प्रयागराज में 100 फीट ऊंचा हाईटेंशन लाइन का टावर गिर गया। हादसे में एक मजदूर का पैर कट कर दूर जा गिरा। 2 मजदूर टावर के नीचे दब गए। घटना में 4 अन्य मजदूर भी गंभीर घायल हुए हैं। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास के गांवों के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे। पुलिस, फायर ब्रिगेड और NHAI की टीम भी पहुंची। करीब 3 घंटे की मशक्कत के बाद टावर के नीचे दबे मजदूरों को बाहर निकाला गया। घायलों को पास के एक स्थानीय अस्पताल भेजा गया। जहां मजदूर सलीम की गंभीर हालत देखकर उसे एसआरएन अस्पताल रेफर किया गया है। घटना शनिवार दोपहर करीब 2 बजे गंगापार के सरायइनायत थाना क्षेत्र के सहसों इलाके की है। रिंग रोड निर्माण कार्य के चलते पुराने टावरों को हटाकर नए टावर लगाए जा रहे हैं। 33 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन बदली जा रही है। रेहंडम के तार को भी नए टावरों में लगाकर ऊंचा किया जा रहा है। आज दोपहर मशीन के माध्यम से मजदूर ब्रिज टावर पर तार खींच रहे थे। तभी तार टूट गया और अचानक टावर गिर गया। पहले देखिए घटना की 3 तस्वीरें… नीचे खड़े मजदूर टावर की चपेट में आए
घटनास्थल पर मौजूद मजदूरों ने बताया कि दोनों तरफ से तार को मशीन से खींचा जा रहा था। कुछ मजदूर टावर के नीचे काम कर रहे थे। टावर गिरा तो नीचे काम कर रहे मजदूर उसकी चपेट में आ गए। हादसे में पश्चिम बंगाल के मालदा के मजदूर आमिर पुत्र भोंदू, कासिम पुत्र इदुवा, अनिरुद्ध सिंह पुत्र सत्तर सेख,अब्दुल पुत्र शेख अख्तर, पुतुल शेख पुत्र भद्दू शेख, सलीम, छोट्टन गंभीर घायल हुए हैं। तार खींचने में लगते हैं 55 मजदूर
सहसों में 15 किलोमीटर के एरिया में छोटे टावर की जगह नए और बड़े टावर लगाए जा रहे हैं। एक टावर के तार खींचने में करीब 55 मजदूर लगते हैं। दोनों साइड जेसीबी या पोकलैंड के सहारे तारों को टॉवर पर डालकर खींचा जाता है। हादसा और बड़ा हो सकता था
असल में तार खिंचाई के दौरान एक ट्रेलर वहीं खड़ा था। उस पर सरिया लदी थी। टावर जब गिरा तो एक साइट ट्रेलर पर अटक गया। इससे बीच में जो मजदूर थे वही दबे।
दूसरे साइड के मजदूर बच गए। तार बंधाई-खिंचाई की यह प्रक्रिया रोज चल रही है। मजदूरों की सुरक्षा, देश-प्रदेश की प्रगति का प्रश्न
प्रयागराज हादसे पर अखिलेश यादव ने कहा- हाईटेंशन लाइन गिरने से चपेट में आए हुए मजदूरों को अच्छा से अच्छा इलाज सुनिश्चित किया जाए। ऐसे असंख्य मजदूर हैं जो अपने जीवन को जोखिम में डालकर देश निर्माण के काम में जुटे हैं। इनकी सुरक्षा का प्रश्न देश-प्रदेश की प्रगति का भी प्रश्न है। महाकुंभ-2025 की परियोजना में इनर रिंग रोड का काम शामिल है। लगभग 7000 करोड़ रुपये की प्रस्तावित रिंग रोड के प्रथम चरण का काम महाकुंभ 2025 के पहले होना था। महाकुंभ के बाद दूसरे और तीसरे चरण का कार्य होना था। पहले चरण की परियोजना के तहत लगभग 3100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसे चरणों में बांट दिया है। जमीन अधिग्रहण समेत अन्य मामलों की वजह से काम में देरी हुई। इसके बाद साफ हुआ कि गंगापार और यमुनापार के दो चरण महाकुंभ से पहले पूरे होंगे। बाकी चरण बाद में पूरा किया जाएगा। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि इनर रिंग रोड के अंतर्गत फूलपुर की तरफ 10.50 किलोमीटर सड़क का निर्माण हो रहा है। जिसमें छह अंडर पास व दो रेलवे पुल का निर्माण किया जा रहा है। सहसों में हाईटेंशन लाइन बदलने का काम भी चल रहा है। जहां ये हादसा हुआ है। ———————— ये भी पढ़ें: गंगा में बन रहा 4500 टन लोहे-स्टील का ब्रिज:महाकुंभ के लिए तेजी से रखी गई नींव, मेला खत्म होते ही तोड़ दिया जाएगा प्रयागराज के मलाका में 26 नवंबर 2020 से 10 किमी लंबा, देश का दूसरा सबसे बड़ा 6 लेन ब्रिज बनाने का काम शुरू हुआ। इसमें करीब 4 किमी का पुल गंगा नदी पर बनना था। महाकुंभ-2025 के लिए यह पुल बहुत जरूरी था। वजह- गंगा नदी पर बने 50 साल पुराने पुल का जर्जर होना। दूसरा यह कि एक रास्ते से करोड़ों श्रद्धालुओं का संगम तक पहुंचना भी आसान नहीं है…(पढ़ें पूरी खबर)
