हिमाचल में तबाही मचाने के बाद मानसून कमजोर पड़ गया है। प्रदेश में बीते 24 घंटे के दौरान मौसम पूरी तरह साफ रहा। आज और कल भी पहाड़ों पर धूप खिलने का पूर्वानुमान है। इससे पहाड़ों पर तीन महीने बाद टूरिस्ट पहुंचना शुरू हो गए हैं। खासकर वीकेंड पर काफी संख्या में कसौली, शिमला, कुफरी व नारकंडा इत्यादि पर्यटन स्थलों पर टूरिस्ट पहुंचे हैं। बारिश थमने के बाद पहाड़ों पर मौसम सुहावना हो गया है। मौसम विभाग की माने तो 24 व 25 सितंबर को मध्यम ऊंचाई वाले कुछ क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी जरूर हो सकती है। 26 सितंबर से मौसम फिर साफ हो जाएगा। इस बीच एक-दो दिन में मानसून भी विड्रा हो सकता है। प्रदेश से मानसून विड्रा होने की नॉर्मल डेट 25 सितंबर है। मानसून सीजन में नॉर्मल से 45% अधिक बारिश इस मानसून सीजन (1 जून से 20 सितंबर के बीच) में नॉर्मल से 45 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है। इस अवधि में 708 मिलीमीटर सामान्य बारिश होती है, लेकिन इस बार 1024.1 मिलीमीटर बादल बरस चुके हैं। मंडी में सबसे ज्यादा 1909.5 मिलीमीटर और कांगड़ा में 1900 मिलीमीटर बारिश हुई है। नॉर्मल की तुलना में शिमला में 104% अधिक बारिश नॉर्मल की तुलना में शिमला जिला में 104 प्रतिशत अधिक और कुल्लू में 103 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। यही भारी बारिश प्रदेश में तबाही का कारण बनी है। प्रदेश में इससे 4841 करोड़ रुपए की निजी व सरकारी संपत्ति नष्ट हुई है और 9 हजार से अधिक घरों को नुकसान पहुंचा है।
हिमाचल में तबाही मचाने के बाद मानसून कमजोर पड़ गया है। प्रदेश में बीते 24 घंटे के दौरान मौसम पूरी तरह साफ रहा। आज और कल भी पहाड़ों पर धूप खिलने का पूर्वानुमान है। इससे पहाड़ों पर तीन महीने बाद टूरिस्ट पहुंचना शुरू हो गए हैं। खासकर वीकेंड पर काफी संख्या में कसौली, शिमला, कुफरी व नारकंडा इत्यादि पर्यटन स्थलों पर टूरिस्ट पहुंचे हैं। बारिश थमने के बाद पहाड़ों पर मौसम सुहावना हो गया है। मौसम विभाग की माने तो 24 व 25 सितंबर को मध्यम ऊंचाई वाले कुछ क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी जरूर हो सकती है। 26 सितंबर से मौसम फिर साफ हो जाएगा। इस बीच एक-दो दिन में मानसून भी विड्रा हो सकता है। प्रदेश से मानसून विड्रा होने की नॉर्मल डेट 25 सितंबर है। मानसून सीजन में नॉर्मल से 45% अधिक बारिश इस मानसून सीजन (1 जून से 20 सितंबर के बीच) में नॉर्मल से 45 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है। इस अवधि में 708 मिलीमीटर सामान्य बारिश होती है, लेकिन इस बार 1024.1 मिलीमीटर बादल बरस चुके हैं। मंडी में सबसे ज्यादा 1909.5 मिलीमीटर और कांगड़ा में 1900 मिलीमीटर बारिश हुई है। नॉर्मल की तुलना में शिमला में 104% अधिक बारिश नॉर्मल की तुलना में शिमला जिला में 104 प्रतिशत अधिक और कुल्लू में 103 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। यही भारी बारिश प्रदेश में तबाही का कारण बनी है। प्रदेश में इससे 4841 करोड़ रुपए की निजी व सरकारी संपत्ति नष्ट हुई है और 9 हजार से अधिक घरों को नुकसान पहुंचा है।