चंडीगढ़ पुलिस की तरफ से हरियाणा के पंचकूला से गिरफ्तार किए गए फर्जी मेजर गणेश भट्ट की जांच में कई खुलासे हो रहे हैं। अक्सर सेना की वर्दी में गनमैन व गाड़ियों में घूमने वाला भट्ट असल में BA फेल है। वो पिछले 8 साल से फौजी अफसर होने का नाटक कर रहा था। चंडीगढ़ पुलिस ने जांच के बाद दावा किया कि लड़कियों को इंप्रेस करने के लिए भट्ट ने वर्दी पहनना शुरू किया। फिर अग्निवीर भर्ती कराने के नाम पर तीन राज्यों उत्तराखंड, हरियाणा व यूपी में अनुमानित 50 से 60 लाख रुपए की ठगी की। कुछ समय पहले उसने चंडीगढ़ पुलिस के सेक्टर-11 की क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर के साथ दोस्ती कर ली। फिर वह अफसरों के बीच उठने-बैठने लगा। इसी बीच एक लेडी कॉन्स्टेबल उसके चक्कर में फंस गई। कॉन्स्टेबल को शादी का झांसा देकर 5 लाख रुपए और सोने की अंगूठी ले ली। बाद में इसी कॉन्स्टेबल की शिकायत पर भट्ट की पोल खुली। 22 अगस्त को भट्ट को गिरफ्तार कर लिया गया। पहले इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही थी, जिसे अब ऑपरेशन सेल को सौंपा गया है। जांच टीम भट्ट की कुंडली तो खंगाल ही रही है, इस मामले में कुछ पुलिस अफसर भी जांच के दायरे में हैं। फर्जी मेजर जिस लेडी कॉन्स्टेबल की शिकायत पर अरेस्ट हुआ है, वो मूलरूप से पंजाब की रहने वाली है। सिलसिलेवार पढ़ें…कैसे उत्तराखंड के रिटायर्ड सूबेदार का बेटा बना फर्जी आर्मी अफसर पिता आर्मी में सूबेदार थे, आर्मी का लाइफ स्टाइल पता था
उत्तराखंड के कुमाऊं डिवीजन के बागेश्वर जिले में एक छोटा सा गांव है पसदेव पट्टीगवाड़ी। गांव की आबादी एक हजार से भी कम है। गांव के लोग बेहद सरलता व सादगी वाले हैं। क्षेत्र के लोगों में सेना में जाने का क्रेज है। बागेश्वर इलाके से कई युवा एनडीए पास करके सेना में अफसर बने हैं। पसदेव गांव के जगदीश चंद्र भट्ट आर्मी में सूबेदार रहे हैं। इन्हीं जगदीश का बेटा है गणेश भट्ट, जो पिछले 8 साल से सेना में मेजर बनने का नाटक कर रहा था। संगत अच्छी नहीं थी, BA सेकेंड ईयर में पढ़ाई छोड़ी
पिता चाहते थे गणेश खूब पढ़े और सेना में अफसर बनें। पिता की नौकरी की वजह से गणेश सैन्य लाइफ स्टाइल के बारे में जानता था। हालांकि उसका मन पढ़ाई में नहीं लगता था। गलत संगत में पड़ गया। उसे लग्जरी लाइफ जीने का शौक था, लेकिन मेहनत नहीं करता था। संगत खराब हुई तो परीक्षा में सफलता नहीं मिली। BA सेकेंड ईयर में पढ़ाई छोड़ दी। परिवार ने समझाया, लेकिन उस पर कोई असर नहीं पड़ा। तंग आकर और बेटे की हरकतें देखकर परिवार ने उसे बेदखल कर दिया। आर्मी की ड्रेस पहनने लगा और भरोसा करने वाले लोगों को ठगने लगा
साल 2018 के आसपास गणेश भट्ट ने ड्रेस पहन खुद को आर्मी का मेजर बताना शुरू किया। उसकी हेयर कट से लेकर बातचीत का लहजा बिल्कुल अफसर जैसा रहा। बचपन से आर्मी का लाइफ-स्टाइल देख ही रखा था। वह उसी को कॉपी कर रहा था। पुलिस की जांच में उल्लेख है कि जो उस पर भरोसा करता वह उसको ठगता। खासकर युवाओं को आर्मी में भर्ती कराने का झांसा देता। सबसे पहले वो देहरादून में फंसा, समझौता कर लिया
