हिमाचल प्रदेश के शक्तिपीठों में नवरात्रि पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। बिलासपुर में मां नैना देवी मंदिर के कपाट रात 2 बजे ही श्रद्धालुओं के दर्शन को खोल दिए गए। ऊना में मां चिंतपूर्णी मंदिर के कपाट सुबह 4 बजे, कांगड़ा में मां ज्वालाजी, मां ब्रजेश्वरी और मां चामुंडा देवी मंदिर के कपाट सुबह 5 बजे खोले गए। प्रदेश के इन शक्तिपीठों में प्रदेश के साथ साथ पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, जम्मू से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। शक्तिपीठों के अलावा मां के दूसरे मंदिरों में भी उत्सव जैसा माहौल है। शिमला के कालीबाड़ी, सिरमौर के बाला सुंदरी, सोलन के मां शूलिनी मंदिर, शिमला के कालीबाड़ी, तारादेवी और मां हाटेश्वरी मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। शारदीय नवरात्रि के लिए इन शक्तिपीठों को रंग-बिरंगे फूलों और लाइटों से आकर्षक ढंग से सजाया गया है। इनमें नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की 9 दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। हिमाचल के 5 शक्तिपीठ की खासियत.. नयना देवी में गिरे थे माता सती के नेत्र पौराणिक कथा के अनुसार, दक्ष के यज्ञ में अपमानित होने के बाद सती ने जब अपने प्राणों का त्याग किया, तो भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 टुकड़े किए और जहां-जहां उनके अंग गिरे, वे शक्तिपीठ कहलाए। हिमाचल के बिलासपुर में स्थित नैना देवी मंदिर में देवी सती के नेत्र गिरे थे, इसलिए इसे नैना देवी शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है। चिंतपूर्णी में माता सत्ती के पांव गिरने की मान्यता ऊना जिला में मां चिंतपूर्णी का मंदिर छिन्नमस्तिका के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि चिंतपूर्णी में सती के पांव गिरे थे। यहां पर पड़ोसी राज्य पंजाब से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन को पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां चिंतपूर्णी भक्तों की सभी चिंताओं को दूर और मनोकामना को पूरा करती हैं। ज्वालाजी में गिरी थी मां सती की जीभ कांगड़ा जिला स्थित मां ज्वाला जी मंदिर भी देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि यहां मां सती की जीभ भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कट कर गिरी थी। मंदिर में भगवती के दर्शन नवज्योति रूपों में होते हैं। उत्तर भारत की प्रसिद्ध 9 देवियों के दर्शन के दौरान चौथा दर्शन मां ज्वाला जी का ही होता है। मां चामुंडा को लेकर ये मान्यता हिमाचल के कांगड़ा जिला के पालमपुर में मां चामुंडा देवी का एक और मशहूर शक्तिपीठ है। मान्यता है कि चामुंडा में देवी दुर्गा ने चंड और मुंड नामक दानवों का संहार किया था, जिसके कारण उन्हें ‘चामुंडा’ नाम मिला। इसके अलावा, यह भी कहा जाता है कि सती के चरणों का कुछ हिस्सा भी यहां गिरा था। यह मंदिर धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में काफी विकसित है। नवरात्रि पर यहां विशेष पूजा की जाती है। सुबह के समय यहां सप्तचंडी का पाठ किया जाता है। बृजेश्वरी मंदिर में गिरा था मां सती का बायां वक्षस्थल कांगड़ा जिला में ही मां बृजेश्वरी देवी मंदिर है। यहां पर भी सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है। नवरात्रि पर्व पर यहां मां दुर्गा की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि यहां मां सती का बांया वक्ष गिरा था, इसलिए यह स्थान मां बृजेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिरों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम प्रदेश के शक्तिपीठों और मां के दूसरे मंदिरों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है। पुलिस जवानों के साथ-साथ सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से भी असामाजिक तत्व की निगरानी की जा रही है। मां नैना देव मंदिर में 450 से ज्यादा पुलिस और होमगार्ड जवान तैनात किए गए है। चिंतपूर्णी मंदिर में भी इतने ही जवान तैनात किए गए हैं। 5 शक्तिपीठों में ही 1200 से अधिक जवान नवरात्रि के दौरान सुरक्षा का जिम्मा संभालेंगे।
