हरियाणा में झज्जर जिले के बहादुरगढ़ में घर में हुए ब्लास्ट के मामले में नया मोड़ आ गया है। पुलिस को घर के मुखिया कारोबारी का सुसाइड नोट मिला है। जिसमें उसने मौत के लिए बहन-जीजा को जिम्मेदार ठहराया है। उसने यह भी कहा कि हमारी लाश किसी को मत देना, पुलिस ही उनका अंतिम संस्कार कर दे। कारोबारी को कल (22 मार्च) की रात PGI रोहतक में इलाज के लिए भेजा गया था लेकिन वह वहां भर्ती नहीं हुआ, फिलहाल वह गायब है। बता दें कि बहादुरगढ़ में शनिवार शाम को कारोबारी हरपाल सिंह के घर में 2 बार धमाके हुए। जिसमें उसकी पत्नी, बेटी और 2 बेटों की मौत हो गई थी। हरपाल भी बुरी तरह से झुलसा हुआ था। पहले इसे AC कंप्रेशर फटने से हादसा माना गया लेकिन अब पुलिस इसे सुसाइड मान रही है। वहीं इस मामले को पुलिस हत्या के एंगल से भी देख रही है कि कहीं कारोबारी ने ही परिवार की हत्या तो नहीं की। मरने वालों के गले पर कुछ निशान भी मिले हैं। DCP मयंक मिश्रा ने कहा कि हर एंगल से मामले की जांच की जा रही है। व्यापारी के घर से मिले सुसाइड नोट में क्या लिखा, 9 पॉइंट्स में पढ़िए 1. बहन-जीजा ने मिलकर मेरा घर हड़पा
“मैं हरपाल सिह S/O रघुवीर सिंह निवासी सितारगंज (सुप्रिया कॉलोनी) हाल निवासी एलायंस सिटी वन रूद्रपुर उत्तराखंड, मैं आज अपने पूरे परिवार के साथ आत्महत्या करने वाला हूं। मेरी और मेरी हत्या का कारण मेरे सगे जीजा दलजीत सिंह पुत्र गुरूमुख सिंह और बहन परविंद्र कौर पत्नी दलजीत सिंह व उनकी फैमिली (निवासी वार्ड नंबर 8 सितारगंज उधम सिंह नगर उत्तराखंड है। दलजीत सिंह ने मेरे घर की रजिस्ट्री अपने नाम करा ली। यह घर मैंने उनको रहने के लिए दिया था। 2. बेटे का अपहरण कराया, मेरी बदनामी कराई
जब मैने पुलिस थाना सितारगंज मे प्राथमिकी दर्ज करवाने की कोशिश की तो मेरी कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे पहले भी 15 सितंबर 2017 को मेरे बेटे जसकीरत का अपहरण भी इन्होंने करवाया था। तब भी इनके साथियों ने मिलकर मेरी भी इन्क्वायरी करवा दी थी और मैं कुछ नहीं कर पाया था। अब दो तीन साल से इन्होंने मेरी हर जगह बदनामी की है कि मैंने इनसे 4 करोड़ रुपया लिया है। इन्होंने मुझको सब रिश्तेदारों और समाज में मुझको बदनाम कर दिया जब कि मैंने इनसे कोई पैसा नहीं लिया। दलजीत सिंह ने मुझको दिमागी तौर पर बहुत परेशान कर दिया है। इससे मेरी पत्नी व बच्चे बहुत ज्यादा प्रभावित हो गए एवं परेशान थे। 3. लोगों ने उन्हें ही सच माना, झूठा केस किया
लोगों ने उनकी की बातों को सच माना एवं मुझको परेशान करने लगे। इसलिए मेरा 2 साल से पूरा परिवार अवसाद में है। मैंने पुलिस में शिकायत की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उल्टा उन लोगों ने मेरी सारी मुसीबतें और बढ़ गई (रजा एसोसिएट खटिया) के माध्यम से केस फाइल किया है लेकिन अब दलजीत सिंह एवं उसके साथी मुझको और मेरे बच्चों को तंग करना चाहते हैं ताकि कोई केस की पैरवी ना करें और वे झूठा केस जीत जाएं। 4. बच्चों को बचाने में फेल हो गया, मेरी लोकेशन पता कर लेते हैं
