“100 रुपए की एक डोज है। एक बार खींचिए डबल वियाग्रा का जोश देगा। थकने का नाम नहीं लेंगे। घोड़े की तरह पूरा जोश रहेगा। सामने वाला भी हैरान हो जाएगा। ऐसे ही नहीं हमारी मार्केट में डिमांड है। इसे देसी वियाग्रा भी बोला जाता है। स्टूडेंट्स को यही बताकर बेचिए खूब कमाएंगे। आप एक बार ट्राई तो कीजिए, फिर देखिए मजा दोगुना हो जाएगा…।” यह दावा बिहार में हेरोइन और स्मैक की डील करने वाले एजेंट का है। वो खुलेआम सूखे नशे का पूरा नेटवर्क चला रहे हैं। सूखे नशे को सेक्स के पावर से जोड़कर इसकी ब्रांडिंग कर रहे हैं। एजेंट बनकर भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने बड़े पैमाने पर हेरोइन और स्मैक की डील की। देखिए और पढ़िए कैसे बिहार में शराब तस्कर सूखे नशे के कारोबार में डायवर्ट हो रहे हैं… यूपी से चला रहे बिहार में तस्करों का नेटवर्क भास्कर इन्वेस्टिगेशन टीम को इनपुट मिला कि बिहार में नई सरकार बनने के बाद बढ़ी पुलिस की सख्ती से मादक पदार्थों के तस्करों ने तस्करी का पैटर्न बदल दिया है। सेफ जोन की तलाश में वह यूपी के सीमावर्ती जिलों में एक्टिव हो गए हैं। पहले की तरह किसी से भी डील करने के बजाए वह अब मल्टीनेशनल कंपनियों की तरह तस्करों की भर्ती कर रहे हैं। पहले इंटरव्यू फिर एड्रेस वेरिफिकेशन के बाद माल सप्लाई कर रहे हैं। इसके लिए बैंकों की तरह आधार कार्ड और अन्य आईडी प्रूफ लेने के बाद KYC करा रहे हैं। गैंग को एक्सपोज करने के लिए भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने एजेंट बनकर तस्करों से डील की। यूपी के एजेंट्स ने हेरोइन तस्करों तक पहुंचाई इन्वेस्टिगेशन टीम को इनपुट मिला कि सरकार की सख्ती के बाद अब शराब के तस्कर भी सूखे नशे की तरफ डायवर्ट हो रहे हैं। सूखे नशे के तस्करों तक पहुंचने के लिए पहले हम यूपी से शराब तस्करों का नेटवर्क चलाने वाले एजेंट्स तक पहुंचना था। इसलिए हमने यूपी के कुशीनगर जिले के बॉर्डर एरिया में नेटवर्क एक्टिव किया। इनपुट मिला कि सरकार की सख्ती के बाद अब पूरा धंधा एड्रेस वेरिफिकेशन यानी तस्करों की KYC के बाद हो रहा है। हम यूपी के तस्करों से होते हुए ही बिहार में हेरोइन और स्मैक तस्करों के नेटवर्क को एक्सपोज कर पाए। इन्वेस्टिगेशन के दौरान सुजीत का इनपुट मिला जो बिहार में शराब की तस्करी के लिए तस्करों की भर्ती करता है। इनपुट के बाद भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम जब सुजीत से बातचीत की तो गोलू का नाम सामने आया। गोलू भी सुजीत की तरह बड़े पैमाने पर लड़कों की भर्ती कर बिहार में मादक पदार्थों की सप्लाई कर रहा है। यूपी के कुशीनगर जनपद के पनियहवा थाना क्षेत्र में गोलू ने पूरी डील की। रिपोर्टर – सुजीत भैया से बात हुई है? गोलू – छोड़िए सुजीत भैया को, अब आप हमसे बात कीजिए। रिपोर्टर – देखिए, माल चाहिए बिहार के लिए? गोलू – आपको बेतिया में चाहिए क्या? रिपोर्टर – हां, बेतिया में ही डिलीवरी चाहिए। गोलू – ठीक है, बेतिया चला जाएगा। रोज चाहिए या फंक्शन के लिए? अपना आधार कार्ड दीजिए। रिपोर्टर – आधार कार्ड का पता नहीं था, इसलिए लेकर नहीं आए। मोबाइल पर भेज दूंगा, पैसे भी भेज दूंगा। गोलू – सुजीत भैया ने आपका घर देखा है या सिर्फ बातचीत हुई है? रिपोर्टर – नहीं, मेरे घर नहीं गए हैं। गोलू – बेतिया में कहां घर है आपका? रिपोर्टर – न्यू कॉलोनी में ही रहते हैं। गोलू – सिटी है या गांव का इलाका है? रिपोर्टर – सिटी से थोड़ा आगे पड़ता है। गोलू – पुलिस का कोई लफड़ा तो नहीं है? रिपोर्टर – नहीं, कोई लफड़ा नहीं। गोलू – हम नए लोगों के साथ जल्दी काम नहीं करते। आजकल पुलिस वाले डील कर पकड़ रहे गोलू ने डील के दौरान कहा आजकल बहुत खतरा है। बिहार में पुलिस काफी सख्त हो गई है। पुलिस ने ऐसा नेटवर्क बना लिया है कि वो डील करने के बहाने पकड़ ले रही है। कई ऐसे लोग भी होते हैं, जो दो से तीन बार माल लेते हैं इसके बाद पकड़वा दे रहे हैं। ऐसे लोग पुलिस के मुखबिर होते हैं। माल पकड़ाने के बाद पता चलता है कि पुलिस के मुखबिरों ने डील कर रेकी की थी। रिपोर्टर – आप निश्चिंत रहिए, हम लोगों के साथ ऐसा कुछ नहीं होगा। गोलू – हां, देखिएगा