घंटे के भीतर ही 2 मौतें हुईं। 25 अक्टूबर को सुखचैन ने दम तोड़ा। अगले दिन यानी 26 अक्टूबर को विक्रम की मौत हो गई। उसके बाद सरकार एक्शन में आई। 26 अक्टूबर देर रात सिरसा के एसपी IPS डॉ. मयंक गुप्ता को हटाकर उनकी जगह दीपक सहारण को लगाया। मयंक गुप्ता को अगली पोस्टिंग नहीं मिली। 27 अक्टूबर की सुबह रानियां थाने के SHO इंस्पेक्टर दिनेश कुमार को लाइन हाजिर किया, फिर सस्पेंड कर दिया। इससे पहले 28 अगस्त को नाथूसरी थाने के SHO इंस्पेक्टर राजकुमार को भी लाइन हाजिर कर सस्पेंड किया गया था। दैनिक भास्कर एप की टीम नहराणा व ओटू गांवों में इन परिवारों के पास पहुंची, जिन्होंने अपने बेटे गंवाए हैं। नहराणा में कुछ ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस कुछ नहीं कर रही, इसलिए गांव वाले खुद चौकसी बरत रहे हैं। नशा रोकने को एक कमेटी भी बनाई है, जो बाहर से गांव में नशा बेचने आने वालों को चेक करती है। एक वीडियो भी वायरल हुई है, जिसमें नशा बेचने आए युवक से माफी मंगवाई जा रही है। गांव के शौचालयों या खंडहर जगह पर जाकर इंजेक्शन लगाते हैं, ताकि किसी को पता न चले। नहराणा और ओटू में लोग पुलिस को कोस रहे… प्रदीप की मां सुमेश बोलीं- पुलिस मिली, उनको सब पता है
प्रदीप के घर पहुंचे तो मां सुमेश लता बेटे को याद कर रोने लगीं। उन्होंने बताया- घटना वाले दिन 7 अगस्त को मेरी प्रदीप से फोन पर बात हुई थी। वह कह रहा था कि मां मुझे बचा लो, ये बाइक की चाबी नहीं दे रहे, आऊं कैसे। आज के बाद कुछ नहीं करूंगा। मैं पड़ोसी युवक को लेकर बाइक पर उसे ढूंढने निकली। आधे घंटे बाद वह नहर की पटरी पर मृत मिला। उस दिन वह अकेला नहीं था। सुमेश ने बताया- पटरी पर कोल्ड ड्रिंक व तीन गिलास पड़े थे। मेरे पति बलबीर सिंह भोले हैं, वह रोते रहते हैं। हमने प्रदीप का फोन पुलिस से मांगा, पर वह भी नहीं दे रही। हमने नशा सप्लाई करने वालों के 5 नाम भी नाथूसरी पुलिस काे बताए, पर कुछ नहीं हुआ। उसके साथ के और लड़के भी नशा सीख रहे हैं, उनकी जिंदगी भी खराब हो रही है। दो भाइयों में छोटा था प्रदीप, ITI करते समय संगत में आया
मां सुमेश बताती हैं- हमारे दो बेटों में प्रदीप छोटा था। 12वीं की पढ़ाई के बाद खेती-बाड़ी करना शुरू की। फिर चौपटा ITI में दाखिला ले लिया। इसी दौरान नशे की लत लगी। ITI के बाद राजस्थान की सोलर फैक्ट्री में काम किया। शुरू में चिट्टा लेता था। बाद में नशे के टीके लगाने शुरू कर दिए। यह लास्ट स्टेज है, क्योंकि चिट्टा महंगा होने के कारण खरीदना मुश्किल हो जाता है और यह सस्ता पड़ता है। रानी देवी बोलीं- भतीजा शौचालय में मृत मिला, पास टीके-सुई मिले
नहराणा गांव में ही 27 अप्रैल को 20 साल के सुनील की मौत हो गई थी। बुआ रानी बताती हैं कि सुनील फतेहाबाद के गांव गुलरहारा का था। गांव में दोस्तों की संगत में नशा करना सीख गया। पता नहीं चिट्टा लेता था या कुछ और। बाद में पता चला कि वह गोली खाता था और टीके लगाता था। रानी ने बताया- भाई ने यह सोचकर 2-3 दिन पहले ही सुनील को मेरे पास भेजा था कि शायद यहां आकर सुधर जाएगा। उस दिन रात करीब 9 बजे तक वह घर नहीं आया। जब शौचालय में देखा तो वह मृत मिला। उसके पास नशे के टीके व सुई मिली थी। पुलिस ने पूछताछ की कि कहां से यह नशा खरीदकर लाया। इसके बाद कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। ओटू के विक्रम की शादी तय होनी थी, मां कपड़े खरीदने गई थी
