‘केवल यह तथ्य कि अभियुक्तों ने पीड़िता का ब्रेस्ट पकड़ा, पायजामे की डोरी तोड़ दी और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश की। लेकिन, कुछ लोगों के रोकने पर वे भाग गए। यह अपने आप में बलात्कार के प्रयास का मामला नहीं बनता।’ -जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ‘यह बहुत गंभीर मामला है। जिस जज ने यह फैसला दिया, उसकी तरफ से बहुत असंवेदनशीलता दिखाई गई। हमें यह कहते हुए दुख है कि फैसला लिखने वाले में संवेदनशीलता की पूरी तरह कमी थी।’ -जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह, सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणियां 14 साल की उस लड़की को जख्म भी देती हैं और राहत भी, जिसके साथ 3 साल पहले रेप का प्रयास हुआ। ये यादव परिवार आज भी इंसाफ के इंतजार में है। पिछले 3 साल से बेटी घर से बाहर नहीं निकल पाती। उसकी पढ़ाई छूट चुकी है। परिवार कहता है- आरोपी ठाकुर हैं, जो 1 किलोमीटर दूर के रहने वाले हैं। वो घर आकर कभी भी धमका जाते हैं। कहते हैं- हमने थाना खरीद लिया, कोर्ट भी खरीद लेंगे। हम कर्ज लेकर जैसे-तैसे केस लड़ रहे हैं, ताकि बिटिया को इंसाफ मिले। लेकिन, न्याय की उम्मीद किसी से नहीं दिखती। अब बस सुप्रीम कोर्ट आखिरी सहारा बचा है, हम वहीं जा रहे हैं। हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक जिस केस पर घमासान मचा है, उसे समझने के लिए दैनिक भास्कर यूपी के जिला कासगंज पहुंचा। हमने बेटी के परिवार और आरोपी पक्ष से बात की। आरोपी पक्ष का कहना है कि हमने पहले केस दर्ज कराया था। दबाव बनाने के लिए नाबालिग लड़की से रेप के प्रयास की क्रॉस FIR दर्ज कराई गई है। पढ़िए ये रिपोर्ट… पहले पूरा केस समझिए बाइक पर लिफ्ट देकर छेड़छाड़, पायजामे का नाड़ा तोड़ा
जिला कासगंज की एक महिला ने 12 जनवरी, 2022 को स्थानीय कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाया कि 10 नवंबर, 2021 को वह अपनी 14 साल की बेटी के साथ कासगंज के पटियाली में अपनी देवरानी के घर गई थी। उसी शाम वह अपने घर लौट रही थी। रास्ते में गांव के रहने वाले पवन (25), आकाश (30) और अशोक (47) मिल गए। पवन ने मेरी बेटी को बाइक पर बैठाकर घर छोड़ने की बात कही। मैंने उस पर भरोसा करते हुए बेटी को बाइक पर बैठा दिया। रास्ते में पवन और आकाश ने बेटी का प्राइवेट पार्ट पकड़ लिया। आकाश ने उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास करते हुए उसके पायजामे की डोरी तोड़ दी। बेटी की चीख-पुकार सुनकर ट्रैक्टर से गुजर रहे सतीश और भूरे मौके पर पहुंचे। इस पर उन लोगों ने देसी तमंचा दिखाकर उन्हें धमकाया और भाग गए। रिव्यू पिटीशन में हाईकोर्ट ने माना, रेप के प्रयास का मामला नहीं बनता
पुलिस के सुनवाई नहीं करने पर मां अदालत में गई। कासगंज कोर्ट ने 21 मार्च, 2022 को ये शिकायत स्वीकार करते हुए मामले को आगे बढ़ाया। इसके बाद पवन और आकाश के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया। जबकि तीसरे आरोपी अशोक पर पॉक्सो एक्ट नहीं लगाया गया। स्थानीय अदालत ने तीनों आरोपियों को समन जारी किया। आरोपियों ने समन आदेश से इनकार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की। जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन स्वीकार कर ली थी। 13 मार्च, 2025 को इस पिटीशन पर सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया गया। 