देहरादून के बहुचर्चित अनुपमा गुलाटी मर्डर केस में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए पति और सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहे राजेश गुलाटी की आपराधिक अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ कहा कि आरोपी की ओर से पेश की गई दलीलें तथ्यों और सबूतों के सामने टिक नहीं पातीं। निचली अदालत द्वारा हत्या और सबूत मिटाने के मामले में सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा पूरी तरह सही है और इसमें हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा भले ही कोई सीधे सबूत न हो, लेकिन जो सबूत हैं, वे सभी आपस में जुड़े हुए हैं और पूरी कहानी को साबित करने में मदद करते हैं। मृतका की गुमशुदगी, आरोपी द्वारा अलग-अलग लोगों को दिए गए अलग-अलग बयान, उसके घर से शव की बरामदगी और जंगल से शरीर के हिस्से की बरामदगी। ये सभी तथ्य सीधे तौर पर आरोपी की ओर इशारा करते हैं। अपील में राजेश गुलाटी ने यह दावा किया था कि पुलिस की बरामदगी संदिग्ध है, कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और हत्या का इरादा साबित नहीं होता। लेकिन कोर्ट ने कहा कि आरोपी यह नहीं बता सका कि उसकी पत्नी का शव उसके ही घर के डीप फ्रीजर में कैसे मिला। पहले 2 प्वाइंट्स में जानिए पूरा मामला…. अब पढ़िए वो दलीलें जो आरोपी ने कोर्ट में रखीं… शव की बरामदगी और जांच प्रक्रिया पर सवाल आरोपी के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि घर से शव मिलने की कहानी संदेह के घेरे में है। कथित तौर पर 12 दिसंबर 2010 को डीप फ्रीजर से शव मिलने का दावा किया गया, लेकिन फ्रीजर को उसी दिन जब्त नहीं किया गया। इसे पांच दिन बाद 17 दिसंबर को सीज किया गया, जिससे पूरी बरामदगी प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। आरोपी को जोड़ने वाला ठोस सबूत नहीं वकील ने कहा कि जिस काले बैग में शव मिलने की बात कही गई, उसके आरोपी द्वारा खरीदे जाने का कोई प्रमाण नहीं है। इसके अलावा मामले में कोई फिंगरप्रिंट रिपोर्ट भी पेश नहीं की गई, जिससे आरोपी को सीधे तौर पर अपराध से जोड़ा जा सके। 15 दिसंबर को जंगल से मृतका का पैर बरामद होने की बात कही गई, लेकिन इसकी बरामदगी का भी कोई गवाह मौजूद नहीं है। हत्या का मकसद और रिश्तों पर सवाल आरोपी के वकील ने दलील दी कि हत्या का कोई ठोस मकसद साबित नहीं हो पाया है। न तो यह दिखाया गया कि पति-पत्नी के रिश्ते असामान्य थे और न ही उनके बीच किसी तरह की असामान्य गतिविधि के सबूत सामने आए। वकील ने यह भी कहा कि मृतका अक्सर घर से बाहर जाती थी, ऐसे में केवल उसके लापता होने से आरोपी पर संदेह नहीं किया जा सकता। ———– मर्डर की पूरी कहानी के लिए ये खबर पढ़ें… कोर्ट ने उम्रकैद की सजा रखी बरकरार; 72 टुकड़ों में काट फ्रीज में रखा था पत्नी का शव राजेश गुलाटी और अनुपमा की शादी 1999 में हुई थी। शादी के कुछ साल बाद दोनों 6 साल के लिए अमेरिका चले गए। राजेश वहां सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करता था, जबकि अनुपमा हाउस वाइफ थीं। इसी दौरान उनके जुड़वां बच्चे हुए, जिनकी उम्र इस समय 19 साल की है। अमेरिका से लौटने के बाद परिवार देहरादून के प्रकाश नगर इलाके में दो कमरे के किराए के मकान में रहने लगा। (पढ़ें पूरी खबर)
