संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच करीब दो घंटे तक चली बैठक समाप्त हो गई। बैठक में किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई। किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने घोषणा की कि किसान 5 मार्च को चंडीगढ़ में प्रदर्शन करेंगे। किसानों का आरोप है कि मुख्यमंत्री गुस्से में आकर बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने बताया कि बैठक में केवल आधे मेमोरेंडम पर चर्चा हुई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी आंख में संक्रमण (इन्फेक्शन) है, उनकी डॉक्टर से अप्वाइंटमेंट है। इस कारण उन्हें जाना होगा। इसके बाद उन्होंने किसानों से पूछा कि वे 5 तारीख को क्या करने वाले हैं। जब किसानों ने किसानों ने कोई जवाब नहीं दिया। साथ ही कहा कि अगर धरना-प्रदर्शन ही करने है तो वह मीटिंग में शामिल नहीं होंगे। फिर बैठक से उठकर चले गए। राजेवाल ने कहा कि ऐसी स्थिति में यह कहना मुश्किल है कि किसी मुद्दे पर सहमति बनी थी या नहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री के इस तरह के व्यवहार को अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि मांगे मान ली जाती है तो वह मोर्चा नहीं लगाने वाले थे। सीएम ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट डालकर लिखा है कि आज पंजाब भवन में हुई बैठक में मैंने किसान जत्थेबंदियों के सभी सम्माननीय नेताओं से अपील की कि चक्का जाम करना, सड़कों और रेलों को रोकना या पंजाब बंद करना, किसी समस्या का हल नहीं है। इन सबसे आम लोगों को परेशान होना पड़ता है। समाज के बाकी वर्गों के कामकाज और कारोबार पर भी इसका बहुत असर पड़ता है, इसका भी हम ख्याल करें। किसानों की यह है मुख्य मांगें किसानों ने सरकार के साथ होने वाली बैठक के लिए अपनी सूची में कुल 17 मांगें शामिल की हैं। इनमें से 13 मांगें ऐसी हैं जिन्हें पूरा करने का सरकार पहले ही आश्वासन दे चुकी है। इन मांगों में किसानों की मांगों को लेकर सरकार और किसानों की सब-कमेटी बनाना, सरकारी विभागों की तर्ज पर किसानों के नाबार्ड लोन के लिए वन टाइम सेटलमेंट स्कीम शुरू करना, 1 जनवरी 2023 से सरहिंद फीडर नहर पर लगी मोटरों के बिल माफ करना, जनवरी 2024 से 13 अप्रैल 2024 तक गांव-गांव में केस-फ्री जमीन बांटना, आवारा पशुओं और कुत्तों के बारे में सरकार कोई समाधान निकालेगी। इनमें पशुओं द्वारा फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए किसानों को राइफल लाइसेंस जारी करना, प्रीपेड बिजली मीटर जारी करना, किसानों को नैनो पैकेजिंग और अन्य उत्पादों की जबरन आपूर्ति पर प्रतिबंध, बाढ़ के कारण गन्ने की फसल को हुए नुकसान का मुआवजा, सहकारी समितियों में नए खाते खोलने पर प्रतिबंध हटाना, आबादकारों और गन्ना किसानों की मांगों के समाधान के लिए उप-समितियों का गठन, पंजाब सरकार द्वारा पारित जल अनुसंधान अधिनियम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शामिल है। शंभू-खनौरी मोर्चा महापंचायतों की तैयारी में पंजाब-हरियाणा के शंभू और खनौरी मोर्चों पर किसानों का संघर्ष लगातार जारी है। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का आमरण अनशन आज सोमवार को 98वें दिन में प्रवेश कर गया है। उनके अनशन के 100 दिन पूरे होने पर, पांच मार्च को खनौरी बॉर्डर पर 101 किसान एक दिन की भूख हड़ताल पर बैठेंगे। इस बीच, मार्च में पूरे देश में आयोजित होने वाली किसान महापंचायत का शेड्यूल भी आज तय किया जाएगा। इसके लिए ऑनलाइन बैठक रखी गई है। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने 8 मार्च को महिला किसान पंचायत आयोजित करने का भी ऐलान किया है। फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा मिले हाल ही में हुई ओलावृष्टि और बारिश के कारण पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में फसलों को भारी नुकसान हुआ है। खासतौर पर, पंजाब के अमृतसर, हरियाणा के अंबाला और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में सरसों और गेहूं की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। शंभू मोर्चे के नेताओं ने राज्य और केंद्र सरकार से मांग की है कि जिस तरह पराली जलाने की निगरानी के लिए ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, उसी तरह फसलों के नुकसान का भी वैज्ञानिक आधार पर तुरंत आकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को बिना देरी किए उचित मुआवजा दिया जाए और फसल बीमा कंपनियों को घेरकर प्रभावित क्षेत्रों में गिरदावरी कराई जाए।