हरिद्वार में 2027 में अर्धकुंभ होने वाला है, लेकिन इससे पहले ही इस क्षेत्र में गैर हिंदुओं के एंट्री बैन करने की मांग तेज हो गई है। इसी बीच आज हरिद्वार की हरकी पैड़ी क्षेत्र में ‘अहिन्दू का प्रवेश निषेध क्षेत्र, आज्ञा से म्यूनिसिपल एक्ट हरिद्वार’ लिखे करीब 12 पोस्टर लगाए गए हैं। गंगा सभा की तरफ से ये पोस्टर घाट किनारे अलग-अलग जगहों पर लगाए गए हैं, जिसके बाद गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर विवाद फिर से तेज हो गया है। घाटों की व्यवस्थाएं देखने वाली संस्था गंगा सभा ने इस मुद्दे पर खुलकर अपना रुख सामने रखा है। संस्था का कहना है कि हरकी पैड़ी और ब्रह्म कुंड क्षेत्र सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र है, इसलिए यहां पवित्रता और व्यवस्थाओं को बनाए रखना जरूरी है। इस मामले पर दैनिक भास्कर एप ने गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम से बात की। उन्होंने कहा कि यह कोई नई पहल नहीं है, बल्कि 1916 के म्यूनिसिपल एक्ट/बायलॉज की जानकारी सार्वजनिक की गई है, ताकि किस क्षेत्र में क्या नियम लागू हैं, इसे लेकर किसी तरह का भ्रम ना रहे। पोस्टर क्यों लगाए गए ये समझने के लिए पढ़िए गौतम की 3 बातें.. गुरुवार को कहा था- गैर हिंदू पत्रकार और अधिकारियों की एंट्री भी बैन हो गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम ने गुरुवार को कहा था कि क्षेत्र में अहिन्दू प्रवेश निषेध के बोर्ड लगने चाहिए और उसके अगले ही दिन पोस्टर चिपका दिए गए। बीते कल गौतम ने ये भी कहा था की हरकी पैड़ी क्षेत्र में कोई भी गैर-हिंदू सरकारी कर्मचारी प्रवेश न करे। साथ ही उन्होंने कहा था कि यह नियम सिर्फ आम लोगों पर नहीं, बल्कि मीडिया कर्मियों पर भी लागू होना चाहिए। हालिया घटना को बताया था मांग की वजह दरअसल, 13 जनवरी को हरिद्वार की हरकी पैड़ी पर दो युवक शेख की ड्रेस में घूमते दिखे थे। इस दौरान उन्होंने अपना नाम हबीबुल्ला और अभिभ बताते हुए दावा किया था की वो दुबई से आए हैं। युवकों की इस हरकत पर संत समाज भड़क गया और पुलिस से तुरंत कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने भी कुछ ही घंटों में दोनों युवक को पकड़ लिया। जांच में दोनों युवक हिंदू निकले और उन्होंने बताया वो घाट किनारे यूट्यूब के लिए वीडियो शूट करने आए थे। गंगा सभा ने बीते कल इसी घटना का जिक्र करते हुए कहा था की- कुछ हिंदू युवकों ने मुस्लिम वेशभूषा पहनकर हरकी पैड़ी में प्रवेश किया और माहौल खराब करने की कोशिश की गई। अगर साफ तौर पर ‘अहिन्दू प्रवेश निषेध’ के बोर्ड लगे हों और कानून व्यवस्था सजग रहे, तो ऐसी घटनाएं अपने आप खत्म होंगी। घाटों पर इन दिनों चेक किए जा रहे आधार कार्ड हरिद्वार में इन दिनों हरकी पैड़ी घाट किनारे सामान बेच रहे लोगों के आधार कार्ड भी चेक किए जा रहे हैं। गंगा सभा का दावा है की अगर कोई गैर-हिंदू इस क्षेत्र में मिला तो उसपर कार्रवाई होगी। घाट क तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित का कहना है कि सभी से कहा गया है कि वे अपना आधार कार्ड अपने पास रखें। अगर कोई गैर-हिन्दू हरकी पैड़ी या घाट क्षेत्र में व्यवसाय करता पाया गया, तो इसकी जानकारी श्री गंगा सभा को दी जाएगी और उस पर कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि यह कदम घाटों की पवित्रता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। अब समझिए क्या है 1916 का बायलॉज जिनके आधार पर हो रही मांग 1916 के म्युनिसिपल बायलॉज के तहत हरकी पैड़ी और उस समय के कुंभ क्षेत्र में गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित माना गया था। अब गंगा सभा ने प्रशासन से इसका सख्ती से पालन कराने की मांग उठाई है। यह बायलॉज अंग्रेजों के दौर में धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया था। इसमें कुंभ क्षेत्र में शराब की बिक्री पर रोक के साथ दुकान या स्टॉल लगाने पर पाबंदी का भी जिक्र है। —————– ये खबर भी पढ़ें… ‘हरिद्वार में गैर हिंदू पत्रकार-सरकारी अधिकारियों की एंट्री हो बैन’: गंगा सभा बोली- 1916 के नियम लागू किए जाएं, ‘गैर हिंदू प्रवेश निषेध’ के बोर्ड लगाएं हरिद्वार के हरकी पैड़ी क्षेत्र की व्यवस्थाएं देखने वाली संस्था गंगा सभा गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर खुलकर सामने आ गई है। संस्था ने साफ कहा है कि हरकी पैड़ी सनातन आस्था का केंद्र है और यहां गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह वर्जित होना चाहिए। इसके लिए 1916 के म्युनिसिपल बायलॉज का कड़ाई से पालन कराने की मांग प्रशासन से की गई है। (पढ़ें पूरी खबर)