गणेश भट्ट ऐसे युवाओं की तलाश में रहता था, जो सेना में भर्ती होना चाहते हैं। ऐसे ही कुछ कांड उसने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में किए। उसने पैसे लेकर नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी की। हालांकि उसकी पोल खुल गई, तो पीड़ितों ने उसके खिलाफ सबसे पहला केस देहरादून में साल 2021 में दर्ज कराया। एफआईआर दर्ज होने के बावजूद भट्ट ने किसी तरह शिकायतकर्ताओं से समझौता कर लिया। जिसके बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया और केस कोर्ट में जाकर खारिज कर दिया गया। फिर पंचकूला में आर्मी कैंप में प्रवेश करते पकड़ा
गणेश भट्ट का एक किस्सा पंचकूला का भी है। यहां उसने चंडी मंदिर आर्मी कैंप में फर्जी आई कार्ड दिखाकर अंदर जाने की कोशिश की। जब आई कार्ड चेक किया गया तो वह फर्जी निकला। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। यह केस साल 2021 का ही है। चंडीगढ़ पुलिस अब इसकी जांच कर रही है कि चंडी मंदिर केस का वर्तमान स्टेटस क्या है। मेरठ में अग्निवीर भर्ती कराने के नाम पर ठगी की
उत्तराखंड व हरियाणा में मामला हाईलाइट होने पर गणेश भट्ट ने उत्तर प्रदेश की तरफ रुख किया, हालांकि उसके रंग-ढंग नहीं बदले। यहां भी वह फौजी अफसर बनकर घूमने लगा। गाड़ियों में घूमता, लग्जरी लाइफ जीता। यहां भी कई युवा उसके प्रभाव में आकर फंस गए और अग्निवीर भर्ती होने के लिए भट्ट को पैसे दे बैठे। जब समय बीत गया और भर्ती नहीं करवाई तो लोगों ने अपने पैसे मांगे, लेकिन उसने पैसे नहीं लौटाए। इसके बाद इसकी शिकायत मेरठ पुलिस स्टेशन में दी गई और उसके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ। इस केस में अभी तक पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया है। मिलिट्री इंटेलिजेंस ने आर्मी ड्रेस में पकड़ा
19 अप्रैल 2023 को मेरठ में उसे मिलिट्री इंटेलिजेंस ने फर्जी मेजर बनकर घूमते हुए पकड़ा लिया। उसके पास से आर्मी की वर्दी-बूट और अन्य सामान बरामद हुआ। पूछताछ में उसने स्वीकार किया था कि वह नौकरी दिलवाने के नाम पर लोगों से पैसे लेता था। इसके अलावा वह लड़कियों से वीडियो कॉल पर भी आर्मी की वर्दी में बात करता था, ताकि वह खुद को असली मेजर साबित कर सके। एक वर्दी पर गणेश कुमार और दूसरी पर गणेश दहिया लिखा था। लालकुर्ती पुलिस स्टेशन के इस मामले में किसी तरह गणेश भट्ट बच निकला। चंडीगढ़ लौटकर पुलिस अफसरों से दोस्ती की
यूपी में भी फंसने के बाद गणेश भट्ट चंडीगढ़-पंचकूला एरिया में लौट आया। इस दौरान उसने कुछ पुलिस वालों से दोस्ती कर ली। अभी तक की जांच में सामने आया है कि क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर के साथ उसका काफी उठना-बैठना शुरू हो गया। इंस्पेक्टर ने ब्रांच में उसका परिचय अपने कजिन ब्रदर के तौर पर करवाया। वो अक्सर आर्मी की ड्रेस पहन गाड़ी में आता और रुतबा बढ़ता गया। पुलिस सैल्यूट मारती थी, अफसरों के साथ टी-लंच