इन लोगों ने मेरा सारा काम खत्म कर दिया। अब मैं भाग-भाग कर थक गया हूं। मैंने अपने बच्चों को बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन मैं फेल हो गया हूं। पता नहीं ये कैसे मेरी लोकेशन पता कर लेते हैं। मैं इस समय अपने आप को बहुत असहाय महसूस कर रहा हूं। क्योंकि अगर आपके पास पैसा और पावर है तो आप झूठ को सच बना सकते हैं। यही काम दलजीत सिंह एवं इनकी फैमिली और साथियों ने किया है। हमारी दो बार पंचायत भी हुई, मैने सारे सबूत पेश किए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। 5. मकान की ओरिजिनल रजिस्ट्री मेरे पास, मुझे मार सकते हैं
अब भी जो मेरा मकान दलजीत सिंह ने धोखे से अपनी पत्नी परविंद्र कौर के नाम रजिस्ट्री करवा लिया। उसकी ओरिजिनल रजिस्ट्री मेरे नाम से है। इस पर यूनियन बैंक सितारगंज से 16 लाख का होम लोन चल रहा है, जबकि उनके सारे कागजात फर्जी हैं, फिर भी मैं कुछ नहीं कर पा रहा हूं। अब मैं 2 साल से मानसिक सामाजिक तनाव झेल रहा हूं और इधर-उधर भाग रहा हूं। अगर मैं सितारगंज, रुद्रपुर गया तो वो मुझको मार सकते हैं। मेरा परिवार खत्म कर सकते हैं। इसलिए मैं अपने परिवार सहित मौत को गले लगा रहा हूं। 6. परिवार की जीने की इच्छा खत्म हुई, सच सामने लाएं
मेरी व मेरे परिवार की मौत के जिम्मेदार दलजीत सिंह, परविंदर कौर एवं उसकी पूरी फैमिली एवं उसके दोस्त हैं। दलजीत सिंह इनके दोस्त दर्शन सिह, लक्खा सिंह और हमारे परिवार वाले सबने मिलकर हमें बहुत मानसिक सामाजिक तौर पर बहुत परेशान किया है। हिंदुजा फाइनेंस के शाखा हल्द्वानी कार्यरत भास्कर पाठक ने भी इनके कहने पर मुझको बहुत परेशान किया है। अत: अब मैं और मेरा परिवार इनको सामाजिक तौर झेलने में असमर्थ हैं। अत: अब हमारी जीने की इच्छा खत्म हो गई है। और आपसे ( पुलिस एवं न्यायपालिका ) से आखरी उम्मीद है कि आप न्याय करके सच को सामने लाएं । 7. मेरे पास साढ़े 4 करोड़ होते तो खुदकुशी क्यों करता
पता करें कि दलजीत सिंह के पास 4.12 करोड़ रुपए कैसे आए और हमारे सारे बैंक अकाउंट भी चेक करें। क्योंकि अगर मैने दलजीत सिंह से 4.50 करोड़ रुपए लिए होते तो मुझको मौत को गले लगाने की जरूरत नहीं होती। मेरी सारी जानकारी एडवोकेट रजा एसोसिएट खटीमा के पास है, क्योंकि ये लोग उनको भी अपनी तरफ मिलाना चाहते थे वो नहीं माने (सारे ओरिजनल पेपर ) वकील साहिब के पास हैं। 8. मेरी डेडबॉडी किसी को न दें, पुलिस संस्कार कर दे
