भिवानी जिले के गांव ढाणी लक्ष्मण की रहने वाली टीचर मनीषा की मौत मामले में भिवानी पहुंची CBI की टीम रिकार्ड खंगाल रही है। हालांकि अभी तक परिवार से संपर्क नहीं हुआ है। मनीषा के दादा रामकिशन और पिता संजय का कहना है कि भिवानी आने के बाद CBI टीम ने उनसे संपर्क नहीं किया है। बता दें कि 3 सितंबर से ही CBI टीम भिवानी पहुंची हुई है। करीब 5-6 सदस्यों की टीम दिल्ली नंबरों की गाड़ियों में भिवानी पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने मनीषा की मौत मामले से संबंधित रिकार्ड पुलिस से लिया। वहीं पुलिस अधिकारियों से बातचीत करके मामले को जानने का प्रयास किया। फिलहाल CBI की टीम रिकार्ड जांचने में जुटी हुई है। जो भिवानी के PWD रेस्ट हाउस में ठहरी है। भिवानी पहुंचने के बाद परिवार से नहीं हुआ संपर्क
मनीषा के परिजनों के अनुसार भिवानी पहुंचने से पहले CBI ने मनीषा के पिता के पास फोन किए थे। इस दौरान CBI का कहना था कि वह जल्द ही जांच के लिए पहुंचेगी। हालांकि भिवानी पहुंचने के बाद CBI की टीम ने मनीषा के परिजनों से संपर्क नहीं किया। मनीषा के दादा रामकिशन और पिता संजय ने कहा कि वे भी CBI का इंतजार ही कर रहे हैं। लेकिन अभी तक उनसे कोई संपर्क नहीं किया है। उम्मीद करते हैं कि CBI निष्पक्ष जांच करेगी और दोषियों को सजा देगी। कई लोगों से हो सकती है पूछताछ
परिवार और गांव को भी काफी दिनों से CBI टीम का इंतजार है। CBI की टीम भिवानी पहुंचने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जल्दी ही टीम भिवानी के गांव सिंघानी स्थित घटनास्थल पर जा सकती है। वहीं परिवार और मनीषा मौत से जुड़े हुए लोगों से पूछताछ कर सकती है। CBI इस केस में कई लोगों से पूछताछ कर सकती है। इसकी लिस्ट लंबी है। इनमें मनीषा के परिजन, प्ले वे स्कूल स्टाफ और संचालक जिसमें मनीषा पढ़ाती थी। खाद-बीज विक्रेता जिससे मनीषा ने एक लीटर मोनो स्प्रे खरीदी थी। नर्सिंग कॉलेज स्टाफ और संचालक, जहां मनीषा दाखिला लेना चाहती थी। वे दो लोग जिन्होंने सबसे पहले मनीषा का शव देखा था। लोकल पुलिस के जांच अधिकारी, पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर्स समेत कई नाम संभावित लिस्ट में हो सकते हैं। 11 अगस्त को हुई थी लापता
बता दें कि मनीषा 11 अगस्त को प्ले स्कूल में पढ़ाने गई थी। लेकिन वापस घर नहीं आई। इसके बाद पिता और परिवार वालों ने खोजने का प्रयास किया, पुलिस को भी सूचना दी। लेकिन कहीं पर नहीं मिली। 12 अगस्त को लापता होने की एफआईआर दर्ज की गई। वहीं 13 अगस्त को मनीषा का शव खेतों में पड़ा हुआ मिला। 18 अगस्त को पुलिस ने मनीषा केस को सुसाइड बताया था। उसी दिन एक सुसाइड नोट भी वायरल हुआ। 20 अगस्त को मुख्यमंत्री ने सीबीआई जांच की मांग मंजूर की थी
DGP शत्रुजीत कपूर प्रेसवार्ता में कह चुके हैं कि सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग मनीषा की राइटिंग से मैच हो गई है। शव पर मिले कपड़े, मनीषा का मोबाइल भी सीबीआई कब्जे में लेगी। मोबाइल की कॉल डिटेल, चैट, आदि महत्वपूर्ण सुराग बन सकते हैं। 20 अगस्त को परिजनों व ग्रामीणों आदि की डिमांड पर मनीषा का तीसरी बार पोस्टमॉर्टम करवाया। वहीं मुख्यमंत्री ने इस केस की जांच CBI से करवाने का आश्वासन दिया। वहीं 2 सितंबर को परिवार वालों ने मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की थी।