भट्ट का क्राइम ब्रांच में लगातार आना-जाना लगा रहता था। अक्सर उसे पुलिस वाले सैल्यूट मारते। सूत्रों से पता चला है कि भट्ट चंडीगढ़ में कुछ अफसरों के साथ टी-लंच तक कर चुका है और उनसे कई बार मिल चुका है। फोन पर भी उनकी बात होती रहती थी और मैसेज के जरिए भी संपर्क में रहता था। चंडीगढ़ पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी लड़कियों पर झूठ बोलकर बड़े-बड़े अफसरों के साथ लिंक बताकर उन्हें इंप्रेस करता था, ताकि उन्हें लगे कि वह बड़े-बड़े अफसर और नेताओं को जानता है। उसने कई नेताओं के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं हुई थी। चंडीगढ़ के एक पूर्व डीजीपी से बातचीत में उसने खुद को मेजर बताया। लेडी कॉन्स्टेबल को शादी का झांसा दे 5 लाख-सोने की अंगूठी ठगी
क्राइम ब्रांच में तैनात एक लेडी कॉन्स्टेबल भी उसके इम्प्रेशन में आ गई। लेडी महिला कॉन्स्टेबल ने उसके धोखे में आकर और शादी का विश्वास करके भट्ट को ₹5 लाख और एक सोने की अंगूठी दे दी। अब इस कॉन्स्टेबल ने भी शिकायत दर्ज कराई है, जिस पर गिरफ्तारी के बाद कार्रवाई चल रही है। एसपी को शक हुआ तो जांच शुरू हुई, जब परतें खुलने लगीं तो एसपी (क्राइम) जसबीर सिंह और डीएसपी धीरज कुमार को गणेश भट्ट पर शक हुआ। उन्होंने इसकी जांच करानी शुरू की। इसके बाद और परतें खुलने लगीं। जांच के दौरान पता चला कि भट्ट का आर्मी में कोई रिकॉर्ड नहीं है और वो लोगों से झूठ बोल रहा है। भट्ट ने हाईकोर्ट में अर्जी लगाई कि पुलिस उसे गिरफ्तार करने आई
गिरफ्तारी के अंदेशे के बीच गणेश भट्ट ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई कि चंडीगढ़ पुलिस ने 14 अगस्त की रात को उसे पंचकूला से जबरन पकड़ने की कोशिश की। उसके साथ मारपीट की और गाड़ी तोड़ दी। इसमें आरोपी के वकील निखिल के. वशिष्ठ ने कहा कि कोर्ट ने हरियाणा डीजीपी को मामले की जांच कर निपटारा करने के आदेश दिए थे। थर्ड डिग्री टॉर्चर के आरोप लगाए
वकील निखिल के. वशिष्ठ ने आरोप लगाया कि क्राइम ब्रांच ने गणेश भट्ट को थर्ड डिग्री टॉर्चर किया। इसके बाद सेक्टर-16 के एसएमओ ने मेडिकल बोर्ड बनाकर उसका मेडिकल करवाया और रिपोर्ट कोर्ट को भेजी। रिपोर्ट के मुताबिक, गणेश भट्ट के कान में चोट, आंख, हाथ-पैर और गाल पर सूजन और शरीर पर चोट के निशान पाए गए। वकील ने बताया कि उन्होंने कोर्ट में अर्जी देकर कहा था कि सेक्टर-16 अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज को प्रिजर्व करवा दिया जाए। जिसके बाद उसे प्रिजर्व करवा दिया गया है। इससे केस में उन्हें काफी मदद मिलेगी। महिला कॉन्स्टेबल की शिकायत पर 22 अगस्त को गिरफ्तारी