मेरी और मेरे परिवार की अंतिम इच्छा है कि हमारा अंतिम संस्कार पुलिस या सामाजिक संगठन करें। हमारी डेडबॉडी किसी और को ना दी जाए। मेरे मजहर अंसारी वजीराबाद दिल्ली पर 1.12 लाख रुपए बकाया हैं। उसे लेकर हमारा उधार और अंतिम संस्कार कर दिया जाए। मजहर ने मुझसे उधार पैसे ले रखे हैं। 9. मकान मालिक सामान बेचकर अपनी भरपाई कर लें
मैं अपने मकान मालिक बेनीवाल जी से हाथ जोड़कर माफी चाहता हूं कि मैंने मजबूरी में अपने परिवार को बचाने की कोशिश में दूसरी आईडी दे कर मकान किराए पर लिया ताकि मैं अपनी फैमिली को बचा सकूं, लेकिन मैं नाकाम रहा हूं। अत: हाथ जोड़कर आपसे माफी मांगता हूं, कृपया मुझे माफ कर दें। अब मैं पूरी तरह से टूट चुका हूं, इसलिए ये कदम उठा रहा हूं। हमें माफ करना। हमारा जो भी सामान है, उसको बेचकर अपना पैसा पूरा कर लेना। हमारा सामान हमारे किसी भी रिश्तेदार को न सौंपना, हमारी आखिरी इच्छा है। आपसे हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं, कृपया मुझे माफ करना । कल क्या हुआ था, सिलसिलेवार ढंग से जानिए… शनिवार को मकान से आई 2 धमाकों की आवाज
शनिवार 22 मार्च की शाम बहादुरगढ़ के सेक्टर-9 के मकान नंबर 312 पी में 2 बार धमाका हुआ था। इसकी सूचना पर पड़ोसी एकत्र हो गए। पड़ोसी प्रशांत ने बताया कि घर में करीब 6 बजे धमाका हुआ था। ऐसा लगा मानो हमारे घर का शीशा टूटा हो। बाहर निकलकर देखा तो पड़ोसी के घर में आग लगी थी। घर में धुआं भरा हुआ था। पास जाकर उसका दरवाजा खोलने की कोशिश की तो अंदर से लॉक था। दरवाजा तोड़ा, 3 बच्चे और एक महिला मृत मिली
प्रशांत ने बताया कि हमने कुछ लोगों को इकट्ठा कर दरवाजा तोड़ा तो देखा कि मकान में रहने वाला सरदार हरपाल सिंह दरवाजे के पास ही झुलसी हालत में पड़ा था। उसके हाथ, पैर और मुंह झुलसे हुए थे। उसे फौरन अस्पताल ले जाने का इंतजाम किया गया। वहीं, घर में अंदर जाकर देखा तो 3 बच्चे और एक महिला पड़ी थी। उनकी मौत हो चुकी थी। वे सभी जले हुए थे। शवों को शहर के सामान्य अस्पताल में भिजवाया गया है। 7 महीने पहले परिवार रहने आया था
DCP मयंक मिश्रा सूचना पर तुरंत घटना स्थल पहुंचे और मामले की जांच की। शुरुआती जांच में पता चला कि हरपाल सिंह कारोबारी है। वह अपने तीन बच्चों और पत्नी के साथ करीब 7 महीने पहले यहां किराए पर रहने आया था। घर एक मंजिला है। हादसे के समय घर अंदर से लॉक था। फोरेंसिक टीम ने की थी जांच
DCP मयंक मिश्रा ने बताया था कि 4 लोगों की ब्लास्ट में मौत हुई है, जबकि 1 गंभीर रूप से घायल है। पुलिस कई पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच शुरू की थी। फोरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया था। घर में रखा सिलेंडर सही सलामत है, AC यूनिट को नुकसान पहुंचा है। ब्लास्ट किस चीज में हुआ है, इसका पता लगाने के लिए विस्फोटक जांच टीम को सूचना भेजी गई थी।
