हरियाणा के भिवानी में पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की प्रतिमा के अपमान पर बवाल मच गया है। यहां युवक ने प्रतिमा के ऊपर चढ़कर रील बनाई। रील में एक युवक प्रतिमा के कंधे पर चढ़कर नाच रहा है। इनमें से एक युवक की वीडियो भी बना रहा था। इस रील के बैकग्राउंड में हरियाणवी गाना लगाया गया है। इसका वीडियो सामने आते ही चौटाला परिवार नाराज हो गया है। चौधरी देवीलाल के पड़पोते JJP नेता दिग्विजय चौटाला ने सिरसा के SP को शिकायत देकर कार्रवाई करने की मांग की है। दिग्विजय ने कहा कि आने वाले समय में पंचायत कर इस पर फैसला किया जाएगा। वहीं, इससे पहले ही रील बनाने वाले युवक ने परिवार समेत हाथ जोड़कर माफी मांग ली है। उसने कहा कि मैं ताऊ देवीलाल के बारे में नहीं जानता था। उससे गलती हुई है। उसने चौधरी देवीलाल-अमर रहे के नारे भी लगाए। उसके परिजनों ने भी माफी मांगी है। वहीं दूसरे युवकों ने कहा कि वह ग्राउंड में घूमने आए थे। वीडियो में वह गलती से रिकॉर्ड हो गए। वह युवक के साथ रील बनाने वाले मामले में शामिल नहीं थे। अपमान का यह मामला भिवानी के गांव धनाना में सामने आया। यहां देवीलाल की प्रतिमा का अनावरण 20 सितंबर 2003 को पूर्व सांसद अजय सिंह चौटाला व विधायक शशि रंजन परमार ने किया था। वायरल वीडियो में 4 युवक दिखे थे
चौधरी देवीलाल की प्रतिमा के अपमान की वायरल वीडियो में 4 युवक दिखाई दे रहे थे। इनमें एक युवक प्रतिमा के ऊपर चढ़ा था। वहीं, दूसरा युवक उसकी वीडियो बना रहा था। बाकी 2 युवक वहां से गुजरते हुए नजर आ रहे थे। हालांकि बाकी तीनों ने अब पल्ला झाड़ लिया। 2 ने कहा कि वह तो घूम रहे थे। उसी वक्त वीडियो में रिकॉर्ड हो गए। वहीं चौथे युवक का कहना है कि रील बनाने वाले ने मुझसे मोबाइल मांगा और जाकर वीडियो बना ली। मुझसे गलती हो गई। पहले भी शरारती तत्वों ने अभद्रता की थी
गांव धनाना निवासी दिनेश ने बताया कि पहले भी शरारती तत्वों द्वारा इस तरह की अभद्रता की जा चुकी है, लेकिन अब इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद सबको पता चल गया। इससे पहले इस प्रतिमा की करीब 8 बार रिपेयरिंग करवाई जा चुकी है। पहले भी शरारती तत्वों द्वारा अभद्रता की गई और रोकने पर झगड़ा भी हुआ था। पूर्व डिप्टी PM के पड़पोते दिग्विजय चौटाला ने क्या कहा.. महापुरुषों से ऐसा बर्ताव करेंगे तो कैसे सुनहरा भविष्य होगा
दिग्विजय चौटाला ने कहा कि उन्हें एक वीडियो मिली थी, जिसमें कुछ युवकों ने चौधरी देवीलाल की प्रतिमा के साथ अभद्रता करने का काम किया है। यह बर्दाश्त करने लायक नहीं है। देवीलाल को चाहने वाले गरीब, किसान, मजदूर व कमेरा वर्ग के लोग इस हरकत से बहुत ज्यादा आहत हैं। उन्होंने कहा कि कम उम्र के नौजवान लड़के अगर इस तरह से अपने महापुरुषों के साथ बर्ताव करेंगे तो हम कैसे अपने सुनहरे भविष्य को लिखने की कामना कर सकते हैं। सभी लोग आलोचना करें, इसके विरोध में आवाज उठाएं, SP को शिकायत दी
दिग्विजय चौटाला ने कहा- पूरा समाज व सभी राजनीतिक लोग इसकी आलोचना करें और इसके विरोध में आवाज उठाएं। दिग्विजय चौटाला ने कहा कि उन्होंने सिरसा SP से बात कर लिखित शिकायत दी है। सिरसा की पुलिस इस पर जल्द कार्रवाई करके FIR दर्ज करेगी। गांव के लोगों के फोन आ रहे हैं। ताऊ देवीलाल: जमींदार परिवार में पैदा हुए, 36 साल की उम्र में जेल गए