ऐसा नहीं हो, नहीं तो सब फंस जाएंगे। रिपोर्टर – आप देख लीजिए, कोई टेंशन मत लीजिए। गोलू – यहां तो कोई दिक्कत नहीं होगी, आप पहले वेरिफिकेशन कराइए। रिपोर्टर – ठीक है। गोलू – कौन-कौन सामान लीजिएगा? रिपोर्टर – जो चल रहा है, जिसकी डिमांड हो वही दीजिएगा। गोलू – फ्रूटी 9 हजार चल रहा है, आरएस 13 हजार में है। रिपोर्टर – यह रेट यहां का है या पहुंचा कर? गोलू – हां, पहुंचाकर यह रेट लगेगा। रिपोर्टर – कोई गुंजाइश हो तो बताइए? गोलू – इसमें कोई गुंजाइश नहीं, पहुंचाने वाला पूरा सिस्टम है, खर्च बहुत आता है। पेटी वाला माल ले जाइए, अभी ट्रक से नहीं जाएगा गोलू से हमने एक ट्रक शराब की डील की, लेकिन पहली डील की वजह से गोलू ने ट्रक से माल भेजने से मना करते हुए पेटी से माल सप्लाई करने की बात कही। गोलू ने दावा किया कि पेटी से हर दिन माल पहुंचा देगा, लेकिन उसका पूरा दबाव डील से पहले एड्रेस वेरिफिकेशन को लेकर था। रिपोर्टर – कुछ हो जाए तो बताएं? गोलू – ज्यादा चाहिए नहीं तो डिस्काउंट की बात क्यों करते हैं? रिपोर्टर – नहीं भाई, हमें तो ज्यादा ही चाहिए। गोलू – कितना चाहिए? रिपोर्टर – छोटा ट्रक लगवा दीजिए। गोलू – अभी शराब वाला ट्रक नहीं लगेगा, पेटी से माल ले जाइए। रिपोर्टर – ठीक है। गोलू – 10 से 12 पेटी रोज पहुंचा देंगे, आप पहले काम किए हैं क्या? रिपोर्टर – नहीं, अब शुरू कर रहे हैं, पहले होटल-होटल में पार्टी ऑर्गेनाइज करते थे। गोलू – कौन सा होटल है आपका? रिपोर्टर – अलग-अलग होटल हैं, इवेंट के नाम पर सप्लाई होता है। आपके एड्रेस पर गड़बड़ी हुई तो रिस्क आपका डील के दौरान गोलू ने बताया कि वह रास्ते का पूरा रिस्क कवर करेगा। अगर आपके एड्रेस पर कोई गड़बड़ी हुई तो पूरी रिस्क आपकी होगी। गोलू ने दावा किया पूरी सेटिंग है, कहीं से कोई गड़बड़ी नहीं होगी। जिन लड़कों को सप्लाई के काम में रखा गया है वह टेस्टेड हैं। उनके पते से लेकर उनके बारे में पूरी तस्दीक करने के बाद ही इस काम में लगाया गया है। एक दो नहीं ऐसे कई लड़के हैं, जो वेरिफाई कराकर काम कर रहे हैं। गोलू – स्टेशन से किधर है? रिपोर्टर – मझवलिया रोड में। गोलू – माल कहां चाहिए? रिपोर्टर – बेतिया में कहीं भी। गोलू – माल आपके पास पहुंच गया तो सारी जिम्मेदारी आपकी होगी। रिपोर्टर – रास्ते में कोई गड़बड़ हुई तो? गोलू – रास्ते में कुछ नहीं होगा, सब मेरी जिम्मेदारी होगी। रिपोर्टर – ठीक है। गोलू – रोज 8 पेटी तक पहुंचा सकते हैं, हमारा बहुत आदमी है, सब पहुंचा देगा। रिपोर्टर – ठीक है। आधार दीजिए, 2 दिन बाद वेरिफिकेशन होगा गोलू ने डील से पहले आधार कार्ड पर पूरा जोर दिया। गोलू ने बताया कि आप चलिए, आपके ठिकाने पर मेरा आदमी पहुंचकर बात करेगा। हमने गोलू से कहा कि जब तक बात नहीं होती, तब तक मैं अपने ठिकाने पर किसी को नहीं बुलाऊंगा। इस पर गोलू ने कहा- हम ऐसे ही वेरिफिकेशन कराते हैं। हमारा आदमी जब तक हमें आपके बारे में जानकारी इकट्ठा कर नहीं देगा, तब तक हम आपको माल नहीं दे सकते हैं। गोलू के इस सवाल पर रिपोर्टर बोला – आप बात कर लीजिए, फिर हम आगे की बात करेंगे। रिपोर्टर की रेकी करवाने लगे तस्कर गोलू ने घंटों रिपोर्टर की रेकी कराई। वह कहां जा रहे हैं, किससे बात कर रहे हैं। इसकी पूरी पड़ताल करा रहा था। जब शाम ढलने लगी और अंधेरा हुआ तो गोलू ने रिपोर्टर को कॉल किया और बोला – पनियहवा में ही जहां मिले थे वहीं पीछे की तरफ आइए, मैं वहीं पर हूं। गोलू इस खेल का मास्टरमाइंड है या नहीं, हमारे लिए यह समझना भी आसान नहीं था। उसके साथ कई ऐसे तस्कर शामिल हैं, जो हमारे आसपास मंडरा रहे थे। सब रिपोर्टर पर पैनी नजर रखे हुए थे। गोलू से दोबारा रात में मिलना रिस्क था, लेकिन नेटवर्क को एक्सपोज करने के लिए 5 घंटे बाद गोलू से मिलने रिपोर्टर दोबारा पहुंचा। वह रिपोर्टर को अंधेरी जगह पर ले गया, जहां शराब और सफेद पाउडर की डील की। वह चलते-चलते बोला – आधार कार्ड भेजिएगा, दो दिन बाद एक आदमी भेजूंगा। पूरा डिटेल्स लेकर आएगा, फिर काम शुरू होगा। यूपी से चल रहा बिहार में व्हाइट पाउडर का नेटवर्क यूपी में इन्वेस्टिगेशन के दौरान और गोलू से बातचीत में नशीले सफेद पाउडर