प्रयागराज महाकुंभ में 24 जनवरी को ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाया गया था। 10 फरवरी को उन्होंने महामंडलेश्वर पद छोड़ने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था, किन्नर अखाड़े में लोग आपस में झगड़ रहे हैं। इससे दुखी हूं। दो दिन बाद 13 फरवरी को ममता फिर से किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बनीं। दैनिक भास्कर को भेजे अपने 1 मिनट 14 सेकेंड के वीडियो में ममता ने कहा कि उनकी गुरु डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने उनका इस्तीफा अस्वीकार किया है। ममता के इस्तीफे से पहले किन्नर जगद्गुरु हिमांगी सखी पर जानलेवा हमला हुआ था। जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हुई थीं। हिमांगी ने आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और उनके सहयोगियों पर हमले का आरोप लगाया था। हिमांगी, ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाए जाने को लेकर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से सवाल कर रहीं थीं। ममता कुलकर्णी के महामंडलेश्वर पद फिर से स्वीकार करने पर हिमांगी सखी ने दैनिक भास्कर से एक्सक्लूसिव बात की और किन्नर अखाड़े, साथ ही आचार्य लक्ष्मी नारायण को लेकर कई गंभीर खुलासे किए हैं। हिमांगी सखी का पूरा इंटरव्यू सिलसिलेवार पढ़ें… सवाल: हिमांगी जी आप कैसा महसूस कर रही हैं? आपका स्वास्थ्य ठीक है? जवाब: मेरा स्वास्थ्य थोड़ा ठीक है। आप देख सकते हैं जैसे मुझे नाक पर चोट लगी है, हाथों में खरोंच है। पैरों पर भी नाखून से मारा गया है। डॉक्टर ने ट्रीटमेंट दिया है और अभी थोड़ा रिलैक्स लग रहा है। सवाल: आपने सुना होगा ममता कुलकर्णी दोबारा मंडलेश्वर बन गई हैं। इस पर क्या कहना है? जवाब: मुझे तो हंसी आती है। सनातन धर्म की इतनी बड़ी पदवी का मजाक बना दिया है। अगर कोई कहता है कि मुझे इस दिखावे की जिंदगी से नहीं जीना है, तो उसे पदवी की क्या लालसा है? सवाल: आपका किन्नर अखाड़े को लेकर क्या विवाद है? जवाब: मुझे शर्म आती है कि किन्नर समाज मुझे नहीं समझ पाया। अगर कोई आपको सत्य का आईना दिखा रहा है और आप उसे नेगेटिव वे में लेकर चलोगे तो मैं क्या कर सकती हूं? मैंने ममता कुलकर्णी के बारे में जो कहा वह सच है। सवाल: आपके साथ मारपीट हुई? जवाब: रात के 9 बजकर 40 मिनट पर 12 गाड़ियां मेरे गेट के बाहर खड़ी थीं। लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी नशे की अवस्था में मेरे कैंप में दाखिल हुईं और मेरे साथ मारपीट की। जब मेरी आंखों से ब्लीडिंग हुई, तब सबको रोका। फिर वीडियो बनाकर ‘हम सब एक हैं’ बोलने के लिए कहा गया। सवाल: पुलिस कब आई? जवाब: पहले सिर्फ एक ही गनर था। वह भी छीन लिया गया। जब यह सब हुआ तो फिर बाद में सिपाही बढ़ाए गए। सवाल: किन्नर अखाड़े में सब सही चलता है या कुछ गड़बड़ है? जवाब: सब जानते हैं क्या है। शराब का पान होता है। मांस-मदिरा का सेवन भी होता है। मेरे शिविर में दाखिल होने वाले कई लोग शराब पिए हुए थे। सवाल: अघोर पूजा के बारे में क्या कहना है? जवाब: अघोर पूजा श्मशान में होती है। कुंभ की पवित्र भूमि पर अघोर पूजा नहीं हो सकती है। यह शास्त्र का खंडन