गांव ओटू के 20 वर्षीय विक्रम सिंह की 26 अक्टूबर को मौत हुई। विक्रम फतेहाबाद में डीजे ऑपरेटर था और जिम करता था। माता-पिता का इकलौता बेटा था। विक्रम की दो माह पहले मंगाला की युवती से सगाई हुई थी। 26 अक्टूबर को ही मुहूर्त देख शादी की तारीख तय होनी थी। इससे पहले यह सब हो गया। पिता बलबीर सिंह बताते हैं- उस दिन शाम को 5 बजे चाय पीने के बाद विक्रम अपनी मां के साथ रानियां कपड़े खरीदने के लिए निकला। रास्ते में अभोली के पास उसकी तबीयत बिगड़ गई। पीसीआर की गाड़ी ने उसे रानियां अस्पताल में पहुंचाया। उसे दूसरे अस्पताल में लेकर गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बलबीर कहते हैं- गांव वालों से अपील है कि जिनका बच्चा ऐसा करता है तो वह ध्यान रखें। पहले भी गांव में नशे के कारण दो से तीन हादसे हो चुके हैं, पर किसी ने आवाज नहीं उठाई। अब दो मौतें हुई हैं। सुखचैन के परिजनों का दावा- हार्ट अटैक से मौत
ओटू गांव के ही 20 वर्षीय सुखचैन की 25 अक्टूबर को मौत हुई थी। परिवार ने इस मामले में कुछ बोलने से मना कर दिया। इतना ही कहा कि सुखचैन की मौत हार्ट अटैक से हुई है। नए एसपी दीपक सहारण सुखचैन के घर पहुंचे तो उनके रिलेटिव ने नशे पर अंकुश लगाने की मांग की थी, ताकि ऐसा किसी और के साथ न हो। जबकि अब परिवार बिल्कुल हटकर बयान दे रहा है। ग्रामीणों में भी यही चर्चा है कि विक्रम और सुखचैन की मौत नशे से हुई है। पुलिस को भी कोई शिकायत नहीं दी है। मामले में पुलिस ने एक-दो को पूछताछ के लिए बुलाया था, पर शिकायत न मिलने पर उनको भी छोड़ दिया। चिट्टे का रूटः सिरसा में कहां से और कैसे आता है नशा सिरसा में पंजाब के रास्ते तरनतारण और अमृतसर की ओर से ज्यादातर स्मैक व अफीम जैसा नशा आता है। इसके अलावा राजस्थान के रास्ते सूखा नशा डोडा पोस्त आता है। ऐलनाबाद में ज्यादातर सूखा नशा इस्तेमाल होता है। डबवाली और रानियां में चिट्टा और मेडिकल नशा ज्यादा है। खासकर लोग इन दिनों मेडिकल नशा का इस्तेमाल करने लगे हैं, क्योंकि यह सस्ता है और आसानी से मेडिकल पर मिल जाता है। जो ज्यादातर मौतें हुई हैं, वह ओवरडोज से हुई हैं। ऐसा करने वालों का पता भी नहीं चलता कि कब तक बचेगा। 16 नशा मुक्ति केंद्र, सिविल में रोज 170 ओपीडी
सिरसा के सिविल अस्पताल में बने नशा मुक्ति केंद्र में औसतन 150 से 170 मरीज आते हैं, जिनमें से 110 से 120 मरीजों को नशे की लत है, जो नशा छुड़वाने के लिए आते हैं। इनमें हर आयु वर्ग के महिला व पुरुष हैं। जिले में करीब 16 नशा मुक्ति केंद्र हैं, इनमें से तीन सरकारी और बाकी मान्यता प्राप्त हैं। सिविल अस्पताल में इस समय 40 से 42 मरीज ऐसे दाखिल हैं, जो नशे की लत में हैं। अब जानिए सिरसा के नए SP दीपक सहारण ने क्या कहा… सवाल: नशा ज्यादा फैल रहा है, बाहर से नशा आ रहा है। इसे रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं?
जवाब: फुल स्पीड में काम शुरू कर दिया है। पहले जो नशा करने वाले हैं, उन्हें चिह्नित कर इलाज करवाएंगे। उससे वो डिमांड कम हो जाएगी। दूसरा, जहां से नशा आ रहा है, उस पर सख्ती शुरू कर दी है। पुलिस टीम नशा तस्करों पर कार्रवाई कर रही है। हर रोज दो से तीन केस दर्ज हो रहे हैं। इसके लिए बाकी महकमों का भी सहयोग लिया जाएगा। सवाल: अब लोग मेडिकल नशा ज्यादा करने लगे हैं। इस पर क्या कर रहे?