का इनपुट मिला। इनपुट मिला कि तस्कर यूपी में बैठकर बिहार में हेरोइन जैसे नशीले सफेद पाउडर का पूरा नेटवर्क चला रहे हैं। गोलू से ही हमें नंद का नंबर मिला, जो बिहार में शराब और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी की बड़ी कड़ी है। गोलू से बातचीत में मिले नंद के नंबर को हमने ट्रैक किया तो वह मिलने को तैयार नहीं हआ। हालांकि वह फोन पर ही पूरी डील और एड्रेस वेरिफिकेशन को लेकर बात की। नंद ने बिहार में शराब से लेकर स्मैक तक की कड़ी बताई। रिपोर्टर – गोलू ने आपका नंबर दिया है, बिहार में सामान चाहिए? नंद – मिल जाएगा, लेकिन अभी फ्रूटी है, बोतल के लिए बाद में बात कीजिए। रिपोर्टर – कितना मिल जाएगा? नंद – जितना चाहिए, मिल जाएगा। रिपोर्टर – क्या करना हाेगा? नंद – विश्वास हो जाए फिर माल पहुंच जाएगा। रिपोर्टर – ठीक है। नंद – हमारा आदमी आपका एड्रेस वेरिफिकेशन कर लेगा फिर माल जाएगा। यूपी के नंद ने शराब के साथ स्मैक की भी पूरी कड़ी बताई। इन्वेस्टिगेशन के दौरान ही बातचीत में नंद ने मोतिहारी के नंदलाल का नंबर दिया और उसके बारे में बताया। काफी पड़ताल के बाद मोतिहारी के सुगौली में हमारी मुलाकात नंदलाल से हुई, जिसने सफेद नशीले पाउडर की पूरी डील की। रिपोर्टर – मुझे हेरोइन और स्मैक चाहिए? नंदलाल – मिल जाएगा। रिपोर्टर – कितना मिल जाएगा। नंदलाल – मिल जाएगा, जितना ऑर्डर दीजिएगा। रिपोर्टर – ले जाने में कोई समस्या तो नहीं? नंदलाल – कोई समस्या नहीं है, महिला के साथ आइए ले जाइए। रिपोर्टर – अभी कितना माल होगा? नंदलाल – फिलहाल अभी तो कम ही है। रिपोर्टर – ज्यादा चाहिए था, ऐसा कीजिए बड़े डीलर से मिलवा दीजिए। नंदलाल से मिली बड़े डीलर की लीड इन्वेस्टिगेशन के दौरान जब नंदलाल ने माल कम होने की बात कही तो हमे मौका मिल गया और हमने बड़े डीलर से मिलवाने की बात कही। रिपोर्टर ने जब नंदलाल से डीलर की बात कही तो उसका जवाब था कि दूसरे जगह की बात छोड़िए, आप सीधे हमसे संपर्क कीजिए, मैं सब इंतजाम कर दूंगा। जहां तक होगा, जितना चाहिए सब कर दूंगा। सामान मंगवाकर रख दूंगा, फिर आपको कॉल करूंगा, आप आकर ले जाइएगा। नंदलाल ने ही कुछ तस्करों का इनपुट देते हुए पूरा मोडस आपरेंडी भी बताए। रिपोर्टर – अभी क्या रेट चल रहा है? नंदलाल – पहले 30 हजार में 100 ग्राम था, अब 40 हजार हो गया है। रिपोर्टर – कहां का सामान है? नंदलाल – सब बाहर से आता है, जैसे बाहर से फ्रूट आता है, वैसे ही आता है। रिपोर्टर – यहां क्या करते हैं, इसपर कुछ काम हाेता है क्या? नंदलाल – यहां लाकर उसे बनाया जाता है। रिपोर्टर – ओरिजिनल है या डुप्लीकेट, कैसे पहचान होगी? नंदलाल – अरे आसान है, आज दिखाएंगे। रिपोर्टर – पहचान क्या है, कुछ खास बताइए? नंदलाल – अगर ओरिजिनल होगा तो पानी की तरफ पिघल जाएगा। रिपोर्टर – ब्राउन शुगर भी देते हैं या और कुछ? नंदलाल – ब्राउन शुगर अलग होता है, हम लोग स्मैक देते हैं। रिपोर्टर – ये कहां से आता है? नंदलाल – ये यहीं बनाया जाता है। यूपी से बिहार तक नशे का कनेक्शन नंदलाल ने बताया कि स्टोन भी मिलता है, जो बहुत हार्ड होता है। (हीरोइन को यहां स्थानीय भाषा में स्टोन भी कहते हैं)। नंदलाल ने बताया कि स्टोन 2 हजार रुपए प्रति ग्राम मिलता है। इसका नशा बहुत खतरनाक होता है। ऐसा नशा है कि अगर आदमी को 5 महीने जीना हो, तो 3 महीने में ही मर जाएगा। यह पाउडर कलर का होता है। अगर ज्यादा माल चाहिए तो यूपी के बाराबंकी चले जाइए। रिपोर्टर – वहां से कैसे आएगा? नंदलाल – वहां से आप खुद ले लीजिएगा। रिपोर्टर – अभी आपके पास कितना है? नंदलाल – अभी तो पुड़िया में है, ग्राम में चाहिए तो कल दे देंगे। रिपोर्टर – रेट बता दीजिएगा, क्या लगेगा? नंदलाल – अभी हमारे पास 2 ग्राम है, 600 रुपए प्रति ग्राम पड़ेगा। रिपोर्टर – हमें ज्यादा चाहिए, आज लड़की के साथ आए हैं। नंदलाल – आप नंबर ले लीजिए, कल बता दूंगा। रिपोर्टर – कब तक बताएंगे? नंदलाल – आज ही शाम तक क्लियर करके बता दूंगा कितना हो जाएगा। रिपोर्टर – फिर आगे माल कैसे जाएगा? नंदलाल – आते-जाते रहेंगे तो विश्वास बनेगा, फिर काम अच्छे से होगा। रिपोर्ट – ठीक है, लेकिन अभी कुछ दीजिए? नंदलाल – अभी पुड़िया में है, पुड़िया ले जाइए। बेचने के लिए रखे हैं? रिपोर्टर – बेचने के लिए, ज्यादा ही चाहिए। नंदलाल – ले जाइए, यहां 100 की पुड़िया, वहां 250 में बिकेगी। रिपोर्टर – कैसे? नंदलाल – एक-एक पार्टी यहां से ले जाती है, एक पुड़िया 500 तक बिक जाता है। रिपोर्टर – कहां से मंगाते हैं, नेपाल से? नंदलाल – नहीं, इंडिया से ही, पहले इसका बेस आता है, जो 18 लाख रुपए किलो है। उसी से हम लोग बनाते हैं। नंदलाल से बातचीत में ही विनोद का इनपुट मिला। सुगौली में ही हमारी मुलाकात विनोद से हुई। विनोद भी हेरोइन और स्मैक के साथ ब्राउन शुगर की डील करता है। डील में विनोद ने दावा किया कि विश्वास जम जाने पर वह घर तक पहुंचाने की सेटिंग जमा देगा। विश्वास जमाने के लिए विनोद ने भी वेरिफिकेशन की बात की। रिपोर्टर – आप लोग कम दे रहे हैं, हमें ज्यादा चाहिए। विनोद – अभी 1 या 2 ग्राम, कहिए, दे देता हूं। रिपोर्टर – आपके पास कौन-कौन सी क्वालिटी का माल है? विनोद – काला वाला मिलेगा, बढ़िया वाला मिलेगा। रिपोर्टर – कैसे पता बढ़िया वाला है? विनोद – एक बार ले जाइए, यूज कीजिए, फिर बाद में ज्यादा मिलेगा। रिपोर्टर – रेट क्या लगेगा? विनोद – 700 रु ग्राम चल रहा है, आपको 600 रुपए लगेगा। रिपोर्टर – हमें ज्यादा मात्रा में माल चाहिए। विनोद – हो जाएगा, पहले विश्वास बनाइए। रिपोर्टर – आपका माल नेपाल से आता है क्या? विनोद – नहीं, यहां फुटकर रखा जाता है। बिहार में सप्लायरों की पूरी फौज विनोद से डील में पता चला कि मोतिहारी और रक्सौल से लेकर पूरे बॉर्डर इलाके में नशा के सप्लायरों की पूरी फौज है। वह एजेंटों को माल सप्लाई करते हैं। इन्वेस्टिगेशन में यह भी खुलासा हुआ कि सप्लायर माल देते हैं उसे एजेंट गांवों में छिपाकर रखते हैं। थोड़ा थोड़ा सामान अपने ठिकानों पर रखते हैं ताकि पुलिस की पकड़ में नहीं आएं। इसलिए अधिक माल की डिमांड पर वह समय मांगते हैं। रिपोर्टर – अभी कितना मिल जाएगा? विनोद – अभी 2 ग्राम तक दे दूंगा। रिपोर्टर – अधिक मात्रा में कब तक मिल जाएगा। विनोद – कल जितना चाहिए, मिल जाएगा। रिपोर्टर – अभी नहीं हो सकता क्या? विनोद – नहीं, अभी आदमी नहीं है, कल आएगा। पुलिस के डर से यहां पुड़िया काटकर भेजते हैं। शराबबंदी के बाद सूखा नशा बढ़ा, नई सरकार में ट्रेंड बदला भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि बिहार में शराबबंदी के बाद सूखे नशा का कारोबार तेजी से बढ़ा है। अब बिहार में नई सरकार में तस्करी का पूरा ट्रेंड बदल गया है। बिहार सरकार की सख्ती के बाद एक्टिव तस्करों ने तस्करी का पूरा ट्रेंड बदल दिया है। तस्करी का नेटवर्क अब पूरी तरह से संगठित और प्रोफेशनल दिख रहा है। तस्करों का नेटवर्क यूपी से लेकर नेपाल तक फैला है। बिहार में सरकार की सख्ती के बाद ही एजेंटों ने शराब और सूखे नशे की सप्लाई करने वाले तस्करों की KYC का पूरा सिस्टम बनाया है। बाहर के तस्कर बिहार के अलग-अलग शहरों में अपने एजेंट बहाल कर रहे हैं। एजेंट के पास प्रतिदिन शराब पहुंच रही है और एजेंट शराब लोगों तक पहुंचा रहे हैं। एजेंट तस्करों को काम में लगाने से पहले एक प्रक्रिया तय करते हैं। तस्कर को इसे पूरा करना होता है। इसके लिए शराब माफिया बनने वाले एजेंट से आधार कार्ड लेते हैं। एजेंट कौन है, कहां रहता है, शहर का है या गांव का, पुलिस से कोई पुराना लफड़ा तो नहीं, पहले शराब का काम किया है या नहीं, यह सब सवाल तस्कर पहले ही तय कर लेते हैं। इसलिए नए नेटवर्क पर भरोसा करने से पहले तस्कर आधार कार्ड तक मांगते हैं और साफ कहते हैं कि जो नए होते हैं, वही अक्सर पुलिस के मुखबिर निकलते हैं। यानी बिहार में शराब तस्करी अब अंडरग्राउंड नहीं, बल्कि पूरी KYC और वेरिफिकेशन सिस्टम के साथ चल रही है। एक्सपर्ट बोले- नपुंसकता का कारण बन सकता है स्मैक का सेवन फिजिशियन डॉक्टर राणा एसपी सिंह बताते हैं, ‘हेरोइन, चरस या गांजा, इन नशीले पदार्थ की रासायनिक संरचना अलग होती है। ये पदार्थ मस्तिष्क के भीतर मौजूद ग्रंथियों को प्रभावित करते हैं, जिससे डोपामीन का स्राव बढ़ता है। जिसके चलते व्यक्ति को कुछ समय के लिए उत्तेजित और एक्साइटमेंट करता है।