करता है। सवाल: लक्ष्मी नारायण जी के बारे में कुछ और कहना चाहेंगी? जवाब: मैंने सब कुछ कह दिया है। कुछ चीजें हैं जो समय आने पर सामने आएंगी। सवाल: आप क्या चाहती हैं? जवाब: मैं एफआईआर तो करके रहूंगी। लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के नाम से। मेरे पास ऐसे एविडेंस हैं। उन्हीं के किन्नर अखाड़े के शिष्यों पर 2022 में भी एफआईआर हुई थी। सवाल: आपका शक और संदेह क्या कहता है? जवाब: मेरी जांच हो पहले और फिर वहां की जांच हो। सब दूध का दूध और पानी का पानी समाज के सामने आएगा। सवाल: किन्नर समाज में गुंडागर्दी बढ़ गई है? जवाब: हां, समाज डरने लगा है। इसी प्रयागराज में किन्नर समाज लूटते हैं, मार पिटाई करते हैं। क्या यह शोभा देता है? सवाल: क्या आपको लगता है कि धन का सही उपयोग होता है? जवाब: वह तो भगवान ही जाने। काला धन है, सफेद धन है या लूटमार वाला धन है। वह कहां जाता है, यह वही जानते हैं। सवाल: आप लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के बारे में क्या कहना चाहेंगी? जवाब: मैं लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को यही कहना चाहूंगी कि उन्होंने 9 साल से अखाड़ा बनाया है, लेकिन अभी तक उन्होंने किन्नरों को धर्म का ज्ञान नहीं दिया है। यह बहुत अफसोस की बात है। अगर मैं उनकी जगह होती, तो मैं अब तक किन्नरों को धर्म का ज्ञान दिलवा चुकी होती, शास्त्रों का ज्ञान दिलवा चुकी होती, गुरुकुल खोलती और उन्हें सत्य का मार्ग दिखाती। सवाल: आपको लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और उनके लोगों पर दया क्यों आती है? जवाब: मुझे उन पर दया इसलिए आती है क्योंकि उन्हें धर्म की गद्दी तो मिल गई है, लेकिन धर्म का ज्ञान नहीं मिल पाया है। वे उस ज्ञान को लेना भी नहीं चाहते हैं। वे अज्ञान का अमृत पान करने की बजाय कुछ और ही पान करने लग गए हैं। सवाल: क्या आप लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से चिढ़ती हैं? जवाब: नहीं, मैं उनसे नहीं चिढ़ती हूं। मुझे तो उन पर अफसोस होता है। मुझे उन पर दया आती है। सवाल: आप अपने समाज को आगे बढ़ाने के लिए क्या कर रही हैं? जवाब: मैं अपने समाज को शिक्षित करने के लिए शास्त्रों की शिक्षा दे रही हूं। मैं उन्हें दस नाम संन्यासी की पद्धति सिखा रही हूं, वैष्णव पद्धति सिखा रही हूं, भक्ति मार्ग सिखा रही हूं। मैं उन्हें सुबह उठकर भगवान का नाम जाप करना सिखा रही हूं। मैं उन्हें 16 श्रृंगार करके गद्दी पर बैठने और डोनेशन का बॉक्स रखने की बजाय धर्म का ज्ञान दे रही हूं। सवाल: आप लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के अखाड़े के बारे में क्या कहना चाहेंगी? जवाब: यही कहना चाहूंगी कि उन्हें भीड़ की जरूरत नहीं है। उन्हें यह देखना चाहिए कि उनका समाज कितना शिक्षित हो रहा है। उन्हें अपने समाज को शिक्षित करने के लिए किसी को तो आगे लाना चाहिए। सवाल:आप अपने बारे में क्या कहना चाहेंगी? जवाब: मैं किन्नर जगतगुरु हिमांगी सखी हूं। मैंने शास्त्रों की शिक्षा ली है। मैं अपने समाज को शिक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। मैं चाहती हूं कि मेरा समाज धर्म का ज्ञान प्राप्त करे और एक