हरियाणा में झज्जर जिले के बहादुरगढ़ में घर में हुए ब्लास्ट के मामले में नया मोड़ आ गया है। पुलिस को घर के मुखिया कारोबारी का सुसाइड नोट मिला है। जिसमें उसने मौत के लिए बहन-जीजा को जिम्मेदार ठहराया है। उसने यह भी कहा कि हमारी लाश किसी को मत देना, पुलिस ही उनका अंतिम संस्कार कर दे। कारोबारी को कल (22 मार्च) की रात PGI रोहतक में इलाज के लिए भेजा गया था लेकिन वह वहां भर्ती नहीं हुआ, फिलहाल वह गायब है। बता दें कि बहादुरगढ़ में शनिवार शाम को कारोबारी हरपाल सिंह के घर में 2 बार धमाके हुए। जिसमें उसकी पत्नी, बेटी और 2 बेटों की मौत हो गई थी। हरपाल भी बुरी तरह से झुलसा हुआ था। पहले इसे AC कंप्रेशर फटने से हादसा माना गया लेकिन अब पुलिस इसे सुसाइड मान रही है। वहीं इस मामले को पुलिस हत्या के एंगल से भी देख रही है कि कहीं कारोबारी ने ही परिवार की हत्या तो नहीं की। मरने वालों के गले पर कुछ निशान भी मिले हैं। DCP मयंक मिश्रा ने कहा कि हर एंगल से मामले की जांच की जा रही है। व्यापारी के घर से मिले सुसाइड नोट में क्या लिखा, 9 पॉइंट्स में पढ़िए 1. बहन-जीजा ने मिलकर मेरा घर हड़पा
“मैं हरपाल सिह S/O रघुवीर सिंह निवासी सितारगंज (सुप्रिया कॉलोनी) हाल निवासी एलायंस सिटी वन रूद्रपुर उत्तराखंड, मैं आज अपने पूरे परिवार के साथ आत्महत्या करने वाला हूं। मेरी और मेरी हत्या का कारण मेरे सगे जीजा दलजीत सिंह पुत्र गुरूमुख सिंह और बहन परविंद्र कौर पत्नी दलजीत सिंह व उनकी फैमिली (निवासी वार्ड नंबर 8 सितारगंज उधम सिंह नगर उत्तराखंड है। दलजीत सिंह ने मेरे घर की रजिस्ट्री अपने नाम करा ली। यह घर मैंने उनको रहने के लिए दिया था। 2. बेटे का अपहरण कराया, मेरी बदनामी कराई
जब मैने पुलिस थाना सितारगंज मे प्राथमिकी दर्ज करवाने की कोशिश की तो मेरी कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे पहले भी 15 सितंबर 2017 को मेरे बेटे जसकीरत का अपहरण भी इन्होंने करवाया था। तब भी इनके साथियों ने मिलकर मेरी भी इन्क्वायरी करवा दी थी और मैं कुछ नहीं कर पाया था। अब दो तीन साल से इन्होंने मेरी हर जगह बदनामी की है कि मैंने इनसे 4 करोड़ रुपया लिया है। इन्होंने मुझको सब रिश्तेदारों और समाज में मुझको बदनाम कर दिया जब कि मैंने इनसे कोई पैसा नहीं लिया। दलजीत सिंह ने मुझको दिमागी तौर पर बहुत परेशान कर दिया है। इससे मेरी पत्नी व बच्चे बहुत ज्यादा प्रभावित हो गए एवं परेशान थे। 3. लोगों ने उन्हें ही सच माना, झूठा केस किया
