2 फरवरी 2015, लखनऊ का शहीद पथ कोहरे में डूबा था। सुबह के करीब 7 बज रहे होंगे। लोग सैर पर निकले थे। इन्हीं में से एक की नजर कुत्तों के झुंड पर गई। कुत्ते एक बोरी को नोच रहे थे। उसमें खून जैसा कुछ लगा था। पता चला, बोरी में इंसान के कटे हुए पैर थे। दोपहर तक कुछ और बॉडी पार्ट्स मिले। ये टुकड़े एक लड़की के थे। पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया। रेप के बाद मर्डर की आशंका थी, लेकिन जांच हुई तो कहानी कुछ और ही निकली। ‘कातिले इश्क’ में आज की कहानी प्यार, शक और धोखे की। राजधानी लखनऊ का गौरी हत्याकांड, जिसने पुलिस की नींद उड़ा दी। सिर्फ एक सुराग के लिए DGP को 50 हजार रुपए इनाम की घोषणा करनी पड़ी… जून 2013, लखनऊ तेलीबाग इलाके के हिमांशु ने फेसबुक पर रोहित के नाम से फेक प्रोफाइल बनाई। एक रात वो अपने कमरे में टहल रहा था। तभी फोन नोटिफिकेशन आया। गौरी ने मैसेज किया था। उसने मैसेज पढ़ा- “हाय रोहित, क्या कर रहे हो?” (आगे स्टोरी में हम हिमांशु को रोहित ही लिखेंगे।) रोहित मुस्कुराया, फिर मैसेज लिखा- “कुछ खास नहीं, तुम बताओ।” गौरी ने टाइप किया- “बस टाइमपास… तुम्हारी पोस्ट काफी इंट्रेस्टिंग लगीं तो सोचा फ्रेंड बना लूं।” रोहित ने तुरंत जवाब दिया- “फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने के बाद मैं यही सोच रहा था कि तुम रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करोगी भी या नहीं।” गौरी की स्माइल फेस इमोजी सेंड की। फिर लिखा- “तुम बहुत सिंपल लगते हो।” रोहित मुस्कुराया- “तुमसे बात करके अच्छा लगा।” गौरी- “मुझे भी।” इसके बाद से ही फेसबुक पर दोनों की लंबी-लंबी चैट्स शुरू हो गईं। देर रात तक बातचीत चलने लगी। एक-दूसरे ने नंबर एक्सचेंज कर लिए, अब वॉट्सऐप पर भी घंटों चैट्स होने लगी। एक दिन रोहित ने पूछा- “गौरी, तुम्हें कभी ऐसा लगा कि हम दोनों के बीच कुछ खास है?” गौरी ने लिखा- “पता नहीं, तुम अच्छे हो। बस इतना कह सकती हूं।” रोहित ने हिम्मत करके लिख दिया- “मुझे तुम पसंद हो।” थोड़ी देर तक कोई जवाब नहीं आया। फिर स्क्रीन चमकी- “देखो रोहित, पसंद तो तुम भी मुझे हो, लेकिन फिलहाल मैं इस बारे में कुछ सोचना नहीं चाहती।” रोहित को लगा शायद वो थोड़ा वक्त मांग रही है। उसने लिखा- “कोई बात नहीं। मैं इंतजार करूंगा।” गौरी ने हार्ट वाली इमोजी भेजी- “यू आर सो क्यूट।” रोहित और गौरी को बातचीत करते करीब डेढ़ साल हो गए थे। इस दौरान दोनों कई बार मिले भी थे। पार्क में घूमते, कॉफी पीते, फिल्म देखने जाते और घंटों एक-दूसरे से बतियाते। फिर भी गौरी ने रोहित की बात का जवाब नहीं दिया था। रोहित अब भी उसे पसंद करता था, बल्कि अब ये पसंद से कुछ ज्यादा था। एक दिन रोहित अपने दोस्त अर्जुन से मिला। अर्जुन ने पूछा- “तुम आजकल फोन में क्यों घुसे रहते हो?” रोहित ने हंसकर कहा- “फेसबुक पर एक लड़की मिली है, गौरी। बड़ी अच्छी लगती है। शायद वो भी मुझे पसंद करती है।” अर्जुन ने आंखें टेढ़ी करके कहा- “वही गौरी जो अक्सर अपनी फोटो अपलोड करती है?” रोहित- “हां, वही।” अर्जुन बोला- “जरा संभलकर भाई, मैंने सुना है कई लड़कों से बात करती है।” रोहित चौंका- “गलत सुना है, वो ऐसी नहीं है।” रोहित ने बात टाल दी। उसे लगा अर्जुन को गलतफहमी हुई है या शायद वो जानबूझकर उसकी और गौरी की दोस्ती खराब करना चाह रहा। फिर उसने अपनी कोचिंग के कुछ लड़कों के मुंह से गौरी का नाम सुना। वो उनसे भी बात कर रही थी। रोहित को लगा शायद वो किसी और गौरी के बारे में बात कर रहे होंगे, लेकिन रोहित के दिमाग में ये बात बैठ गई थी। एक दिन उसने गौरी के सामने बैठकर साफ-साफ बात करने की ठानी। इन दिनों उसका परिवार भी किसी काम से मुंबई गया था। घर में सिर्फ वही था। रोहित ने गौरी को मैसेज किया- “कल मिल सकती हो?” कुछ सेकेंड बाद स्क्रीन चमकी- “हां, पर बात क्या है?” रोहित- “कुछ नहीं बस यूं ही…” 1 फरवरी, 2015 गौरी, रोहित से मिलने जा रही थी। मां ने पूछा- “कहां जा रही हो?” गौरी ने कंधे पर बैग टांगते हुए बोली- “पापा की जैकेट ड्राईक्लीन करानी है। फिर उधर से मंदिर भी जाऊंगी।” मां ने कहा- “जल्दी आ जाना।” गौरी मुस्कुराई और चलते समय रोहित को मैसेज किया- “मैं निकल रही हूं।” रोहित ने मैसेज देखा और बोला- “आज सब साफ हो जाएगा।” करीब 45 मिनट बाद गौरी ने फिर से मैसेज किया- “मॉडल हाउस के पास हूं, तुम कितनी देर में आ रहे हो?