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच करीब दो घंटे तक चली बैठक समाप्त हो गई। बैठक में किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई। किसान नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने घोषणा की कि किसान 5 मार्च को चंडीगढ़ में प्रदर्शन करेंगे। किसानों का आरोप है कि मुख्यमंत्री गुस्से में आकर बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने बताया कि बैठक में केवल आधे मेमोरेंडम पर चर्चा हुई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी आंख में संक्रमण (इन्फेक्शन) है, उनकी डॉक्टर से अप्वाइंटमेंट है। इस कारण उन्हें जाना होगा। इसके बाद उन्होंने किसानों से पूछा कि वे 5 तारीख को क्या करने वाले हैं। जब किसानों ने किसानों ने कोई जवाब नहीं दिया। साथ ही कहा कि अगर धरना-प्रदर्शन ही करने है तो वह मीटिंग में शामिल नहीं होंगे। फिर बैठक से उठकर चले गए। राजेवाल ने कहा कि ऐसी स्थिति में यह कहना मुश्किल है कि किसी मुद्दे पर सहमति बनी थी या नहीं। उन्होंने मुख्यमंत्री के इस तरह के व्यवहार को अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि मांगे मान ली जाती है तो वह मोर्चा नहीं लगाने वाले थे। सीएम ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट डालकर लिखा है कि आज पंजाब भवन में हुई बैठक में मैंने किसान जत्थेबंदियों के सभी सम्माननीय नेताओं से अपील की कि चक्का जाम करना, सड़कों और रेलों को रोकना या पंजाब बंद करना, किसी समस्या का हल नहीं है। इन सबसे आम लोगों को परेशान होना पड़ता है। समाज के बाकी वर्गों के कामकाज और कारोबार पर भी इसका बहुत असर पड़ता है, इसका भी हम ख्याल करें। किसानों की यह है मुख्य मांगें किसानों ने सरकार के साथ होने वाली बैठक के लिए अपनी सूची में कुल 17 मांगें शामिल की हैं। इनमें से 13 मांगें ऐसी हैं जिन्हें पूरा करने का सरकार पहले ही आश्वासन दे चुकी है। इन मांगों में किसानों की मांगों को लेकर सरकार और किसानों की सब-कमेटी बनाना, सरकारी विभागों की तर्ज पर किसानों के नाबार्ड लोन के लिए वन टाइम सेटलमेंट स्कीम शुरू करना, 1 जनवरी 2023 से सरहिंद फीडर नहर पर लगी मोटरों के बिल माफ करना, जनवरी 2024 से 13 अप्रैल 2024 तक गांव-गांव में केस-फ्री जमीन बांटना, आवारा पशुओं और कुत्तों के बारे में सरकार कोई समाधान निकालेगी। इनमें पशुओं द्वारा फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए किसानों को राइफल लाइसेंस जारी करना, प्रीपेड बिजली मीटर जारी करना, किसानों को नैनो पैकेजिंग और अन्य उत्पादों की जबरन आपूर्ति पर प्रतिबंध, बाढ़ के कारण गन्ने की फसल को हुए नुकसान का मुआवजा, सहकारी समितियों में नए खाते खोलने पर प्रतिबंध हटाना, आबादकारों और गन्ना किसानों की मांगों के समाधान के लिए उप-समितियों का गठन, पंजाब सरकार द्वारा पारित जल अनुसंधान अधिनियम और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शामिल है। शंभू-खनौरी मोर्चा महापंचायतों की तैयारी में पंजाब-हरियाणा के शंभू और खनौरी मोर्चों पर किसानों का संघर्ष लगातार जारी है। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का आमरण अनशन आज सोमवार को 98वें दिन में प्रवेश कर गया है। उनके अनशन के 100 दिन पूरे होने पर, पांच मार्च को खनौरी बॉर्डर पर 101 किसान एक दिन की भूख हड़ताल पर बैठेंगे। इस बीच, मार्च में पूरे देश में आयोजित होने वाली किसान महापंचायत का शेड्यूल भी आज तय किया जाएगा। इसके लिए ऑनलाइन बैठक रखी गई है। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा ने 8 मार्च को महिला किसान पंचायत आयोजित करने का भी ऐलान किया है। फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा मिले हाल ही में हुई ओलावृष्टि और बारिश के कारण पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में फसलों को भारी नुकसान हुआ है। खासतौर पर, पंजाब के अमृतसर, हरियाणा के अंबाला और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में सरसों और गेहूं की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। शंभू मोर्चे के नेताओं ने राज्य और केंद्र सरकार से मांग की है कि जिस तरह पराली जलाने की निगरानी के लिए ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, उसी तरह फसलों के नुकसान का भी वैज्ञानिक आधार पर तुरंत आकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को बिना देरी किए उचित मुआवजा दिया जाए और फसल बीमा कंपनियों को घेरकर प्रभावित क्षेत्रों में गिरदावरी कराई जाए।