हरियाणा में बैठक में अफसरों की डांट के बाद लेडी डॉक्टर के रोने से सरकारी डॉक्टरों और विभागीय अफसरों के बीच विवाद गहरा गया है। सरकारी डॉक्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाली हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (HCMSA) ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को इस संबंध में लिखित शिकायत दी है। शिकायत में HCMSA ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ-साथ नेशनल हेल्थ मिशन के मदर एंड चाइल्ड (MCH) के डायरेक्टर के रवैये पर विशेष रूप से आपत्ति जताई है। HCMSA के राज्य महासचिव डॉ. अनिल यादव ने बताया कि शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई है, इसकी जानकारी नहीं है। वहीं, MCH के डायरेक्टर डॉ. विरेंद्र यादव ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा- विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारी बैठकों में मौजूद रहते हैं, और उनकी उपस्थिति में किसी भी अधिकारी द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग करने का सवाल ही नहीं उठता। सरकारी डॉक्टरों की एसोसिएशन की शिकायत पर हेल्थ विभाग के डायरेक्टर जनरल डॉ. कुलदीप ने कहा कि एक बैठक में जब एक डॉक्टर से टीबी और मलेरिया के इलाज के बारे में पूछा गया, तो उसे इसकी जानकारी तक नहीं थी। उन्होंने कहा कि ऐसे डॉक्टर को डॉक्टर कहलाने का हक नहीं है। उन्होंने डिप्टी CMO के प्रदर्शन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी सैलरी 3 लाख से अधिक है, लेकिन समीक्षा में उनका प्रदर्शन शून्य है। अब जानिए क्या है पूरा मामला, क्यों अफसरों की डांट पर रो पड़ीं लेडी डॉक्टर सार्थक मीटिंग में शुरू हुआ विवाद
3 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से विवाद की शुरुआत हुई। बैठक में नेशनल हेल्थ मिशन के एमडी, डीजी हेल्थ, MCH के डायरेक्टर समेत सभी जिलों के CMO, PMO, डिप्टी CMO और SMO जुड़े। ये बैठक केंद्र व राज्य सरकारी की ओर से चलाई जा रही स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा के लिए थी, लेकिन रिव्यू करने वाले अधिकारियों की टिप्पणी की वजह से चर्चा में आ गई। अफसरों के अपशब्द सुन बैठक में रो पड़ीं एक लेडी डॉक्टर
बताया जा रहा है कि इस मीटिंग में अफसर बार-बार चार्जशीट करने की धमकी दे रहे थे। बैठक में मौजूद एक डॉक्टर ने बताया कि अफसरों के रवैये से आहत होकर एक सीनियर महिला डॉक्टर की तो आंखों में आंसू तक आ गए। CMO लेवल की इस लेडी डॉक्टर की रिटायरमेंट नजदीक है। बैठक ले रहे अधिकारियों ने कठोर अंदाज में यहां तक कह दिया कि आपको काम नहीं करना आता, आपको तो हटा देना चाहिए। कई जिलों के सीनियर डॉक्टरों की शिकायत के बाद एसोसिएशन आगे आई
इस बैठक के बाद कई CMO, डिप्टी CMO व नोडल अधिकारियों ने हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन को शिकायत दर्ज कराई। खासकर हिसार, सिरसा व झज्जर जिलों से शिकायतें आईं। जिसके बाद 4 सितंबर को एसोसिएशन के लेटर हेड पर CM को शिकायत भेजी गई। एसोसिएशन की झज्जर जिला प्रधान डॉ. आकृति हुड्डा ने बताया कि यह जिले के सभी डॉक्टरों की ओर से की गई सामूहिक शिकायत है। उन्होंने बताया कि हाल ही में हुई कुछ बैठकों में एनएचएम के एमडी और अन्य अधिकारियों का व्यवहार उचित नहीं था। उनका बोलने का तरीका सही नहीं था और वे बार-बार चार्जशीट की धमकी देते हैं, जिससे डॉक्टरों में निराशा और मानसिक तनाव है। डॉ. हुड्डा ने बताया कि पिछले दिनों पीएनडीटी की बैठक में 900 से कम लिंगानुपात वाले कुछ CMO और SMO को सरेआम चार्जशीट की धमकी दी गई। वहीं, झज्जर CMO डॉ. जयमाला ने इस पूरे मामले पर अनभिज्ञता जताई है। HCMSA ने शिकायत में ये 4 अहम बातें उठाईं अब पढ़िए इस लेटर पर अधिकारियों ने क्या प्रतिक्रिया दी MCH के डायरेक्टर बोले-कोई अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं
एचसीएमएस की ओर से सीएम को भेजे लेटर में लिखी शिकायतों पर नेशनल हेल्थ मिशन के मदर एंड चाइल्ड (MCH) डायरेक्टर डॉ. विरेंद्र यादव ने कहा- बैठक में सभी उच्चाधिकारी होते हैं। उनके होते हुए मैं या कोई अन्य अधिकारी भी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं कर सकता। हमारा उद्देश्य सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का होता है। डीजी हेल्थ बोले- डॉक्टरों की लाखों की सैलरी, समीक्षा में नतीजे जीरो
सार्थक टीम का हिस्सा रहे स्वास्थ्य महानिदेशक (डीजी हेल्थ) डॉ. कुलदीप ने कहा- कुछ चिकित्सा अधिकारी लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उनके कामों की समीक्षा की जाती है, तो वह जीरो मिलता है। एक डिप्टी सीएमओ को विभाग 3 लाख से ज्यादा सैलरी देता है। जब उसके कार्यों की समीक्षा की जाती है तो वह निल मिलती है। ऐसे में विभाग के नियमों के तहत उन्हें चेतावनी दी जाती है कि या तो वे काम में प्रगति लाएं वरना चार्जशीट या नियमानुसार अन्य कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सरकार को रिपोर्ट भी भेज रखी है। सरकार की ओर से तीन-चार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है। एचसीएमएस ने सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए शिकायत की है। एक डॉक्टर को टीबी और मलेरिया का इलाज भी नहीं पता था
डॉ. कुलदीप ने बताया कि पिछले दिनों हुई बैठक में जब एक डॉक्टर से पूछा गया कि टीबी और मलेरिया का इलाज कैसे होता है, तो उसे इसकी जानकारी ही नहीं थी। ऐसे में उसे डॉक्टर कहलाने का ही हक नहीं। रही बात एक साल पहले बी‑पाल‑एम रेजीमेन जारी किया गया था। यह टीबी के इलाज की आधुनिक पद्धति है। एक डॉक्टर को तो यह भी पता नहीं चला। कई डॉक्टरों को तो अपने फील्ड के प्रोग्राम की भी जानकारी नहीं थी। ऐसे में उन्हें यही गया था कि अगर उन्हें कोई जानकारी नहीं है तो वे कम से कम सीख तो लें, ताकि भविष्य में लोगों की सेहत के साथ कोई खिलवाड़ न हो। अब एक नजर…प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों की लगातार हो रही कमी पर सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर कम, नियुक्ति के बाद भी 206 ने ठुकराया ऑफर
हरियाणा के सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की लगातार कमी बनी हुई है। मेडिकल ऑफिसर (एमओ) के कुल मंजूर 3,969 पद हैं। करीब 1506 पद रिक्त हैं। इनमें से सरकार ने 777 मेडिकल ऑफिसरों की भर्ती के लिए हरियाणा सरकार ने अगस्त 2024 में प्रक्रिया शुरू की। परीक्षा के बाद 6 दिसंबर को परिणाम जारी कर दिया गया, लेकिन इसके तीन महीने बाद भी सभी चयनित मेडिकल ऑफिसरों को नियुक्ति नहीं मिल पाई। इस वजह से 206 चयनित डॉक्टरों ने जॉइनिंग ऑफर ही ठुकरा दिया। प्रदेश में एसएमओ के 644 पदों में से 219 खाली पड़े हैं। कई डॉक्टर बगैर सूचना दिए गैर हाजिर, 40 को हटाया
स्वास्थ्य विभाग ने 40 ऐसे सरकारी डॉक्टरों की लिस्ट तैयार की थी, जो पांच साल से अधिक समय से ड्यूटी पर नहीं लौटे। इस साल मार्च में स्वास्थ्य विभाग ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इन डॉक्टरों को चार्जशीट किया। डॉक्टरों द्वारा कोई जवाब नहीं देने पर इनका सेवा से त्यागपत्र माना जाता है। इस कार्रवाई के बाद यह मामले सरकार को भेजे गए हैं। हरियाणा में डॉक्टरों की वीआरएस और रिजाइन देने की दर ज्यादा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हरियाणा में डॉक्टरों की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) और इस्तीफे देने की दर ज्यादा है। इससे चिंतित सरकार ने कारण जानने के लिए एक कमेटी का गठन किया था। यह पता लगाना था कि विशेषज्ञ सरकारी नौकरी किन कारणों से छोड़ रहे हैं। हालांकि कमेटी की रिपोर्ट आई या नहीं, यह बात आज तक सार्वजनिक नहीं हो पाई। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसिस एसोसिएशन ने CM को लिखा लेटर…