लोगों ने उनकी की बातों को सच माना एवं मुझको परेशान करने लगे। इसलिए मेरा 2 साल से पूरा परिवार अवसाद में है। मैंने पुलिस में शिकायत की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उल्टा उन लोगों ने मेरी सारी मुसीबतें और बढ़ गई (रजा एसोसिएट खटिया) के माध्यम से केस फाइल किया है लेकिन अब दलजीत सिंह एवं उसके साथी मुझको और मेरे बच्चों को तंग करना चाहते हैं ताकि कोई केस की पैरवी ना करें और वे झूठा केस जीत जाएं। 4. बच्चों को बचाने में फेल हो गया, मेरी लोकेशन पता कर लेते हैं
इन लोगों ने मेरा सारा काम खत्म कर दिया। अब मैं भाग-भाग कर थक गया हूं। मैंने अपने बच्चों को बचाने की बहुत कोशिश की, लेकिन मैं फेल हो गया हूं। पता नहीं ये कैसे मेरी लोकेशन पता कर लेते हैं। मैं इस समय अपने आप को बहुत असहाय महसूस कर रहा हूं। क्योंकि अगर आपके पास पैसा और पावर है तो आप झूठ को सच बना सकते हैं। यही काम दलजीत सिंह एवं इनकी फैमिली और साथियों ने किया है। हमारी दो बार पंचायत भी हुई, मैने सारे सबूत पेश किए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। 5. मकान की ओरिजिनल रजिस्ट्री मेरे पास, मुझे मार सकते हैं
अब भी जो मेरा मकान दलजीत सिंह ने धोखे से अपनी पत्नी परविंद्र कौर के नाम रजिस्ट्री करवा लिया। उसकी ओरिजिनल रजिस्ट्री मेरे नाम से है। इस पर यूनियन बैंक सितारगंज से 16 लाख का होम लोन चल रहा है, जबकि उनके सारे कागजात फर्जी हैं, फिर भी मैं कुछ नहीं कर पा रहा हूं। अब मैं 2 साल से मानसिक सामाजिक तनाव झेल रहा हूं और इधर-उधर भाग रहा हूं। अगर मैं सितारगंज, रुद्रपुर गया तो वो मुझको मार सकते हैं। मेरा परिवार खत्म कर सकते हैं। इसलिए मैं अपने परिवार सहित मौत को गले लगा रहा हूं। 6. परिवार की जीने की इच्छा खत्म हुई, सच सामने लाएं
मेरी व मेरे परिवार की मौत के जिम्मेदार दलजीत सिंह, परविंदर कौर एवं उसकी पूरी फैमिली एवं उसके दोस्त हैं। दलजीत सिंह इनके दोस्त दर्शन सिह, लक्खा सिंह और हमारे परिवार वाले सबने मिलकर हमें बहुत मानसिक सामाजिक तौर पर बहुत परेशान किया है। हिंदुजा फाइनेंस के शाखा हल्द्वानी कार्यरत भास्कर पाठक ने भी इनके कहने पर मुझको बहुत परेशान किया है। अत: अब मैं और मेरा परिवार इनको सामाजिक तौर झेलने में असमर्थ हैं। अत: अब हमारी जीने की इच्छा खत्म हो गई है। और आपसे ( पुलिस एवं न्यायपालिका ) से आखरी उम्मीद है कि आप न्याय करके सच को सामने लाएं । 7. मेरे पास साढ़े 4 करोड़ होते तो खुदकुशी क्यों करता
पता करें कि दलजीत सिंह के पास 4.12 करोड़ रुपए कैसे आए और हमारे सारे बैंक अकाउंट भी चेक करें। क्योंकि अगर मैने दलजीत सिंह से 4.50 करोड़ रुपए लिए होते तो मुझको मौत को गले लगाने की जरूरत नहीं होती। मेरी सारी जानकारी एडवोकेट रजा एसोसिएट खटीमा के पास है, क्योंकि ये लोग उनको भी अपनी तरफ मिलाना चाहते थे वो नहीं माने (सारे ओरिजनल पेपर ) वकील साहिब के पास हैं। 8. मेरी डेडबॉडी किसी को न दें, पुलिस संस्कार कर दे