17 मार्च, 2025 को हाईकोर्ट ने कहा कि पवन और आकाश के खिलाफ बलात्कार के प्रयास का आरोप नहीं बनता। उन्हें IPC की धारा-354B के तहत मामूली आरोप के लिए समन जारी किया जाए। 27 मार्च, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना या उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना अटैंप्ट-टू-रेप नहीं माना गया है। SC ने इस मामले में केंद्र सरकार, यूपी सरकार और पक्षकार को नोटिस जारी किए हैं। अब गांव और पीड़ित परिवार की बात आरोपियों का घर पीड़िता से सिर्फ एक किलोमीटर दूर
जिस लड़की के साथ ये पूरी घटना हुई, उसका गांव कासगंज जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर एटा जिले के बॉर्डर पर है। हम गांव की पगडंडियों से होते हुए एक छोर पर बने जर्जर मकान पर पहुंचे। एकमात्र छप्परनुमा कमरे के इस मकान के आगे कुछ पशु बंधे हुए थे। घर के बाहर बेटी की चाची-चाचा और दादी बैठी थीं। पता चला, बेटी और उसके मां-बाप हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करने सुप्रीम कोर्ट (दिल्ली) गए हैं। यह गांव एक बड़ी ग्राम पंचायत का मजरा है। यहां करीब 200 परिवार रहते हैं। इसमें बड़ी संख्या चौहान (ठाकुरों) की है। आरोपी भी इसी बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। आरोपियों के मकान सिर्फ लड़की के घर से 1 किलोमीटर दूर हैं। चाची बोली- हमारे पास सिर्फ इज्जत है, आरोपी उसे भी उछाल रहे
दैनिक भास्कर ने सबसे पहले लड़की की चाची से बात की। हमने पूछा- हाईकोर्ट के फैसले के बारे में कोई जानकारी है? वो कहती हैं- हां, कोर्ट से जानकारी मिली है कि हमारा केस खारिज हो गया। ये क्यों हुआ? इसकी हमें अभी कोई खबर नहीं। बेटी ने अदालत में खड़े होकर चिल्ला-चिल्लाकर कहा था कि मेरे साथ अत्याचार हुआ है। बेटी ने पूरा घटनाक्रम बताया, लेकिन कानून मुल्जिम के साथ न्याय और हमारे साथ सिर्फ अन्याय कर रहा है। वह कहती हैं- बेटी 3 साल से घर में बैठी है। मुल्जिम सीधे घर पर आकर धमकी देते हैं कि क्या बिगाड़ लिया हमारा? कानून ने हमारा क्या उखाड़ लिया? हमारी बेटी पिछले 3 साल से घर से बाहर नहीं निकलती। वो मुंह छिपाकर घर के अंदर बैठी रहती है। लोगों के ताने सुनती है। आरोपी कहते हैं कि तू इसी तरह बैठी रहेगी। न तेरी शादी होगी, न पढ़ाई-लिखाई। सोचिए, उस बच्ची पर क्या बीत रही होगी। बेटी की चाची का कहना है हमारी सरकार ‘बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है। लेकिन, न बेटी बच रही है और न बेटी पढ़ रही है। हमारी बेटी के साथ सिर्फ अत्याचार हो रहा है। अमीर की बेटियों के साथ ये सब क्यों नहीं होता? हमारे पास दौलत नहीं है। हमारे पास सिर्फ इज्जत है। उस इज्जत को भी आरोपी उछाल–उछालकर और गंदा कर दे रहे हैं। पीड़िता की चाची का कहना है कि हम दूसरों से पैसा लेकर कोर्ट में तारीख करने जाते हैं, ताकि हमारी बेटी को न्याय मिले। दूसरों के हाथ-पैर जोड़ते हैं। उनसे उधार पैसा मांगते हैं। पैदल जाते हैं, किराए से जाते हैं, तब तारीख करने कोर्ट पहुंचते हैं। उसके बाद भी नतीजा क्या मिला? हाईकोर्ट ने रेप का प्रयास मानने से ही इनकार कर दिया। अब किसी से न्याय की उम्मीद नहीं है। दुनिया में कोई अच्छा इंसान है या नहीं, हम ये देख रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई अच्छा इंसान नहीं मिला। चाचा बोले- आरोपी कहते हैं, हमने थाना खरीद लिया, कोर्ट भी खरीद लेंगे
