पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के शिक्षा विभाग ने बाढ़ में स्कूल बंद करने के बदले 1.21 लाख टीचरों का मोबाइल भत्ता काट लिया। विभाग ने तर्क दिया कि वित्त विभाग का निर्देश है कि अगर स्कूल लगातार 10 दिन बंद रहते हैं तो टीचरों को मोबाइल भत्ता नहीं दिया जा सकता। अगस्त-सितंबर महीने में लगातार स्कूल 11 दिन बंद रहे। ऐसे में यह भत्ता काट लिया गया। इस पर हिंदी शिक्षक संघ ने बताया कि पंजाब सरकार ग्रेड पे के हिसाब से टीचर्स को 500 और 600 रुपए हर महीने मोबाइल भत्ता देती है। इस महीने शिक्षा विभाग ने टीचर्स का मोबाइल भत्ता काट कर 6 करोड़ रुपए बचा लिए हैं। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (DTF) के प्रदेश प्रधान विक्रम देव सिंह ने कहा कि सरकार एक तरफ भत्ता काट रही और दूसरी तरफ बाढ़ राहत के नाम पर फंड मांग रही है। टीचरों को मोबाइल भत्ता क्यों?
शिक्षा विभाग ने जब से टीचरों से ऑनलाइन काम लेने शुरू किए तो उन्हें हर महीने 500 से 600 रुपए का भत्ता दिया जाता है। पहले टीचरों से सब्जेक्ट वाइज मार्किंग डेटा फीड करने का काम लिया जाता था। फिर कोरोना काल के बाद पढ़ाई के अलावा और भी कई काम ऑनलाइन शुरू कर दिए गए। इसके बाद इंटरनेट यूज करने के लिए भत्ता दिया जाने लगा। वित्त विभाग का 10 दिन का आदेश क्या?
16 अगस्त 2013 में वित्त विभाग ने मोबाइल भत्ते को लेकर एक पत्र जारी किया था। जिसमें कहा गया कि कोर्ट, शिक्षा विभाग या अन्य विभागों में अगर लगातार 10 दिन से ज्यादा छुट्टियां हों तो उनके कर्मचारियों को मोबाइल भत्ता नहीं दिया जा सकता। शिक्षा विभाग ने सितंबर माह की सैरी जारी करते समय इसी पत्र का हवाला दिया और टीचर्स की सैलरी काट दी। वित्त विभाग का लेटर पढ़ें….. इस बारे में टीचर संगठनों ने क्या कहा… एक महीने में तो 10 छुट्टियां हुई ही नहीं
इस बारे में पंजाब डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के प्रधान विक्रम देव सिंह का कहना है कि शिक्षा विभाग अगर वित्त विभाग के आदेश की बात भी कर रहा है तो भी टीचर्स का मोबाइल भत्ता नहीं कटता। 10 छुटि्टयां एक महीने में तो हुई ही नहीं। सरकार ने यह सरासर गलत किया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बात की जाएगी। ऑनलाइन काम कराया, अब भत्ता काट दिया
हिंदी शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव मनोज कुमार ने बताया कि जब बाढ़ के कारण सूबे में स्कूल बंद हुए तो शिक्षा विभाग ने बच्चों को ऑनलाइन काम देने को कहा। छुट्टियों के दौरान टीचर्स ऑनलाइन काम करते रहे और अब उनके वेतन में से पैसे काट दिए। यह कटौती नियमों के विपरीत है। छुट्टी सरकार ने की है न की टीचरों ने। जबरन बाढ़ फंड वसूलने का आरोप लगा चुकी भाजपा
भारतीय जनता पार्टी के नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री मनोरंजन कालिया ने भी आरोप लगाया था कि सरकार अलग-अलग विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों से जबरन बाढ़ फंड के लिए पैसे वसूल रही है। उन्होंने बाकायदा लुधियाना में पठानकोट के एसएमओ का एक पत्र भी जारी किया था। जिसमें पद के हिसाब से लिखा गया था कि उन्हें कितने पैसे जमा करवाने हैं। स्लाइड में जानिए पंजाब में बाढ़ से क्या नुकसान हुआ… —————————- एक करोड़ के घर की मालकिन तंबू में रह रही:पंजाब में बाढ़ के बाद घर लौट रहे लोग; खेतों में रेत-कीचड़, छतें-दीवारें टूटी पंजाब में आई भीषण बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे उतर रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों में जिंदगी भी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। जो लोग पलायन कर गए थे या सुरक्षित स्थान पर चले गए थे, वे अब अपने-अपने घरों को लौट रहे हैं। मगर, बाढ़ से बने हालात देखकर इन लोगों को घर लौटने की संतुष्टि कम, भविष्य की चिंता ज्यादा सता रही है। (पूरी खबर पढ़ें)
पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के शिक्षा विभाग ने बाढ़ में स्कूल बंद करने के बदले 1.21 लाख टीचरों का मोबाइल भत्ता काट लिया। विभाग ने तर्क दिया कि वित्त विभाग का निर्देश है कि अगर स्कूल लगातार 10 दिन बंद रहते हैं तो टीचरों को मोबाइल भत्ता नहीं दिया जा सकता। अगस्त-सितंबर महीने में लगातार स्कूल 11 दिन बंद रहे। ऐसे में यह भत्ता काट लिया गया। इस पर हिंदी शिक्षक संघ ने बताया कि पंजाब सरकार ग्रेड पे के हिसाब से टीचर्स को 500 और 600 रुपए हर महीने मोबाइल भत्ता देती है। इस महीने शिक्षा विभाग ने टीचर्स का मोबाइल भत्ता काट कर 6 करोड़ रुपए बचा लिए हैं। डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (DTF) के प्रदेश प्रधान विक्रम देव सिंह ने कहा कि सरकार एक तरफ भत्ता काट रही और दूसरी तरफ बाढ़ राहत के नाम पर फंड मांग रही है। टीचरों को मोबाइल भत्ता क्यों?