मेरी और मेरे परिवार की अंतिम इच्छा है कि हमारा अंतिम संस्कार पुलिस या सामाजिक संगठन करें। हमारी डेडबॉडी किसी और को ना दी जाए। मेरे मजहर अंसारी वजीराबाद दिल्ली पर 1.12 लाख रुपए बकाया हैं। उसे लेकर हमारा उधार और अंतिम संस्कार कर दिया जाए। मजहर ने मुझसे उधार पैसे ले रखे हैं। 9. मकान मालिक सामान बेचकर अपनी भरपाई कर लें
मैं अपने मकान मालिक बेनीवाल जी से हाथ जोड़कर माफी चाहता हूं कि मैंने मजबूरी में अपने परिवार को बचाने की कोशिश में दूसरी आईडी दे कर मकान किराए पर लिया ताकि मैं अपनी फैमिली को बचा सकूं, लेकिन मैं नाकाम रहा हूं। अत: हाथ जोड़कर आपसे माफी मांगता हूं, कृपया मुझे माफ कर दें। अब मैं पूरी तरह से टूट चुका हूं, इसलिए ये कदम उठा रहा हूं। हमें माफ करना। हमारा जो भी सामान है, उसको बेचकर अपना पैसा पूरा कर लेना। हमारा सामान हमारे किसी भी रिश्तेदार को न सौंपना, हमारी आखिरी इच्छा है। आपसे हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं, कृपया मुझे माफ करना । कल क्या हुआ था, सिलसिलेवार ढंग से जानिए… शनिवार को मकान से आई 2 धमाकों की आवाज
शनिवार 22 मार्च की शाम बहादुरगढ़ के सेक्टर-9 के मकान नंबर 312 पी में 2 बार धमाका हुआ था। इसकी सूचना पर पड़ोसी एकत्र हो गए। पड़ोसी प्रशांत ने बताया कि घर में करीब 6 बजे धमाका हुआ था। ऐसा लगा मानो हमारे घर का शीशा टूटा हो। बाहर निकलकर देखा तो पड़ोसी के घर में आग लगी थी। घर में धुआं भरा हुआ था। पास जाकर उसका दरवाजा खोलने की कोशिश की तो अंदर से लॉक था। दरवाजा तोड़ा, 3 बच्चे और एक महिला मृत मिली
प्रशांत ने बताया कि हमने कुछ लोगों को इकट्ठा कर दरवाजा तोड़ा तो देखा कि मकान में रहने वाला सरदार हरपाल सिंह दरवाजे के पास ही झुलसी हालत में पड़ा था। उसके हाथ, पैर और मुंह झुलसे हुए थे। उसे फौरन अस्पताल ले जाने का इंतजाम किया गया। वहीं, घर में अंदर जाकर देखा तो 3 बच्चे और एक महिला पड़ी थी। उनकी मौत हो चुकी थी। वे सभी जले हुए थे। शवों को शहर के सामान्य अस्पताल में भिजवाया गया है। 7 महीने पहले परिवार रहने आया था
DCP मयंक मिश्रा सूचना पर तुरंत घटना स्थल पहुंचे और मामले की जांच की। शुरुआती जांच में पता चला कि हरपाल सिंह कारोबारी है। वह अपने तीन बच्चों और पत्नी के साथ करीब 7 महीने पहले यहां किराए पर रहने आया था। घर एक मंजिला है। हादसे के समय घर अंदर से लॉक था। फोरेंसिक टीम ने की थी जांच
DCP मयंक मिश्रा ने बताया था कि 4 लोगों की ब्लास्ट में मौत हुई है, जबकि 1 गंभीर रूप से घायल है। पुलिस कई पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच शुरू की थी। फोरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया था। घर में रखा सिलेंडर सही सलामत है, AC यूनिट को नुकसान पहुंचा है। ब्लास्ट किस चीज में हुआ है, इसका पता लगाने के लिए विस्फोटक जांच टीम को सूचना भेजी गई थी।