“ कुछ देर बाद रोहित बाइक से वहां आ गया। उसने गौरी को बैठाया और चल दिया। सब-कुछ नॉर्मल था। दोनों मॉडल हाउस पार्क में टहलते रहे। फिर रोहित उसे पास के ही इको पार्क ले गया। दोनों हमेशा की तरह हंस-बोल रहे थे। तभी रोहित ने कहा- “मेरा घर यहीं पास में है, चलोगी?” गौरी कुछ ठिठक गई, बोली- “घर… वहां जाकर क्या करेंगे।” रोहित बोला- “अक्षय कुमार की नई मूवी आई है न, बेबी… मेरे पास लैपटॉप में है। अर्जुन बता रहा था, बहुत बढ़िया मूवी है। मेरे घर में भी कोई नहीं है। मस्त मूवी देखेंगे और कुछ चाय-समोसा खाएंगे।” गौरी ने कुछ देर सोचा फिर रोहित के घर जाने को राजी हो गई। दोनों घर पहुंचे, रोहित उसे अपने कमरे में ले गया। उसके लिए पानी लाया और वहीं बैठ गया, बोला- “गौरी दरअसल बात ये है कि मैं तुमसे कुछ पूछना चाहता था, इसलिए तुम्हें यहां लेकर आया।” गौरी को बहुत अजीब लगा, बोली- “ऐसी क्या बात थी जो वहां, नहीं हो सकती थी? तुम मुझे यहां अपने घर लेकर आए?” रोहित की आवाज टूटने लगी- “क्या तुम मेरे अलावा भी… मेरा मतलब दूसरे लड़कों से भी बात करती हो?” गौरी का चेहरा सख्त हो गया। उसने बड़े रूखे अंदाज में पूछा- “क्या मतलब… तुम ये सब क्यों पूछ रहे हो?” रोहित ने कहा- “मैं तुमसे प्यार करता हूं गौरी… सच्चा प्यार।” गौरी फौरन बोल पड़ी- “लेकिन मैंने तो कभी ऐसा नहीं कहा। तुमने खुद ही मान लिया कि मैं भी तुम्हें पसंद करती हूं। ये तुम्हारी गलती है मेरी नहीं…” रोहित खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा था, गुस्सा भी आ रहा था। तेज आवाज में बोला- “तुम्हारी गलती है… तुमने कभी ये भी नहीं कहा कि तुम सिर्फ टाइमपास कर रही हो” गौरी भी तुनककर बोली- “हो कौन तुम… क्यों बताऊं तुम्हें…” ये सुनकर रोहित के तनबदन में आग लग गई। तभी गौरी के फोन पर मैसेज के कई सारे नोटिफिकेशन आए। उसने झटके से गौरी का मोबाइल छीन लिया। गौरी चीख उठी- “रोहित, मेरा फोन वापस दो…” रोहित ने हाथ पीछे करके कहा- “पासवर्ड बताओ।” गौरी ने गुस्से से कहा- “नहीं बताऊंगी, तुम कौन होते हो मेरा फोन चेक करने वाले…” गौरी का एक-एक शब्द रोहित का गुस्सा बढ़ा रहा था। वो चीख पड़ा- “पासवर्ड बताओ, अभी।” गौरी कांप गई। उसने पासवर्ड बता दिया। रोहित ने फोन अनलॉक किया और वॉट्सऐप चेक करने लगा। रोहित गुस्से से कांप रहा था। उसने फोन की स्क्रीन गौरी की तरफ घुमाई- “ये फोटो किसको भेजे हैं? कौन हैं ये लोग?” गौरी तमककर बोली- “फोन वापस करो मेरा…” गौरी ने फोन छीनने की कोशिश में हाथ बढ़ाया ही था कि रोहित ने उसकी गर्दन पकड़ ली। वो गौरी को धक्का देकर पीछे दीवार तक ले गया और दोनों हाथों से उसकी गर्दन दबा दी। गौरी लगातार हाथ पैर-पटक रही थी, लेकिन रोहित गुस्से में जैसे पागल हो गया था। कुछ देर बाद गौरी शांत हो गई। उधर गौरी के देर तक घर ने लौटने से उसकी मां तृप्ति काफी परेशान थीं। गौरी के मोबाइल पर रिंग जा रही थी, लेकिन वो कॉल रिसीव नहीं हो रही थी। शाम 6:18 बजे आखिरकार गौरी का फोन उठा, उधर से एक लड़के की आवाज आई। “हैलो, जी नमस्ते आंटी… मैं रोहित बोल रहा हूं, गौरी का दोस्त। हम लोग इको पार्क आए थे, यहां अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई है, आप आ जाइए।” ये सुनते ही तृप्ति के हाथ-पांव फूल गए। पति शिशिर भी तब-तक घर आ चुके थे। दोनों आलमबाग इलाके में इको पार्क पहुंचे, लेकिन न रोहित वहां मिला और न गौरी। रात के 8 बज चुके थे। गौरी का फोन भी अब स्विच ऑफ हो गया था। मां-बाप का परेशान होना लाजिम था। शिशिर ने तुरंत यूपी पुलिस के डायल 100 पर कॉल की और पूरी बात बताई। अमीनाबाद थाने में गौरी श्रीवास्तव की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हो गई। 