हिमाचल की सत्तारूढ़ कांग्रेस में राज्यसभा चुनाव से पहले फरवरी 2024 जैसा असंतोष नजर आ रहा है। PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान के बाद सुक्खू कैबिनेट दो-फाड़ दिख रही है। मंत्री बारी-बारी एक दूसरे पर तीखे जुबानी हमले बोल रहे हैं। BJP इस फूट का फायदा उठाने की तैयारी में है। सियासी गलियारों में ‘ऑपरेशन लोटस-2’ की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इन चर्चाओं को BJP सांसद अनुराग ठाकुर के बयान ने हवा दे दी है। दिशा कमेटी की मीटिंग में आज सुबह ऊना पहुंचे अनुराग ठाकुर ने कहा- जिस तरह मंत्री लड़ रहे हैं, वह बड़ा होने का इशारा है। उन्होंने कहा- कांग्रेस का कुनबा कभी भी इस तरह नहीं बिखरा, जैसा अभी लग रहा है। बता दें कि राज्यसभा सांसद इंदू गोस्वामी का 6 साल का कार्यकाल 10 अप्रैल को पूरा हो रहा है। लिहाजा इससे पहले राज्यसभा चुनाव प्रस्तावित है। मगर कांग्रेस सरकार में 2024 जैसी गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। वजह, विक्रमादित्य सिंह का यूपी-बिहार के अफसरों के शासक बनने को लेकर दिया गया बयान बना है। इस बयान के बाद राजस्व मंत्री जगत नेगी, पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और तकनीकी शिक्षा राजेश धर्माणी ने भी मंत्री विक्रमादित्य पर जुबानी हमले बोले। खासकर अनिरुद्ध सिंह ने तो यहां तक कह डाला कि काम कराना आना चाहिए। इसके पलटवार में विक्रमादित्य सिंह ने भी अनिरुद्ध को NHAI अधिकारियों की मारपीट की वह घटना याद दिलाई, जिसमें मंत्री अनिरुद्ध पर मामला दर्ज है। सोशल मीडिया में लड़ाई होली लॉज बनाम ओक ओवर हो गई इस लड़ाई में विक्रमादित्य अलग-थलग नजर आ रहे हैं। हालांकि, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने विक्रमादित्य को ‘एफिशियंट मंत्री’ बताकर उनका बचाव किया। इस तरह, एक के बाद एक कई मंत्रियों के हमले से मामला सुलझने के बजाय उलझता जा रहा है। इससे सोशल मीडिया पर तो लड़ाई होली लॉज (विक्रमादित्य) बनाम ओक ओवर (सुक्खू गुट) हो गई है। अब सीएम के करीबी विधायक सुरेश कुमार भी मंत्री पर निशाना साध रहे हैं। वहीं होली लॉज समर्थक भी सोशल मीडिया पर भड़ास निकाल रहे हैं। 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी नाराज थे विक्रमादित्य विक्रमादित्य सिंह 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान भी नाराज थे। तब उन्होंने नाराजगी की वजह पिता एवं 6 बार के CM वीरभद्र सिंह की प्रतिमा नहीं लगाना बताया था। इसी वजह से उन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया था। उस दौरान वीरभद्र सिंह के करीबी सुधीर शर्मा और राजेंद्र राणा समेत 6 कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस वोट किया था। यही नहीं उस दौरान कांग्रेस सरकार का बाहर से समर्थन करने वाले 3 निर्दलीय ने भी बीजेपी प्रत्याशी को वोट किया। इससे कांग्रेस बहुमत के बावजूद राज्यसभा चुनाव हार गई। उस दौरान भी हार का कारण कांग्रेस विधायकों में असंतोष था। अब एक बार फिर वैसा ही माहौल बनता दिख रहा है। ‘ऑपरेशन लोटस’ को लेकर शीर्ष नेताओं से चर्चा कांग्रेस सरकार के भीतर असंतोष की आवाजें देखकर BJP इसका फायदा उठाने की तैयारी में है। सूत्र बताते हैं कि बीजेपी ने इस बार भी राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारने का मन बना लिया है। प्रदेश के शीर्ष नेता ने ‘ऑपरेशन लोटस’ को लेकर हाईकमान से चर्चा शुरू कर दी है और कांग्रेस के नाराज विधायकों पर भारतीय जनता पार्टी नजर बनाए हुए हैं। बहुमत के लिए 35 MLA जरूरी, BJP के पास 28 विधायक मौजूदा विधानसभा में कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के पास 28 MLA हैं। बहुमत के लिए 35 विधायक जरूरी है। कांग्रेस के पास बहुमत से 5 ज्यादा है, जबकि BJP के पास 7 विधायक कम है। संख्याबल के लिहाज से कांग्रेस की स्थिति मजबूत दिखती है, लेकिन पिछले अनुभवों को देखते हुए भाजपा को उम्मीद है कि कांग्रेस की अंदरूनी कलह एक बार फिर बाजी पलट सकती है। सीएम सुक्खू से बात करेंगे कांग्रेस अध्यक्ष कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह ने कहा- वह इस मसले पर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू से बात करेंगे, ताकि कोई भी मंत्री-विधायक एक दूसरे के खिलाफ प्रतिक्रिया न दें। उन्होंने बताया- कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है। राज्यसभा चुनाव में BJP की मंशा पूरी नहीं होगी।
