हिमाचल प्रदेश के चंबा से एक खच्चर पर डेढ़ करोड़ रुपए की रेत-बजरी ढोने का मामला सामने आया है। खच्चर के मालिक को 5 साल तक सरकारी मेटेरियल ढोने के बदले 1.53 करोड़ मिले थे। हालांकि बाद में जनप्रतिनिधियों ने ही इस पैसे का बंदरबांट कर लिया और चेक के मध्यम से अपने-अपने खातों में अपने हिस्से के पैसे डलवा लिए। ग्रामीणों को जब पता लगा कि रेत ढुलाई के बदले करोड़ों रुपए मिले हैं तो उन्हें इस पर शक हुआ। फौरन मामले की शिकायत पुलिस को दी गई। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में ही गड़बड़ी पकड़ ली और FIR दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस ने बताया कि है कि अभी सिर्फ 5 साल की है डिटेल चेक की गई है। शक है कि ये गड़बड़ी कम से कम 20 साल से चल रही है। अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़ें पूरा मामला… खाते में आए करोड़ों, गांव वालों को शक हुआ
खच्चर मालिक लेखराज सनवाल पंचायत के ही सनवाल गांव का रहने वाला है और वह बीपीएल परिवार से संबंध रखता है। उसके पास एक खच्चर है, जिससे वो ढुलाई का काम करता है। गांव में किसी भी सरकारी योजना के तहत कोई विकास कार्य होता है तो लेखराज अपने ही खच्चर से सामान की ढुलाई करता है। लेखराज को 2020 से लेकर 2024 तक 1.53 करोड़ पेमेंट हुई। ये बात किसी तरह गांव वालों को पता लगी। ग्रामीणों को गड़बड़ी का शक हुआ। उनका मानना था कि एक खच्चर पर 5 साल में इतनी रेत-बजरी की ढुलाई संभव ही नहीं है। पुलिस को शिकायत दी, आरोप सही निकले
6 ग्रामीणों ने बीते 20 जनवरी को तीसा पुलिस थाने में शिकायत दी। शिकायत में पूर्व जिला परिषद सदस्य कर्मचंद, उसकी पत्नी पूर्व प्रधान धनदेवी, मौजूदा प्रधान मोहन लाल पर गड़बड़ी के आरोप लगाए। पुलिस ने मामले की जांच की तो गड़बड़ी सामने आ गई, जिसके बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी। प्रधान सहित पूर्व जनप्रतिनिधियों ने पैसे बांटे
सनवाल के ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने जब जांच शुरू की तो पता चला कि जनप्रतिनिधियों ने 1.53 करोड़ रुपए खच्चर मालिक के बैंक खाते में डाले हैं। बाद में ये पैसे पूर्व जिला परिषद, पूर्व प्रधान व मौजूदा प्रधान सहित कुछ अन्य के बैंक खातों में चैक के जरिए ट्रांसफर किए गए। पूर्व प्रधान धनदेवी के अकाउंट में तो चेक से एक पेमेंट 12 लाख रुपए की पाई गई। वेंडर के जरिए हुआ पूरा घोटाला
दरअसल, कोई भी पंचायत रेत, बजरी जैसा मेटेरियल वेंडर के थ्रू सप्लाई करती है। जांच में पता चला है कि पंचायत के वेंडर ने ही यह राशि लेखराज के खाते में ट्रांसफर की थी। इससे पुलिस को शक है कि वेंडर भी इस पूरे घोटाले में मिला हुआ था। जांच में शामिल नहीं हो रहा खच्चर मालिक
सूत्र बताते हैं कि पुलिस ने खच्चर मालिक को दो बार पुलिस थाने में बुलाया, लेकिन वह जांच में शामिल नहीं हो रहा है। दोनों बार बुलाने पर भी वो थाने में नहीं आया। तीसरी बार उसके घर पर पुलिस भी भेजी गई। हालांकि वह उस समय घर पर मिला ही नहीं। वहीं पुलिस के अनुसार, जिन पंचायत प्रतिनिधियों के बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर किया गया, उन पर 2022 में सवा करोड़ रुपए के सेब के पौधे खरीदने में भी गड़बड़ी के आरोप लगे थे।