2 फरवरी 2015, रायबरेली रोड घने कोहरे के बीच लोग शहीद पथ के किनारे सैर पर निकले थे। इन्हीं में से एक की नजर कुत्तों के झुंड पर गई। कुत्ते एक बोरी को नोच रहे थे। लोगों ने नजदीक जाकर देखा तो पता चला बोरी में इंसान के कटे हुए पैर थे। तुरंत पुलिस को खबर दी गई। पैर मिले हैं तो बाकी बॉडी पार्ट्स भी आस-पास ही फेंके होंगे। पूरा इलाका जैसे छावनी में बदल गया। चप्पे-चप्पे की सर्चिंग हुई, तब जाकर दोपहर में नहर के पास एक बोरी में सिर और धड़ मिला। पास ही एक पॉलिथीन में दोनों हाथ थे। चेहरे पर चोट का कोई निशान नहीं था, शिनाख्त हो गई- गौरी श्रीवास्तव…। पूरे देश में कोहराम मच गया। न्यूज चैनलों ने यूपी सरकार और पुलिस की बखिया उधेड़नी शुरू कर दी। शक जताया गया कि रेप के बाद गौरी को टुकड़ों में काटकर फेंक दिया गया। आरोपी का नाम भी था, लेकिन चेहरा नहीं। घरवाले रो-रोकर अधमरे हो गए थे और पुलिस सबूत की तलाश में। गौरी का मोबाइल बरामद नहीं हुआ था और उसकी कॉल डिटेल रिपोर्ट (CDR) से कुछ खास पता नहीं चला। इसकी वजह थी कि गौरी ने रोहित को एक बार भी कॉल नहीं की थी। दोनों वॉट्सऐप चैट कर रहे थे और इसे ट्रेस नहीं किया जा सकता। रोहित का नंबर भी पुलिस के पास नहीं था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि रेप नहीं हुआ था। फिर भी एक दहलाने वाला तथ्य सामने आया। जब कातिल गौरी के टुकड़े कर रहा था, उस समय वो जिंदा थी। शायद कोमा में चली गई थी, यानी एक जिंदा इंसान को टुकड़ों में काटा गया था। केस और उलझ गया। रेप नहीं हुआ तो मर्डर का मोटिव क्या था? और मर्डर भी इतनी बेरहमी से…। मीडिया ने शासन-प्रशासन की फिर से छीछालेदर शुरू कर दी। देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की पुलिस पर जबरदस्त प्रेशर था। पुलिस को सिर्फ इतना पता कि गौरी की लास्ट लोकेशन ‘तेलीबाग’ थी। सिर्फ इसी एक कड़ी के सहार CCTV फुटेज खंगालने की कवायद शुरू हुई। आखिरकार एक कैमरे में गौरी नजर आई। वो लगातार फोन पर किसी से चैट कर रही थी। फिर बाइक पर एक लड़का आता दिखा। गौरी बाइक पर बैठी और उसके साथ चली गई। काफी अहम कड़ी पुलिस के हाथ लगी थी, लेकिन चुनौती अभी भी कम नहीं थी। फुटेज की क्वालिटी इतनी खराब थी कि बाइक का नंबर नजर ही नहीं आ रहा था। लड़के का चेहरा हेलमेट से ढंका था। जांच फिर फंस गई, लिहाजा यूपी पुलिस के मुखिया एके जैन (तब के DGP) ने हेलमेट वाले लड़के का सुराग देने पर 50 हजार रुपए इनाम की घोषणा की। फिर भी बात नहीं बनी। पुलिस ने खुद ग्राउंड पर उतरकर सर्चिंग शुरू की। RTO (रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस) से पता किया गया कि तेलीबाग इलाके में उस मॉडल की कितनी बाइक रजिस्टर्ड हैं। एक-एक गली-मोहल्ला छान मारा। एक घर के लॉन में उसी मॉडल की बाइक नजर आई। दरवाजा खटखटाया तो एक लड़का बाहर आया। सिपाही ने नाम पूछा, जवाब मिला- “हिमांशु प्रजापति…” पुलिस फिर खाली हाथ। थाने लौटकर एक बार फिर CCTV फुटेज चेक किया गया। एक सिपाही बोला- “CCTV में बाइकवाला जो हेलमेट पहने दिख रहा है, वैसा ही वहां उस लड़के की अलमारी पर रखा था।” 7 फरवरी की दोपहर पुलिसवाले फिर से उसी लड़के हिमांशु के घर पहुंची। लड़का घर पर ही था। दोबारा पुलिस को देखकर हिमांशु घबरा गया। हिमांशु- “आप लोग फिर से… क्या हुआ सर?” सिपाही- “ये बाइक तुम्हारी है?” हिमांशु हां में सिर हिलाता है। दूसरे सिपाही ने पूछा- “गौरी श्रीवास्तव को जानते हो?” हिमांशु ने ना में सिर हिलाया, लेकिन उसकी घबराहट बढ़ गई थी। “1 फरवरी को कहां थे?” “यहीं अपने घर पर…।” पुलिस का शक गहराता जा रहा था। तभी एक सिपाही की नजर हिमांशु के मोबाइल पर गई। स्क्रीन के वॉलपेपर में गौरी की तस्वीर थी। इसके बाद पुलिस को यकीन हो गया कि लड़के का गौरी से कुछ तो कनेक्शन है। घर की तलाशी ली गई, तो एक मोबाइल बरामद हुआ। मॉडल वही था, जो रिपोर्ट में गौरी के घरवालों ने लिखवाया था। स्विच ऑन हुआ तो