हिमाचल की सत्तारूढ़ कांग्रेस में राज्यसभा चुनाव से पहले फरवरी 2024 जैसा असंतोष नजर आ रहा है। PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान के बाद सुक्खू कैबिनेट दो-फाड़ दिख रही है। मंत्री बारी-बारी एक दूसरे पर तीखे जुबानी हमले बोल रहे हैं। BJP इस फूट का फायदा उठाने की तैयारी में है। सियासी गलियारों में ‘ऑपरेशन लोटस-2’ की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इन चर्चाओं को BJP सांसद अनुराग ठाकुर के बयान ने हवा दे दी है। दिशा कमेटी की मीटिंग में आज सुबह ऊना पहुंचे अनुराग ठाकुर ने कहा- जिस तरह मंत्री लड़ रहे हैं, वह बड़ा होने का इशारा है। उन्होंने कहा- कांग्रेस का कुनबा कभी भी इस तरह नहीं बिखरा, जैसा अभी लग रहा है। बता दें कि राज्यसभा सांसद इंदू गोस्वामी का 6 साल का कार्यकाल 10 अप्रैल को पूरा हो रहा है। लिहाजा इससे पहले राज्यसभा चुनाव प्रस्तावित है। मगर कांग्रेस सरकार में 2024 जैसी गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। वजह, विक्रमादित्य सिंह का यूपी-बिहार के अफसरों के शासक बनने को लेकर दिया गया बयान बना है। इस बयान के बाद राजस्व मंत्री जगत नेगी, पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह और तकनीकी शिक्षा राजेश धर्माणी ने भी मंत्री विक्रमादित्य पर जुबानी हमले बोले। खासकर अनिरुद्ध सिंह ने तो यहां तक कह डाला कि काम कराना आना चाहिए। इसके पलटवार में विक्रमादित्य सिंह ने भी अनिरुद्ध को NHAI अधिकारियों की मारपीट की वह घटना याद दिलाई, जिसमें मंत्री अनिरुद्ध पर मामला दर्ज है। सोशल मीडिया में लड़ाई होली लॉज बनाम ओक ओवर हो गई इस लड़ाई में विक्रमादित्य अलग-थलग नजर आ रहे हैं। हालांकि, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने विक्रमादित्य को ‘एफिशियंट मंत्री’ बताकर उनका बचाव किया। इस तरह, एक के बाद एक कई मंत्रियों के हमले से मामला सुलझने के बजाय उलझता जा रहा है। इससे सोशल मीडिया पर तो लड़ाई होली लॉज (विक्रमादित्य) बनाम ओक ओवर (सुक्खू गुट) हो गई है। अब सीएम के करीबी विधायक सुरेश कुमार भी मंत्री पर निशाना साध रहे हैं। वहीं होली लॉज समर्थक भी सोशल मीडिया पर भड़ास निकाल रहे हैं। 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी नाराज थे विक्रमादित्य विक्रमादित्य सिंह 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान भी नाराज थे। तब उन्होंने नाराजगी की वजह पिता एवं 6 बार के CM वीरभद्र सिंह की प्रतिमा नहीं लगाना बताया था। इसी वजह से उन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया था। उस दौरान वीरभद्र सिंह के करीबी सुधीर शर्मा और राजेंद्र राणा समेत 6 कांग्रेस विधायकों ने क्रॉस वोट किया था। यही नहीं उस दौरान कांग्रेस सरकार का बाहर से समर्थन करने वाले 3 निर्दलीय ने भी बीजेपी प्रत्याशी को वोट किया। इससे कांग्रेस बहुमत के बावजूद राज्यसभा चुनाव हार गई। उस दौरान भी हार का कारण कांग्रेस विधायकों में असंतोष था। अब एक बार फिर वैसा ही माहौल बनता दिख रहा है। ‘ऑपरेशन लोटस’ को लेकर शीर्ष नेताओं से चर्चा कांग्रेस सरकार के भीतर असंतोष की आवाजें देखकर BJP इसका फायदा उठाने की तैयारी में है। सूत्र बताते हैं कि बीजेपी ने इस बार भी राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारने का मन बना लिया है। प्रदेश के शीर्ष नेता ने ‘ऑपरेशन लोटस’ को लेकर हाईकमान से चर्चा शुरू कर दी है और कांग्रेस के नाराज विधायकों पर भारतीय जनता पार्टी नजर बनाए हुए हैं। बहुमत के लिए 35 MLA जरूरी, BJP के पास 28 विधायक मौजूदा विधानसभा में कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के पास 28 MLA हैं। बहुमत के लिए 35 विधायक जरूरी है। कांग्रेस के पास बहुमत से 5 ज्यादा है, जबकि BJP के पास 7 विधायक कम है। संख्याबल के लिहाज से कांग्रेस की स्थिति मजबूत दिखती है, लेकिन पिछले अनुभवों को देखते हुए भाजपा को उम्मीद है कि कांग्रेस की अंदरूनी कलह एक बार फिर बाजी पलट सकती है। सीएम सुक्खू से बात करेंगे कांग्रेस अध्यक्ष कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह ने कहा- वह इस मसले पर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू से बात करेंगे, ताकि कोई भी मंत्री-विधायक एक दूसरे के खिलाफ प्रतिक्रिया न दें। उन्होंने बताया- कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है। राज्यसभा चुनाव में BJP की मंशा पूरी नहीं होगी।