हरियाणा की जेलों में अब मणिपुर और असम में हुई हिंसा के पत्थरबाज भी रखे जा रहे हैं। डीजी जेल आलोक राय ने बताया कि करीब 250 पत्थरबाजों को अलग-अलग जेलों में हाई सिक्योरिटी में रखा गया है। इन कैदियों को वहां की राज्य सरकारों की अनुमति लेकर हरियाणा लाया गया है। इससे पहले जम्मू-कश्मीर के पत्थरबाज भी हरियाणा की जेलों में शिफ्ट किए गए थे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इनके लिए खास इंतजाम किए गए हैं। अब पढ़िए कैसे शिफ्ट हुए यहां पत्थरबाज
दूसरे राज्यों के कैदियों को हरियाणा लाने के लिए एक तय प्रक्रिया होती है। यह प्रक्रिया जेल मैन्युअल में लिखी हुई है। इसके तहत दोनों राज्यों के डीजीपी आपस में बातचीत करके सहमति का लेटर साइन करते हैं। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि इसके लिए दोनों राज्य सरकारों की मंजूरी लेनी पड़ती है। अगर किसी राज्य में कैदी की सुरक्षा को खतरा हो जाता है, तो उसे सुरक्षित रखने के लिए उसे दूसरे राज्य की जेल में शिफ्ट कर दिया जाता है। यहां पढ़िए जेलों में कैसे रखे गए हैं
असम और मणिपुर के इन पत्थरबाजों की सुरक्षा को लेकर हरियाणा की जेलों में विशेष इंतजाम किए गए हैं। इनके लिए हाई सिक्योरिटी जेलों में अलग से बैरक बनाए गए हैं। इसके अलावा इन बैरकों में अलग अलग सेल्स भी बने हैं, जहां इन्हें रखा जाता है। इनका कंपाउंड भी आम कैदियों से अलग होता है। 6 जेलों के बाहर बीएसएफ की सिक्योरिटी
डीजी जेल ने बताया कि हरियाणा में मौजूदा समय में प्रदेश की 6 जेलों की बाहरी सुरक्षा सीमा सुरक्षा बल के हवाले की गई हैं। इनमें करनाल, झज्जर, फरीदाबाद, यमुनानगर, गुरुग्राम और रोहतक जेल हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में यदि किसी और जेल की बाहरी सुरक्षा को लेकर कोई सोर्स रिपोर्ट आती है तो वहां पर भी बीएसएफ की तैनाती पर विचार किया जा सकता है। स्टाफ की कमी दूर करने की कोशिश
डीजी जेल ने बताया कि हरियाणा की जेलों की क्षमता 22 हजार कैदियों की है, जबकि मौजूदा संख्या 27 हजार है। स्टाफ की कमी दूर करने पर काम चल रहा है। रोहतक में हाई सिक्योरिटी जेल का निर्माण तीन महीने में पूरा होगा। पंचकूला और फतेहाबाद में नई जेलों के लिए जमीन मिल चुकी है।
हरियाणा की जेलों में अब मणिपुर और असम में हुई हिंसा के पत्थरबाज भी रखे जा रहे हैं। डीजी जेल आलोक राय ने बताया कि करीब 250 पत्थरबाजों को अलग-अलग जेलों में हाई सिक्योरिटी में रखा गया है। इन कैदियों को वहां की राज्य सरकारों की अनुमति लेकर हरियाणा लाया गया है। इससे पहले जम्मू-कश्मीर के पत्थरबाज भी हरियाणा की जेलों में शिफ्ट किए गए थे। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इनके लिए खास इंतजाम किए गए हैं। अब पढ़िए कैसे शिफ्ट हुए यहां पत्थरबाज
दूसरे राज्यों के कैदियों को हरियाणा लाने के लिए एक तय प्रक्रिया होती है। यह प्रक्रिया जेल मैन्युअल में लिखी हुई है। इसके तहत दोनों राज्यों के डीजीपी आपस में बातचीत करके सहमति का लेटर साइन करते हैं। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि इसके लिए दोनों राज्य सरकारों की मंजूरी लेनी पड़ती है। अगर किसी राज्य में कैदी की सुरक्षा को खतरा हो जाता है, तो उसे सुरक्षित रखने के लिए उसे दूसरे राज्य की जेल में शिफ्ट कर दिया जाता है। यहां पढ़िए जेलों में कैसे रखे गए हैं
असम और मणिपुर के इन पत्थरबाजों की सुरक्षा को लेकर हरियाणा की जेलों में विशेष इंतजाम किए गए हैं। इनके लिए हाई सिक्योरिटी जेलों में अलग से बैरक बनाए गए हैं। इसके अलावा इन बैरकों में अलग अलग सेल्स भी बने हैं, जहां इन्हें रखा जाता है। इनका कंपाउंड भी आम कैदियों से अलग होता है। 6 जेलों के बाहर बीएसएफ की सिक्योरिटी
डीजी जेल ने बताया कि हरियाणा में मौजूदा समय में प्रदेश की 6 जेलों की बाहरी सुरक्षा सीमा सुरक्षा बल के हवाले की गई हैं। इनमें करनाल, झज्जर, फरीदाबाद, यमुनानगर, गुरुग्राम और रोहतक जेल हैं। उन्होंने बताया कि भविष्य में यदि किसी और जेल की बाहरी सुरक्षा को लेकर कोई सोर्स रिपोर्ट आती है तो वहां पर भी बीएसएफ की तैनाती पर विचार किया जा सकता है। स्टाफ की कमी दूर करने की कोशिश
डीजी जेल ने बताया कि हरियाणा की जेलों की क्षमता 22 हजार कैदियों की है, जबकि मौजूदा संख्या 27 हजार है। स्टाफ की कमी दूर करने पर काम चल रहा है। रोहतक में हाई सिक्योरिटी जेल का निर्माण तीन महीने में पूरा होगा। पंचकूला और फतेहाबाद में नई जेलों के लिए जमीन मिल चुकी है।