फोन गौरी का ही निकला। लकड़ी काटने की आरी भी घर में मिली। थाने लाकर हिमांशु से पूछताछ शुरू हुई। सारे सबूत उसके खिलाफ थे। हिमांशु ने मुंह खोला- “डेढ़ साल पहले फेसबुक पर दोस्ती हुई थी। वहीं से बातें शुरू हो गईं। कभी-कभार मिलते भी थे। मैं उससे प्यार करने लगा था, लेकिन वो कई लड़कों से बात करती थी।” दरोगा चिल्लाया- “इसीलिए मार दिया उसे…” “जी” दरोगा- “पूरी बात बताओ।” हिमांशु आगे बताने लगा- “मेरे घरवाले रिश्तेदार की शादी में मुंबई गए थे। घर खाली था। मैंने गौरी को बहाने से बुला लिया। पहले पार्क घूमे, फिर मैं उसे घर ले आया। थोड़ी देर बात की फिर उसके फोन पर लगातार मैसेज आने लगे। हिमांशु ने सांस ली और फिर बोलना शुरू किया- “मैंने उसका मोबाइल मांगा तो उसने मना कर दिया। हमारी बहस होने लगी, फिर उसने फोन दे दिया। उसके चैट में कई सारे लड़कों के नंबर थे। कुछ लड़कों को उसने अपने फोटोज भी भेजे थे। गुस्से में मैंने उसका गला दबा दिया।” कुछ देर चुप रहने के बाद हिमांशु फिर बोला- “मैं उसे प्यार करता था, मारना नहीं चाहता था। गुस्से में मुझसे ये सब हो गया। लाश ठिकाने लगाने के लिए बाजार से आरी और बोरियां खरीद लाया। मैंने शराब भी पी। इसके बाद घर आकर लाश के टुकड़े कर दिए।” थोड़ा सोचकर बोला- “सबसे पहले हाथ काटे तो काफी खून बहने लगा। खून नाली से बाहर न जाए, इसलिए गौरी के कपड़े उतारकर नाली पर लगा दिए। फिर पैर काटने लगा। जांघ के पास लगातार कई वार किए। मांस हड्डी से अलग हो गई। इसके बाद गर्दन काटी। सारे टुकड़े बोरी में भरे और बाइक से ही शहीद पथ के किनारे अलग-अलग जगह फेंक आया।” हिमांशु ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था, लेकिन एक सवाल अभी भी था। अगर हिमांशु ने गौरी को मारा तो रोहित कौन था? पुलिस ने सवाल किया तो पता चला हिमांशु ने फेसबुक पर रोहित के नाम से प्रोफाइल बना रखी थी। गौरी भी उसे इसी नाम से जानती थी। उसके मोबाइल में भी हिमांशु का नंबर रोहित के नाम से सेव था। हाई प्रोफाइल गौरी मर्डर केस खुल चुका था। यूपी पुलिस के DGP एके जैन ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके हिमांशु प्रजापति को मीडिया के सामने रखा। हिमांशु के साथ उसका एक दोस्त अनुज गौतम भी पकड़ा गया था। पुलिस ने उसे भी आरोपी बनाया था लेकिन दो महीने की छानबीन के बाद भी अनुज के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले लिहाजा कोर्ट में IPC 169 की रिपोर्ट दाखिल करके उसे बरी कर दिया गया। गिरफ्तारी के 9 साल बाद जून, 2024 में हिमांशु प्रजापति को जमानत मिल गई। मामला कोर्ट में अभी चल रहा है। उम्मीद है जल्द ही उसे अपने गुनाह की सजा मिलेगी। *** स्टोरी एडिट- कृष्ण गोपाल *** रेफरेंस जर्नलिस्ट- गोविंद पंत राजू, आनंद राय, यासिर रजा भास्कर टीम ने सीनियर जर्नलिस्ट्स, पुलिस, पीड़ितों और जानकारों से बात करने के बाद सभी कड़ियों को जोड़कर ये स्टोरी लिखी है। कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी ली गई है। ———————————————————- सीरीज की ये स्टोरीज भी पढ़ें… बॉयफ्रेंड के साथ खुद की मौत का नाटक रचा: सोनभद्र से लड़की लाए, मारकर लाश जंगल में फेंकी; एक फोन कॉल से खुला राज दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज की स्टूडेंट शिखा दुबे देर रात तक घर नहीं लौटी। घरवालों की बेचैनी बढ़ी तो थाने जाकर रिपोर्ट लिखाई। अगले दिन एक लाश मिली। परिवारवालों ने अंतिम संस्कार कर दिया। जांच आगे बढ़ी तो जो सामने आया वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। शिखा जिंदा थी। पूरी स्टोरी पढ़ें… मुस्लिम बॉयफ्रेंड के लिए मां-बाप समेत 5 को मारा; 2 बच्चों के पिता शानू से लव मैरिज की, एक गलती से पकड़ी गई 26 अगस्त 2016, वेस्ट यूपी में बुलंदशहर का नरौरा कस्बा। सुबह करीब 7 बजे नहर के पास से गुजर रहे आदमी की नजर अचानक ठिठक गई। नेवी ब्लू रंग की ईको कार पानी में तैरती दिखी। पुलिस आई, कार पानी से निकाली गई। पिछली सीट पर तीन लाशें थीं। पूरी स्टोरी पढ़ें…