महिला कॉन्स्टेबल से 5 लाख की ठगी के मामले में 22 अगस्त को भट्ट को चंडीगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हालांकि उसे रिमांड पर लेने की क्राइम ब्रांच की अर्जी जिला अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने डीजीपी से रिपोर्ट भी मांगी थी कि यह केस क्राइम ब्रांच से हटाकर किसी और थाने को क्यों न दिया जाए। वजह ये है कि खुद क्राइम ब्रांच पर सवाल उठ रहे हैं– एक तो इस ठगी में क्राइम ब्रांच के ही एक इंस्पेक्टर पर आरोप हैं, दूसरा, आरोपी गणेश ने पुलिस पर थर्ड डिग्री टॉर्चर और मारपीट के आरोप लगाए हैं। जिसके बाद डीजीपी द्वारा मामले की जांच ऑपरेशन सेल को ट्रांसफर करने के लिए बोला गया। अब ऑपरेशन सेल कर रही जांच, जयपुर से वर्दी बरामद
अब यह केस क्राइम ब्रांच से लेकर ऑपरेशन सेल को दे दिया गया है। सेल ने उसे रिमांड पर लिया ताकि राजस्थान के जयपुर से उसकी आर्मी की वर्दी और गुरुग्राम से मोबाइल बरामद किया जा सके। ऑपरेशन सेल के अधिकारी ने बताया कि वर्दी व मोबाइल बरामद कर लिए हैं। हालांकि कॉन्स्टेबल से ली गई सोने की अंगूठी का बरामदगी में कोई जिक्र नहीं है। बुधवार को कोर्ट ने आरोपी को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया है। गुरुवार को भट्ट की बेल एप्लिकेशन को चंडीगढ़ कोर्ट ने खारिज कर दिया। आरोपी के वकील का दावा- झूठे केस में फंसाया जा रहा
आरोपी के वकील निखिल के. वशिष्ठ दावा करते हैं कि गणेश को झूठे केस में फंसाया जा रहा है और पुलिस की कहानी झूठी है। पहले भी पुलिस ने हिरासत में गणेश के साथ मारपीट की।
चंडीगढ़ पुलिस की तरफ से हरियाणा के पंचकूला से गिरफ्तार किए गए फर्जी मेजर गणेश भट्ट की जांच में कई खुलासे हो रहे हैं। अक्सर सेना की वर्दी में गनमैन व गाड़ियों में घूमने वाला भट्ट असल में BA फेल है। वो पिछले 8 साल से फौजी अफसर होने का नाटक कर रहा था। चंडीगढ़ पुलिस ने जांच के बाद दावा किया कि लड़कियों को इंप्रेस करने के लिए भट्ट ने वर्दी पहनना शुरू किया। फिर अग्निवीर भर्ती कराने के नाम पर तीन राज्यों उत्तराखंड, हरियाणा व यूपी में अनुमानित 50 से 60 लाख रुपए की ठगी की। कुछ समय पहले उसने चंडीगढ़ पुलिस के सेक्टर-11 की क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर के साथ दोस्ती कर ली। फिर वह अफसरों के बीच उठने-बैठने लगा। इसी बीच एक लेडी कॉन्स्टेबल उसके चक्कर में फंस गई। कॉन्स्टेबल को शादी का झांसा देकर 5 लाख रुपए और सोने की अंगूठी ले ली। बाद में इसी कॉन्स्टेबल की शिकायत पर भट्ट की पोल खुली। 22 अगस्त को भट्ट को गिरफ्तार कर लिया गया। पहले इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही थी, जिसे अब ऑपरेशन सेल को सौंपा गया है। जांच टीम भट्ट की कुंडली तो खंगाल ही रही है, इस मामले में कुछ पुलिस अफसर भी जांच के दायरे में हैं। फर्जी मेजर जिस लेडी कॉन्स्टेबल की शिकायत पर अरेस्ट हुआ है, वो मूलरूप से पंजाब की रहने वाली है। सिलसिलेवार पढ़ें…कैसे उत्तराखंड के रिटायर्ड सूबेदार का बेटा बना फर्जी आर्मी अफसर पिता आर्मी में सूबेदार थे, आर्मी का लाइफ स्टाइल पता था
