तमिलनाडु के बाद शनिवार को मध्य प्रदेश और केरल ने भी कोल्ड्रिफ (Coldrif) कफ सिरप को बैन कर दिया। इस सिरप से मध्यप्रदेश में 27 दिन में 11 बच्चों की मौत हो गई। इन सभी की उम्र एक से 5 साल के बीच है। कोल्ड्रिफ (Coldrif) दवा की मैन्युफैक्चरिंग तमिलनाडु के कांचीपुरम में हो रही थी। उधर, राजस्थान में डेक्सट्रोमेथोरपन हाइड्रोब्रोमाइड कफ सिरप से आज तीसरे बच्चे की जान चली गई। चूरू के 6 साल के बच्चे को तबीयत बिगड़ने पर जयपुर रेफर किया था। यहां जेके लोन अस्पताल में इलाज के दौरान सुबह 10 बजे उसने दम तोड़ दिया। उधर, भरतपुर में इस सिरप से बुजुर्ग महिला की तबीयत बिगड़ गई। राज्य सरकार ने इस सिरप को बनाने वाली कंपनी केसंस फार्मा को भी प्रतिबंधित कर दिया है। इस कंपनी का प्लांट जयपुर में है। इस बीच चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि मौत की वजह सिरप नहीं हैं। एमपी में कोल्ड्रिफ से 11 मौतें छिंंदवाड़ा में एमपी के छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने से 11 बच्चों की मौत हुई है। पहला संदिग्ध मामला 24 अगस्त को सामने आया था। पहली मौत 7 सितंबर को हुई थी। इसके बाद 15 दिन में किडनी फेल होने से एक-एक कर 6 बच्चों की मौत हो गई। एमपी स्टेट फूड एंड ड्रग कंट्रोलर दिनेश कुमार मौर्य ने शनिवार को बताया, “कोल्ड्रिफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया, इसकी मात्रा तय मात्रा से ज्यादा थी। इसी कारण यह सिरप विषैला पाया गया। CM मोहन यादव ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से मरने वाले 11 बच्चों के परिवारों को 4-4 लाख रुपए की मदद देने की घोषणा की। राजस्थान के सीकर, भरतपुर और चुरू में एक-एक मौतें राजस्थान में कफ सिरप पीने से भरतपुर और सीकर में एक-एक मौतें सामने आई हैं। शुरुआती जांच में Dextromethorphan hydrobromide syrup ip का नाम सामने आया। यह दवाई एक निजी फार्मा कंपनी केसंस फार्मा तैयार करती है। यहां भी बच्चों की मौत की वजह किडनी फेल होने की बात बताई गई। शनिवार को चूरू में एक बच्चे की मौत का कारण भी कफ सिरप पीना बताया जा रहा है। इसके बाद शनिवार को सरकार एक्शन में आई। राजस्थान सरकार ने केसंस फार्मा की सभी 19 प्रकार की दवाइयों पर रोक लगा दी है। राज्य के ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा को निलंबित कर दिया। इससे पहले, शर्मा ने कंपनी को जांच में क्लीन चिट दी थी। भरतपुर में बुजुर्ग महिला की तबीयत बिगड़ी, मंंत्री बोले- जांच में कुछ नहीं निकला भरतपुर में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना में मिले कफ सिरप पीने से बुजुर्ग महिला की तबीयत बिगड़ गई। परिजन महिला को आरबीएम हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां उसका इलाज जारी है। 60 साल की रामदेई ने बताया- 3 अक्टूबर मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, इसलिए मैंने घर पर रखा कफ सिरप पी लिया। यह सिरप 7 दिन पहले सैटेलाइट हॉस्पिटल से खरीदा था। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने जोधपुर के सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मंत्री ने कहा कि प्रदेश में कफ सिरप की वजह से मौतें नहीं हुई हैं। हमने इसकी जांच करवाई है। जांच में ऐसा कुछ सामने नहीं आया। दो बार दवा की जांच करवा चुके हैं। पूरी खबर पढ़ें गुजरात ने कफ सिरप की जांच शुरू की मध्य प्रदेश और राजस्थान में बच्चों की कफ सिरप से हुई मौतों की खबरों के बीच, गुजरात सरकार ने शनिवार को यह पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए कि राज्य में बेचे जा रहे सिरप में कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं हैं। तमिलनाडु में एमपी के पत्र के बाद 48 घंटों में एक्शन एमपी के ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्या ने बताया था कि स्वास्थ्य विभाग ने दोनों कफ सिरप (coldrif व Nextro DS) का प्रोडक्शन रुकवाने के लिए तमिलनाडु और हिमाचल को पत्र लिखा है। तमिलनाडु सरकार ने मप्र की ओर से पत्र मिलते ही 24 घंटे के भीतर कोल्ड्रिफ सिरप (बैच नंबर SR-13) का सैंपल लेकर जांच कराई। इसमें डाईएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) 48.6% मिला, जो एक विषैला पदार्थ है। यह सेहत के लिए हानिकारक है। इसके तुरंत बाद पूरे तमिलनाडु में इसके उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया। सीडीएससीओ ने दवा कंपनियों की जांच शुरू की स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने मध्य प्रदेश में कफ सिरप से बच्चों की मौत की खबरों के बाद छह