2 फरवरी 2015, लखनऊ का शहीद पथ कोहरे में डूबा था। सुबह के करीब 7 बज रहे होंगे। लोग सैर पर निकले थे। इन्हीं में से एक की नजर कुत्तों के झुंड पर गई। कुत्ते एक बोरी को नोच रहे थे। उसमें खून जैसा कुछ लगा था। पता चला, बोरी में इंसान के कटे हुए पैर थे। दोपहर तक कुछ और बॉडी पार्ट्स मिले। ये टुकड़े एक लड़की के थे। पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया। रेप के बाद मर्डर की आशंका थी, लेकिन जांच हुई तो कहानी कुछ और ही निकली। ‘कातिले इश्क’ में आज की कहानी प्यार, शक और धोखे की। राजधानी लखनऊ का गौरी हत्याकांड, जिसने पुलिस की नींद उड़ा दी। सिर्फ एक सुराग के लिए DGP को 50 हजार रुपए इनाम की घोषणा करनी पड़ी… जून 2013, लखनऊ तेलीबाग इलाके के हिमांशु ने फेसबुक पर रोहित के नाम से फेक प्रोफाइल बनाई। एक रात वो अपने कमरे में टहल रहा था। तभी फोन नोटिफिकेशन आया। गौरी ने मैसेज किया था। उसने मैसेज पढ़ा- “हाय रोहित, क्या कर रहे हो?” (आगे स्टोरी में हम हिमांशु को रोहित ही लिखेंगे।) रोहित मुस्कुराया, फिर मैसेज लिखा- “कुछ खास नहीं, तुम बताओ।” गौरी ने टाइप किया- “बस टाइमपास… तुम्हारी पोस्ट काफी इंट्रेस्टिंग लगीं तो सोचा फ्रेंड बना लूं।” रोहित ने तुरंत जवाब दिया- “फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने के बाद मैं यही सोच रहा था कि तुम रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करोगी भी या नहीं।” गौरी की स्माइल फेस इमोजी सेंड की। फिर लिखा- “तुम बहुत सिंपल लगते हो।” रोहित मुस्कुराया- “तुमसे बात करके अच्छा लगा।” गौरी- “मुझे भी।” इसके बाद से ही फेसबुक पर दोनों की लंबी-लंबी चैट्स शुरू हो गईं। देर रात तक बातचीत चलने लगी। एक-दूसरे ने नंबर एक्सचेंज कर लिए, अब वॉट्सऐप पर भी घंटों चैट्स होने लगी। एक दिन रोहित ने पूछा- “गौरी, तुम्हें कभी ऐसा लगा कि हम दोनों के बीच कुछ खास है?” गौरी ने लिखा- “पता नहीं, तुम अच्छे हो। बस इतना कह सकती हूं।” रोहित ने हिम्मत करके लिख दिया- “मुझे तुम पसंद हो।” थोड़ी देर तक कोई जवाब नहीं आया। फिर स्क्रीन चमकी- “देखो रोहित, पसंद तो तुम भी मुझे हो, लेकिन फिलहाल मैं इस बारे में कुछ सोचना नहीं चाहती।” रोहित को लगा शायद वो थोड़ा वक्त मांग रही है। उसने लिखा- “कोई बात नहीं। मैं इंतजार करूंगा।” गौरी ने हार्ट वाली इमोजी भेजी- “यू आर सो क्यूट।” रोहित और गौरी को बातचीत करते करीब डेढ़ साल हो गए थे। इस दौरान दोनों कई बार मिले भी थे। पार्क में घूमते, कॉफी पीते, फिल्म देखने जाते और घंटों एक-दूसरे से बतियाते। फिर भी गौरी ने रोहित की बात का जवाब नहीं दिया था। रोहित अब भी उसे पसंद करता था, बल्कि अब ये पसंद से कुछ ज्यादा था। एक दिन रोहित अपने दोस्त अर्जुन से मिला। अर्जुन ने पूछा- “तुम आजकल फोन में क्यों घुसे रहते हो?” रोहित ने हंसकर कहा- “फेसबुक पर एक लड़की मिली है, गौरी। बड़ी अच्छी लगती है। शायद वो भी मुझे पसंद करती है।” अर्जुन ने आंखें टेढ़ी करके कहा- “वही गौरी जो अक्सर अपनी फोटो अपलोड करती है?” रोहित- “हां, वही।” अर्जुन बोला- “जरा संभलकर भाई, मैंने सुना है कई लड़कों से बात करती है।” रोहित चौंका- “गलत सुना है, वो ऐसी नहीं है।” रोहित ने बात टाल दी। उसे लगा अर्जुन को गलतफहमी हुई है या शायद वो जानबूझकर उसकी और गौरी की दोस्ती खराब करना चाह रहा। फिर उसने अपनी कोचिंग के कुछ लड़कों के मुंह से गौरी का नाम सुना। वो उनसे भी बात कर रही थी। रोहित को लगा शायद वो किसी और गौरी के बारे में बात कर रहे होंगे, लेकिन रोहित के दिमाग में ये बात बैठ गई थी। एक दिन उसने गौरी के सामने बैठकर साफ-साफ बात करने की ठानी। इन दिनों उसका परिवार भी किसी काम से मुंबई गया था। घर में सिर्फ वही था। रोहित ने गौरी को मैसेज किया- “कल मिल सकती हो?” कुछ सेकेंड बाद स्क्रीन चमकी- “हां, पर बात क्या है?” रोहित- “कुछ नहीं बस यूं ही…” 1 फरवरी, 2015 गौरी, रोहित से मिलने जा रही थी। मां ने पूछा- “कहां जा रही हो?” गौरी ने कंधे पर बैग टांगते हुए बोली- “पापा की जैकेट ड्राईक्लीन करानी है। फिर उधर से मंदिर भी जाऊंगी।” मां ने कहा- “जल्दी आ जाना।” गौरी मुस्कुराई और चलते समय रोहित को मैसेज किया- “मैं निकल रही हूं।” रोहित ने मैसेज देखा और बोला- “आज सब साफ हो जाएगा।” करीब 45 मिनट बाद गौरी ने फिर से मैसेज किया- “मॉडल हाउस के पास हूं, तुम कितनी देर में आ रहे हो?