उत्तराखंड के कुमाऊं डिवीजन के बागेश्वर जिले में एक छोटा सा गांव है पसदेव पट्टीगवाड़ी। गांव की आबादी एक हजार से भी कम है। गांव के लोग बेहद सरलता व सादगी वाले हैं। क्षेत्र के लोगों में सेना में जाने का क्रेज है। बागेश्वर इलाके से कई युवा एनडीए पास करके सेना में अफसर बने हैं। पसदेव गांव के जगदीश चंद्र भट्ट आर्मी में सूबेदार रहे हैं। इन्हीं जगदीश का बेटा है गणेश भट्ट, जो पिछले 8 साल से सेना में मेजर बनने का नाटक कर रहा था। संगत अच्छी नहीं थी, BA सेकेंड ईयर में पढ़ाई छोड़ी
पिता चाहते थे गणेश खूब पढ़े और सेना में अफसर बनें। पिता की नौकरी की वजह से गणेश सैन्य लाइफ स्टाइल के बारे में जानता था। हालांकि उसका मन पढ़ाई में नहीं लगता था। गलत संगत में पड़ गया। उसे लग्जरी लाइफ जीने का शौक था, लेकिन मेहनत नहीं करता था। संगत खराब हुई तो परीक्षा में सफलता नहीं मिली। BA सेकेंड ईयर में पढ़ाई छोड़ दी। परिवार ने समझाया, लेकिन उस पर कोई असर नहीं पड़ा। तंग आकर और बेटे की हरकतें देखकर परिवार ने उसे बेदखल कर दिया। आर्मी की ड्रेस पहनने लगा और भरोसा करने वाले लोगों को ठगने लगा
साल 2018 के आसपास गणेश भट्ट ने ड्रेस पहन खुद को आर्मी का मेजर बताना शुरू किया। उसकी हेयर कट से लेकर बातचीत का लहजा बिल्कुल अफसर जैसा रहा। बचपन से आर्मी का लाइफ-स्टाइल देख ही रखा था। वह उसी को कॉपी कर रहा था। पुलिस की जांच में उल्लेख है कि जो उस पर भरोसा करता वह उसको ठगता। खासकर युवाओं को आर्मी में भर्ती कराने का झांसा देता। सबसे पहले वो देहरादून में फंसा, समझौता कर लिया
गणेश भट्ट ऐसे युवाओं की तलाश में रहता था, जो सेना में भर्ती होना चाहते हैं। ऐसे ही कुछ कांड उसने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में किए। उसने पैसे लेकर नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी की। हालांकि उसकी पोल खुल गई, तो पीड़ितों ने उसके खिलाफ सबसे पहला केस देहरादून में साल 2021 में दर्ज कराया। एफआईआर दर्ज होने के बावजूद भट्ट ने किसी तरह शिकायतकर्ताओं से समझौता कर लिया। जिसके बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया और केस कोर्ट में जाकर खारिज कर दिया गया। फिर पंचकूला में आर्मी कैंप में प्रवेश करते पकड़ा
गणेश भट्ट का एक किस्सा पंचकूला का भी है। यहां उसने चंडी मंदिर आर्मी कैंप में फर्जी आई कार्ड दिखाकर अंदर जाने की कोशिश की। जब आई कार्ड चेक किया गया तो वह फर्जी निकला। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। यह केस साल 2021 का ही है। चंडीगढ़ पुलिस अब इसकी जांच कर रही है कि चंडी मंदिर केस का वर्तमान स्टेटस क्या है। मेरठ में अग्निवीर भर्ती कराने के नाम पर ठगी की