शिक्षा विभाग ने जब से टीचरों से ऑनलाइन काम लेने शुरू किए तो उन्हें हर महीने 500 से 600 रुपए का भत्ता दिया जाता है। पहले टीचरों से सब्जेक्ट वाइज मार्किंग डेटा फीड करने का काम लिया जाता था। फिर कोरोना काल के बाद पढ़ाई के अलावा और भी कई काम ऑनलाइन शुरू कर दिए गए। इसके बाद इंटरनेट यूज करने के लिए भत्ता दिया जाने लगा। वित्त विभाग का 10 दिन का आदेश क्या?
16 अगस्त 2013 में वित्त विभाग ने मोबाइल भत्ते को लेकर एक पत्र जारी किया था। जिसमें कहा गया कि कोर्ट, शिक्षा विभाग या अन्य विभागों में अगर लगातार 10 दिन से ज्यादा छुट्टियां हों तो उनके कर्मचारियों को मोबाइल भत्ता नहीं दिया जा सकता। शिक्षा विभाग ने सितंबर माह की सैरी जारी करते समय इसी पत्र का हवाला दिया और टीचर्स की सैलरी काट दी। वित्त विभाग का लेटर पढ़ें….. इस बारे में टीचर संगठनों ने क्या कहा… एक महीने में तो 10 छुट्टियां हुई ही नहीं
इस बारे में पंजाब डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के प्रधान विक्रम देव सिंह का कहना है कि शिक्षा विभाग अगर वित्त विभाग के आदेश की बात भी कर रहा है तो भी टीचर्स का मोबाइल भत्ता नहीं कटता। 10 छुटि्टयां एक महीने में तो हुई ही नहीं। सरकार ने यह सरासर गलत किया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बात की जाएगी। ऑनलाइन काम कराया, अब भत्ता काट दिया
हिंदी शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव मनोज कुमार ने बताया कि जब बाढ़ के कारण सूबे में स्कूल बंद हुए तो शिक्षा विभाग ने बच्चों को ऑनलाइन काम देने को कहा। छुट्टियों के दौरान टीचर्स ऑनलाइन काम करते रहे और अब उनके वेतन में से पैसे काट दिए। यह कटौती नियमों के विपरीत है। छुट्टी सरकार ने की है न की टीचरों ने। जबरन बाढ़ फंड वसूलने का आरोप लगा चुकी भाजपा
भारतीय जनता पार्टी के नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री मनोरंजन कालिया ने भी आरोप लगाया था कि सरकार अलग-अलग विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों से जबरन बाढ़ फंड के लिए पैसे वसूल रही है। उन्होंने बाकायदा लुधियाना में पठानकोट के एसएमओ का एक पत्र भी जारी किया था। जिसमें पद के हिसाब से लिखा गया था कि उन्हें कितने पैसे जमा करवाने हैं। स्लाइड में जानिए पंजाब में बाढ़ से क्या नुकसान हुआ… —————————- एक करोड़ के घर की मालकिन तंबू में रह रही:पंजाब में बाढ़ के बाद घर लौट रहे लोग; खेतों में रेत-कीचड़, छतें-दीवारें टूटी पंजाब में आई भीषण बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे उतर रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों में जिंदगी भी धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। जो लोग पलायन कर गए थे या सुरक्षित स्थान पर चले गए थे, वे अब अपने-अपने घरों को लौट रहे हैं। मगर, बाढ़ से बने हालात देखकर इन लोगों को घर लौटने की संतुष्टि कम, भविष्य की चिंता ज्यादा सता रही है। (पूरी खबर पढ़ें)