“ कुछ देर बाद रोहित बाइक से वहां आ गया। उसने गौरी को बैठाया और चल दिया। सब-कुछ नॉर्मल था। दोनों मॉडल हाउस पार्क में टहलते रहे। फिर रोहित उसे पास के ही इको पार्क ले गया। दोनों हमेशा की तरह हंस-बोल रहे थे। तभी रोहित ने कहा- “मेरा घर यहीं पास में है, चलोगी?” गौरी कुछ ठिठक गई, बोली- “घर… वहां जाकर क्या करेंगे।” रोहित बोला- “अक्षय कुमार की नई मूवी आई है न, बेबी… मेरे पास लैपटॉप में है। अर्जुन बता रहा था, बहुत बढ़िया मूवी है। मेरे घर में भी कोई नहीं है। मस्त मूवी देखेंगे और कुछ चाय-समोसा खाएंगे।” गौरी ने कुछ देर सोचा फिर रोहित के घर जाने को राजी हो गई। दोनों घर पहुंचे, रोहित उसे अपने कमरे में ले गया। उसके लिए पानी लाया और वहीं बैठ गया, बोला- “गौरी दरअसल बात ये है कि मैं तुमसे कुछ पूछना चाहता था, इसलिए तुम्हें यहां लेकर आया।” गौरी को बहुत अजीब लगा, बोली- “ऐसी क्या बात थी जो वहां, नहीं हो सकती थी? तुम मुझे यहां अपने घर लेकर आए?” रोहित की आवाज टूटने लगी- “क्या तुम मेरे अलावा भी… मेरा मतलब दूसरे लड़कों से भी बात करती हो?” गौरी का चेहरा सख्त हो गया। उसने बड़े रूखे अंदाज में पूछा- “क्या मतलब… तुम ये सब क्यों पूछ रहे हो?” रोहित ने कहा- “मैं तुमसे प्यार करता हूं गौरी… सच्चा प्यार।” गौरी फौरन बोल पड़ी- “लेकिन मैंने तो कभी ऐसा नहीं कहा। तुमने खुद ही मान लिया कि मैं भी तुम्हें पसंद करती हूं। ये तुम्हारी गलती है मेरी नहीं…” रोहित खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा था, गुस्सा भी आ रहा था। तेज आवाज में बोला- “तुम्हारी गलती है… तुमने कभी ये भी नहीं कहा कि तुम सिर्फ टाइमपास कर रही हो” गौरी भी तुनककर बोली- “हो कौन तुम… क्यों बताऊं तुम्हें…” ये सुनकर रोहित के तनबदन में आग लग गई। तभी गौरी के फोन पर मैसेज के कई सारे नोटिफिकेशन आए। उसने झटके से गौरी का मोबाइल छीन लिया। गौरी चीख उठी- “रोहित, मेरा फोन वापस दो…” रोहित ने हाथ पीछे करके कहा- “पासवर्ड बताओ।” गौरी ने गुस्से से कहा- “नहीं बताऊंगी, तुम कौन होते हो मेरा फोन चेक करने वाले…” गौरी का एक-एक शब्द रोहित का गुस्सा बढ़ा रहा था। वो चीख पड़ा- “पासवर्ड बताओ, अभी।” गौरी कांप गई। उसने पासवर्ड बता दिया। रोहित ने फोन अनलॉक किया और वॉट्सऐप चेक करने लगा। रोहित गुस्से से कांप रहा था। उसने फोन की स्क्रीन गौरी की तरफ घुमाई- “ये फोटो किसको भेजे हैं? कौन हैं ये लोग?” गौरी तमककर बोली- “फोन वापस करो मेरा…” गौरी ने फोन छीनने की कोशिश में हाथ बढ़ाया ही था कि रोहित ने उसकी गर्दन पकड़ ली। वो गौरी को धक्का देकर पीछे दीवार तक ले गया और दोनों हाथों से उसकी गर्दन दबा दी। गौरी लगातार हाथ पैर-पटक रही थी, लेकिन रोहित गुस्से में जैसे पागल हो गया था। कुछ देर बाद गौरी शांत हो गई। उधर गौरी के देर तक घर ने लौटने से उसकी मां तृप्ति काफी परेशान थीं। गौरी के मोबाइल पर रिंग जा रही थी, लेकिन वो कॉल रिसीव नहीं हो रही थी। शाम 6:18 बजे आखिरकार गौरी का फोन उठा, उधर से एक लड़के की आवाज आई। “हैलो, जी नमस्ते आंटी… मैं रोहित बोल रहा हूं, गौरी का दोस्त। हम लोग इको पार्क आए थे, यहां अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई है, आप आ जाइए।” ये सुनते ही तृप्ति के हाथ-पांव फूल गए। पति शिशिर भी तब-तक घर आ चुके थे। दोनों आलमबाग इलाके में इको पार्क पहुंचे, लेकिन न रोहित वहां मिला और न गौरी। रात के 8 बज चुके थे। गौरी का फोन भी अब स्विच ऑफ हो गया था। मां-बाप का परेशान होना लाजिम था। शिशिर ने तुरंत यूपी पुलिस के डायल 100 पर कॉल की और पूरी बात बताई। अमीनाबाद थाने में गौरी श्रीवास्तव की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हो गई। 