भिवानी जिले के गांव ढाणी लक्ष्मण की रहने वाली टीचर मनीषा की मौत मामले में भिवानी पहुंची CBI की टीम रिकार्ड खंगाल रही है। हालांकि अभी तक परिवार से संपर्क नहीं हुआ है। मनीषा के दादा रामकिशन और पिता संजय का कहना है कि भिवानी आने के बाद CBI टीम ने उनसे संपर्क नहीं किया है। बता दें कि 3 सितंबर से ही CBI टीम भिवानी पहुंची हुई है। करीब 5-6 सदस्यों की टीम दिल्ली नंबरों की गाड़ियों में भिवानी पहुंची थी। इस दौरान उन्होंने मनीषा की मौत मामले से संबंधित रिकार्ड पुलिस से लिया। वहीं पुलिस अधिकारियों से बातचीत करके मामले को जानने का प्रयास किया। फिलहाल CBI की टीम रिकार्ड जांचने में जुटी हुई है। जो भिवानी के PWD रेस्ट हाउस में ठहरी है। भिवानी पहुंचने के बाद परिवार से नहीं हुआ संपर्क
मनीषा के परिजनों के अनुसार भिवानी पहुंचने से पहले CBI ने मनीषा के पिता के पास फोन किए थे। इस दौरान CBI का कहना था कि वह जल्द ही जांच के लिए पहुंचेगी। हालांकि भिवानी पहुंचने के बाद CBI की टीम ने मनीषा के परिजनों से संपर्क नहीं किया। मनीषा के दादा रामकिशन और पिता संजय ने कहा कि वे भी CBI का इंतजार ही कर रहे हैं। लेकिन अभी तक उनसे कोई संपर्क नहीं किया है। उम्मीद करते हैं कि CBI निष्पक्ष जांच करेगी और दोषियों को सजा देगी। कई लोगों से हो सकती है पूछताछ
परिवार और गांव को भी काफी दिनों से CBI टीम का इंतजार है। CBI की टीम भिवानी पहुंचने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जल्दी ही टीम भिवानी के गांव सिंघानी स्थित घटनास्थल पर जा सकती है। वहीं परिवार और मनीषा मौत से जुड़े हुए लोगों से पूछताछ कर सकती है। CBI इस केस में कई लोगों से पूछताछ कर सकती है। इसकी लिस्ट लंबी है। इनमें मनीषा के परिजन, प्ले वे स्कूल स्टाफ और संचालक जिसमें मनीषा पढ़ाती थी। खाद-बीज विक्रेता जिससे मनीषा ने एक लीटर मोनो स्प्रे खरीदी थी। नर्सिंग कॉलेज स्टाफ और संचालक, जहां मनीषा दाखिला लेना चाहती थी। वे दो लोग जिन्होंने सबसे पहले मनीषा का शव देखा था। लोकल पुलिस के जांच अधिकारी, पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर्स समेत कई नाम संभावित लिस्ट में हो सकते हैं। 11 अगस्त को हुई थी लापता
बता दें कि मनीषा 11 अगस्त को प्ले स्कूल में पढ़ाने गई थी। लेकिन वापस घर नहीं आई। इसके बाद पिता और परिवार वालों ने खोजने का प्रयास किया, पुलिस को भी सूचना दी। लेकिन कहीं पर नहीं मिली। 12 अगस्त को लापता होने की एफआईआर दर्ज की गई। वहीं 13 अगस्त को मनीषा का शव खेतों में पड़ा हुआ मिला। 18 अगस्त को पुलिस ने मनीषा केस को सुसाइड बताया था। उसी दिन एक सुसाइड नोट भी वायरल हुआ। 20 अगस्त को मुख्यमंत्री ने सीबीआई जांच की मांग मंजूर की थी
DGP शत्रुजीत कपूर प्रेसवार्ता में कह चुके हैं कि सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग मनीषा की राइटिंग से मैच हो गई है। शव पर मिले कपड़े, मनीषा का मोबाइल भी सीबीआई कब्जे में लेगी। मोबाइल की कॉल डिटेल, चैट, आदि महत्वपूर्ण सुराग बन सकते हैं। 20 अगस्त को परिजनों व ग्रामीणों आदि की डिमांड पर मनीषा का तीसरी बार पोस्टमॉर्टम करवाया। वहीं मुख्यमंत्री ने इस केस की जांच CBI से करवाने का आश्वासन दिया। वहीं 2 सितंबर को परिवार वालों ने मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की थी।