उम्र महज 11 साल… कंधों पर स्कूल बैग होना चाहिए था, हाथों में किताबें और आंखों में सपने, लेकिन दिल कुमारी बैगा के सिर पर लकड़ी का भारी गट्ठा है। वह घुटनों के बल सड़क पर रेंगती हुई आगे बढ़ रही है। यह दृश्य सिंगरौली जिले के छत्तीसगढ़ बॉर्डर से सटे बारहपन गांव का है, जिसने हर संवेदनशील दिल को झकझोर दिया। वीडियो सामने आने के बाद जब दैनिक भास्कर ने पड़ताल की तो दिल कुमारी की कहानी और भी दर्दनाक निकली। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली यह आदिवासी बच्ची जन्म से ही दोनों पैरों से दिव्यांग है। चलने की ताकत उसके पैरों में नहीं, लेकिन हालातों से लड़ने का साहस उसके चेहरे पर साफ झलकता है। घर की जरूरतों में हाथ बंटाने के लिए वह घुटनों के सहारे लकड़ी ढोने को मजबूर है। दिल कुमारी अपने नाना राम ब्रिज बैगा और नानी सोनमती बैगा के साथ रहती है। नाना की आंखें भर आती हैं, जब वह बताते हैं कि दिल की मां उर्मिला बैगा की चार संतानें हैं, लेकिन दिव्यांग होने के कारण दिल कुमारी की देखभाल कर पाना मां के लिए भी आसान नहीं था। मजबूरी में नाना-नानी ने ही अपनी पोती की परवरिश का जिम्मा उठा लिया। देखिए तस्वीरें… नाना बोले- ठंड में हमारे लिए लकड़ी लेने गई थी
वीडियो में बच्ची के सिर पर लकड़ी ढोने को लेकर उठे सवालों पर नाना राम ब्रिज भावुक हो गए। उन्होंने बताया, “हमने उसे कभी जंगल से लकड़ी लाने के लिए नहीं कहा। शायद उसे लगा होगा कि ठंड में नाना-नानी को आग की जरूरत होगी। इसी सोच के साथ वह खुद लकड़ी लेने निकल गई।” कई बार सरपंच और नेताओं से मदद मांगी, लेकिन नहीं मिली
नाना ने यह भी बताया कि उन्होंने कई बार पंचायत स्तर पर मदद के लिए सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस सहायता नहीं मिल पाई। गरीबी और लाचारी के बीच बच्ची पढ़ाई भी कर रही है, लेकिन उसकी दिव्यांगता उसके हर कदम को मुश्किल बना देती है। कांग्रेस नेता बच्ची की मदद करने गांव पहुंचे
वीडियो सामने आने के बाद कई कांग्रेस नेता सूर्य द्विवेदी बच्ची से मिलने गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि फेसबुक पर वीडियो शेयर होने के बाद जब उसे लाखों व्यूज मिले, तो उन्हें लगा कि सिर्फ शेयर करना काफी नहीं है, मदद जरूरी है। सूर्य द्विवेदी ने कहा, “हम प्रशासन से बात करेंगे। अगर शासन स्तर पर मदद नहीं मिलती है, तो हम अपने स्तर पर इस बिटिया की सहायता करेंगे।” दैनिक भास्कर की ओर से इस मामले की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाए जाने के बाद शुक्रवार को प्रशासन हरकत में आया। बच्ची और उसके परिजनों को जिला मुख्यालय बुलाया गया। रेड क्रॉस सोसाइटी के जरिए बच्ची को ट्राइसिकल प्रदान की गई, ताकि उसकी दैनिक आवाजाही आसान हो सके। एडिशनल सीईओ बोले- इलाज, ऑपरेशन की व्यवस्था की जा रही
एडिशनल सीईओ जिला पंचायत आईबी डामोर ने बताया कि बच्ची का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है। दिव्यांगता को ध्यान में रखते हुए उसके संभावित ऑपरेशन की भी व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत जो भी सुविधाएं संभव होंगी, वे बच्ची को उपलब्ध कराई जाएगी।