पीड़ित लड़की के चाचा बताते हैं- उस दिन की घटना के बाद हम सब लोग इकट्ठा होकर थाने पहुंचे थे। दरोगा ने कहा कि परसों आना। हम दो दिन बाद गए तो दरोगा ने फिर कहा कि दो-चार दिन बाद आना। ऐसे करके 15 दिन निकल गए। 15 दिन बाद पुलिस ने साफ मना कर दिया। कहा कि आपकी कोई सुनवाई नहीं होगी। फिर हम कोर्ट चले गए। कोर्ट केस करके घर लौटे ही थे कि आरोपी हमारे घर आ धमके। बोले- हमने थाना खरीद लिया तो कोर्ट भी खरीद लेंगे। हमें लोकल कोर्ट से न्याय नहीं मिला। इसलिए हम इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे। चाचा सीधे तौर पर ये आरोप लगाकर कहते हैं- आरोपियों के वकील और जज एक ही गांव के थे, इसीलिए हमें न्याय नहीं मिल पाया। भाजपा सरकार में आरोपियों को ठाकुर होने का फायदा मिला
इसी गांव की समाजसेविका सरोज चौहान बताती हैं- घटना वाले दिन मैं कहीं बाहर से गांव आई थी। पीड़ित परिवार मेरे घर आया और पूरी घटना बताई। इसके बाद मैं सभी को अपनी गाड़ी में बैठाकर पुलिस स्टेशन गई। जांच करने के नाम पर पुलिस बरगलाती रही। आरोपी ठाकुर हैं। हाईकोर्ट से राहत मिलती नहीं दिख रही। अब मैंने सुप्रीम कोर्ट में एक-दो वकीलों से बातचीत की है। उन्हें बताया है कि पीड़ित परिवार गरीब है और फीस देने की कंडीशन में नहीं है। वकील निशुल्क केस लड़ने के लिए तैयार हो गए हैं। अब ये परिवार हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज देने जा रहा है। सरोज चौहान खुद भी भाजपा से जुड़ी हैं, हालांकि उनके पास कोई पद नहीं है। दूसरा पक्ष बोला- हमने पहले छेड़छाड़ की FIR कराई थी, उसका बदला लिया
इस केस के तीनों आरोपी पवन, आकाश और अशोक अब दिल्ली में परिवार सहित रहते हैं और अलग-अलग नौकरियां करते हैं। उस घटना के करीब 8-10 महीने बाद ये सभी परिवार के साथ दिल्ली शिफ्ट हो गए थे। हालांकि बीच-बीच में ये गांव आते रहते हैं। यहां महत्वपूर्ण बात यह भी है कि नामजद एक आरोपी आकाश की मां ने 17 अक्टूबर, 2021 को कासगंज के थाना पटियाली में राजीव, शैलेंद्र, सुखवीर और विदेश के खिलाफ एक FIR कराई थी। महिला के अनुसार, आरोपियों ने 4 अक्टूबर, 2021 को उसके साथ छेड़छाड़ की और कपड़े फाड़ दिए। यह घटना तब हुई, जब वो अपने बेटे के साथ खेत पर गई थी। आरोपियों ने उसके बेटे के साथ भी मारपीट की थी। पवन, आकाश और अशोक के वकील इंद्र कुमार सिंह ने हाईकोर्ट को रिव्यू पिटीशन के वक्त भी ये पूरा प्रकरण बताया। उन्होंने कहा कि पुरानी रंजिश की वजह से ही नाबालिग लड़की से रेप के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया गया था। गांव के कई लोग दबी जुबान यह भी बताते हैं कि मामला पूरी तरह छेड़छाड़ या रेप के प्रयास जैसा नहीं था। मामला कुछ और था, जिसे दूसरा रूप दे दिया गया। ————————– ये खबर भी पढ़ें… बच्ची का प्राइवेट पार्ट पकड़ना, सलवार का नाड़ा तोड़ना बलात्कार की कोशिश नहीं है; इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का क्या असर होगा किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश से रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ का मामला नहीं बनता। सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों पर लगी धाराएं बदल दीं। पढ़ें पूरी खबर