देहरादून के बहुचर्चित अनुपमा गुलाटी मर्डर केस में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए पति और सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहे राजेश गुलाटी की आपराधिक अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ कहा कि आरोपी की ओर से पेश की गई दलीलें तथ्यों और सबूतों के सामने टिक नहीं पातीं। निचली अदालत द्वारा हत्या और सबूत मिटाने के मामले में सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा पूरी तरह सही है और इसमें हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा भले ही कोई सीधे सबूत न हो, लेकिन जो सबूत हैं, वे सभी आपस में जुड़े हुए हैं और पूरी कहानी को साबित करने में मदद करते हैं। मृतका की गुमशुदगी, आरोपी द्वारा अलग-अलग लोगों को दिए गए अलग-अलग बयान, उसके घर से शव की बरामदगी और जंगल से शरीर के हिस्से की बरामदगी। ये सभी तथ्य सीधे तौर पर आरोपी की ओर इशारा करते हैं। अपील में राजेश गुलाटी ने यह दावा किया था कि पुलिस की बरामदगी संदिग्ध है, कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और हत्या का इरादा साबित नहीं होता। लेकिन कोर्ट ने कहा कि आरोपी यह नहीं बता सका कि उसकी पत्नी का शव उसके ही घर के डीप फ्रीजर में कैसे मिला। पहले 2 प्वाइंट्स में जानिए पूरा मामला…. अब पढ़िए वो दलीलें जो आरोपी ने कोर्ट में रखीं… शव की बरामदगी और जांच प्रक्रिया पर सवाल आरोपी के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि घर से शव मिलने की कहानी संदेह के घेरे में है। कथित तौर पर 12 दिसंबर 2010 को डीप फ्रीजर से शव मिलने का दावा किया गया, लेकिन फ्रीजर को उसी दिन जब्त नहीं किया गया। इसे पांच दिन बाद 17 दिसंबर को सीज किया गया, जिससे पूरी बरामदगी प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। आरोपी को जोड़ने वाला ठोस सबूत नहीं वकील ने कहा कि जिस काले बैग में शव मिलने की बात कही गई, उसके आरोपी द्वारा खरीदे जाने का कोई प्रमाण नहीं है। इसके अलावा मामले में कोई फिंगरप्रिंट रिपोर्ट भी पेश नहीं की गई, जिससे आरोपी को सीधे तौर पर अपराध से जोड़ा जा सके। 15 दिसंबर को जंगल से मृतका का पैर बरामद होने की बात कही गई, लेकिन इसकी बरामदगी का भी कोई गवाह मौजूद नहीं है। हत्या का मकसद और रिश्तों पर सवाल आरोपी के वकील ने दलील दी कि हत्या का कोई ठोस मकसद साबित नहीं हो पाया है। न तो यह दिखाया गया कि पति-पत्नी के रिश्ते असामान्य थे और न ही उनके बीच किसी तरह की असामान्य गतिविधि के सबूत सामने आए। वकील ने यह भी कहा कि मृतका अक्सर घर से बाहर जाती थी, ऐसे में केवल उसके लापता होने से आरोपी पर संदेह नहीं किया जा सकता। ———– मर्डर की पूरी कहानी के लिए ये खबर पढ़ें… कोर्ट ने उम्रकैद की सजा रखी बरकरार; 72 टुकड़ों में काट फ्रीज में रखा था पत्नी का शव राजेश गुलाटी और अनुपमा की शादी 1999 में हुई थी। शादी के कुछ साल बाद दोनों 6 साल के लिए अमेरिका चले गए। राजेश वहां सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करता था, जबकि अनुपमा हाउस वाइफ थीं। इसी दौरान उनके जुड़वां बच्चे हुए, जिनकी उम्र इस समय 19 साल की है। अमेरिका से लौटने के बाद परिवार देहरादून के प्रकाश नगर इलाके में दो कमरे के किराए के मकान में रहने लगा। (पढ़ें पूरी खबर)