हरियाणा में कांग्रेस बड़बोले नेताओं की जुबान पर लगाम कसने की तैयार कर रही है। प्रदेश में एक के बाद एक नेताओं के बयानों से पार्टी को असहज होना पड़ा रहा है। वहीं, पार्टी की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ रही है। इससे कांग्रेस संगठन के नेता परेशान हैं। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी बीके हरि प्रसाद का कहना है कि जल्द ही कांग्रेस हरियाणा में अनुशासन समिति बनाने जा रही है। यह समिति कभी भी बनकर तैयार हो सकती है। बीके हरि प्रसाद ने कहा कि इस समिति में कांग्रेस के सीनियर नेताओं को शामिल किया जाएगा। यह समिति ऐसे नेताओं पर कार्रवाई के लिए अनुशंसा करेगी जो पार्टी लाइन से हटकर बयान देते हैं और पार्टी के ही नेताओं पर बयानबाजी कर गुटबाजी को हवा देते हैं। इससे पहले कांग्रेस ने 2 साल पहले डिसीप्लीनरी (अनुशासन) एक्शन कमेटी बनाई थी इसकी जिम्मेदारी कांग्रेस के दक्षिण हरियाणा के नेता महेंद्र प्रताप को दी गई थी। इसके अलावा पूर्व प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना, जगबीर मलिक और चक्रवर्ती शर्मा को मेंबर बनाया गया था, मगर कमेटी कुछ खास नहीं कर पाई थी। अब कांग्रेस नए सिरे से अनुशासन कमेटी बना सकती है। जानिए इन नेताओं क्यों हो सकती है कार्रवाई… पढ़िए…अपने ही नेताओं से असहज क्यों हो रही कांग्रेस पहले SRK गुट बना था, किरण की जगह बीरेंद्र सिंह आ गए
इससे पहले हुड्डा विरोधी कुमारी सैलजा, रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी एकजुट हुए थे। तब इसे SRK का नाम मिला। कई मौकों पर बीरेंद्र सिंह भी इनके साथ खड़े नजर आते थे। हालांकि बाद में किरण चौधरी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चलीं गई। किरण की जगह अब चौधरी बीरेंद्र सिंह ने ले ली है। चुनाव के समय भी दोनों गुट अलग-अलग नजर आए। राहुल गांधी ने दोनों सीनियर नेताओं के हाथ मिलवाने की कोशिश की मगर चुनाव में गुटबाजी के कारण कांग्रेस चुनाव हार गई। राहुल गांधी ने भी हरियाणा में चुनाव हारने के बाद कहा था कि हरियाणा में कांग्रेस के सीनियर नेताओं के इंटरेस्ट पार्टी से ऊपर हो गए हैं। हार के कारण जानने को कांग्रेस ने कमेटी बनाई थी
विधानसभा चुनाव में अच्छे माहौल के बावजूद हारी कांग्रेस ने इसके कारण तलाशे थे। शुरुआत में कांग्रेस हाईकमान ने इसके लिए 2 मेंबरी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई। जिसमें छत्तीसगढ़ के पूर्व CM भूपेश बघेल और राजस्थान के कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी शामिल रहे। प्रदेश के 90 में से चुनाव हारे 53 नेताओं से उनकी बातचीत हुई थी। कमेटी ने चुनाव हारे उम्मीदवारों से 4 तरह के सवाल पूछे थे। जिसके बाद कमेटी ने इसकी लिखित रिपोर्ट तैयार की थी। जिसमें EVM से ज्यादा चुनाव के बीच तालमेल की कमी और गुटबाजी की वजह सामने आई थी।
हरियाणा में कांग्रेस बड़बोले नेताओं की जुबान पर लगाम कसने की तैयार कर रही है। प्रदेश में एक के बाद एक नेताओं के बयानों से पार्टी को असहज होना पड़ा रहा है। वहीं, पार्टी की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ रही है। इससे कांग्रेस संगठन के नेता परेशान हैं। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी बीके हरि प्रसाद का कहना है कि जल्द ही कांग्रेस हरियाणा में अनुशासन समिति बनाने जा रही है। यह समिति कभी भी बनकर तैयार हो सकती है। बीके हरि प्रसाद ने कहा कि इस समिति में कांग्रेस के सीनियर नेताओं को शामिल किया जाएगा। यह समिति ऐसे नेताओं पर कार्रवाई के लिए अनुशंसा करेगी जो पार्टी लाइन से हटकर बयान देते हैं और पार्टी के ही नेताओं पर बयानबाजी कर गुटबाजी को हवा देते हैं। इससे पहले कांग्रेस ने 2 साल पहले डिसीप्लीनरी (अनुशासन) एक्शन कमेटी बनाई थी इसकी जिम्मेदारी कांग्रेस के दक्षिण हरियाणा के नेता महेंद्र प्रताप को दी गई थी। इसके अलावा पूर्व प्रदेशाध्यक्ष फूलचंद मुलाना, जगबीर मलिक और चक्रवर्ती शर्मा को मेंबर बनाया गया था, मगर कमेटी कुछ खास नहीं कर पाई थी। अब कांग्रेस नए सिरे से अनुशासन कमेटी बना सकती है। जानिए इन नेताओं क्यों हो सकती है कार्रवाई… पढ़िए…अपने ही नेताओं से असहज क्यों हो रही कांग्रेस पहले SRK गुट बना था, किरण की जगह बीरेंद्र सिंह आ गए
इससे पहले हुड्डा विरोधी कुमारी सैलजा, रणदीप सुरजेवाला और किरण चौधरी एकजुट हुए थे। तब इसे SRK का नाम मिला। कई मौकों पर बीरेंद्र सिंह भी इनके साथ खड़े नजर आते थे। हालांकि बाद में किरण चौधरी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चलीं गई। किरण की जगह अब चौधरी बीरेंद्र सिंह ने ले ली है। चुनाव के समय भी दोनों गुट अलग-अलग नजर आए। राहुल गांधी ने दोनों सीनियर नेताओं के हाथ मिलवाने की कोशिश की मगर चुनाव में गुटबाजी के कारण कांग्रेस चुनाव हार गई। राहुल गांधी ने भी हरियाणा में चुनाव हारने के बाद कहा था कि हरियाणा में कांग्रेस के सीनियर नेताओं के इंटरेस्ट पार्टी से ऊपर हो गए हैं। हार के कारण जानने को कांग्रेस ने कमेटी बनाई थी
विधानसभा चुनाव में अच्छे माहौल के बावजूद हारी कांग्रेस ने इसके कारण तलाशे थे। शुरुआत में कांग्रेस हाईकमान ने इसके लिए 2 मेंबरी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई। जिसमें छत्तीसगढ़ के पूर्व CM भूपेश बघेल और राजस्थान के कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी शामिल रहे। प्रदेश के 90 में से चुनाव हारे 53 नेताओं से उनकी बातचीत हुई थी। कमेटी ने चुनाव हारे उम्मीदवारों से 4 तरह के सवाल पूछे थे। जिसके बाद कमेटी ने इसकी लिखित रिपोर्ट तैयार की थी। जिसमें EVM से ज्यादा चुनाव के बीच तालमेल की कमी और गुटबाजी की वजह सामने आई थी।