तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के प्रसाद में मिलावट मामले में शनिवार को नया खुलासा हुआ। स्पेशल इन्वेस्टिगेंशन टीम (SIT) ने बताया कि TTD ट्रस्ट बोर्ड के चेयरमैन बीआर नायडू ने कबूला है कि साल 2019 से 2024 के बीच 48.76 करोड़ लड्डू बनाए गए। इनमें 20 करोड़ लड्डू मिलावटी घी से बनाए गए थे। TTD के मुताबिक यह अनुमान रोजाना दर्शनार्थियों की संख्या, खरीद के रिकॉर्ड, बनाने और सप्लाई के आंकड़ों को मिलाकर निकाला गया है। SIT ने चेयरमैन बीआर नायडू से आज करीब आठ घंटे पूछताछ की। पहले पूरे मामले को समझिए
2022 में लड्डू प्रसादम में इस्तेमाल होने वाले घी में मिलावट की कई शिकायतें मिली थीं। इसके बाद SIT ने जांच की थी। इसके बाद TTD ने उत्तराखंड की भोलेबाबा डेयरी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके बावजूद डेयरी मालिकों ने दूसरी डेयरी फर्मों के नाम पर टेंडर हासिल किए और घी की सप्लाई जारी रखी। इनमें वैष्णवी डेयरी (तिरुपति), माल गंगा डेयरी (उत्तर प्रदेश) और AR डेयरी फूड्स (तमिलनाडु) शामिल हैं। ये सब सुब्बा रेड्डी के चेयरमैन रहते हुए हुआ। SIT की पूछताछ और अगला कदम SIT ने पूर्व TTD चेयरमैन सुब्बा रेड्डी से यह पूछा कि लैब रिपोर्ट में मिलावट सामने आने के बाद भी घी के टैंकर क्यों मंजूर किए गए। रेड्डी का कहना है कि उन्हें रिपोर्ट कभी दिखाई ही नहीं गई, और खरीद तकनीकी समिति की सिफारिश पर हुई थी। उनके पूर्व सहायक चिन्ना अप्पन्ना पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। SIT ने TTD के पूर्व EO ए.वी. धर्मा रेड्डी से भी पूछताछ की है। एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट नेल्लोर कोर्ट में जमा कर दी है और 15 दिसंबर तक सप्लीमेंटरी चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है। जानिए क्या है तिरुपति लड्डू का इतिहास तिरुमाला मंदिर में रोजाना 3.5 लाख से ज्यादा भक्तों को लड्डू प्रसाद दिया जाता है। यह परंपरा 1715 से, यानी 300 से अधिक सालों से चली आ रही है। प्रसाद मंदिर की रसोई पोट्टु में तैयार होता है, जहां पारंपरिक समुदाय के कारीगर पीढ़ियों से इसे बनाने की कला को आगे बढ़ा रहे हैं। लड्डू को भक्तों को देने से पहले सबसे पहले भगवान वेंकटेश्वर को अर्पित किया जाता है। लड्डू बनाने के प्रोसेस को दित्तम कहते हैं लड्डू बनाने की प्रोसेस को दित्तम कहा जाता है। इसमें कौन सी चीज कितनी मात्रा में डालनी है इसका बहुत सख्ती से पालन किया जाता है। इतने लंबे समय में लड्डू की रेसिपी में सिर्फ छह बार ही बदलाव किए गए हैं। पहले लड्डू बेसन और गुड़ की चाशनी से बनते थे, ताकि वे ज्यादा समय तक ठीक रहें। बाद में स्वाद और पौष्टिकता बढ़ाने के लिए इसमें बादाम, काजू और किशमिश भी मिलाना शुरू किया गया। —— तिरूपति लड्डू घोटाला से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… तिरुपति लड्डू विवाद:उत्तराखंड की कंपनी ने 68 लाख किलो मिलावटी घी-मक्खन सप्लाई किया, ₹250 करोड़ कमाए तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) में मिलावटी प्रसाद मामले में नया खुलासा हुआ है। मंदिर में घी सप्लाई करने वाली उत्तराखंड की डेयरी ने 2019 से 2024 के बीच ₹250 करोड़ कीमत का 68 लाख किलो मिलावटी घी सप्लाई किया था।पूरी खबर पढ़ें
तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के प्रसाद में मिलावट मामले में शनिवार को नया खुलासा हुआ। स्पेशल इन्वेस्टिगेंशन टीम (SIT) ने बताया कि TTD ट्रस्ट बोर्ड के चेयरमैन बीआर नायडू ने कबूला है कि साल 2019 से 2024 के बीच 48.76 करोड़ लड्डू बनाए गए। इनमें 20 करोड़ लड्डू मिलावटी घी से बनाए गए थे। TTD के मुताबिक यह अनुमान रोजाना दर्शनार्थियों की संख्या, खरीद के रिकॉर्ड, बनाने और सप्लाई के आंकड़ों को मिलाकर निकाला गया है। SIT ने चेयरमैन बीआर नायडू से आज करीब आठ घंटे पूछताछ की। पहले पूरे मामले को समझिए
2022 में लड्डू प्रसादम में इस्तेमाल होने वाले घी में मिलावट की कई शिकायतें मिली थीं। इसके बाद SIT ने जांच की थी। इसके बाद TTD ने उत्तराखंड की भोलेबाबा डेयरी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके बावजूद डेयरी मालिकों ने दूसरी डेयरी फर्मों के नाम पर टेंडर हासिल किए और घी की सप्लाई जारी रखी। इनमें वैष्णवी डेयरी (तिरुपति), माल गंगा डेयरी (उत्तर प्रदेश) और AR डेयरी फूड्स (तमिलनाडु) शामिल हैं। ये सब सुब्बा रेड्डी के चेयरमैन रहते हुए हुआ। SIT की पूछताछ और अगला कदम SIT ने पूर्व TTD चेयरमैन सुब्बा रेड्डी से यह पूछा कि लैब रिपोर्ट में मिलावट सामने आने के बाद भी घी के टैंकर क्यों मंजूर किए गए। रेड्डी का कहना है कि उन्हें रिपोर्ट कभी दिखाई ही नहीं गई, और खरीद तकनीकी समिति की सिफारिश पर हुई थी। उनके पूर्व सहायक चिन्ना अप्पन्ना पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। SIT ने TTD के पूर्व EO ए.वी. धर्मा रेड्डी से भी पूछताछ की है। एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट नेल्लोर कोर्ट में जमा कर दी है और 15 दिसंबर तक सप्लीमेंटरी चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है। जानिए क्या है तिरुपति लड्डू का इतिहास तिरुमाला मंदिर में रोजाना 3.5 लाख से ज्यादा भक्तों को लड्डू प्रसाद दिया जाता है। यह परंपरा 1715 से, यानी 300 से अधिक सालों से चली आ रही है। प्रसाद मंदिर की रसोई पोट्टु में तैयार होता है, जहां पारंपरिक समुदाय के कारीगर पीढ़ियों से इसे बनाने की कला को आगे बढ़ा रहे हैं। लड्डू को भक्तों को देने से पहले सबसे पहले भगवान वेंकटेश्वर को अर्पित किया जाता है। लड्डू बनाने के प्रोसेस को दित्तम कहते हैं लड्डू बनाने की प्रोसेस को दित्तम कहा जाता है। इसमें कौन सी चीज कितनी मात्रा में डालनी है इसका बहुत सख्ती से पालन किया जाता है। इतने लंबे समय में लड्डू की रेसिपी में सिर्फ छह बार ही बदलाव किए गए हैं। पहले लड्डू बेसन और गुड़ की चाशनी से बनते थे, ताकि वे ज्यादा समय तक ठीक रहें। बाद में स्वाद और पौष्टिकता बढ़ाने के लिए इसमें बादाम, काजू और किशमिश भी मिलाना शुरू किया गया। —— तिरूपति लड्डू घोटाला से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… तिरुपति लड्डू विवाद:उत्तराखंड की कंपनी ने 68 लाख किलो मिलावटी घी-मक्खन सप्लाई किया, ₹250 करोड़ कमाए तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) में मिलावटी प्रसाद मामले में नया खुलासा हुआ है। मंदिर में घी सप्लाई करने वाली उत्तराखंड की डेयरी ने 2019 से 2024 के बीच ₹250 करोड़ कीमत का 68 लाख किलो मिलावटी घी सप्लाई किया था।पूरी खबर पढ़ें