‘केवल यह तथ्य कि अभियुक्तों ने पीड़िता का ब्रेस्ट पकड़ा, पायजामे की डोरी तोड़ दी और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश की। लेकिन, कुछ लोगों के रोकने पर वे भाग गए। यह अपने आप में बलात्कार के प्रयास का मामला नहीं बनता।’ -जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा, इलाहाबाद हाईकोर्ट ‘यह बहुत गंभीर मामला है। जिस जज ने यह फैसला दिया, उसकी तरफ से बहुत असंवेदनशीलता दिखाई गई। हमें यह कहते हुए दुख है कि फैसला लिखने वाले में संवेदनशीलता की पूरी तरह कमी थी।’ -जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह, सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणियां 14 साल की उस लड़की को जख्म भी देती हैं और राहत भी, जिसके साथ 3 साल पहले रेप का प्रयास हुआ। ये यादव परिवार आज भी इंसाफ के इंतजार में है। पिछले 3 साल से बेटी घर से बाहर नहीं निकल पाती। उसकी पढ़ाई छूट चुकी है। परिवार कहता है- आरोपी ठाकुर हैं, जो 1 किलोमीटर दूर के रहने वाले हैं। वो घर आकर कभी भी धमका जाते हैं। कहते हैं- हमने थाना खरीद लिया, कोर्ट भी खरीद लेंगे। हम कर्ज लेकर जैसे-तैसे केस लड़ रहे हैं, ताकि बिटिया को इंसाफ मिले। लेकिन, न्याय की उम्मीद किसी से नहीं दिखती। अब बस सुप्रीम कोर्ट आखिरी सहारा बचा है, हम वहीं जा रहे हैं। हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक जिस केस पर घमासान मचा है, उसे समझने के लिए दैनिक भास्कर यूपी के जिला कासगंज पहुंचा। हमने बेटी के परिवार और आरोपी पक्ष से बात की। आरोपी पक्ष का कहना है कि हमने पहले केस दर्ज कराया था। दबाव बनाने के लिए नाबालिग लड़की से रेप के प्रयास की क्रॉस FIR दर्ज कराई गई है। पढ़िए ये रिपोर्ट… पहले पूरा केस समझिए बाइक पर लिफ्ट देकर छेड़छाड़, पायजामे का नाड़ा तोड़ा
जिला कासगंज की एक महिला ने 12 जनवरी, 2022 को स्थानीय कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाया कि 10 नवंबर, 2021 को वह अपनी 14 साल की बेटी के साथ कासगंज के पटियाली में अपनी देवरानी के घर गई थी। उसी शाम वह अपने घर लौट रही थी। रास्ते में गांव के रहने वाले पवन (25), आकाश (30) और अशोक (47) मिल गए। पवन ने मेरी बेटी को बाइक पर बैठाकर घर छोड़ने की बात कही। मैंने उस पर भरोसा करते हुए बेटी को बाइक पर बैठा दिया। रास्ते में पवन और आकाश ने बेटी का प्राइवेट पार्ट पकड़ लिया। आकाश ने उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास करते हुए उसके पायजामे की डोरी तोड़ दी। बेटी की चीख-पुकार सुनकर ट्रैक्टर से गुजर रहे सतीश और भूरे मौके पर पहुंचे। इस पर उन लोगों ने देसी तमंचा दिखाकर उन्हें धमकाया और भाग गए। रिव्यू पिटीशन में हाईकोर्ट ने माना, रेप के प्रयास का मामला नहीं बनता
पुलिस के सुनवाई नहीं करने पर मां अदालत में गई। कासगंज कोर्ट ने 21 मार्च, 2022 को ये शिकायत स्वीकार करते हुए मामले को आगे बढ़ाया। इसके बाद पवन और आकाश के खिलाफ पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया। जबकि तीसरे आरोपी अशोक पर पॉक्सो एक्ट नहीं लगाया गया। स्थानीय अदालत ने तीनों आरोपियों को समन जारी किया। आरोपियों ने समन आदेश से इनकार करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की। जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की सिंगल बेंच ने क्रिमिनल रिवीजन पिटीशन स्वीकार कर ली थी। 