बेहतर जीवन जिए। इस्तीफा वापस लेने पर क्या बोलीं ममता कुलकर्णी? ममता कुलकर्णी ने कहा, ‘मैं श्रीयामाई ममता नंदगिरि। दो दिन पहले मेरे पट्टा गुरु लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी पर कुछ लोगों ने गलत आक्षेप लगाए थे। इस चीज से दुखी होकर मैंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उन्होंने मेरा इस्तीफा नामंजूर कर दिया है और जो गुरु भेंट मैंने आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को दी थी, वो एक महामंडलेश्वर बनने के बाद जो छत्र, छड़ी और चंवर होते हैं, उसके लिए थी। जो थोड़ी गुरु भेंट बची, वो भंडारे के लिए समर्पित कर दी गई। मैंने उनकी कृतज्ञ हूं, उन्होंने मुझे वापस इस पद पर बैठाया। आगे चलकर मैं अपना जीवन किन्नर अखाड़ा और सनातन धर्म के लिए समर्पित करूंगी।’ ……………………………………. ममता कुलकर्णी से जुड़ी ये खबर पढ़ें… ममता कुलकर्णी का इस्तीफा नामंजूर, फिर महामंडलेश्वर बनीं:बोलीं- गुरु डॉ. लक्ष्मी त्रिपाठी पर आरोप लगने से दुखी थी, इसलिए छोड़ा था पद ममता कुलकर्णी 2 दिन बाद फिर किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बन गईं। उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। 13 फरवरी को वीडियो जारी करते हुए कहा, उनकी गुरु डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। दैनिक भास्कर से आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी त्रिपाठी ने कहा, ‘ममता कुलकर्णी को हमने महामंडलेश्वर बनाया था। वह किन्नर अखाड़े में थीं, हैं और आगे भी रहेंगी।’ पूरी खबर पढ़ें
प्रयागराज महाकुंभ में 24 जनवरी को ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाया गया था। 10 फरवरी को उन्होंने महामंडलेश्वर पद छोड़ने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था, किन्नर अखाड़े में लोग आपस में झगड़ रहे हैं। इससे दुखी हूं। दो दिन बाद 13 फरवरी को ममता फिर से किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बनीं। दैनिक भास्कर को भेजे अपने 1 मिनट 14 सेकेंड के वीडियो में ममता ने कहा कि उनकी गुरु डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने उनका इस्तीफा अस्वीकार किया है। ममता के इस्तीफे से पहले किन्नर जगद्गुरु हिमांगी सखी पर जानलेवा हमला हुआ था। जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हुई थीं। हिमांगी ने आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और उनके सहयोगियों पर हमले का आरोप लगाया था। हिमांगी, ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाए जाने को लेकर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से सवाल कर रहीं थीं। ममता कुलकर्णी के महामंडलेश्वर पद फिर से स्वीकार करने पर हिमांगी सखी ने दैनिक भास्कर से एक्सक्लूसिव बात की और किन्नर अखाड़े, साथ ही आचार्य लक्ष्मी नारायण को लेकर कई गंभीर खुलासे किए हैं। हिमांगी सखी का पूरा इंटरव्यू सिलसिलेवार पढ़ें… सवाल: हिमांगी जी आप कैसा महसूस कर रही हैं? आपका स्वास्थ्य ठीक है? जवाब: मेरा स्वास्थ्य थोड़ा ठीक है। आप देख सकते हैं जैसे मुझे नाक पर चोट लगी है, हाथों में खरोंच है। पैरों पर भी नाखून से मारा