प्रयागराज में 100 फीट ऊंचा हाईटेंशन लाइन का टावर गिर गया। हादसे में एक मजदूर का पैर कट कर दूर जा गिरा। 2 मजदूर टावर के नीचे दब गए। घटना में 4 अन्य मजदूर भी गंभीर घायल हुए हैं। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास के गांवों के लोग बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे। पुलिस, फायर ब्रिगेड और NHAI की टीम भी पहुंची। करीब 3 घंटे की मशक्कत के बाद टावर के नीचे दबे मजदूरों को बाहर निकाला गया। घायलों को पास के एक स्थानीय अस्पताल भेजा गया। जहां मजदूर सलीम की गंभीर हालत देखकर उसे एसआरएन अस्पताल रेफर किया गया है। घटना शनिवार दोपहर करीब 2 बजे गंगापार के सरायइनायत थाना क्षेत्र के सहसों इलाके की है। रिंग रोड निर्माण कार्य के चलते पुराने टावरों को हटाकर नए टावर लगाए जा रहे हैं। 33 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन बदली जा रही है। रेहंडम के तार को भी नए टावरों में लगाकर ऊंचा किया जा रहा है। आज दोपहर मशीन के माध्यम से मजदूर ब्रिज टावर पर तार खींच रहे थे। तभी तार टूट गया और अचानक टावर गिर गया। पहले देखिए घटना की 3 तस्वीरें… नीचे खड़े मजदूर टावर की चपेट में आए
घटनास्थल पर मौजूद मजदूरों ने बताया कि दोनों तरफ से तार को मशीन से खींचा जा रहा था। कुछ मजदूर टावर के नीचे काम कर रहे थे। टावर गिरा तो नीचे काम कर रहे मजदूर उसकी चपेट में आ गए। हादसे में पश्चिम बंगाल के मालदा के मजदूर आमिर पुत्र भोंदू, कासिम पुत्र इदुवा, अनिरुद्ध सिंह पुत्र सत्तर सेख,अब्दुल पुत्र शेख अख्तर, पुतुल शेख पुत्र भद्दू शेख, सलीम, छोट्टन गंभीर घायल हुए हैं। तार खींचने में लगते हैं 55 मजदूर
सहसों में 15 किलोमीटर के एरिया में छोटे टावर की जगह नए और बड़े टावर लगाए जा रहे हैं। एक टावर के तार खींचने में करीब 55 मजदूर लगते हैं। दोनों साइड जेसीबी या पोकलैंड के सहारे तारों को टॉवर पर डालकर खींचा जाता है। हादसा और बड़ा हो सकता था
असल में तार खिंचाई के दौरान एक ट्रेलर वहीं खड़ा था। उस पर सरिया लदी थी। टावर जब गिरा तो एक साइट ट्रेलर पर अटक गया। इससे बीच में जो मजदूर थे वही दबे।
दूसरे साइड के मजदूर बच गए। तार बंधाई-खिंचाई की यह प्रक्रिया रोज चल रही है। मजदूरों की सुरक्षा, देश-प्रदेश की प्रगति का प्रश्न
प्रयागराज हादसे पर अखिलेश यादव ने कहा- हाईटेंशन लाइन गिरने से चपेट में आए हुए मजदूरों को अच्छा से अच्छा इलाज सुनिश्चित किया जाए। ऐसे असंख्य मजदूर हैं जो अपने जीवन को जोखिम में डालकर देश निर्माण के काम में जुटे हैं। इनकी सुरक्षा का प्रश्न देश-प्रदेश की प्रगति का भी प्रश्न है। महाकुंभ-2025 की परियोजना में इनर रिंग रोड का काम शामिल है। लगभग 7000 करोड़ रुपये की प्रस्तावित रिंग रोड के प्रथम चरण का काम महाकुंभ 2025 के पहले होना था। महाकुंभ के बाद दूसरे और तीसरे चरण का कार्य होना था। पहले चरण की परियोजना के तहत लगभग 3100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसे चरणों में बांट दिया है। जमीन अधिग्रहण समेत अन्य मामलों की वजह से काम में देरी हुई। इसके बाद साफ हुआ कि गंगापार और यमुनापार के दो चरण महाकुंभ से पहले पूरे होंगे। बाकी चरण बाद में पूरा किया जाएगा। एनएचएआई के अधिकारियों का कहना है कि इनर रिंग रोड के अंतर्गत फूलपुर की तरफ 10.50 किलोमीटर सड़क का निर्माण हो रहा है। जिसमें छह अंडर पास व दो रेलवे पुल का निर्माण किया जा रहा है। सहसों में हाईटेंशन लाइन बदलने का काम भी चल रहा है। जहां ये हादसा हुआ है। ———————— ये भी पढ़ें: गंगा में बन रहा 4500 टन लोहे-स्टील का ब्रिज:महाकुंभ के लिए तेजी से रखी गई नींव, मेला खत्म होते ही तोड़ दिया जाएगा प्रयागराज के मलाका में 26 नवंबर 2020 से 10 किमी लंबा, देश का दूसरा सबसे बड़ा 6 लेन ब्रिज बनाने का काम शुरू हुआ। इसमें करीब 4 किमी का पुल गंगा नदी पर बनना था। महाकुंभ-2025 के लिए यह पुल बहुत जरूरी था। वजह- गंगा नदी पर बने 50 साल पुराने पुल का जर्जर होना। दूसरा यह कि एक रास्ते से करोड़ों श्रद्धालुओं का संगम तक पहुंचना भी आसान नहीं है…(पढ़ें पूरी खबर)