जवाब: मेडिकल एसोसिएशन के साथ मंगलवार को एक मीटिंग की गई, जिसमें 40 से 50 मेडिकल स्टोर संचालक शामिल हुए थे। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि सभी CCTV कैमरे लगवाएं और किसी को भी बिना फ्रेश पर्ची के खुली सीरिंज न बेचें। सवाल : नशा के कारण परिजन भी हताश है, खुलकर बता नहीं रहे ?
जवाब: कुम्हारियां व बाजेकां गांव में नशा से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करवाए हैं। ओटू में भी डॉक्टरों की टीम जांच के लिए भेजी थी। अब सूचना देने वाले भी सामने आ रहे हैं। कुछ लोग एक बार नशा छोड़ देते हैं। जब संगत में बैठते हैं तो फिर शुरू कर देते हैं। लोगों में जागरूकता ला रहे हैं। कोई नशा पीड़ित है तो परिवार उसका इलाज करवाए। उदासीनता नहीं लानी है।
हरियाणा में सिरसा के नाथूसरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला गांव नहराणा। यहां चिट्टे के नशे से 24 साल के प्रदीप की मौत हो गई। मरने से पहले उसने मां को फोन पर कहा- “मम्मी, मनै छोड़ कोणी रहे, चाबी कोनी देवै। मैं आऊं कुकर?… मनै बचा लो।” मां सुमेश लता बागड़ी बोली में कहती हैं- “फोन सुण मैं घणी भाजी, वो पाया कोनी। मैं जद गई, आगे वो पूरा हो रहा था।” (फोन सुनकर मैं खूब भागी, वह मिला नहीं। जब मैं गई, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।) सुमेश आगे कहती हैं- “वो टीका (नशे का इंजेक्शन) लगा लेता था, पर जल्दी घर आ जाता था। उस दिन उसका फोन आया कि ये छोड़ नहीं रहे।” जब मौके पर पहुंची तो वहां ठंडे (कोल्ड ड्रिंक) की 2 बोतल व 3 ग्लास थे। उसके ऐसा सुआ (सिरिंज) लगा रखा था, जिससे वह बहुत तड़पा। सुमेश ने बताया- “उस दिन उसके साथ कौन थे, जो नशा देते हैं, उनके नाम-गांव पुलिस को पता हैं। हमने भी पुलिस को नाम बताए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। हमारे बेटे का मोबाइल भी नहीं मिला। हमारा बेटा तो चला गया, बाकियों की जिंदगी सुधरनी चाहिए। छोटे-छोटे बच्चे भी नशा करना सीख रहे हैं। पुलिस कुछ नहीं कर रही। 6 बार पुलिस के पास गए। पुलिस उसका फोन भी नहीं दे रही।” सिरसा में चिट्टे से हुई मौतों के बाद SHO से लेकर SP तक बदले जा चुके हैं, लेकिन लोगों का कहना है कि हालात अभी भी वही बने हुए हैं। 24 घंटे में 2 मौत के बाद सरकार एक्शन में आई
सिरसा में रानियां थाने के ओटू गांव में 24 घंटे के भीतर ही 2 मौतें हुईं। 25 अक्टूबर को सुखचैन ने दम तोड़ा। अगले दिन यानी 26 अक्टूबर को विक्रम की मौत हो गई। उसके बाद सरकार एक्शन में आई। 26 अक्टूबर देर रात सिरसा के एसपी IPS डॉ. मयंक गुप्ता को हटाकर उनकी जगह दीपक सहारण को लगाया। मयंक गुप्ता को अगली पोस्टिंग नहीं मिली। 27 अक्टूबर की सुबह रानियां थाने के SHO इंस्पेक्टर दिनेश कुमार को लाइन हाजिर किया, फिर सस्पेंड कर दिया। इससे पहले 28 अगस्त को नाथूसरी थाने के SHO इंस्पेक्टर राजकुमार को भी लाइन हाजिर कर सस्पेंड किया गया था। दैनिक भास्कर एप की टीम नहराणा व ओटू गांवों में इन परिवारों के पास पहुंची, जिन्होंने अपने बेटे गंवाए हैं। नहराणा में कुछ ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस कुछ नहीं कर रही, इसलिए गांव वाले खुद चौकसी बरत रहे हैं। नशा रोकने को एक कमेटी भी बनाई है, जो बाहर से गांव में नशा बेचने आने वालों को चेक करती है। एक वीडियो भी वायरल हुई है, जिसमें नशा बेचने आए युवक से माफी मंगवाई जा रही है। गांव के शौचालयों या खंडहर जगह पर जाकर इंजेक्शन लगाते हैं, ताकि किसी को पता न चले। नहराणा और ओटू में लोग पुलिस को कोस रहे… प्रदीप की मां सुमेश बोलीं- पुलिस मिली, उनको सब पता है