गया है। डॉक्टर ने ट्रीटमेंट दिया है और अभी थोड़ा रिलैक्स लग रहा है। सवाल: आपने सुना होगा ममता कुलकर्णी दोबारा मंडलेश्वर बन गई हैं। इस पर क्या कहना है? जवाब: मुझे तो हंसी आती है। सनातन धर्म की इतनी बड़ी पदवी का मजाक बना दिया है। अगर कोई कहता है कि मुझे इस दिखावे की जिंदगी से नहीं जीना है, तो उसे पदवी की क्या लालसा है? सवाल: आपका किन्नर अखाड़े को लेकर क्या विवाद है? जवाब: मुझे शर्म आती है कि किन्नर समाज मुझे नहीं समझ पाया। अगर कोई आपको सत्य का आईना दिखा रहा है और आप उसे नेगेटिव वे में लेकर चलोगे तो मैं क्या कर सकती हूं? मैंने ममता कुलकर्णी के बारे में जो कहा वह सच है। सवाल: आपके साथ मारपीट हुई? जवाब: रात के 9 बजकर 40 मिनट पर 12 गाड़ियां मेरे गेट के बाहर खड़ी थीं। लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी नशे की अवस्था में मेरे कैंप में दाखिल हुईं और मेरे साथ मारपीट की। जब मेरी आंखों से ब्लीडिंग हुई, तब सबको रोका। फिर वीडियो बनाकर ‘हम सब एक हैं’ बोलने के लिए कहा गया। सवाल: पुलिस कब आई? जवाब: पहले सिर्फ एक ही गनर था। वह भी छीन लिया गया। जब यह सब हुआ तो फिर बाद में सिपाही बढ़ाए गए। सवाल: किन्नर अखाड़े में सब सही चलता है या कुछ गड़बड़ है? जवाब: सब जानते हैं क्या है। शराब का पान होता है। मांस-मदिरा का सेवन भी होता है। मेरे शिविर में दाखिल होने वाले कई लोग शराब पिए हुए थे। सवाल: अघोर पूजा के बारे में क्या कहना है? जवाब: अघोर पूजा श्मशान में होती है। कुंभ की पवित्र भूमि पर अघोर पूजा नहीं हो सकती है। यह शास्त्र का खंडन करता है। सवाल: लक्ष्मी नारायण जी के बारे में कुछ और कहना चाहेंगी? जवाब: मैंने सब कुछ कह दिया है। कुछ चीजें हैं जो समय आने पर सामने आएंगी। सवाल: आप क्या चाहती हैं? जवाब: मैं एफआईआर तो करके रहूंगी। लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के नाम से। मेरे पास ऐसे एविडेंस हैं। उन्हीं के किन्नर अखाड़े के शिष्यों पर 2022 में भी एफआईआर हुई थी। सवाल: आपका शक और संदेह क्या कहता है? जवाब: मेरी जांच हो पहले और फिर वहां की जांच हो। सब दूध का दूध और पानी का पानी समाज के सामने आएगा। सवाल: किन्नर समाज में गुंडागर्दी बढ़ गई है? जवाब: हां, समाज डरने लगा है। इसी प्रयागराज में किन्नर समाज लूटते हैं, मार पिटाई करते हैं। क्या यह शोभा देता है? सवाल: क्या आपको लगता है कि धन का सही उपयोग होता है? जवाब: वह तो भगवान ही जाने। काला धन है, सफेद धन है या लूटमार वाला धन है। वह कहां जाता है, यह वही जानते हैं। सवाल: आप लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के बारे में क्या कहना चाहेंगी? जवाब: मैं लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को यही कहना चाहूंगी कि उन्होंने 9 साल से अखाड़ा बनाया है, लेकिन अभी तक उन्होंने किन्नरों को धर्म का ज्ञान नहीं दिया है। यह बहुत अफसोस की बात है। अगर मैं उनकी जगह होती, तो मैं अब तक किन्नरों को धर्म का ज्ञान दिलवा चुकी होती, शास्त्रों का ज्ञान दिलवा चुकी होती, गुरुकुल खोलती और उन्हें सत्य का मार्ग दिखाती। सवाल: आपको लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और उनके लोगों पर