हरियाणा में बैठक में अफसरों की डांट के बाद लेडी डॉक्टर के रोने से सरकारी डॉक्टरों और विभागीय अफसरों के बीच विवाद गहरा गया है। सरकारी डॉक्टरों का प्रतिनिधित्व करने वाली हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (HCMSA) ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को इस संबंध में लिखित शिकायत दी है। शिकायत में HCMSA ने स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ-साथ नेशनल हेल्थ मिशन के मदर एंड चाइल्ड (MCH) के डायरेक्टर के रवैये पर विशेष रूप से आपत्ति जताई है। HCMSA के राज्य महासचिव डॉ. अनिल यादव ने बताया कि शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई है, इसकी जानकारी नहीं है। वहीं, MCH के डायरेक्टर डॉ. विरेंद्र यादव ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा- विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारी बैठकों में मौजूद रहते हैं, और उनकी उपस्थिति में किसी भी अधिकारी द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग करने का सवाल ही नहीं उठता। सरकारी डॉक्टरों की एसोसिएशन की शिकायत पर हेल्थ विभाग के डायरेक्टर जनरल डॉ. कुलदीप ने कहा कि एक बैठक में जब एक डॉक्टर से टीबी और मलेरिया के इलाज के बारे में पूछा गया, तो उसे इसकी जानकारी तक नहीं थी। उन्होंने कहा कि ऐसे डॉक्टर को डॉक्टर कहलाने का हक नहीं है। उन्होंने डिप्टी CMO के प्रदर्शन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी सैलरी 3 लाख से अधिक है, लेकिन समीक्षा में उनका प्रदर्शन शून्य है। अब जानिए क्या है पूरा मामला, क्यों अफसरों की डांट पर रो पड़ीं लेडी डॉक्टर सार्थक मीटिंग में शुरू हुआ विवाद
3 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से विवाद की शुरुआत हुई। बैठक में नेशनल हेल्थ मिशन के एमडी, डीजी हेल्थ, MCH के डायरेक्टर समेत सभी जिलों के CMO, PMO, डिप्टी CMO और SMO जुड़े। ये बैठक केंद्र व राज्य सरकारी की ओर से चलाई जा रही स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा के लिए थी, लेकिन रिव्यू करने वाले अधिकारियों की टिप्पणी की वजह से चर्चा में आ गई। अफसरों के अपशब्द सुन बैठक में रो पड़ीं एक लेडी डॉक्टर
बताया जा रहा है कि इस मीटिंग में अफसर बार-बार चार्जशीट करने की धमकी दे रहे थे। बैठक में मौजूद एक डॉक्टर ने बताया कि अफसरों के रवैये से आहत होकर एक सीनियर महिला डॉक्टर की तो आंखों में आंसू तक आ गए। CMO लेवल की इस लेडी डॉक्टर की रिटायरमेंट नजदीक है। बैठक ले रहे अधिकारियों ने कठोर अंदाज में यहां तक कह दिया कि आपको काम नहीं करना आता, आपको तो हटा देना चाहिए। कई जिलों के सीनियर डॉक्टरों की शिकायत के बाद एसोसिएशन आगे आई
इस बैठक के बाद कई CMO, डिप्टी CMO व नोडल अधिकारियों ने हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन को शिकायत दर्ज कराई। खासकर हिसार, सिरसा व झज्जर जिलों से शिकायतें आईं। जिसके बाद 4 सितंबर को एसोसिएशन के लेटर हेड पर CM को शिकायत भेजी गई। एसोसिएशन की झज्जर जिला प्रधान डॉ. आकृति हुड्डा ने बताया कि यह जिले के सभी डॉक्टरों की ओर से की गई सामूहिक शिकायत है। उन्होंने बताया कि हाल ही में हुई कुछ बैठकों में एनएचएम के एमडी और अन्य अधिकारियों का व्यवहार उचित नहीं था। उनका बोलने का तरीका सही नहीं था और वे बार-बार चार्जशीट की धमकी देते हैं, जिससे डॉक्टरों में निराशा और मानसिक तनाव है। डॉ. हुड्डा ने बताया कि पिछले दिनों पीएनडीटी की बैठक में 900 से कम लिंगानुपात वाले कुछ CMO और SMO को सरेआम चार्जशीट की धमकी दी गई। वहीं, झज्जर CMO डॉ. जयमाला ने इस पूरे मामले पर अनभिज्ञता जताई है। HCMSA ने शिकायत में ये 4 अहम बातें उठाईं अब पढ़िए इस लेटर पर अधिकारियों ने क्या प्रतिक्रिया दी MCH के डायरेक्टर बोले-कोई अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं
एचसीएमएस की ओर से सीएम को भेजे लेटर में लिखी शिकायतों पर नेशनल हेल्थ मिशन के मदर एंड चाइल्ड (MCH) डायरेक्टर डॉ. विरेंद्र यादव ने कहा- बैठक में सभी उच्चाधिकारी होते हैं। उनके होते हुए मैं या कोई अन्य अधिकारी भी अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं कर सकता। हमारा उद्देश्य सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का होता है। डीजी हेल्थ बोले- डॉक्टरों की लाखों की सैलरी, समीक्षा में नतीजे जीरो
सार्थक टीम का हिस्सा रहे स्वास्थ्य महानिदेशक (डीजी हेल्थ) डॉ. कुलदीप ने कहा- कुछ चिकित्सा अधिकारी लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उनके कामों की समीक्षा की जाती है, तो वह जीरो मिलता है। एक डिप्टी सीएमओ को विभाग 3 लाख से ज्यादा सैलरी देता है। जब उसके कार्यों की समीक्षा की जाती है तो वह निल मिलती है। ऐसे में विभाग के नियमों के तहत उन्हें चेतावनी दी जाती है कि या तो वे काम में प्रगति लाएं वरना चार्जशीट या नियमानुसार अन्य कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सरकार को रिपोर्ट भी भेज रखी है। सरकार की ओर से तीन-चार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है। एचसीएमएस ने सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए शिकायत की है। एक डॉक्टर को टीबी और मलेरिया का इलाज भी नहीं पता था
डॉ. कुलदीप ने बताया कि पिछले दिनों हुई बैठक में जब एक डॉक्टर से पूछा गया कि टीबी और मलेरिया का इलाज कैसे होता है, तो उसे इसकी जानकारी ही नहीं थी। ऐसे में उसे डॉक्टर कहलाने का ही हक नहीं। रही बात एक साल पहले बी‑पाल‑एम रेजीमेन जारी किया गया था। यह टीबी के इलाज की आधुनिक पद्धति है। एक डॉक्टर को तो यह भी पता नहीं चला। कई डॉक्टरों को तो अपने फील्ड के प्रोग्राम की भी जानकारी नहीं थी। ऐसे में उन्हें यही गया था कि अगर उन्हें कोई जानकारी नहीं है तो वे कम से कम सीख तो लें, ताकि भविष्य में लोगों की सेहत के साथ कोई खिलवाड़ न हो। अब एक नजर…प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों की लगातार हो रही कमी पर सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर कम, नियुक्ति के बाद भी 206 ने ठुकराया ऑफर
हरियाणा के सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की लगातार कमी बनी हुई है। मेडिकल ऑफिसर (एमओ) के कुल मंजूर 3,969 पद हैं। करीब 1506 पद रिक्त हैं। इनमें से सरकार ने 777 मेडिकल ऑफिसरों की भर्ती के लिए हरियाणा सरकार ने अगस्त 2024 में प्रक्रिया शुरू की। परीक्षा के बाद 6 दिसंबर को परिणाम जारी कर दिया गया, लेकिन इसके तीन महीने बाद भी सभी चयनित मेडिकल ऑफिसरों को नियुक्ति नहीं मिल पाई। इस वजह से 206 चयनित डॉक्टरों ने जॉइनिंग ऑफर ही ठुकरा दिया। प्रदेश में एसएमओ के 644 पदों में से 219 खाली पड़े हैं। कई डॉक्टर बगैर सूचना दिए गैर हाजिर, 40 को हटाया
स्वास्थ्य विभाग ने 40 ऐसे सरकारी डॉक्टरों की लिस्ट तैयार की थी, जो पांच साल से अधिक समय से ड्यूटी पर नहीं लौटे। इस साल मार्च में स्वास्थ्य विभाग ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इन डॉक्टरों को चार्जशीट किया। डॉक्टरों द्वारा कोई जवाब नहीं देने पर इनका सेवा से त्यागपत्र माना जाता है। इस कार्रवाई के बाद यह मामले सरकार को भेजे गए हैं। हरियाणा में डॉक्टरों की वीआरएस और रिजाइन देने की दर ज्यादा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हरियाणा में डॉक्टरों की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) और इस्तीफे देने की दर ज्यादा है। इससे चिंतित सरकार ने कारण जानने के लिए एक कमेटी का गठन किया था। यह पता लगाना था कि विशेषज्ञ सरकारी नौकरी किन कारणों से छोड़ रहे हैं। हालांकि कमेटी की रिपोर्ट आई या नहीं, यह बात आज तक सार्वजनिक नहीं हो पाई। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसिस एसोसिएशन ने CM को लिखा लेटर…