25 सितंबर 1914 को चौधरी देवीलाल का जन्म सिरसा जिले के संपन्न किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता लेख राम सिहाग 2,750 बीघा जमीन के मालिक थे। देवीलाल की राजनीतिक जीवनी लिख चुके इतिहासकार प्रोफेसर केसी यादव बताते हैं, ‘देवीलाल खुद बहुत संपन्न परिवार के थे, 1930 से ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे, लेकिन उनका अंदाज ठेठ ग्रामीणों वाला ही रहा, वे दिल्ली के पावर कॉरिडोर में खेतिहर मजदूरों और गरीब गुरबों की सबसे बड़ी उम्मीद थे। देश का शहरी तबका उनको दबंग नेता की तरह ही देखता रहा।’ 1950 आते-आते देवीलाल किसानों के नेता बन गए थे। उन्होंने इसी साल एक बड़ा किसान आंदोलन किया, जिसमें देवीलाल समेत 500 किसानों की गिरफ्तारी हुई। बाद में पंजाब के CM गोपीचंद भार्गव को किसान नेताओं से समझौता करना पड़ा। देवीलाल तब पंजाब से अलग हरियाणा राज्य की मांग करने लगे थे। 1952 में वह पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक बनकर पंजाब विधानसभा में पहुंचे। पंजाब की राजनीति में उनकी दखल का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि 1956 में कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। नवंबर 1966 में पंजाब से अलग राज्य हरियाणा बना तो देवीलाल यहां के सबसे बड़े नेताओं में से एक थे। 1975 में इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी। बाकी नेताओं की तरह देवीलाल की भी गिरफ्तारी हुई और वह 19 महीने तक जेल में रहे। आपातकाल हटा तो 1977 में चुनाव हुए और देवीलाल ने जनता पार्टी से चुनाव लड़ा। इसके बाद वह हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। 1980 के संसदीय चुनाव में देवीलाल जनता पार्टी (समाजवादी) से चुनाव लड़े। इस चुनाव में जीतकर वह संसद पहुंच गए। दो साल बाद ही 1982 में देवीलाल ने लोकदल नाम से एक नई पार्टी बनाई। मई 1982 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में लोकदल और BJP ने गठबंधन करके कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ा। इस चुनाव में हरियाणा विधानसभा की कुल 90 सीटों में से कांग्रेस 36 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। वहीं, लोकदल और BJP को 37 सीटों पर जीत मिली। हालांकि कांग्रेस ने निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर सरकार बना ली। इसके बाद देवीलाल अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी में लग गए। अपनी नई पार्टी लोकदल को जिताने के लिए जमकर मेहनत की। परिणाम ये हुआ कि 5 साल बाद 1987 के विधानसभा चुनाव में लोकदल ने हरियाणा के 90 सदस्यीय सदन में 85 सीटें जीतकर कांग्रेस को सिर्फ 5 सीटों पर समेट दिया। 1989 में चौधरी देवीलाल को गठबंधन की केंद्र सरकार में प्रधानमंत्री पद ऑफर हुआ लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। देवीलाल ने तब कहा था- ‘मुझे हरियाणा में ताऊ कहते हैं। यहां भी ताऊ ही बना रहना चाहता हूं। मेरी इच्छा है कि विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री बने। मैं अपना नाम वापस लेता हूं और माननीय वीपी सिंह का नाम तजवीज (सुझाव) करता हूं, क्योंकि देश वीपी को चाहता है।’ इस सरकार में वह वीपी सिंह के साथ उपप्रधानमंत्री बने। ******************** ताऊ देवीलाल से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… देवीलाल ने PM पद ठुकराया, बोले- ताऊ ही रहने दो:बाद में उप-प्रधानमंत्री बनने के लिए अड़े; राज्यपाल को जड़ा था थप्पड़