हरिद्वार में 2027 में अर्धकुंभ होने वाला है, लेकिन इससे पहले ही इस क्षेत्र में गैर हिंदुओं के एंट्री बैन करने की मांग तेज हो गई है। इसी बीच आज हरिद्वार की हरकी पैड़ी क्षेत्र में ‘अहिन्दू का प्रवेश निषेध क्षेत्र, आज्ञा से म्यूनिसिपल एक्ट हरिद्वार’ लिखे करीब 12 पोस्टर लगाए गए हैं। गंगा सभा की तरफ से ये पोस्टर घाट किनारे अलग-अलग जगहों पर लगाए गए हैं, जिसके बाद गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर विवाद फिर से तेज हो गया है। घाटों की व्यवस्थाएं देखने वाली संस्था गंगा सभा ने इस मुद्दे पर खुलकर अपना रुख सामने रखा है। संस्था का कहना है कि हरकी पैड़ी और ब्रह्म कुंड क्षेत्र सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र है, इसलिए यहां पवित्रता और व्यवस्थाओं को बनाए रखना जरूरी है। इस मामले पर दैनिक भास्कर एप ने गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम से बात की। उन्होंने कहा कि यह कोई नई पहल नहीं है, बल्कि 1916 के म्यूनिसिपल एक्ट/बायलॉज की जानकारी सार्वजनिक की गई है, ताकि किस क्षेत्र में क्या नियम लागू हैं, इसे लेकर किसी तरह का भ्रम ना रहे। पोस्टर क्यों लगाए गए ये समझने के लिए पढ़िए गौतम की 3 बातें.. गुरुवार को कहा था- गैर हिंदू पत्रकार और अधिकारियों की एंट्री भी बैन हो गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम ने गुरुवार को कहा था कि क्षेत्र में अहिन्दू प्रवेश निषेध के बोर्ड लगने चाहिए और उसके अगले ही दिन पोस्टर चिपका दिए गए। बीते कल गौतम ने ये भी कहा था की हरकी पैड़ी क्षेत्र में कोई भी गैर-हिंदू सरकारी कर्मचारी प्रवेश न करे। साथ ही उन्होंने कहा था कि यह नियम सिर्फ आम लोगों पर नहीं, बल्कि मीडिया कर्मियों पर भी लागू होना चाहिए। हालिया घटना को बताया था मांग की वजह दरअसल, 13 जनवरी को हरिद्वार की हरकी पैड़ी पर दो युवक शेख की ड्रेस में घूमते दिखे थे। इस दौरान उन्होंने अपना नाम हबीबुल्ला और अभिभ बताते हुए दावा किया था की वो दुबई से आए हैं। युवकों की इस हरकत पर संत समाज भड़क गया और पुलिस से तुरंत कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने भी कुछ ही घंटों में दोनों युवक को पकड़ लिया। जांच में दोनों युवक हिंदू निकले और उन्होंने बताया वो घाट किनारे यूट्यूब के लिए वीडियो शूट करने आए थे। गंगा सभा ने बीते कल इसी घटना का जिक्र करते हुए कहा था की- कुछ हिंदू युवकों ने मुस्लिम वेशभूषा पहनकर हरकी पैड़ी में प्रवेश किया और माहौल खराब करने की कोशिश की गई। अगर साफ तौर पर ‘अहिन्दू प्रवेश निषेध’ के बोर्ड लगे हों और कानून व्यवस्था सजग रहे, तो ऐसी घटनाएं अपने आप खत्म होंगी। घाटों पर इन दिनों चेक किए जा रहे आधार कार्ड हरिद्वार में इन दिनों हरकी पैड़ी घाट किनारे सामान बेच रहे लोगों के आधार कार्ड भी चेक किए जा रहे हैं। गंगा सभा का दावा है की अगर कोई गैर-हिंदू इस क्षेत्र में मिला तो उसपर कार्रवाई होगी। घाट क तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित का कहना है कि सभी से कहा गया है कि वे अपना आधार कार्ड अपने पास रखें। अगर कोई गैर-हिन्दू हरकी पैड़ी या घाट क्षेत्र में व्यवसाय करता पाया गया, तो इसकी जानकारी श्री गंगा सभा को दी जाएगी और उस पर कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना है कि यह कदम घाटों की पवित्रता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। अब समझिए क्या है 1916 का बायलॉज जिनके आधार पर हो रही मांग 1916 के म्युनिसिपल बायलॉज के तहत हरकी पैड़ी और उस समय के कुंभ क्षेत्र में गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित माना गया था। अब गंगा सभा ने प्रशासन से इसका सख्ती से पालन कराने की मांग उठाई है। यह बायलॉज अंग्रेजों के दौर में धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखकर बनाया गया था। इसमें कुंभ क्षेत्र में शराब की बिक्री पर रोक के साथ दुकान या स्टॉल लगाने पर पाबंदी का भी जिक्र है। —————– ये खबर भी पढ़ें… ‘हरिद्वार में गैर हिंदू पत्रकार-सरकारी अधिकारियों की एंट्री हो बैन’: गंगा सभा बोली- 1916 के नियम लागू किए जाएं, ‘गैर हिंदू प्रवेश निषेध’ के बोर्ड लगाएं हरिद्वार के हरकी पैड़ी क्षेत्र की व्यवस्थाएं देखने वाली संस्था गंगा सभा गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर खुलकर सामने आ गई है। संस्था ने साफ कहा है कि हरकी पैड़ी सनातन आस्था का केंद्र है और यहां गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह वर्जित होना चाहिए। इसके लिए 1916 के म्युनिसिपल बायलॉज का कड़ाई से पालन कराने की मांग प्रशासन से की गई है। (पढ़ें पूरी खबर)