राज्यों में कफ सिरप और एंटीबायोटिक दवाएं बनाने वाली 19 कंपनियों के प्लांट में 3 अक्टूबर से निरीक्षण शुरू किया है। इसका उद्देश्य उन खामियों की पहचान करना है जिनके कारण दवा की क्वालिटी में कमी आई है। केंद्र सरकार ने एडवाइजरी जारी की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को हेल्थ एडवाइजरी जारी करके कहा कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप (खांसी और सर्दी की दवाएं) न दी जाएं। सरकार ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से 11 बच्चों की मौत की खबरों के बाद एडवाइजरी जारी की है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले DGHS ने एडवाइजरी में कहा कि आमतौर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं दिया जाना चाहिए। इससे बड़े बच्चों को यदि कफ सिरप दिया जाए तो उनका इस्तेमाल सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए। यानी जिस बच्चे को दवा दी जा रही है, उसे कड़ी निगरानी में रखा जाए। उसे उचित खुराक दी जाए। कम से कम समय के लिए दवा दी जाए। कई दवाओं के साथ कफ सिरप नहीं दिया जाए। DGHS की डॉ. सुनीता शर्मा ने यह एडवाइजरी जारी की है। ————————- कफ सिरप से मौत से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… बच्चों के सिरप में कूलेंट वाले केमिकल का कंटेंट:इससे किडनी-दिमाग पर बुरा असर, इन सॉल्वेंट का इस्तेमाल गैरकानूनी मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में किडनी फेल होने से 7 बच्चों की मौत हो चुकी है। 7वें बच्चे ने नागपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ा। जिन दवाओं से बच्चों को आराम मिलना चाहिए था, वही उनकी मौत की वजह बन गईं। पूरी खबर पढ़ें… राजस्थान में 2 बच्चों की मौत; ड्रग कंट्रोलर ने नकली दवाओं की परिभाषा बदली, कई फार्मा कंपनियों को बचाया सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली कफ सिरप पीने से 2 बच्चों की मौत के साथ ही तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आ रहे हैं। फूड सेफ्टी ड्रग कंट्रोलर डिपार्टमेंट के अधिकारी फार्मा कंपनियों को बचाने में जुटे हैं। अधिकारी ने नकली दवाइयां बनाते पकड़ी गई कंपनियों को बचाने के लिए एक्ट की परिभाषा ही बदल दी। पूरी खबर पढ़ें…
तमिलनाडु के बाद शनिवार को मध्य प्रदेश और केरल ने भी कोल्ड्रिफ (Coldrif) कफ सिरप को बैन कर दिया। इस सिरप से मध्यप्रदेश में 27 दिन में 11 बच्चों की मौत हो गई। इन सभी की उम्र एक से 5 साल के बीच है। कोल्ड्रिफ (Coldrif) दवा की मैन्युफैक्चरिंग तमिलनाडु के कांचीपुरम में हो रही थी। उधर, राजस्थान में डेक्सट्रोमेथोरपन हाइड्रोब्रोमाइड कफ सिरप से आज तीसरे बच्चे की जान चली गई। चूरू के 6 साल के बच्चे को तबीयत बिगड़ने पर जयपुर रेफर किया था। यहां जेके लोन अस्पताल में इलाज के दौरान सुबह 10 बजे उसने दम तोड़ दिया। उधर, भरतपुर में इस सिरप से बुजुर्ग महिला की तबीयत बिगड़ गई। राज्य सरकार ने इस सिरप को बनाने वाली कंपनी केसंस फार्मा को भी प्रतिबंधित कर दिया है। इस कंपनी का प्लांट जयपुर में है। इस बीच चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि मौत की वजह सिरप नहीं हैं। एमपी में कोल्ड्रिफ से 11 मौतें छिंंदवाड़ा में एमपी के छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने से 11 बच्चों की मौत हुई है। पहला संदिग्ध मामला 24 अगस्त को सामने आया था। पहली मौत 7 सितंबर को हुई थी। इसके बाद 15 दिन में किडनी फेल होने से एक-एक कर 6 बच्चों की मौत हो गई। एमपी स्टेट फूड एंड ड्रग कंट्रोलर दिनेश कुमार मौर्य ने शनिवार को बताया, “कोल्ड्रिफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया, इसकी मात्रा तय मात्रा से ज्यादा थी। इसी कारण यह सिरप विषैला पाया गया। CM मोहन यादव ने कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से मरने वाले 11 बच्चों के परिवारों को 4-4 लाख रुपए की मदद देने की घोषणा की। राजस्थान के सीकर, भरतपुर और चुरू में एक-एक मौतें राजस्थान में कफ सिरप पीने से भरतपुर और सीकर में एक-एक मौतें सामने आई हैं। शुरुआती जांच में Dextromethorphan hydrobromide syrup ip का नाम सामने आया। यह दवाई एक निजी फार्मा कंपनी केसंस फार्मा तैयार करती है। यहां भी बच्चों की मौत की वजह किडनी फेल होने की बात बताई गई। शनिवार को चूरू में एक बच्चे की मौत का कारण भी कफ सिरप पीना बताया जा रहा है। इसके बाद शनिवार को सरकार एक्शन में आई। राजस्थान सरकार ने केसंस फार्मा की सभी 19 प्रकार की दवाइयों पर रोक लगा दी है। राज्य के ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा को निलंबित कर दिया। इससे पहले, शर्मा ने कंपनी को जांच में क्लीन चिट दी थी। भरतपुर में बुजुर्ग महिला की तबीयत बिगड़ी, मंंत्री बोले- जांच में कुछ नहीं निकला भरतपुर में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना में मिले कफ सिरप पीने से बुजुर्ग महिला की तबीयत बिगड़ गई। परिजन महिला को आरबीएम हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां उसका इलाज जारी है। 