हरियाणा के भिवानी में पूर्व उपप्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की प्रतिमा के अपमान पर बवाल मच गया है। यहां युवक ने प्रतिमा के ऊपर चढ़कर रील बनाई। रील में एक युवक प्रतिमा के कंधे पर चढ़कर नाच रहा है। इनमें से एक युवक की वीडियो भी बना रहा था। इस रील के बैकग्राउंड में हरियाणवी गाना लगाया गया है। इसका वीडियो सामने आते ही चौटाला परिवार नाराज हो गया है। चौधरी देवीलाल के पड़पोते JJP नेता दिग्विजय चौटाला ने सिरसा के SP को शिकायत देकर कार्रवाई करने की मांग की है। दिग्विजय ने कहा कि आने वाले समय में पंचायत कर इस पर फैसला किया जाएगा। वहीं, इससे पहले ही रील बनाने वाले युवक ने परिवार समेत हाथ जोड़कर माफी मांग ली है। उसने कहा कि मैं ताऊ देवीलाल के बारे में नहीं जानता था। उससे गलती हुई है। उसने चौधरी देवीलाल-अमर रहे के नारे भी लगाए। उसके परिजनों ने भी माफी मांगी है। वहीं दूसरे युवकों ने कहा कि वह ग्राउंड में घूमने आए थे। वीडियो में वह गलती से रिकॉर्ड हो गए। वह युवक के साथ रील बनाने वाले मामले में शामिल नहीं थे। अपमान का यह मामला भिवानी के गांव धनाना में सामने आया। यहां देवीलाल की प्रतिमा का अनावरण 20 सितंबर 2003 को पूर्व सांसद अजय सिंह चौटाला व विधायक शशि रंजन परमार ने किया था। वायरल वीडियो में 4 युवक दिखे थे
चौधरी देवीलाल की प्रतिमा के अपमान की वायरल वीडियो में 4 युवक दिखाई दे रहे थे। इनमें एक युवक प्रतिमा के ऊपर चढ़ा था। वहीं, दूसरा युवक उसकी वीडियो बना रहा था। बाकी 2 युवक वहां से गुजरते हुए नजर आ रहे थे। हालांकि बाकी तीनों ने अब पल्ला झाड़ लिया। 2 ने कहा कि वह तो घूम रहे थे। उसी वक्त वीडियो में रिकॉर्ड हो गए। वहीं चौथे युवक का कहना है कि रील बनाने वाले ने मुझसे मोबाइल मांगा और जाकर वीडियो बना ली। मुझसे गलती हो गई। पहले भी शरारती तत्वों ने अभद्रता की थी
गांव धनाना निवासी दिनेश ने बताया कि पहले भी शरारती तत्वों द्वारा इस तरह की अभद्रता की जा चुकी है, लेकिन अब इसकी वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद सबको पता चल गया। इससे पहले इस प्रतिमा की करीब 8 बार रिपेयरिंग करवाई जा चुकी है। पहले भी शरारती तत्वों द्वारा अभद्रता की गई और रोकने पर झगड़ा भी हुआ था। पूर्व डिप्टी PM के पड़पोते दिग्विजय चौटाला ने क्या कहा.. महापुरुषों से ऐसा बर्ताव करेंगे तो कैसे सुनहरा भविष्य होगा
दिग्विजय चौटाला ने कहा कि उन्हें एक वीडियो मिली थी, जिसमें कुछ युवकों ने चौधरी देवीलाल की प्रतिमा के साथ अभद्रता करने का काम किया है। यह बर्दाश्त करने लायक नहीं है। देवीलाल को चाहने वाले गरीब, किसान, मजदूर व कमेरा वर्ग के लोग इस हरकत से बहुत ज्यादा आहत हैं। उन्होंने कहा कि कम उम्र के नौजवान लड़के अगर इस तरह से अपने महापुरुषों के साथ बर्ताव करेंगे तो हम कैसे अपने सुनहरे भविष्य को लिखने की कामना कर सकते हैं। सभी लोग आलोचना करें, इसके विरोध में आवाज उठाएं, SP को शिकायत दी
दिग्विजय चौटाला ने कहा- पूरा समाज व सभी राजनीतिक लोग इसकी आलोचना करें और इसके विरोध में आवाज उठाएं। दिग्विजय चौटाला ने कहा कि उन्होंने सिरसा SP से बात कर लिखित शिकायत दी है। सिरसा की पुलिस इस पर जल्द कार्रवाई करके FIR दर्ज करेगी। गांव के लोगों के फोन आ रहे हैं। ताऊ देवीलाल: जमींदार परिवार में पैदा हुए, 36 साल की उम्र में जेल गए