हिमाचल प्रदेश के शक्तिपीठों में नवरात्रि पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। बिलासपुर में मां नैना देवी मंदिर के कपाट रात 2 बजे ही श्रद्धालुओं के दर्शन को खोल दिए गए। ऊना में मां चिंतपूर्णी मंदिर के कपाट सुबह 4 बजे, कांगड़ा में मां ज्वालाजी, मां ब्रजेश्वरी और मां चामुंडा देवी मंदिर के कपाट सुबह 5 बजे खोले गए। प्रदेश के इन शक्तिपीठों में प्रदेश के साथ साथ पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, जम्मू से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। शक्तिपीठों के अलावा मां के दूसरे मंदिरों में भी उत्सव जैसा माहौल है। शिमला के कालीबाड़ी, सिरमौर के बाला सुंदरी, सोलन के मां शूलिनी मंदिर, शिमला के कालीबाड़ी, तारादेवी और मां हाटेश्वरी मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। शारदीय नवरात्रि के लिए इन शक्तिपीठों को रंग-बिरंगे फूलों और लाइटों से आकर्षक ढंग से सजाया गया है। इनमें नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की 9 दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। हिमाचल के 5 शक्तिपीठ की खासियत.. नयना देवी में गिरे थे माता सती के नेत्र पौराणिक कथा के अनुसार, दक्ष के यज्ञ में अपमानित होने के बाद सती ने जब अपने प्राणों का त्याग किया, तो भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 टुकड़े किए और जहां-जहां उनके अंग गिरे, वे शक्तिपीठ कहलाए। हिमाचल के बिलासपुर में स्थित नैना देवी मंदिर में देवी सती के नेत्र गिरे थे, इसलिए इसे नैना देवी शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है। चिंतपूर्णी में माता सत्ती के पांव गिरने की मान्यता ऊना जिला में मां चिंतपूर्णी का मंदिर छिन्नमस्तिका के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि चिंतपूर्णी में सती के पांव गिरे थे। यहां पर पड़ोसी राज्य पंजाब से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन को पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां चिंतपूर्णी भक्तों की सभी चिंताओं को दूर और मनोकामना को पूरा करती हैं। ज्वालाजी में गिरी थी मां सती की जीभ कांगड़ा जिला स्थित मां ज्वाला जी मंदिर भी देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि यहां मां सती की जीभ भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कट कर गिरी थी। मंदिर में भगवती के दर्शन नवज्योति रूपों में होते हैं। उत्तर भारत की प्रसिद्ध 9 देवियों के दर्शन के दौरान चौथा दर्शन मां ज्वाला जी का ही होता है। मां चामुंडा को लेकर ये मान्यता हिमाचल के कांगड़ा जिला के पालमपुर में मां चामुंडा देवी का एक और मशहूर शक्तिपीठ है। मान्यता है कि चामुंडा में देवी दुर्गा ने चंड और मुंड नामक दानवों का संहार किया था, जिसके कारण उन्हें ‘चामुंडा’ नाम मिला। इसके अलावा, यह भी कहा जाता है कि सती के चरणों का कुछ हिस्सा भी यहां गिरा था। यह मंदिर धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में काफी विकसित है। नवरात्रि पर यहां विशेष पूजा की जाती है। सुबह के समय यहां सप्तचंडी का पाठ किया जाता है। बृजेश्वरी मंदिर में गिरा था मां सती का बायां वक्षस्थल कांगड़ा जिला में ही मां बृजेश्वरी देवी मंदिर है। यहां पर भी सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है। नवरात्रि पर्व पर यहां मां दुर्गा की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि यहां मां सती का बांया वक्ष गिरा था, इसलिए यह स्थान मां बृजेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिरों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम प्रदेश के शक्तिपीठों और मां के दूसरे मंदिरों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है। पुलिस जवानों के साथ-साथ सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से भी असामाजिक तत्व की निगरानी की जा रही है। मां नैना देव मंदिर में 450 से ज्यादा पुलिस और होमगार्ड जवान तैनात किए गए है। चिंतपूर्णी मंदिर में भी इतने ही जवान तैनात किए गए हैं। 5 शक्तिपीठों में ही 1200 से अधिक जवान नवरात्रि के दौरान सुरक्षा का जिम्मा संभालेंगे।