उत्तराखंड व हरियाणा में मामला हाईलाइट होने पर गणेश भट्ट ने उत्तर प्रदेश की तरफ रुख किया, हालांकि उसके रंग-ढंग नहीं बदले। यहां भी वह फौजी अफसर बनकर घूमने लगा। गाड़ियों में घूमता, लग्जरी लाइफ जीता। यहां भी कई युवा उसके प्रभाव में आकर फंस गए और अग्निवीर भर्ती होने के लिए भट्ट को पैसे दे बैठे। जब समय बीत गया और भर्ती नहीं करवाई तो लोगों ने अपने पैसे मांगे, लेकिन उसने पैसे नहीं लौटाए। इसके बाद इसकी शिकायत मेरठ पुलिस स्टेशन में दी गई और उसके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ। इस केस में अभी तक पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया है। मिलिट्री इंटेलिजेंस ने आर्मी ड्रेस में पकड़ा
19 अप्रैल 2023 को मेरठ में उसे मिलिट्री इंटेलिजेंस ने फर्जी मेजर बनकर घूमते हुए पकड़ा लिया। उसके पास से आर्मी की वर्दी-बूट और अन्य सामान बरामद हुआ। पूछताछ में उसने स्वीकार किया था कि वह नौकरी दिलवाने के नाम पर लोगों से पैसे लेता था। इसके अलावा वह लड़कियों से वीडियो कॉल पर भी आर्मी की वर्दी में बात करता था, ताकि वह खुद को असली मेजर साबित कर सके। एक वर्दी पर गणेश कुमार और दूसरी पर गणेश दहिया लिखा था। लालकुर्ती पुलिस स्टेशन के इस मामले में किसी तरह गणेश भट्ट बच निकला। चंडीगढ़ लौटकर पुलिस अफसरों से दोस्ती की
यूपी में भी फंसने के बाद गणेश भट्ट चंडीगढ़-पंचकूला एरिया में लौट आया। इस दौरान उसने कुछ पुलिस वालों से दोस्ती कर ली। अभी तक की जांच में सामने आया है कि क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर के साथ उसका काफी उठना-बैठना शुरू हो गया। इंस्पेक्टर ने ब्रांच में उसका परिचय अपने कजिन ब्रदर के तौर पर करवाया। वो अक्सर आर्मी की ड्रेस पहन गाड़ी में आता और रुतबा बढ़ता गया। पुलिस सैल्यूट मारती थी, अफसरों के साथ टी-लंच
भट्ट का क्राइम ब्रांच में लगातार आना-जाना लगा रहता था। अक्सर उसे पुलिस वाले सैल्यूट मारते। सूत्रों से पता चला है कि भट्ट चंडीगढ़ में कुछ अफसरों के साथ टी-लंच तक कर चुका है और उनसे कई बार मिल चुका है। फोन पर भी उनकी बात होती रहती थी और मैसेज के जरिए भी संपर्क में रहता था। चंडीगढ़ पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी लड़कियों पर झूठ बोलकर बड़े-बड़े अफसरों के साथ लिंक बताकर उन्हें इंप्रेस करता था, ताकि उन्हें लगे कि वह बड़े-बड़े अफसर और नेताओं को जानता है। उसने कई नेताओं के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं हुई थी। चंडीगढ़ के एक पूर्व डीजीपी से बातचीत में उसने खुद को मेजर बताया। लेडी कॉन्स्टेबल को शादी का झांसा दे 5 लाख-सोने की अंगूठी ठगी
क्राइम ब्रांच में तैनात एक लेडी कॉन्स्टेबल भी उसके इम्प्रेशन में आ गई। लेडी महिला कॉन्स्टेबल ने उसके धोखे में आकर और शादी का विश्वास करके भट्ट को ₹5 लाख और एक सोने की अंगूठी दे दी। अब इस कॉन्स्टेबल ने भी शिकायत दर्ज कराई है, जिस पर गिरफ्तारी के बाद कार्रवाई चल रही है। एसपी को शक हुआ तो जांच शुरू हुई, जब परतें खुलने लगीं तो एसपी (क्राइम) जसबीर सिंह और डीएसपी धीरज कुमार को गणेश भट्ट पर शक हुआ। उन्होंने इसकी जांच करानी शुरू की। इसके बाद और परतें खुलने लगीं। जांच के दौरान पता चला कि भट्ट का आर्मी में कोई रिकॉर्ड नहीं है और वो लोगों से झूठ बोल रहा है। भट्ट ने हाईकोर्ट में अर्जी लगाई कि पुलिस उसे गिरफ्तार करने आई