“100 रुपए की एक डोज है। एक बार खींचिए डबल वियाग्रा का जोश देगा। थकने का नाम नहीं लेंगे। घोड़े की तरह पूरा जोश रहेगा। सामने वाला भी हैरान हो जाएगा। ऐसे ही नहीं हमारी मार्केट में डिमांड है। इसे देसी वियाग्रा भी बोला जाता है। स्टूडेंट्स को यही बताकर बेचिए खूब कमाएंगे। आप एक बार ट्राई तो कीजिए, फिर देखिए मजा दोगुना हो जाएगा…।” यह दावा बिहार में हेरोइन और स्मैक की डील करने वाले एजेंट का है। वो खुलेआम सूखे नशे का पूरा नेटवर्क चला रहे हैं। सूखे नशे को सेक्स के पावर से जोड़कर इसकी ब्रांडिंग कर रहे हैं। एजेंट बनकर भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने बड़े पैमाने पर हेरोइन और स्मैक की डील की। देखिए और पढ़िए कैसे बिहार में शराब तस्कर सूखे नशे के कारोबार में डायवर्ट हो रहे हैं… यूपी से चला रहे बिहार में तस्करों का नेटवर्क भास्कर इन्वेस्टिगेशन टीम को इनपुट मिला कि बिहार में नई सरकार बनने के बाद बढ़ी पुलिस की सख्ती से मादक पदार्थों के तस्करों ने तस्करी का पैटर्न बदल दिया है। सेफ जोन की तलाश में वह यूपी के सीमावर्ती जिलों में एक्टिव हो गए हैं। पहले की तरह किसी से भी डील करने के बजाए वह अब मल्टीनेशनल कंपनियों की तरह तस्करों की भर्ती कर रहे हैं। पहले इंटरव्यू फिर एड्रेस वेरिफिकेशन के बाद माल सप्लाई कर रहे हैं। इसके लिए बैंकों की तरह आधार कार्ड और अन्य आईडी प्रूफ लेने के बाद KYC करा रहे हैं। गैंग को एक्सपोज करने के लिए भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम ने एजेंट बनकर तस्करों से डील की। यूपी के एजेंट्स ने हेरोइन तस्करों तक पहुंचाई इन्वेस्टिगेशन टीम को इनपुट मिला कि सरकार की सख्ती के बाद अब शराब के तस्कर भी सूखे नशे की तरफ डायवर्ट हो रहे हैं। सूखे नशे के तस्करों तक पहुंचने के लिए पहले हम यूपी से शराब तस्करों का नेटवर्क चलाने वाले एजेंट्स तक पहुंचना था। इसलिए हमने यूपी के कुशीनगर जिले के बॉर्डर एरिया में नेटवर्क एक्टिव किया। इनपुट मिला कि सरकार की सख्ती के बाद अब पूरा धंधा एड्रेस वेरिफिकेशन यानी तस्करों की KYC के बाद हो रहा है। हम यूपी के तस्करों से होते हुए ही बिहार में हेरोइन और स्मैक तस्करों के नेटवर्क को एक्सपोज कर पाए। इन्वेस्टिगेशन के दौरान सुजीत का इनपुट मिला जो बिहार में शराब की तस्करी के लिए तस्करों की भर्ती करता है। इनपुट के बाद भास्कर की इन्वेस्टिगेशन टीम जब सुजीत से बातचीत की तो गोलू का नाम सामने आया। गोलू भी सुजीत की तरह बड़े पैमाने पर लड़कों की भर्ती कर बिहार में मादक पदार्थों की सप्लाई कर रहा है। यूपी के कुशीनगर जनपद के पनियहवा थाना क्षेत्र में गोलू ने पूरी डील की। रिपोर्टर – सुजीत भैया से बात हुई है? गोलू – छोड़िए सुजीत भैया को, अब आप हमसे बात कीजिए। रिपोर्टर – देखिए, माल चाहिए बिहार के लिए? गोलू – आपको बेतिया में चाहिए क्या? रिपोर्टर – हां, बेतिया में ही डिलीवरी चाहिए। गोलू – ठीक है, बेतिया चला जाएगा। रोज चाहिए या फंक्शन के लिए? अपना आधार कार्ड दीजिए। रिपोर्टर – आधार कार्ड का पता नहीं था, इसलिए लेकर नहीं आए। मोबाइल पर भेज दूंगा, पैसे भी भेज दूंगा। गोलू – सुजीत भैया ने आपका घर देखा है या सिर्फ बातचीत हुई है? रिपोर्टर – नहीं, मेरे घर नहीं गए हैं। गोलू – बेतिया में कहां घर है आपका? रिपोर्टर – न्यू कॉलोनी में ही रहते हैं। गोलू – सिटी है या गांव का इलाका है? रिपोर्टर – सिटी से थोड़ा आगे पड़ता है। गोलू – पुलिस का कोई लफड़ा तो नहीं है? रिपोर्टर – नहीं, कोई लफड़ा नहीं। गोलू – हम नए लोगों के साथ जल्दी काम नहीं करते। आजकल पुलिस वाले डील कर पकड़ रहे गोलू ने डील के दौरान कहा आजकल बहुत खतरा है। बिहार में पुलिस काफी सख्त हो गई है। पुलिस ने ऐसा नेटवर्क बना लिया है कि वो डील करने के बहाने पकड़ ले रही है। कई ऐसे लोग भी होते हैं, जो दो से तीन बार माल लेते हैं इसके बाद पकड़वा दे रहे हैं। ऐसे लोग पुलिस के मुखबिर होते हैं। माल पकड़ाने के बाद पता चलता है कि पुलिस के मुखबिरों ने डील कर रेकी की थी। रिपोर्टर – आप निश्चिंत रहिए, हम लोगों के साथ ऐसा कुछ नहीं होगा। गोलू – हां, देखिएगा ऐसा नहीं