हिमाचल प्रदेश के चंबा से एक खच्चर पर डेढ़ करोड़ रुपए की रेत-बजरी ढोने का मामला सामने आया है। खच्चर के मालिक को 5 साल तक सरकारी मेटेरियल ढोने के बदले 1.53 करोड़ मिले थे। हालांकि बाद में जनप्रतिनिधियों ने ही इस पैसे का बंदरबांट कर लिया और चेक के मध्यम से अपने-अपने खातों में अपने हिस्से के पैसे डलवा लिए। ग्रामीणों को जब पता लगा कि रेत ढुलाई के बदले करोड़ों रुपए मिले हैं तो उन्हें इस पर शक हुआ। फौरन मामले की शिकायत पुलिस को दी गई। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में ही गड़बड़ी पकड़ ली और FIR दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस ने बताया कि है कि अभी सिर्फ 5 साल की है डिटेल चेक की गई है। शक है कि ये गड़बड़ी कम से कम 20 साल से चल रही है। अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़ें पूरा मामला… खाते में आए करोड़ों, गांव वालों को शक हुआ
खच्चर मालिक लेखराज सनवाल पंचायत के ही सनवाल गांव का रहने वाला है और वह बीपीएल परिवार से संबंध रखता है। उसके पास एक खच्चर है, जिससे वो ढुलाई का काम करता है। गांव में किसी भी सरकारी योजना के तहत कोई विकास कार्य होता है तो लेखराज अपने ही खच्चर से सामान की ढुलाई करता है। लेखराज को 2020 से लेकर 2024 तक 1.53 करोड़ पेमेंट हुई। ये बात किसी तरह गांव वालों को पता लगी। ग्रामीणों को गड़बड़ी का शक हुआ। उनका मानना था कि एक खच्चर पर 5 साल में इतनी रेत-बजरी की ढुलाई संभव ही नहीं है। पुलिस को शिकायत दी, आरोप सही निकले
6 ग्रामीणों ने बीते 20 जनवरी को तीसा पुलिस थाने में शिकायत दी। शिकायत में पूर्व जिला परिषद सदस्य कर्मचंद, उसकी पत्नी पूर्व प्रधान धनदेवी, मौजूदा प्रधान मोहन लाल पर गड़बड़ी के आरोप लगाए। पुलिस ने मामले की जांच की तो गड़बड़ी सामने आ गई, जिसके बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी। प्रधान सहित पूर्व जनप्रतिनिधियों ने पैसे बांटे
सनवाल के ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस ने जब जांच शुरू की तो पता चला कि जनप्रतिनिधियों ने 1.53 करोड़ रुपए खच्चर मालिक के बैंक खाते में डाले हैं। बाद में ये पैसे पूर्व जिला परिषद, पूर्व प्रधान व मौजूदा प्रधान सहित कुछ अन्य के बैंक खातों में चैक के जरिए ट्रांसफर किए गए। पूर्व प्रधान धनदेवी के अकाउंट में तो चेक से एक पेमेंट 12 लाख रुपए की पाई गई। वेंडर के जरिए हुआ पूरा घोटाला
दरअसल, कोई भी पंचायत रेत, बजरी जैसा मेटेरियल वेंडर के थ्रू सप्लाई करती है। जांच में पता चला है कि पंचायत के वेंडर ने ही यह राशि लेखराज के खाते में ट्रांसफर की थी। इससे पुलिस को शक है कि वेंडर भी इस पूरे घोटाले में मिला हुआ था। जांच में शामिल नहीं हो रहा खच्चर मालिक
सूत्र बताते हैं कि पुलिस ने खच्चर मालिक को दो बार पुलिस थाने में बुलाया, लेकिन वह जांच में शामिल नहीं हो रहा है। दोनों बार बुलाने पर भी वो थाने में नहीं आया। तीसरी बार उसके घर पर पुलिस भी भेजी गई। हालांकि वह उस समय घर पर मिला ही नहीं। वहीं पुलिस के अनुसार, जिन पंचायत प्रतिनिधियों के बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर किया गया, उन पर 2022 में सवा करोड़ रुपए के सेब के पौधे खरीदने में भी गड़बड़ी के आरोप लगे थे।