25 सितंबर 1914 को चौधरी देवीलाल का जन्म सिरसा जिले के संपन्न किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता लेख राम सिहाग 2,750 बीघा जमीन के मालिक थे। देवीलाल की राजनीतिक जीवनी लिख चुके इतिहासकार प्रोफेसर केसी यादव बताते हैं, ‘देवीलाल खुद बहुत संपन्न परिवार के थे, 1930 से ही राजनीति में सक्रिय हो गए थे, लेकिन उनका अंदाज ठेठ ग्रामीणों वाला ही रहा, वे दिल्ली के पावर कॉरिडोर में खेतिहर मजदूरों और गरीब गुरबों की सबसे बड़ी उम्मीद थे। देश का शहरी तबका उनको दबंग नेता की तरह ही देखता रहा।’ 1950 आते-आते देवीलाल किसानों के नेता बन गए थे। उन्होंने इसी साल एक बड़ा किसान आंदोलन किया, जिसमें देवीलाल समेत 500 किसानों की गिरफ्तारी हुई। बाद में पंजाब के CM गोपीचंद भार्गव को किसान नेताओं से समझौता करना पड़ा। देवीलाल तब पंजाब से अलग हरियाणा राज्य की मांग करने लगे थे। 1952 में वह पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक बनकर पंजाब विधानसभा में पहुंचे। पंजाब की राजनीति में उनकी दखल का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि 1956 में कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। नवंबर 1966 में पंजाब से अलग राज्य हरियाणा बना तो देवीलाल यहां के सबसे बड़े नेताओं में से एक थे। 1975 में इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी। बाकी नेताओं की तरह देवीलाल की भी गिरफ्तारी हुई और वह 19 महीने तक जेल में रहे। आपातकाल हटा तो 1977 में चुनाव हुए और देवीलाल ने जनता पार्टी से चुनाव लड़ा। इसके बाद वह हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। 1980 के संसदीय चुनाव में देवीलाल जनता पार्टी (समाजवादी) से चुनाव लड़े। इस चुनाव में जीतकर वह संसद पहुंच गए। दो साल बाद ही 1982 में देवीलाल ने लोकदल नाम से एक नई पार्टी बनाई। मई 1982 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में लोकदल और BJP ने गठबंधन करके कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ा। इस चुनाव में हरियाणा विधानसभा की कुल 90 सीटों में से कांग्रेस 36 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी। वहीं, लोकदल और BJP को 37 सीटों पर जीत मिली। हालांकि कांग्रेस ने निर्दलीय विधायकों के साथ मिलकर सरकार बना ली। इसके बाद देवीलाल अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी में लग गए। अपनी नई पार्टी लोकदल को जिताने के लिए जमकर मेहनत की। परिणाम ये हुआ कि 5 साल बाद 1987 के विधानसभा चुनाव में लोकदल ने हरियाणा के 90 सदस्यीय सदन में 85 सीटें जीतकर कांग्रेस को सिर्फ 5 सीटों पर समेट दिया। 1989 में चौधरी देवीलाल को गठबंधन की केंद्र सरकार में प्रधानमंत्री पद ऑफर हुआ लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया। देवीलाल ने तब कहा था- ‘मुझे हरियाणा में ताऊ कहते हैं। यहां भी ताऊ ही बना रहना चाहता हूं। मेरी इच्छा है कि विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री बने। मैं अपना नाम वापस लेता हूं और माननीय वीपी सिंह का नाम तजवीज (सुझाव) करता हूं, क्योंकि देश वीपी को चाहता है।’ इस सरकार में वह वीपी सिंह के साथ उपप्रधानमंत्री बने। ******************** ताऊ देवीलाल से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… देवीलाल ने PM पद ठुकराया, बोले- ताऊ ही रहने दो:बाद में उप-प्रधानमंत्री बनने के लिए अड़े; राज्यपाल को जड़ा था थप्पड़