हो, नहीं तो सब फंस जाएंगे। रिपोर्टर – आप देख लीजिए, कोई टेंशन मत लीजिए। गोलू – यहां तो कोई दिक्कत नहीं होगी, आप पहले वेरिफिकेशन कराइए। रिपोर्टर – ठीक है। गोलू – कौन-कौन सामान लीजिएगा? रिपोर्टर – जो चल रहा है, जिसकी डिमांड हो वही दीजिएगा। गोलू – फ्रूटी 9 हजार चल रहा है, आरएस 13 हजार में है। रिपोर्टर – यह रेट यहां का है या पहुंचा कर? गोलू – हां, पहुंचाकर यह रेट लगेगा। रिपोर्टर – कोई गुंजाइश हो तो बताइए? गोलू – इसमें कोई गुंजाइश नहीं, पहुंचाने वाला पूरा सिस्टम है, खर्च बहुत आता है। पेटी वाला माल ले जाइए, अभी ट्रक से नहीं जाएगा गोलू से हमने एक ट्रक शराब की डील की, लेकिन पहली डील की वजह से गोलू ने ट्रक से माल भेजने से मना करते हुए पेटी से माल सप्लाई करने की बात कही। गोलू ने दावा किया कि पेटी से हर दिन माल पहुंचा देगा, लेकिन उसका पूरा दबाव डील से पहले एड्रेस वेरिफिकेशन को लेकर था। रिपोर्टर – कुछ हो जाए तो बताएं? गोलू – ज्यादा चाहिए नहीं तो डिस्काउंट की बात क्यों करते हैं? रिपोर्टर – नहीं भाई, हमें तो ज्यादा ही चाहिए। गोलू – कितना चाहिए? रिपोर्टर – छोटा ट्रक लगवा दीजिए। गोलू – अभी शराब वाला ट्रक नहीं लगेगा, पेटी से माल ले जाइए। रिपोर्टर – ठीक है। गोलू – 10 से 12 पेटी रोज पहुंचा देंगे, आप पहले काम किए हैं क्या? रिपोर्टर – नहीं, अब शुरू कर रहे हैं, पहले होटल-होटल में पार्टी ऑर्गेनाइज करते थे। गोलू – कौन सा होटल है आपका? रिपोर्टर – अलग-अलग होटल हैं, इवेंट के नाम पर सप्लाई होता है। आपके एड्रेस पर गड़बड़ी हुई तो रिस्क आपका डील के दौरान गोलू ने बताया कि वह रास्ते का पूरा रिस्क कवर करेगा। अगर आपके एड्रेस पर कोई गड़बड़ी हुई तो पूरी रिस्क आपकी होगी। गोलू ने दावा किया पूरी सेटिंग है, कहीं से कोई गड़बड़ी नहीं होगी। जिन लड़कों को सप्लाई के काम में रखा गया है वह टेस्टेड हैं। उनके पते से लेकर उनके बारे में पूरी तस्दीक करने के बाद ही इस काम में लगाया गया है। एक दो नहीं ऐसे कई लड़के हैं, जो वेरिफाई कराकर काम कर रहे हैं। गोलू – स्टेशन से किधर है? रिपोर्टर – मझवलिया रोड में। गोलू – माल कहां चाहिए? रिपोर्टर – बेतिया में कहीं भी। गोलू – माल आपके पास पहुंच गया तो सारी जिम्मेदारी आपकी होगी। रिपोर्टर – रास्ते में कोई गड़बड़ हुई तो? गोलू – रास्ते में कुछ नहीं होगा, सब मेरी जिम्मेदारी होगी। रिपोर्टर – ठीक है। गोलू – रोज 8 पेटी तक पहुंचा सकते हैं, हमारा बहुत आदमी है, सब पहुंचा देगा। रिपोर्टर – ठीक है। आधार दीजिए, 2 दिन बाद वेरिफिकेशन होगा गोलू ने डील से पहले आधार कार्ड पर पूरा जोर दिया। गोलू ने बताया कि आप चलिए, आपके ठिकाने पर मेरा आदमी पहुंचकर बात करेगा। हमने गोलू से कहा कि जब तक बात नहीं होती, तब तक मैं अपने ठिकाने पर किसी को नहीं बुलाऊंगा। इस पर गोलू ने कहा- हम ऐसे ही वेरिफिकेशन कराते हैं। हमारा आदमी जब तक हमें आपके बारे में जानकारी इकट्ठा कर नहीं देगा, तब तक हम आपको माल नहीं दे सकते हैं। गोलू के इस सवाल पर रिपोर्टर बोला – आप बात कर लीजिए, फिर हम आगे की बात करेंगे। रिपोर्टर की रेकी करवाने लगे तस्कर गोलू ने घंटों रिपोर्टर की रेकी कराई। वह कहां जा रहे हैं, किससे बात कर रहे हैं। इसकी पूरी पड़ताल करा रहा था। जब शाम ढलने लगी और अंधेरा हुआ तो गोलू ने रिपोर्टर को कॉल किया और बोला – पनियहवा में ही जहां मिले थे वहीं पीछे की तरफ आइए, मैं वहीं पर हूं। गोलू इस खेल का मास्टरमाइंड है या नहीं, हमारे लिए यह समझना भी आसान नहीं था। उसके साथ कई ऐसे तस्कर शामिल हैं, जो हमारे आसपास मंडरा रहे थे। सब रिपोर्टर पर पैनी नजर रखे हुए थे। गोलू से दोबारा रात में मिलना रिस्क था, लेकिन नेटवर्क को एक्सपोज करने के लिए 5 घंटे बाद गोलू से मिलने रिपोर्टर दोबारा पहुंचा। वह रिपोर्टर को अंधेरी जगह पर ले गया, जहां शराब और सफेद पाउडर की डील की। वह चलते-चलते बोला – आधार कार्ड भेजिएगा, दो दिन बाद एक आदमी भेजूंगा। पूरा डिटेल्स लेकर आएगा, फिर काम शुरू होगा। यूपी से चल रहा बिहार में व्हाइट पाउडर का नेटवर्क यूपी में इन्वेस्टिगेशन के दौरान और गोलू से बातचीत में नशीले सफेद पाउडर का इनपुट