13 मार्च, 2025 को इस पिटीशन पर सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया गया। 17 मार्च, 2025 को हाईकोर्ट ने कहा कि पवन और आकाश के खिलाफ बलात्कार के प्रयास का आरोप नहीं बनता। उन्हें IPC की धारा-354B के तहत मामूली आरोप के लिए समन जारी किया जाए। 27 मार्च, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना या उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना अटैंप्ट-टू-रेप नहीं माना गया है। SC ने इस मामले में केंद्र सरकार, यूपी सरकार और पक्षकार को नोटिस जारी किए हैं। अब गांव और पीड़ित परिवार की बात आरोपियों का घर पीड़िता से सिर्फ एक किलोमीटर दूर
जिस लड़की के साथ ये पूरी घटना हुई, उसका गांव कासगंज जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर एटा जिले के बॉर्डर पर है। हम गांव की पगडंडियों से होते हुए एक छोर पर बने जर्जर मकान पर पहुंचे। एकमात्र छप्परनुमा कमरे के इस मकान के आगे कुछ पशु बंधे हुए थे। घर के बाहर बेटी की चाची-चाचा और दादी बैठी थीं। पता चला, बेटी और उसके मां-बाप हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करने सुप्रीम कोर्ट (दिल्ली) गए हैं। यह गांव एक बड़ी ग्राम पंचायत का मजरा है। यहां करीब 200 परिवार रहते हैं। इसमें बड़ी संख्या चौहान (ठाकुरों) की है। आरोपी भी इसी बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। आरोपियों के मकान सिर्फ लड़की के घर से 1 किलोमीटर दूर हैं। चाची बोली- हमारे पास सिर्फ इज्जत है, आरोपी उसे भी उछाल रहे
दैनिक भास्कर ने सबसे पहले लड़की की चाची से बात की। हमने पूछा- हाईकोर्ट के फैसले के बारे में कोई जानकारी है? वो कहती हैं- हां, कोर्ट से जानकारी मिली है कि हमारा केस खारिज हो गया। ये क्यों हुआ? इसकी हमें अभी कोई खबर नहीं। बेटी ने अदालत में खड़े होकर चिल्ला-चिल्लाकर कहा था कि मेरे साथ अत्याचार हुआ है। बेटी ने पूरा घटनाक्रम बताया, लेकिन कानून मुल्जिम के साथ न्याय और हमारे साथ सिर्फ अन्याय कर रहा है। वह कहती हैं- बेटी 3 साल से घर में बैठी है। मुल्जिम सीधे घर पर आकर धमकी देते हैं कि क्या बिगाड़ लिया हमारा? कानून ने हमारा क्या उखाड़ लिया? हमारी बेटी पिछले 3 साल से घर से बाहर नहीं निकलती। वो मुंह छिपाकर घर के अंदर बैठी रहती है। लोगों के ताने सुनती है। आरोपी कहते हैं कि तू इसी तरह बैठी रहेगी। न तेरी शादी होगी, न पढ़ाई-लिखाई। सोचिए, उस बच्ची पर क्या बीत रही होगी। बेटी की चाची का कहना है हमारी सरकार ‘बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है। लेकिन, न बेटी बच रही है और न बेटी पढ़ रही है। हमारी बेटी के साथ सिर्फ अत्याचार हो रहा है। अमीर की बेटियों के साथ ये सब क्यों नहीं होता? हमारे पास दौलत नहीं है। हमारे पास सिर्फ इज्जत है। उस इज्जत को भी आरोपी उछाल–उछालकर और गंदा कर दे रहे हैं। पीड़िता की चाची का कहना है कि हम दूसरों से पैसा लेकर कोर्ट में तारीख करने जाते हैं, ताकि हमारी बेटी को न्याय मिले। दूसरों के हाथ-पैर जोड़ते हैं। उनसे उधार पैसा मांगते हैं। पैदल जाते हैं, किराए से जाते हैं, तब तारीख करने कोर्ट पहुंचते हैं। उसके बाद भी नतीजा क्या मिला? हाईकोर्ट ने रेप का प्रयास मानने से ही इनकार कर दिया। अब किसी से न्याय की उम्मीद नहीं है। दुनिया में कोई अच्छा इंसान है या नहीं, हम ये देख रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई अच्छा इंसान नहीं मिला। चाचा बोले- आरोपी कहते हैं, हमने थाना खरीद लिया, कोर्ट भी खरीद लेंगे