प्रदीप के घर पहुंचे तो मां सुमेश लता बेटे को याद कर रोने लगीं। उन्होंने बताया- घटना वाले दिन 7 अगस्त को मेरी प्रदीप से फोन पर बात हुई थी। वह कह रहा था कि मां मुझे बचा लो, ये बाइक की चाबी नहीं दे रहे, आऊं कैसे। आज के बाद कुछ नहीं करूंगा। मैं पड़ोसी युवक को लेकर बाइक पर उसे ढूंढने निकली। आधे घंटे बाद वह नहर की पटरी पर मृत मिला। उस दिन वह अकेला नहीं था। सुमेश ने बताया- पटरी पर कोल्ड ड्रिंक व तीन गिलास पड़े थे। मेरे पति बलबीर सिंह भोले हैं, वह रोते रहते हैं। हमने प्रदीप का फोन पुलिस से मांगा, पर वह भी नहीं दे रही। हमने नशा सप्लाई करने वालों के 5 नाम भी नाथूसरी पुलिस काे बताए, पर कुछ नहीं हुआ। उसके साथ के और लड़के भी नशा सीख रहे हैं, उनकी जिंदगी भी खराब हो रही है। दो भाइयों में छोटा था प्रदीप, ITI करते समय संगत में आया
मां सुमेश बताती हैं- हमारे दो बेटों में प्रदीप छोटा था। 12वीं की पढ़ाई के बाद खेती-बाड़ी करना शुरू की। फिर चौपटा ITI में दाखिला ले लिया। इसी दौरान नशे की लत लगी। ITI के बाद राजस्थान की सोलर फैक्ट्री में काम किया। शुरू में चिट्टा लेता था। बाद में नशे के टीके लगाने शुरू कर दिए। यह लास्ट स्टेज है, क्योंकि चिट्टा महंगा होने के कारण खरीदना मुश्किल हो जाता है और यह सस्ता पड़ता है। रानी देवी बोलीं- भतीजा शौचालय में मृत मिला, पास टीके-सुई मिले
नहराणा गांव में ही 27 अप्रैल को 20 साल के सुनील की मौत हो गई थी। बुआ रानी बताती हैं कि सुनील फतेहाबाद के गांव गुलरहारा का था। गांव में दोस्तों की संगत में नशा करना सीख गया। पता नहीं चिट्टा लेता था या कुछ और। बाद में पता चला कि वह गोली खाता था और टीके लगाता था। रानी ने बताया- भाई ने यह सोचकर 2-3 दिन पहले ही सुनील को मेरे पास भेजा था कि शायद यहां आकर सुधर जाएगा। उस दिन रात करीब 9 बजे तक वह घर नहीं आया। जब शौचालय में देखा तो वह मृत मिला। उसके पास नशे के टीके व सुई मिली थी। पुलिस ने पूछताछ की कि कहां से यह नशा खरीदकर लाया। इसके बाद कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। ओटू के विक्रम की शादी तय होनी थी, मां कपड़े खरीदने गई थी
गांव ओटू के 20 वर्षीय विक्रम सिंह की 26 अक्टूबर को मौत हुई। विक्रम फतेहाबाद में डीजे ऑपरेटर था और जिम करता था। माता-पिता का इकलौता बेटा था। विक्रम की दो माह पहले मंगाला की युवती से सगाई हुई थी। 26 अक्टूबर को ही मुहूर्त देख शादी की तारीख तय होनी थी। इससे पहले यह सब हो गया। पिता बलबीर सिंह बताते हैं- उस दिन शाम को 5 बजे चाय पीने के बाद विक्रम अपनी मां के साथ रानियां कपड़े खरीदने के लिए निकला। रास्ते में अभोली के पास उसकी तबीयत बिगड़ गई। पीसीआर की गाड़ी ने उसे रानियां अस्पताल में पहुंचाया। उसे दूसरे अस्पताल में लेकर गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बलबीर कहते हैं- गांव वालों से अपील है कि जिनका बच्चा ऐसा करता है तो वह ध्यान रखें। पहले भी गांव में नशे के कारण दो से तीन हादसे हो चुके हैं, पर किसी ने आवाज नहीं उठाई। अब दो मौतें हुई हैं। सुखचैन के परिजनों का दावा- हार्ट अटैक से मौत
