सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। EC की ओर से सीनियर वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि SIR के तहत आयोग सिर्फ यह तय करता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने के योग्य है या नहीं। इससे सिर्फ नागरिकता वेरिफाई की जाती है। उन्होंने साफ किया कि SIR से किसी का डिपोर्टेशन (देश से बाहर निकालना) नहीं होता, क्योंकि देश से बाहर निकालने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। द्विवेदी ने संविधान सभा की बहसों और सरबानंद सोनोवाल केस का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में नागरिकता की जांच जरूरी है। उन्होंने बताया कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर केवल वोटर लिस्ट से जुड़ा फैसला कर सकते हैं। संदिग्ध गैर-नागरिकों को वोट देने देना चुनाव की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचा सकता है, जिस पर CJI सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने सवाल उठाए। जस्टिस बागची की टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकता पहले से ही सख्त रही है और संविधान सभा में भी यही सोच थी कि नागरिकता आसानी से नहीं मिलनी चाहिए। बिहार, केरल, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में SIR प्रक्रिया पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे और सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की थीं। इन याचिकाओं में चुनाव आयोग की शक्तियों, नागरिकता की पहचान और वोट देने के अधिकार से जुड़े सवाल उठाए गए थे। उधर, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों की याचिकाओं पर भारत निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। SIR पर पिछली मुख्य 3 सुनवाई… 6 जनवरी: चुनाव आयोग ने कहा-वोटर लिस्ट को सही और साफ रखना हमारा काम चुनाव आयोग (EC) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसे वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) कराने का पूरा अधिकार है। आयोग ने यह भी बताया कि उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि कोई भी विदेशी नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल न हो। आयोग की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और जज जैसे सभी प्रमुख पदों पर नियुक्ति के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य शर्त है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान नागरिक-केंद्रित है, इसलिए हर अहम पद पर केवल भारतीय नागरिक ही रह सकता है। आयोग राजनीतिक दलों की बयानबाजी का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है। हमारा मुख्य काम वोटर लिस्ट को सही और साफ रखना है। पूरी खबर पढ़ें… 4 दिसंबर: सुप्रीम कोर्ट बोला-BLOs के काम के दबाव को कम करें:राज्यों और केंद्र से कहा- अतिरिक्त कर्मचारी तैनात करें सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिसंबर को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया कि वे SIR में लगे बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के काम के दबाव को कम करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति पर विचार करें। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कझगम (TVK) की उस याचिका पर दिया, जिसमें मांग की गई थी कि समय पर काम ना कर पाने BLOs के खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई न की जाए। पूरी खबर पढ़ें… 26 नवंबर: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग बोला- राजनीतिक पार्टियां डर का माहौल बना रहीं सुप्रीम कोर्ट में 26 नवंबर को SIR के खिलाफ दायर तमिलनाडु, बंगाल और केरल की याचिका पर सुनवाई हुई थी। इस दौरान चुनाव आयोग ने कहा- SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दल जानबूझकर डर का माहौल बना रही हैं। पूरी खबर पढ़ें… —————– ये खबर भी पढ़ें… चुनाव आयुक्तों को आजीवन सुरक्षा, SC का केंद्र को नोटिस:कहा- छूट संविधान की भावना के खिलाफ हो सकती है, न्यायिक जांच की जरूरत सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (EC) को उनके आधिकारिक कामों के लिए आजीवन कानूनी इम्युनिटी (सुरक्षा) देने वाला प्रावधान संविधान की भावना के खिलाफ हो सकता है। लॉ ट्रेंड के मुताबिक, कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग (EC) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पूरी खबर पढ़ें…
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। EC की ओर से सीनियर वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि SIR के तहत आयोग सिर्फ यह तय करता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने के योग्य है या नहीं। इससे सिर्फ नागरिकता वेरिफाई की जाती है। उन्होंने साफ किया कि SIR से किसी का डिपोर्टेशन (देश से बाहर निकालना) नहीं होता, क्योंकि देश से बाहर निकालने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। द्विवेदी ने संविधान सभा की बहसों और सरबानंद सोनोवाल केस का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में नागरिकता की जांच जरूरी है। उन्होंने बताया कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर केवल वोटर लिस्ट से जुड़ा फैसला कर सकते हैं। संदिग्ध गैर-नागरिकों को वोट देने देना चुनाव की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचा सकता है, जिस पर CJI सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने सवाल उठाए। जस्टिस बागची की टिप्पणी पर उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकता पहले से ही सख्त रही है और संविधान सभा में भी यही सोच थी कि नागरिकता आसानी से नहीं मिलनी चाहिए। बिहार, केरल, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में SIR प्रक्रिया पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे और सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की थीं। इन याचिकाओं में चुनाव आयोग की शक्तियों, नागरिकता की पहचान और वोट देने के अधिकार से जुड़े सवाल उठाए गए थे। उधर, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों की याचिकाओं पर भारत निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। SIR पर पिछली मुख्य 3 सुनवाई… 6 जनवरी: चुनाव आयोग ने कहा-वोटर लिस्ट को सही और साफ रखना हमारा काम चुनाव आयोग (EC) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसे वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) कराने का पूरा अधिकार है। आयोग ने यह भी बताया कि उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि कोई भी विदेशी नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल न हो। आयोग की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और जज जैसे सभी प्रमुख पदों पर नियुक्ति के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य शर्त है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान नागरिक-केंद्रित है, इसलिए हर अहम पद पर केवल भारतीय नागरिक ही रह सकता है। आयोग राजनीतिक दलों की बयानबाजी का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है। हमारा मुख्य काम वोटर लिस्ट को सही और साफ रखना है। पूरी खबर पढ़ें… 4 दिसंबर: सुप्रीम कोर्ट बोला-BLOs के काम के दबाव को कम करें:राज्यों और केंद्र से कहा- अतिरिक्त कर्मचारी तैनात करें सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिसंबर को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया कि वे SIR में लगे बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के काम के दबाव को कम करने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति पर विचार करें। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कझगम (TVK) की उस याचिका पर दिया, जिसमें मांग की गई थी कि समय पर काम ना कर पाने BLOs के खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई न की जाए। पूरी खबर पढ़ें… 26 नवंबर: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग बोला- राजनीतिक पार्टियां डर का माहौल बना रहीं सुप्रीम कोर्ट में 26 नवंबर को SIR के खिलाफ दायर तमिलनाडु, बंगाल और केरल की याचिका पर सुनवाई हुई थी। इस दौरान चुनाव आयोग ने कहा- SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दल जानबूझकर डर का माहौल बना रही हैं। पूरी खबर पढ़ें… —————– ये खबर भी पढ़ें… चुनाव आयुक्तों को आजीवन सुरक्षा, SC का केंद्र को नोटिस:कहा- छूट संविधान की भावना के खिलाफ हो सकती है, न्यायिक जांच की जरूरत सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (EC) को उनके आधिकारिक कामों के लिए आजीवन कानूनी इम्युनिटी (सुरक्षा) देने वाला प्रावधान संविधान की भावना के खिलाफ हो सकता है। लॉ ट्रेंड के मुताबिक, कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग (EC) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। पूरी खबर पढ़ें…