पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए यूटी प्रशासन ने स्विट्जरलैंड के जेनेवा में यूनेस्को को हाईकोर्ट के हॉलिस्टिक डेवलपमेंट प्लान का संशोधित प्रस्ताव सौंपा है। इस प्रस्ताव में 16 नए कोर्ट बनाने के साथ वकीलों के चैंबर, पार्किंग, कैफेटेरिया और प्रशासनिक ब्लॉक की व्यवस्था शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, यूनेस्को की टीम ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और अब 20 दिन के भीतर बैठक की मिनट्स ऑफ मीटिंग जारी होने का इंतजार है। चीफ सेक्रेटरी समेत शीर्ष अधिकारी पहुंचे जेनेवा
जेनेवा में हुई बैठक में यूटी प्रशासन की ओर से चीफ सेक्रेटरी राजीव वर्मा, चीफ आर्किटेक्ट राजीव कुमार मेहता और सीनियर आर्किटेक्ट संगीता बग्गा शामिल हुए। अधिकारियों ने बताया कि हाईकोर्ट विकास योजना का निर्माण दायरा घटाकर अब केवल 2 लाख वर्ग फीट रखा गया है। सभी निर्माण कार्य मौजूदा हाईकोर्ट परिसर के भीतर ही होंगे, लेकिन धरोहर इमारतों से दूरी बनाकर किए जाएंगे। जगह की कमी को देखते हुए बहुमंजिला इमारतें बनाने की योजना है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि हाईकोर्ट में रोजाना करीब 10 हजार वकील, 3300 कर्मचारी, हजारों याचिकाकर्ता और लगभग 10 हजार वाहन आते हैं, ऐसे में परिसर में अतिरिक्त सुविधाओं का होना बेहद जरूरी हो गया है। पहले आईकोमोस ने जताई थी आपत्ति
गौरतलब है कि इससे पहले यूनेस्को और उसकी संस्था इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स (आईकोमोस) ने पुरानी योजना पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इस योजना से कैपिटल कांप्लेक्स की विश्व धरोहर पहचान (OUV) को नुकसान पहुंच सकता है। इसी वजह से अंडरग्राउंड पार्किंग और एसी चिलर प्लांट जैसी योजनाओं को रोक दिया गया था। कोर्ट ने भी प्रशासन से मांगा था जवाब
पिछले महीने हाईकोर्ट ने कर्मचारियों की एसोसिएशन के सचिव विनोद धत्तरवाल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासन से पूछा था कि क्या यह नई विकास योजना यूटी प्रशासन और हेरिटेज कमेटी दोनों से मंजूर हुई है, खासकर तब जब कोर्टरूम की संख्या घटा दी गई है। इससे पहले प्रशासन ने हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट (HIA) भी कराया था। 2023 की आईकोमोस समीक्षा में यह साफ कहा गया था कि हाईकोर्ट की पिछली ओर की ग्रीन बेल्ट और खुली जगहों को बचाए रखना जरूरी है। हालांकि, समीक्षा में यह भी माना गया था कि मौजूदा और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए विस्तार की योजना जरूरी है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए यूटी प्रशासन ने स्विट्जरलैंड के जेनेवा में यूनेस्को को हाईकोर्ट के हॉलिस्टिक डेवलपमेंट प्लान का संशोधित प्रस्ताव सौंपा है। इस प्रस्ताव में 16 नए कोर्ट बनाने के साथ वकीलों के चैंबर, पार्किंग, कैफेटेरिया और प्रशासनिक ब्लॉक की व्यवस्था शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, यूनेस्को की टीम ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और अब 20 दिन के भीतर बैठक की मिनट्स ऑफ मीटिंग जारी होने का इंतजार है। चीफ सेक्रेटरी समेत शीर्ष अधिकारी पहुंचे जेनेवा
जेनेवा में हुई बैठक में यूटी प्रशासन की ओर से चीफ सेक्रेटरी राजीव वर्मा, चीफ आर्किटेक्ट राजीव कुमार मेहता और सीनियर आर्किटेक्ट संगीता बग्गा शामिल हुए। अधिकारियों ने बताया कि हाईकोर्ट विकास योजना का निर्माण दायरा घटाकर अब केवल 2 लाख वर्ग फीट रखा गया है। सभी निर्माण कार्य मौजूदा हाईकोर्ट परिसर के भीतर ही होंगे, लेकिन धरोहर इमारतों से दूरी बनाकर किए जाएंगे। जगह की कमी को देखते हुए बहुमंजिला इमारतें बनाने की योजना है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि हाईकोर्ट में रोजाना करीब 10 हजार वकील, 3300 कर्मचारी, हजारों याचिकाकर्ता और लगभग 10 हजार वाहन आते हैं, ऐसे में परिसर में अतिरिक्त सुविधाओं का होना बेहद जरूरी हो गया है। पहले आईकोमोस ने जताई थी आपत्ति
गौरतलब है कि इससे पहले यूनेस्को और उसकी संस्था इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स (आईकोमोस) ने पुरानी योजना पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि इस योजना से कैपिटल कांप्लेक्स की विश्व धरोहर पहचान (OUV) को नुकसान पहुंच सकता है। इसी वजह से अंडरग्राउंड पार्किंग और एसी चिलर प्लांट जैसी योजनाओं को रोक दिया गया था। कोर्ट ने भी प्रशासन से मांगा था जवाब
पिछले महीने हाईकोर्ट ने कर्मचारियों की एसोसिएशन के सचिव विनोद धत्तरवाल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रशासन से पूछा था कि क्या यह नई विकास योजना यूटी प्रशासन और हेरिटेज कमेटी दोनों से मंजूर हुई है, खासकर तब जब कोर्टरूम की संख्या घटा दी गई है। इससे पहले प्रशासन ने हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट (HIA) भी कराया था। 2023 की आईकोमोस समीक्षा में यह साफ कहा गया था कि हाईकोर्ट की पिछली ओर की ग्रीन बेल्ट और खुली जगहों को बचाए रखना जरूरी है। हालांकि, समीक्षा में यह भी माना गया था कि मौजूदा और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए विस्तार की योजना जरूरी है।