पीड़ित लड़की के चाचा बताते हैं- उस दिन की घटना के बाद हम सब लोग इकट्ठा होकर थाने पहुंचे थे। दरोगा ने कहा कि परसों आना। हम दो दिन बाद गए तो दरोगा ने फिर कहा कि दो-चार दिन बाद आना। ऐसे करके 15 दिन निकल गए। 15 दिन बाद पुलिस ने साफ मना कर दिया। कहा कि आपकी कोई सुनवाई नहीं होगी। फिर हम कोर्ट चले गए। कोर्ट केस करके घर लौटे ही थे कि आरोपी हमारे घर आ धमके। बोले- हमने थाना खरीद लिया तो कोर्ट भी खरीद लेंगे। हमें लोकल कोर्ट से न्याय नहीं मिला। इसलिए हम इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे। चाचा सीधे तौर पर ये आरोप लगाकर कहते हैं- आरोपियों के वकील और जज एक ही गांव के थे, इसीलिए हमें न्याय नहीं मिल पाया। भाजपा सरकार में आरोपियों को ठाकुर होने का फायदा मिला
इसी गांव की समाजसेविका सरोज चौहान बताती हैं- घटना वाले दिन मैं कहीं बाहर से गांव आई थी। पीड़ित परिवार मेरे घर आया और पूरी घटना बताई। इसके बाद मैं सभी को अपनी गाड़ी में बैठाकर पुलिस स्टेशन गई। जांच करने के नाम पर पुलिस बरगलाती रही। आरोपी ठाकुर हैं। हाईकोर्ट से राहत मिलती नहीं दिख रही। अब मैंने सुप्रीम कोर्ट में एक-दो वकीलों से बातचीत की है। उन्हें बताया है कि पीड़ित परिवार गरीब है और फीस देने की कंडीशन में नहीं है। वकील निशुल्क केस लड़ने के लिए तैयार हो गए हैं। अब ये परिवार हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज देने जा रहा है। सरोज चौहान खुद भी भाजपा से जुड़ी हैं, हालांकि उनके पास कोई पद नहीं है। दूसरा पक्ष बोला- हमने पहले छेड़छाड़ की FIR कराई थी, उसका बदला लिया
इस केस के तीनों आरोपी पवन, आकाश और अशोक अब दिल्ली में परिवार सहित रहते हैं और अलग-अलग नौकरियां करते हैं। उस घटना के करीब 8-10 महीने बाद ये सभी परिवार के साथ दिल्ली शिफ्ट हो गए थे। हालांकि बीच-बीच में ये गांव आते रहते हैं। यहां महत्वपूर्ण बात यह भी है कि नामजद एक आरोपी आकाश की मां ने 17 अक्टूबर, 2021 को कासगंज के थाना पटियाली में राजीव, शैलेंद्र, सुखवीर और विदेश के खिलाफ एक FIR कराई थी। महिला के अनुसार, आरोपियों ने 4 अक्टूबर, 2021 को उसके साथ छेड़छाड़ की और कपड़े फाड़ दिए। यह घटना तब हुई, जब वो अपने बेटे के साथ खेत पर गई थी। आरोपियों ने उसके बेटे के साथ भी मारपीट की थी। पवन, आकाश और अशोक के वकील इंद्र कुमार सिंह ने हाईकोर्ट को रिव्यू पिटीशन के वक्त भी ये पूरा प्रकरण बताया। उन्होंने कहा कि पुरानी रंजिश की वजह से ही नाबालिग लड़की से रेप के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया गया था। गांव के कई लोग दबी जुबान यह भी बताते हैं कि मामला पूरी तरह छेड़छाड़ या रेप के प्रयास जैसा नहीं था। मामला कुछ और था, जिसे दूसरा रूप दे दिया गया। ————————– ये खबर भी पढ़ें… बच्ची का प्राइवेट पार्ट पकड़ना, सलवार का नाड़ा तोड़ना बलात्कार की कोशिश नहीं है; इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का क्या असर होगा किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश से रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ का मामला नहीं बनता। सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों पर लगी धाराएं बदल दीं। पढ़ें पूरी खबर