मिला। इनपुट मिला कि तस्कर यूपी में बैठकर बिहार में हेरोइन जैसे नशीले सफेद पाउडर का पूरा नेटवर्क चला रहे हैं। गोलू से ही हमें नंद का नंबर मिला, जो बिहार में शराब और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी की बड़ी कड़ी है। गोलू से बातचीत में मिले नंद के नंबर को हमने ट्रैक किया तो वह मिलने को तैयार नहीं हआ। हालांकि वह फोन पर ही पूरी डील और एड्रेस वेरिफिकेशन को लेकर बात की। नंद ने बिहार में शराब से लेकर स्मैक तक की कड़ी बताई। रिपोर्टर – गोलू ने आपका नंबर दिया है, बिहार में सामान चाहिए? नंद – मिल जाएगा, लेकिन अभी फ्रूटी है, बोतल के लिए बाद में बात कीजिए। रिपोर्टर – कितना मिल जाएगा? नंद – जितना चाहिए, मिल जाएगा। रिपोर्टर – क्या करना हाेगा? नंद – विश्वास हो जाए फिर माल पहुंच जाएगा। रिपोर्टर – ठीक है। नंद – हमारा आदमी आपका एड्रेस वेरिफिकेशन कर लेगा फिर माल जाएगा। यूपी के नंद ने शराब के साथ स्मैक की भी पूरी कड़ी बताई। इन्वेस्टिगेशन के दौरान ही बातचीत में नंद ने मोतिहारी के नंदलाल का नंबर दिया और उसके बारे में बताया। काफी पड़ताल के बाद मोतिहारी के सुगौली में हमारी मुलाकात नंदलाल से हुई, जिसने सफेद नशीले पाउडर की पूरी डील की। रिपोर्टर – मुझे हेरोइन और स्मैक चाहिए? नंदलाल – मिल जाएगा। रिपोर्टर – कितना मिल जाएगा। नंदलाल – मिल जाएगा, जितना ऑर्डर दीजिएगा। रिपोर्टर – ले जाने में कोई समस्या तो नहीं? नंदलाल – कोई समस्या नहीं है, महिला के साथ आइए ले जाइए। रिपोर्टर – अभी कितना माल होगा? नंदलाल – फिलहाल अभी तो कम ही है। रिपोर्टर – ज्यादा चाहिए था, ऐसा कीजिए बड़े डीलर से मिलवा दीजिए। नंदलाल से मिली बड़े डीलर की लीड इन्वेस्टिगेशन के दौरान जब नंदलाल ने माल कम होने की बात कही तो हमे मौका मिल गया और हमने बड़े डीलर से मिलवाने की बात कही। रिपोर्टर ने जब नंदलाल से डीलर की बात कही तो उसका जवाब था कि दूसरे जगह की बात छोड़िए, आप सीधे हमसे संपर्क कीजिए, मैं सब इंतजाम कर दूंगा। जहां तक होगा, जितना चाहिए सब कर दूंगा। सामान मंगवाकर रख दूंगा, फिर आपको कॉल करूंगा, आप आकर ले जाइएगा। नंदलाल ने ही कुछ तस्करों का इनपुट देते हुए पूरा मोडस आपरेंडी भी बताए। रिपोर्टर – अभी क्या रेट चल रहा है? नंदलाल – पहले 30 हजार में 100 ग्राम था, अब 40 हजार हो गया है। रिपोर्टर – कहां का सामान है? नंदलाल – सब बाहर से आता है, जैसे बाहर से फ्रूट आता है, वैसे ही आता है। रिपोर्टर – यहां क्या करते हैं, इसपर कुछ काम हाेता है क्या? नंदलाल – यहां लाकर उसे बनाया जाता है। रिपोर्टर – ओरिजिनल है या डुप्लीकेट, कैसे पहचान होगी? नंदलाल – अरे आसान है, आज दिखाएंगे। रिपोर्टर – पहचान क्या है, कुछ खास बताइए? नंदलाल – अगर ओरिजिनल होगा तो पानी की तरफ पिघल जाएगा। रिपोर्टर – ब्राउन शुगर भी देते हैं या और कुछ? नंदलाल – ब्राउन शुगर अलग होता है, हम लोग स्मैक देते हैं। रिपोर्टर – ये कहां से आता है? नंदलाल – ये यहीं बनाया जाता है। यूपी से बिहार तक नशे का कनेक्शन नंदलाल ने बताया कि स्टोन भी मिलता है, जो बहुत हार्ड होता है। (हीरोइन को यहां स्थानीय भाषा में स्टोन भी कहते हैं)। नंदलाल ने बताया कि स्टोन 2 हजार रुपए प्रति ग्राम मिलता है। इसका नशा बहुत खतरनाक होता है। ऐसा नशा है कि अगर आदमी को 5 महीने जीना हो, तो 3 महीने में ही मर जाएगा। यह पाउडर कलर का होता है। अगर ज्यादा माल चाहिए तो यूपी के बाराबंकी चले जाइए। रिपोर्टर – वहां से कैसे आएगा? नंदलाल – वहां से आप खुद ले लीजिएगा। रिपोर्टर – अभी आपके पास कितना है? नंदलाल – अभी तो पुड़िया में है, ग्राम में चाहिए तो कल दे देंगे। रिपोर्टर – रेट बता दीजिएगा, क्या लगेगा? नंदलाल – अभी हमारे पास 2 ग्राम है, 600 रुपए प्रति ग्राम पड़ेगा। रिपोर्टर – हमें ज्यादा चाहिए, आज लड़की के साथ आए हैं। नंदलाल – आप नंबर ले लीजिए, कल बता दूंगा। रिपोर्टर – कब तक बताएंगे? नंदलाल – आज ही शाम तक क्लियर करके बता दूंगा कितना हो जाएगा। रिपोर्टर – फिर आगे माल कैसे जाएगा? नंदलाल – आते-जाते रहेंगे तो विश्वास बनेगा, फिर काम अच्छे से होगा। रिपोर्ट – ठीक है, लेकिन अभी कुछ दीजिए? नंदलाल – अभी