60 साल की रामदेई ने बताया- 3 अक्टूबर मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, इसलिए मैंने घर पर रखा कफ सिरप पी लिया। यह सिरप 7 दिन पहले सैटेलाइट हॉस्पिटल से खरीदा था। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने जोधपुर के सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मंत्री ने कहा कि प्रदेश में कफ सिरप की वजह से मौतें नहीं हुई हैं। हमने इसकी जांच करवाई है। जांच में ऐसा कुछ सामने नहीं आया। दो बार दवा की जांच करवा चुके हैं। पूरी खबर पढ़ें गुजरात ने कफ सिरप की जांच शुरू की मध्य प्रदेश और राजस्थान में बच्चों की कफ सिरप से हुई मौतों की खबरों के बीच, गुजरात सरकार ने शनिवार को यह पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए कि राज्य में बेचे जा रहे सिरप में कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं हैं। तमिलनाडु में एमपी के पत्र के बाद 48 घंटों में एक्शन एमपी के ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्या ने बताया था कि स्वास्थ्य विभाग ने दोनों कफ सिरप (coldrif व Nextro DS) का प्रोडक्शन रुकवाने के लिए तमिलनाडु और हिमाचल को पत्र लिखा है। तमिलनाडु सरकार ने मप्र की ओर से पत्र मिलते ही 24 घंटे के भीतर कोल्ड्रिफ सिरप (बैच नंबर SR-13) का सैंपल लेकर जांच कराई। इसमें डाईएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) 48.6% मिला, जो एक विषैला पदार्थ है। यह सेहत के लिए हानिकारक है। इसके तुरंत बाद पूरे तमिलनाडु में इसके उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया। सीडीएससीओ ने दवा कंपनियों की जांच शुरू की स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने मध्य प्रदेश में कफ सिरप से बच्चों की मौत की खबरों के बाद छह राज्यों में कफ सिरप और एंटीबायोटिक दवाएं बनाने वाली 19 कंपनियों के प्लांट में 3 अक्टूबर से निरीक्षण शुरू किया है। इसका उद्देश्य उन खामियों की पहचान करना है जिनके कारण दवा की क्वालिटी में कमी आई है। केंद्र सरकार ने एडवाइजरी जारी की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को हेल्थ एडवाइजरी जारी करके कहा कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप (खांसी और सर्दी की दवाएं) न दी जाएं। सरकार ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से 11 बच्चों की मौत की खबरों के बाद एडवाइजरी जारी की है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले DGHS ने एडवाइजरी में कहा कि आमतौर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं दिया जाना चाहिए। इससे बड़े बच्चों को यदि कफ सिरप दिया जाए तो उनका इस्तेमाल सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए। यानी जिस बच्चे को दवा दी जा रही है, उसे कड़ी निगरानी में रखा जाए। उसे उचित खुराक दी जाए। कम से कम समय के लिए दवा दी जाए। कई दवाओं के साथ कफ सिरप नहीं दिया जाए। DGHS की डॉ. सुनीता शर्मा ने यह एडवाइजरी जारी की है। ————————- कफ सिरप से मौत से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… बच्चों के सिरप में कूलेंट वाले केमिकल का कंटेंट:इससे किडनी-दिमाग पर बुरा असर, इन सॉल्वेंट का इस्तेमाल गैरकानूनी मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में किडनी फेल होने से 7 बच्चों की मौत हो चुकी है। 7वें बच्चे ने नागपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ा। जिन दवाओं से बच्चों को आराम मिलना चाहिए था, वही उनकी मौत की वजह बन गईं। पूरी खबर पढ़ें… राजस्थान में 2 बच्चों की मौत; ड्रग कंट्रोलर ने नकली दवाओं की परिभाषा बदली, कई फार्मा कंपनियों को बचाया सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली कफ सिरप पीने से 2 बच्चों की मौत के साथ ही तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आ रहे हैं। फूड सेफ्टी ड्रग कंट्रोलर डिपार्टमेंट के अधिकारी फार्मा कंपनियों को बचाने में जुटे हैं। अधिकारी ने नकली दवाइयां बनाते पकड़ी गई कंपनियों को बचाने के लिए एक्ट की परिभाषा ही बदल दी। पूरी खबर पढ़ें…