गिरफ्तारी के अंदेशे के बीच गणेश भट्ट ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई कि चंडीगढ़ पुलिस ने 14 अगस्त की रात को उसे पंचकूला से जबरन पकड़ने की कोशिश की। उसके साथ मारपीट की और गाड़ी तोड़ दी। इसमें आरोपी के वकील निखिल के. वशिष्ठ ने कहा कि कोर्ट ने हरियाणा डीजीपी को मामले की जांच कर निपटारा करने के आदेश दिए थे। थर्ड डिग्री टॉर्चर के आरोप लगाए
वकील निखिल के. वशिष्ठ ने आरोप लगाया कि क्राइम ब्रांच ने गणेश भट्ट को थर्ड डिग्री टॉर्चर किया। इसके बाद सेक्टर-16 के एसएमओ ने मेडिकल बोर्ड बनाकर उसका मेडिकल करवाया और रिपोर्ट कोर्ट को भेजी। रिपोर्ट के मुताबिक, गणेश भट्ट के कान में चोट, आंख, हाथ-पैर और गाल पर सूजन और शरीर पर चोट के निशान पाए गए। वकील ने बताया कि उन्होंने कोर्ट में अर्जी देकर कहा था कि सेक्टर-16 अस्पताल की सीसीटीवी फुटेज को प्रिजर्व करवा दिया जाए। जिसके बाद उसे प्रिजर्व करवा दिया गया है। इससे केस में उन्हें काफी मदद मिलेगी। महिला कॉन्स्टेबल की शिकायत पर 22 अगस्त को गिरफ्तारी
महिला कॉन्स्टेबल से 5 लाख की ठगी के मामले में 22 अगस्त को भट्ट को चंडीगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हालांकि उसे रिमांड पर लेने की क्राइम ब्रांच की अर्जी जिला अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने डीजीपी से रिपोर्ट भी मांगी थी कि यह केस क्राइम ब्रांच से हटाकर किसी और थाने को क्यों न दिया जाए। वजह ये है कि खुद क्राइम ब्रांच पर सवाल उठ रहे हैं– एक तो इस ठगी में क्राइम ब्रांच के ही एक इंस्पेक्टर पर आरोप हैं, दूसरा, आरोपी गणेश ने पुलिस पर थर्ड डिग्री टॉर्चर और मारपीट के आरोप लगाए हैं। जिसके बाद डीजीपी द्वारा मामले की जांच ऑपरेशन सेल को ट्रांसफर करने के लिए बोला गया। अब ऑपरेशन सेल कर रही जांच, जयपुर से वर्दी बरामद
अब यह केस क्राइम ब्रांच से लेकर ऑपरेशन सेल को दे दिया गया है। सेल ने उसे रिमांड पर लिया ताकि राजस्थान के जयपुर से उसकी आर्मी की वर्दी और गुरुग्राम से मोबाइल बरामद किया जा सके। ऑपरेशन सेल के अधिकारी ने बताया कि वर्दी व मोबाइल बरामद कर लिए हैं। हालांकि कॉन्स्टेबल से ली गई सोने की अंगूठी का बरामदगी में कोई जिक्र नहीं है। बुधवार को कोर्ट ने आरोपी को ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया है। गुरुवार को भट्ट की बेल एप्लिकेशन को चंडीगढ़ कोर्ट ने खारिज कर दिया। आरोपी के वकील का दावा- झूठे केस में फंसाया जा रहा
आरोपी के वकील निखिल के. वशिष्ठ दावा करते हैं कि गणेश को झूठे केस में फंसाया जा रहा है और पुलिस की कहानी झूठी है। पहले भी पुलिस ने हिरासत में गणेश के साथ मारपीट की।