पुड़िया में है, पुड़िया ले जाइए। बेचने के लिए रखे हैं? रिपोर्टर – बेचने के लिए, ज्यादा ही चाहिए। नंदलाल – ले जाइए, यहां 100 की पुड़िया, वहां 250 में बिकेगी। रिपोर्टर – कैसे? नंदलाल – एक-एक पार्टी यहां से ले जाती है, एक पुड़िया 500 तक बिक जाता है। रिपोर्टर – कहां से मंगाते हैं, नेपाल से? नंदलाल – नहीं, इंडिया से ही, पहले इसका बेस आता है, जो 18 लाख रुपए किलो है। उसी से हम लोग बनाते हैं। नंदलाल से बातचीत में ही विनोद का इनपुट मिला। सुगौली में ही हमारी मुलाकात विनोद से हुई। विनोद भी हेरोइन और स्मैक के साथ ब्राउन शुगर की डील करता है। डील में विनोद ने दावा किया कि विश्वास जम जाने पर वह घर तक पहुंचाने की सेटिंग जमा देगा। विश्वास जमाने के लिए विनोद ने भी वेरिफिकेशन की बात की। रिपोर्टर – आप लोग कम दे रहे हैं, हमें ज्यादा चाहिए। विनोद – अभी 1 या 2 ग्राम, कहिए, दे देता हूं। रिपोर्टर – आपके पास कौन-कौन सी क्वालिटी का माल है? विनोद – काला वाला मिलेगा, बढ़िया वाला मिलेगा। रिपोर्टर – कैसे पता बढ़िया वाला है? विनोद – एक बार ले जाइए, यूज कीजिए, फिर बाद में ज्यादा मिलेगा। रिपोर्टर – रेट क्या लगेगा? विनोद – 700 रु ग्राम चल रहा है, आपको 600 रुपए लगेगा। रिपोर्टर – हमें ज्यादा मात्रा में माल चाहिए। विनोद – हो जाएगा, पहले विश्वास बनाइए। रिपोर्टर – आपका माल नेपाल से आता है क्या? विनोद – नहीं, यहां फुटकर रखा जाता है। बिहार में सप्लायरों की पूरी फौज विनोद से डील में पता चला कि मोतिहारी और रक्सौल से लेकर पूरे बॉर्डर इलाके में नशा के सप्लायरों की पूरी फौज है। वह एजेंटों को माल सप्लाई करते हैं। इन्वेस्टिगेशन में यह भी खुलासा हुआ कि सप्लायर माल देते हैं उसे एजेंट गांवों में छिपाकर रखते हैं। थोड़ा थोड़ा सामान अपने ठिकानों पर रखते हैं ताकि पुलिस की पकड़ में नहीं आएं। इसलिए अधिक माल की डिमांड पर वह समय मांगते हैं। रिपोर्टर – अभी कितना मिल जाएगा? विनोद – अभी 2 ग्राम तक दे दूंगा। रिपोर्टर – अधिक मात्रा में कब तक मिल जाएगा। विनोद – कल जितना चाहिए, मिल जाएगा। रिपोर्टर – अभी नहीं हो सकता क्या? विनोद – नहीं, अभी आदमी नहीं है, कल आएगा। पुलिस के डर से यहां पुड़िया काटकर भेजते हैं। शराबबंदी के बाद सूखा नशा बढ़ा, नई सरकार में ट्रेंड बदला भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि बिहार में शराबबंदी के बाद सूखे नशा का कारोबार तेजी से बढ़ा है। अब बिहार में नई सरकार में तस्करी का पूरा ट्रेंड बदल गया है। बिहार सरकार की सख्ती के बाद एक्टिव तस्करों ने तस्करी का पूरा ट्रेंड बदल दिया है। तस्करी का नेटवर्क अब पूरी तरह से संगठित और प्रोफेशनल दिख रहा है। तस्करों का नेटवर्क यूपी से लेकर नेपाल तक फैला है। बिहार में सरकार की सख्ती के बाद ही एजेंटों ने शराब और सूखे नशे की सप्लाई करने वाले तस्करों की KYC का पूरा सिस्टम बनाया है। बाहर के तस्कर बिहार के अलग-अलग शहरों में अपने एजेंट बहाल कर रहे हैं। एजेंट के पास प्रतिदिन शराब पहुंच रही है और एजेंट शराब लोगों तक पहुंचा रहे हैं। एजेंट तस्करों को काम में लगाने से पहले एक प्रक्रिया तय करते हैं। तस्कर को इसे पूरा करना होता है। इसके लिए शराब माफिया बनने वाले एजेंट से आधार कार्ड लेते हैं। एजेंट कौन है, कहां रहता है, शहर का है या गांव का, पुलिस से कोई पुराना लफड़ा तो नहीं, पहले शराब का काम किया है या नहीं, यह सब सवाल तस्कर पहले ही तय कर लेते हैं। इसलिए नए नेटवर्क पर भरोसा करने से पहले तस्कर आधार कार्ड तक मांगते हैं और साफ कहते हैं कि जो नए होते हैं, वही अक्सर पुलिस के मुखबिर निकलते हैं। यानी बिहार में शराब तस्करी अब अंडरग्राउंड नहीं, बल्कि पूरी KYC और वेरिफिकेशन सिस्टम के साथ चल रही है। एक्सपर्ट बोले- नपुंसकता का कारण बन सकता है स्मैक का सेवन फिजिशियन डॉक्टर राणा एसपी सिंह बताते हैं, ‘हेरोइन, चरस या गांजा, इन नशीले पदार्थ की रासायनिक संरचना अलग होती है। ये पदार्थ मस्तिष्क के भीतर मौजूद ग्रंथियों को प्रभावित करते हैं, जिससे डोपामीन का स्राव बढ़ता है। जिसके चलते व्यक्ति को कुछ समय के लिए उत्तेजित और एक्साइटमेंट करता है।