उम्र महज 11 साल… कंधों पर स्कूल बैग होना चाहिए था, हाथों में किताबें और आंखों में सपने, लेकिन दिल कुमारी बैगा के सिर पर लकड़ी का भारी गट्ठा है। वह घुटनों के बल सड़क पर रेंगती हुई आगे बढ़ रही है। यह दृश्य सिंगरौली जिले के छत्तीसगढ़ बॉर्डर से सटे बारहपन गांव का है, जिसने हर संवेदनशील दिल को झकझोर दिया। वीडियो सामने आने के बाद जब दैनिक भास्कर ने पड़ताल की तो दिल कुमारी की कहानी और भी दर्दनाक निकली। तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली यह आदिवासी बच्ची जन्म से ही दोनों पैरों से दिव्यांग है। चलने की ताकत उसके पैरों में नहीं, लेकिन हालातों से लड़ने का साहस उसके चेहरे पर साफ झलकता है। घर की जरूरतों में हाथ बंटाने के लिए वह घुटनों के सहारे लकड़ी ढोने को मजबूर है। दिल कुमारी अपने नाना राम ब्रिज बैगा और नानी सोनमती बैगा के साथ रहती है। नाना की आंखें भर आती हैं, जब वह बताते हैं कि दिल की मां उर्मिला बैगा की चार संतानें हैं, लेकिन दिव्यांग होने के कारण दिल कुमारी की देखभाल कर पाना मां के लिए भी आसान नहीं था। मजबूरी में नाना-नानी ने ही अपनी पोती की परवरिश का जिम्मा उठा लिया। देखिए तस्वीरें… नाना बोले- ठंड में हमारे लिए लकड़ी लेने गई थी
वीडियो में बच्ची के सिर पर लकड़ी ढोने को लेकर उठे सवालों पर नाना राम ब्रिज भावुक हो गए। उन्होंने बताया, “हमने उसे कभी जंगल से लकड़ी लाने के लिए नहीं कहा। शायद उसे लगा होगा कि ठंड में नाना-नानी को आग की जरूरत होगी। इसी सोच के साथ वह खुद लकड़ी लेने निकल गई।” कई बार सरपंच और नेताओं से मदद मांगी, लेकिन नहीं मिली
नाना ने यह भी बताया कि उन्होंने कई बार पंचायत स्तर पर मदद के लिए सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस सहायता नहीं मिल पाई। गरीबी और लाचारी के बीच बच्ची पढ़ाई भी कर रही है, लेकिन उसकी दिव्यांगता उसके हर कदम को मुश्किल बना देती है। कांग्रेस नेता बच्ची की मदद करने गांव पहुंचे
वीडियो सामने आने के बाद कई कांग्रेस नेता सूर्य द्विवेदी बच्ची से मिलने गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि फेसबुक पर वीडियो शेयर होने के बाद जब उसे लाखों व्यूज मिले, तो उन्हें लगा कि सिर्फ शेयर करना काफी नहीं है, मदद जरूरी है। सूर्य द्विवेदी ने कहा, “हम प्रशासन से बात करेंगे। अगर शासन स्तर पर मदद नहीं मिलती है, तो हम अपने स्तर पर इस बिटिया की सहायता करेंगे।” दैनिक भास्कर की ओर से इस मामले की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाए जाने के बाद शुक्रवार को प्रशासन हरकत में आया। बच्ची और उसके परिजनों को जिला मुख्यालय बुलाया गया। रेड क्रॉस सोसाइटी के जरिए बच्ची को ट्राइसिकल प्रदान की गई, ताकि उसकी दैनिक आवाजाही आसान हो सके। एडिशनल सीईओ बोले- इलाज, ऑपरेशन की व्यवस्था की जा रही
एडिशनल सीईओ जिला पंचायत आईबी डामोर ने बताया कि बच्ची का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है। दिव्यांगता को ध्यान में रखते हुए उसके संभावित ऑपरेशन की भी व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत जो भी सुविधाएं संभव होंगी, वे बच्ची को उपलब्ध कराई जाएगी।