SC के आदेश पर चुनाव आयोग ने SIR की लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी लिस्ट वेबसाइट पर डाली, पंचायत-ब्लॉक और वार्ड दफ्तरों में चस्पा होगी चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार SIR के तहत ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ लिस्ट में शामिल मतदाताओं के नाम शनिवार को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिए। अब यह सूची ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक कार्यालयों और नगर वार्ड दफ्तरों में चिपकाई जाएगी। मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार ने कहा कि SIR 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहा है। बाकी राज्यों में इसे जल्द लागू किया जाएगा। 19 जनवरी को SC ने लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिस वाले 1.25 करोड़ वोटर्स को लिस्ट ग्राम पंचायत भवन, ब्लॉक कार्यालय और वार्ड कार्यालय में सार्वजनिक करने के निर्देश दिए थे। सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन को लेकर चुनाव आयोग असमंजस में था, क्योंकि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को जरूरी सॉफ्टवेयर शुक्रवार देर रात तक नहीं मिल पाया था। चुनाव आयुक्त बोले- बाकी राज्यों में भी जल्द लागू होगा SIR मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि SIR फिलहाल 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सुचारू रूप से चल रहा है। बाकी राज्यों में भी इसे जल्द लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है। CEC के मुताबिक बिहार में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अंतिम मतदाता सूची के खिलाफ एक भी अपील दर्ज नहीं हुई। इसी आधार पर हुए चुनावों में 67.13% मतदान हुआ, जबकि महिलाओं की भागीदारी 71.78% रही अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन बोले- बंगाल में जल्दबाजी में SIR हो रहा नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर कहा कि यह प्रक्रिया बहुत जल्दबाजी में की जा रही है, जिससे लोगों के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। खासकर तब जब राज्य में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। सेन ने कहा कि SIR के तहत मतदाताओं को अपने अधिकार साबित करने के लिए दस्तावेज देने पड़ रहे हैं। इसके लिए उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा। इससे कई योग्य मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। अभिषेक बनर्जी का आरोप- लिस्ट जारी करने में जानबूझकर देरी इधर तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने शनिवार शाम को कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और आयोग के अपने पत्र के बावजूद 24 जनवरी तक सभी ग्राम पंचायतों और नगर वार्डों में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ सूची प्रकाशित नहीं की गई। जिस सॉफ्टवेयर ने 7 करोड़ से ज्यादा फॉर्म का विश्लेषण कर एक घंटे में गड़बड़ियां पकड़ लीं, वही अब सूची जारी करने में धीमा पड़ गया है। क्या देरी जानबूझकर की जा रही है? ———- ये खबर भी पढ़ें… बंगाल SIR,गड़बड़ी वाले 1.25 करोड़ नाम सार्वजनिक करने का निर्देश:सुप्रीम कोर्ट बोला- जांच पारदर्शी रहे, ताकि आम लोगों को परेशानी न हो सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के 1.25 करोड़ वोटर्स को अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए एक और मौका दिया। कहा कि वे 10 दिन में अपने डॉक्यूमेंट्स चुनाव आयोग को पेश करें। चुनाव आयोग ने राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान नाम, सरनेम, आयु में गड़बड़ी की वजह 1.25 करोड़ वोटर्स को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिस जारी किया था। पूरी खबर पढ़ें…
SC के आदेश पर चुनाव आयोग ने SIR की लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी लिस्ट वेबसाइट पर डाली, पंचायत-ब्लॉक और वार्ड दफ्तरों में चस्पा होगी चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार SIR के तहत ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ लिस्ट में शामिल मतदाताओं के नाम शनिवार को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिए। अब यह सूची ग्राम पंचायत भवनों, ब्लॉक कार्यालयों और नगर वार्ड दफ्तरों में चिपकाई जाएगी। मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार ने कहा कि SIR 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहा है। बाकी राज्यों में इसे जल्द लागू किया जाएगा। 19 जनवरी को SC ने लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिस वाले 1.25 करोड़ वोटर्स को लिस्ट ग्राम पंचायत भवन, ब्लॉक कार्यालय और वार्ड कार्यालय में सार्वजनिक करने के निर्देश दिए थे। सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन को लेकर चुनाव आयोग असमंजस में था, क्योंकि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) को जरूरी सॉफ्टवेयर शुक्रवार देर रात तक नहीं मिल पाया था। चुनाव आयुक्त बोले- बाकी राज्यों में भी जल्द लागू होगा SIR मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि SIR फिलहाल 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सुचारू रूप से चल रहा है। बाकी राज्यों में भी इसे जल्द लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव है। CEC के मुताबिक बिहार में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अंतिम मतदाता सूची के खिलाफ एक भी अपील दर्ज नहीं हुई। इसी आधार पर हुए चुनावों में 67.13% मतदान हुआ, जबकि महिलाओं की भागीदारी 71.78% रही अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन बोले- बंगाल में जल्दबाजी में SIR हो रहा नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर कहा कि यह प्रक्रिया बहुत जल्दबाजी में की जा रही है, जिससे लोगों के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। खासकर तब जब राज्य में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। सेन ने कहा कि SIR के तहत मतदाताओं को अपने अधिकार साबित करने के लिए दस्तावेज देने पड़ रहे हैं। इसके लिए उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा। इससे कई योग्य मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। अभिषेक बनर्जी का आरोप- लिस्ट जारी करने में जानबूझकर देरी इधर तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने शनिवार शाम को कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और आयोग के अपने पत्र के बावजूद 24 जनवरी तक सभी ग्राम पंचायतों और नगर वार्डों में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ सूची प्रकाशित नहीं की गई। जिस सॉफ्टवेयर ने 7 करोड़ से ज्यादा फॉर्म का विश्लेषण कर एक घंटे में गड़बड़ियां पकड़ लीं, वही अब सूची जारी करने में धीमा पड़ गया है। क्या देरी जानबूझकर की जा रही है? ———- ये खबर भी पढ़ें… बंगाल SIR,गड़बड़ी वाले 1.25 करोड़ नाम सार्वजनिक करने का निर्देश:सुप्रीम कोर्ट बोला- जांच पारदर्शी रहे, ताकि आम लोगों को परेशानी न हो सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के 1.25 करोड़ वोटर्स को अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए एक और मौका दिया। कहा कि वे 10 दिन में अपने डॉक्यूमेंट्स चुनाव आयोग को पेश करें। चुनाव आयोग ने राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान नाम, सरनेम, आयु में गड़बड़ी की वजह 1.25 करोड़ वोटर्स को लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी नोटिस जारी किया था। पूरी खबर पढ़ें…