दया क्यों आती है? जवाब: मुझे उन पर दया इसलिए आती है क्योंकि उन्हें धर्म की गद्दी तो मिल गई है, लेकिन धर्म का ज्ञान नहीं मिल पाया है। वे उस ज्ञान को लेना भी नहीं चाहते हैं। वे अज्ञान का अमृत पान करने की बजाय कुछ और ही पान करने लग गए हैं। सवाल: क्या आप लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से चिढ़ती हैं? जवाब: नहीं, मैं उनसे नहीं चिढ़ती हूं। मुझे तो उन पर अफसोस होता है। मुझे उन पर दया आती है। सवाल: आप अपने समाज को आगे बढ़ाने के लिए क्या कर रही हैं? जवाब: मैं अपने समाज को शिक्षित करने के लिए शास्त्रों की शिक्षा दे रही हूं। मैं उन्हें दस नाम संन्यासी की पद्धति सिखा रही हूं, वैष्णव पद्धति सिखा रही हूं, भक्ति मार्ग सिखा रही हूं। मैं उन्हें सुबह उठकर भगवान का नाम जाप करना सिखा रही हूं। मैं उन्हें 16 श्रृंगार करके गद्दी पर बैठने और डोनेशन का बॉक्स रखने की बजाय धर्म का ज्ञान दे रही हूं। सवाल: आप लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के अखाड़े के बारे में क्या कहना चाहेंगी? जवाब: यही कहना चाहूंगी कि उन्हें भीड़ की जरूरत नहीं है। उन्हें यह देखना चाहिए कि उनका समाज कितना शिक्षित हो रहा है। उन्हें अपने समाज को शिक्षित करने के लिए किसी को तो आगे लाना चाहिए। सवाल:आप अपने बारे में क्या कहना चाहेंगी? जवाब: मैं किन्नर जगतगुरु हिमांगी सखी हूं। मैंने शास्त्रों की शिक्षा ली है। मैं अपने समाज को शिक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। मैं चाहती हूं कि मेरा समाज धर्म का ज्ञान प्राप्त करे और एक बेहतर जीवन जिए। इस्तीफा वापस लेने पर क्या बोलीं ममता कुलकर्णी? ममता कुलकर्णी ने कहा, ‘मैं श्रीयामाई ममता नंदगिरि। दो दिन पहले मेरे पट्टा गुरु लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी पर कुछ लोगों ने गलत आक्षेप लगाए थे। इस चीज से दुखी होकर मैंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन उन्होंने मेरा इस्तीफा नामंजूर कर दिया है और जो गुरु भेंट मैंने आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को दी थी, वो एक महामंडलेश्वर बनने के बाद जो छत्र, छड़ी और चंवर होते हैं, उसके लिए थी। जो थोड़ी गुरु भेंट बची, वो भंडारे के लिए समर्पित कर दी गई। मैंने उनकी कृतज्ञ हूं, उन्होंने मुझे वापस इस पद पर बैठाया। आगे चलकर मैं अपना जीवन किन्नर अखाड़ा और सनातन धर्म के लिए समर्पित करूंगी।’ ……………………………………. ममता कुलकर्णी से जुड़ी ये खबर पढ़ें… ममता कुलकर्णी का इस्तीफा नामंजूर, फिर महामंडलेश्वर बनीं:बोलीं- गुरु डॉ. लक्ष्मी त्रिपाठी पर आरोप लगने से दुखी थी, इसलिए छोड़ा था पद ममता कुलकर्णी 2 दिन बाद फिर किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बन गईं। उन्होंने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। 13 फरवरी को वीडियो जारी करते हुए कहा, उनकी गुरु डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। दैनिक भास्कर से आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी त्रिपाठी ने कहा, ‘ममता कुलकर्णी को हमने महामंडलेश्वर बनाया था। वह किन्नर अखाड़े में थीं, हैं और आगे भी रहेंगी।’ पूरी खबर पढ़ें