ओटू गांव के ही 20 वर्षीय सुखचैन की 25 अक्टूबर को मौत हुई थी। परिवार ने इस मामले में कुछ बोलने से मना कर दिया। इतना ही कहा कि सुखचैन की मौत हार्ट अटैक से हुई है। नए एसपी दीपक सहारण सुखचैन के घर पहुंचे तो उनके रिलेटिव ने नशे पर अंकुश लगाने की मांग की थी, ताकि ऐसा किसी और के साथ न हो। जबकि अब परिवार बिल्कुल हटकर बयान दे रहा है। ग्रामीणों में भी यही चर्चा है कि विक्रम और सुखचैन की मौत नशे से हुई है। पुलिस को भी कोई शिकायत नहीं दी है। मामले में पुलिस ने एक-दो को पूछताछ के लिए बुलाया था, पर शिकायत न मिलने पर उनको भी छोड़ दिया। चिट्टे का रूटः सिरसा में कहां से और कैसे आता है नशा सिरसा में पंजाब के रास्ते तरनतारण और अमृतसर की ओर से ज्यादातर स्मैक व अफीम जैसा नशा आता है। इसके अलावा राजस्थान के रास्ते सूखा नशा डोडा पोस्त आता है। ऐलनाबाद में ज्यादातर सूखा नशा इस्तेमाल होता है। डबवाली और रानियां में चिट्टा और मेडिकल नशा ज्यादा है। खासकर लोग इन दिनों मेडिकल नशा का इस्तेमाल करने लगे हैं, क्योंकि यह सस्ता है और आसानी से मेडिकल पर मिल जाता है। जो ज्यादातर मौतें हुई हैं, वह ओवरडोज से हुई हैं। ऐसा करने वालों का पता भी नहीं चलता कि कब तक बचेगा। 16 नशा मुक्ति केंद्र, सिविल में रोज 170 ओपीडी
सिरसा के सिविल अस्पताल में बने नशा मुक्ति केंद्र में औसतन 150 से 170 मरीज आते हैं, जिनमें से 110 से 120 मरीजों को नशे की लत है, जो नशा छुड़वाने के लिए आते हैं। इनमें हर आयु वर्ग के महिला व पुरुष हैं। जिले में करीब 16 नशा मुक्ति केंद्र हैं, इनमें से तीन सरकारी और बाकी मान्यता प्राप्त हैं। सिविल अस्पताल में इस समय 40 से 42 मरीज ऐसे दाखिल हैं, जो नशे की लत में हैं। अब जानिए सिरसा के नए SP दीपक सहारण ने क्या कहा… सवाल: नशा ज्यादा फैल रहा है, बाहर से नशा आ रहा है। इसे रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं?
जवाब: फुल स्पीड में काम शुरू कर दिया है। पहले जो नशा करने वाले हैं, उन्हें चिह्नित कर इलाज करवाएंगे। उससे वो डिमांड कम हो जाएगी। दूसरा, जहां से नशा आ रहा है, उस पर सख्ती शुरू कर दी है। पुलिस टीम नशा तस्करों पर कार्रवाई कर रही है। हर रोज दो से तीन केस दर्ज हो रहे हैं। इसके लिए बाकी महकमों का भी सहयोग लिया जाएगा। सवाल: अब लोग मेडिकल नशा ज्यादा करने लगे हैं। इस पर क्या कर रहे?
जवाब: मेडिकल एसोसिएशन के साथ मंगलवार को एक मीटिंग की गई, जिसमें 40 से 50 मेडिकल स्टोर संचालक शामिल हुए थे। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि सभी CCTV कैमरे लगवाएं और किसी को भी बिना फ्रेश पर्ची के खुली सीरिंज न बेचें। सवाल : नशा के कारण परिजन भी हताश है, खुलकर बता नहीं रहे ?
जवाब: कुम्हारियां व बाजेकां गांव में नशा से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करवाए हैं। ओटू में भी डॉक्टरों की टीम जांच के लिए भेजी थी। अब सूचना देने वाले भी सामने आ रहे हैं। कुछ लोग एक बार नशा छोड़ देते हैं। जब संगत में बैठते हैं तो फिर शुरू कर देते हैं। लोगों में जागरूकता ला रहे हैं। कोई नशा पीड़ित है तो परिवार उसका इलाज करवाए। उदासीनता नहीं लानी है।