2 फरवरी 2015, रायबरेली रोड घने कोहरे के बीच लोग शहीद पथ के किनारे सैर पर निकले थे। इन्हीं में से एक की नजर कुत्तों के झुंड पर गई। कुत्ते एक बोरी को नोच रहे थे। लोगों ने नजदीक जाकर देखा तो पता चला बोरी में इंसान के कटे हुए पैर थे। तुरंत पुलिस को खबर दी गई। पैर मिले हैं तो बाकी बॉडी पार्ट्स भी आस-पास ही फेंके होंगे। पूरा इलाका जैसे छावनी में बदल गया। चप्पे-चप्पे की सर्चिंग हुई, तब जाकर दोपहर में नहर के पास एक बोरी में सिर और धड़ मिला। पास ही एक पॉलिथीन में दोनों हाथ थे। चेहरे पर चोट का कोई निशान नहीं था, शिनाख्त हो गई- गौरी श्रीवास्तव…। पूरे देश में कोहराम मच गया। न्यूज चैनलों ने यूपी सरकार और पुलिस की बखिया उधेड़नी शुरू कर दी। शक जताया गया कि रेप के बाद गौरी को टुकड़ों में काटकर फेंक दिया गया। आरोपी का नाम भी था, लेकिन चेहरा नहीं। घरवाले रो-रोकर अधमरे हो गए थे और पुलिस सबूत की तलाश में। गौरी का मोबाइल बरामद नहीं हुआ था और उसकी कॉल डिटेल रिपोर्ट (CDR) से कुछ खास पता नहीं चला। इसकी वजह थी कि गौरी ने रोहित को एक बार भी कॉल नहीं की थी। दोनों वॉट्सऐप चैट कर रहे थे और इसे ट्रेस नहीं किया जा सकता। रोहित का नंबर भी पुलिस के पास नहीं था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि रेप नहीं हुआ था। फिर भी एक दहलाने वाला तथ्य सामने आया। जब कातिल गौरी के टुकड़े कर रहा था, उस समय वो जिंदा थी। शायद कोमा में चली गई थी, यानी एक जिंदा इंसान को टुकड़ों में काटा गया था। केस और उलझ गया। रेप नहीं हुआ तो मर्डर का मोटिव क्या था? और मर्डर भी इतनी बेरहमी से…। मीडिया ने शासन-प्रशासन की फिर से छीछालेदर शुरू कर दी। देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की पुलिस पर जबरदस्त प्रेशर था। पुलिस को सिर्फ इतना पता कि गौरी की लास्ट लोकेशन ‘तेलीबाग’ थी। सिर्फ इसी एक कड़ी के सहार CCTV फुटेज खंगालने की कवायद शुरू हुई। आखिरकार एक कैमरे में गौरी नजर आई। वो लगातार फोन पर किसी से चैट कर रही थी। फिर बाइक पर एक लड़का आता दिखा। गौरी बाइक पर बैठी और उसके साथ चली गई। काफी अहम कड़ी पुलिस के हाथ लगी थी, लेकिन चुनौती अभी भी कम नहीं थी। फुटेज की क्वालिटी इतनी खराब थी कि बाइक का नंबर नजर ही नहीं आ रहा था। लड़के का चेहरा हेलमेट से ढंका था। जांच फिर फंस गई, लिहाजा यूपी पुलिस के मुखिया एके जैन (तब के DGP) ने हेलमेट वाले लड़के का सुराग देने पर 50 हजार रुपए इनाम की घोषणा की। फिर भी बात नहीं बनी। पुलिस ने खुद ग्राउंड पर उतरकर सर्चिंग शुरू की। RTO (रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस) से पता किया गया कि तेलीबाग इलाके में उस मॉडल की कितनी बाइक रजिस्टर्ड हैं। एक-एक गली-मोहल्ला छान मारा। एक घर के लॉन में उसी मॉडल की बाइक नजर आई। दरवाजा खटखटाया तो एक लड़का बाहर आया। सिपाही ने नाम पूछा, जवाब मिला- “हिमांशु प्रजापति…” पुलिस फिर खाली हाथ। थाने लौटकर एक बार फिर CCTV फुटेज चेक किया गया। एक सिपाही बोला- “CCTV में बाइकवाला जो हेलमेट पहने दिख रहा है, वैसा ही वहां उस लड़के की अलमारी पर रखा था।” 7 फरवरी की दोपहर पुलिसवाले फिर से उसी लड़के हिमांशु के घर पहुंची। लड़का घर पर ही था। दोबारा पुलिस को देखकर हिमांशु घबरा गया। हिमांशु- “आप लोग फिर से… क्या हुआ सर?” सिपाही- “ये बाइक तुम्हारी है?” हिमांशु हां में सिर हिलाता है। दूसरे सिपाही ने पूछा- “गौरी श्रीवास्तव को जानते हो?” हिमांशु ने ना में सिर हिलाया, लेकिन उसकी घबराहट बढ़ गई थी। “1 फरवरी को कहां थे?” “यहीं अपने घर पर…।” पुलिस का शक गहराता जा रहा था। तभी एक सिपाही की नजर हिमांशु के मोबाइल पर गई। स्क्रीन के वॉलपेपर में गौरी की तस्वीर थी। इसके बाद पुलिस को यकीन हो गया कि लड़के का गौरी से कुछ तो कनेक्शन है। घर की तलाशी ली गई, तो एक मोबाइल बरामद हुआ। मॉडल वही था, जो रिपोर्ट में गौरी के घरवालों ने लिखवाया था। स्विच ऑन हुआ तो फोन गौरी का ही निकला। लकड़ी काटने की आरी भी घर में मिली। थाने लाकर हिमांशु से पूछताछ शुरू हुई। सारे सबूत उसके खिलाफ थे। हिमांशु ने मुंह खोला- “डेढ़ साल पहले फेसबुक पर दोस्ती हुई थी। वहीं से बातें शुरू हो गईं। कभी-कभार मिलते भी थे। मैं उससे प्यार करने लगा था, लेकिन वो कई लड़कों से बात करती थी।” दरोगा चिल्लाया- “इसीलिए मार दिया उसे…” “जी” दरोगा- “पूरी बात बताओ।” हिमांशु आगे बताने लगा- “मेरे घरवाले रिश्तेदार की शादी में मुंबई गए थे। घर खाली था। मैंने गौरी को बहाने से बुला लिया। पहले पार्क घूमे, फिर मैं उसे घर ले आया। थोड़ी देर बात की फिर उसके फोन पर लगातार मैसेज आने लगे। हिमांशु ने सांस ली और फिर बोलना शुरू किया- “मैंने उसका मोबाइल मांगा तो उसने मना कर दिया। हमारी बहस होने लगी, फिर उसने फोन दे दिया। उसके चैट में कई सारे लड़कों के नंबर थे। कुछ लड़कों को उसने अपने फोटोज भी भेजे थे। गुस्से में मैंने उसका गला दबा दिया।” कुछ देर चुप रहने के बाद हिमांशु फिर बोला- “मैं उसे प्यार करता था, मारना नहीं चाहता था। गुस्से में मुझसे ये सब हो गया। लाश ठिकाने लगाने के लिए बाजार से आरी और बोरियां खरीद लाया। मैंने शराब भी पी। इसके बाद घर आकर लाश के टुकड़े कर दिए।” थोड़ा सोचकर बोला- “सबसे पहले हाथ काटे तो काफी खून बहने लगा। खून नाली से बाहर न जाए, इसलिए गौरी के कपड़े उतारकर नाली पर लगा दिए। फिर पैर काटने लगा। जांघ के पास लगातार कई वार किए। मांस हड्डी से अलग हो गई। इसके बाद गर्दन काटी। सारे टुकड़े बोरी में भरे और बाइक से ही शहीद पथ के किनारे अलग-अलग जगह फेंक आया।” हिमांशु ने अपना गुनाह कबूल कर लिया था, लेकिन एक सवाल अभी भी था। अगर हिमांशु ने गौरी को मारा तो रोहित कौन था? पुलिस ने सवाल किया तो पता चला हिमांशु ने फेसबुक पर रोहित के नाम से प्रोफाइल बना रखी थी। गौरी भी उसे इसी नाम से जानती थी। उसके मोबाइल में भी हिमांशु का नंबर रोहित के नाम से सेव था। हाई प्रोफाइल गौरी मर्डर केस खुल चुका था। यूपी पुलिस के DGP एके जैन ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके हिमांशु प्रजापति को मीडिया के सामने रखा। हिमांशु के साथ उसका एक दोस्त अनुज गौतम भी पकड़ा गया था। पुलिस ने उसे भी आरोपी बनाया था लेकिन दो महीने की छानबीन के बाद भी अनुज के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले लिहाजा कोर्ट में IPC 169 की रिपोर्ट दाखिल करके उसे बरी कर दिया गया। गिरफ्तारी के 9 साल बाद जून, 2024 में हिमांशु प्रजापति को जमानत मिल गई। मामला कोर्ट में अभी चल रहा है। उम्मीद है जल्द ही उसे अपने गुनाह की सजा मिलेगी। *** स्टोरी एडिट- कृष्ण गोपाल *** रेफरेंस जर्नलिस्ट- गोविंद पंत राजू, आनंद राय, यासिर रजा भास्कर टीम ने सीनियर जर्नलिस्ट्स, पुलिस, पीड़ितों और जानकारों से बात करने के बाद सभी कड़ियों को जोड़कर ये स्टोरी लिखी है। कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी ली गई है। ———————————————————- सीरीज की ये स्टोरीज भी पढ़ें… बॉयफ्रेंड के साथ खुद की मौत का नाटक रचा: सोनभद्र से लड़की लाए, मारकर लाश जंगल में फेंकी; एक फोन कॉल से खुला राज दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज की स्टूडेंट शिखा दुबे देर रात तक घर नहीं लौटी। घरवालों की बेचैनी बढ़ी तो थाने जाकर रिपोर्ट लिखाई। अगले दिन एक लाश मिली। परिवारवालों ने अंतिम संस्कार कर दिया। जांच आगे बढ़ी तो जो सामने आया वो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। शिखा जिंदा थी। पूरी स्टोरी पढ़ें… मुस्लिम बॉयफ्रेंड के लिए मां-बाप समेत 5 को मारा; 2 बच्चों के पिता शानू से लव मैरिज की, एक गलती से पकड़ी गई 26 अगस्त 2016, वेस्ट यूपी में बुलंदशहर का नरौरा कस्बा। सुबह करीब 7 बजे नहर के पास से गुजर रहे आदमी की नजर अचानक ठिठक गई। नेवी ब्लू रंग की ईको कार पानी में तैरती दिखी। पुलिस आई, कार पानी से निकाली गई। पिछली सीट पर तीन लाशें थीं। पूरी स्टोरी पढ़ें…