हरिद्वार में आज विश्व सनातन महापीठ का शिला पूजन कार्यक्रम हुआ, जिसमें पूरे देश के कई बड़े संत और कथावाचक पहुंचे हैं। इस दौरान कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने मंच से देश में सनातन बोर्ड के गठन की मांग रखी है। उन्होंने कहा- जिस देश में आजादी के बाद से ही वक्फ बोर्ड है, तो फिर यहां सनातन बोर्ड क्यों नहीं हो सकता। इसके साथ ही देवकीनंदन ठाकुर ने तिलक और कलावा को सनातन संस्कृति का मूल प्रतीक बताते हुए कहा कि यदि किसी स्कूल में बच्चों को तिलक लगाने से रोका जाता है, तो अभिभावकों को स्कूल पहुंचकर संचालकों से जवाब मांगना चाहिए। उन्होंने कहा कि “तिलक और कलावा पहनना हमारा फंडामेंटल राइट है।” उन्होंने यह भी अपील की कि पेरेंट्स केवल बच्चों को सनातन का उपदेश ना दें, बल्कि उन्हें गर्व के साथ सनातनी भी बनाएं। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि देश में 3% क्रिश्चन है, जिन्हें 90% बाइबल का ज्ञान है। बताइए कितने हिन्दुओं के सिर पर तिलक है। ना तो घर में रामायण-गीता का पाठ है। आप उनको ID पर हिन्दू कह सकते हो। जीवन आचरण में हिन्दू नहीं कह सकते। उनके बच्चे मदरसे में जाते है। लेकिन हमारे बच्चे इंग्लिश मीडियम में जाते हैं, जहां पर संस्कार नहीं दिए जाते। हमारे बच्चों को नहीं पता रामकृष्ण की जरूरत क्या है। अगर हमारे बच्चों को राम-कृष्णा, रामायण-गीता का पाठ पता होता तो आज मथुरा में राम मंदिर की तरह भव्य कृष्ण मंदिर बन गया होता। मंच से हुआ शराब बंदी का आह्वान
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा – हमने धर्म से अधिक पैसे को महत्व दिया, जिस कारण विकास के नाम पर विनाश हुआ। हरिद्वार में मांस मदिरा की दुकानों पर उन्होंने कहा कि हमारे सभी तीर्थों को मांस मदिरा की दुकान से मुक्त होना चाहिए, इस दौरान मंच से आह्वान किया गया की जोर से हाथ उठाकर समर्थन कीजिए ताकी केंद्र और राज्य सरकार के कानों तक आवाज पहुंचे, इसे साथ ही देवकीनंदन ने कहा कि- अगर आप सच्चे हिंदू हैं तो सबसे पहला काम होना चाहिए की तीर्थ स्थलों पर बिक रही शराब बंद हो। देश-विदेश के प्रतिष्ठित संत व महापुरुष शामिल विश्व सनातन महापीठ के शिला पूजन कार्यक्रम में देशभर से संत पहुंचे हैं। प्रमुख उपस्थितियों में डॉ. अनिरुद्धाचार्य, देवकीनंदन ठाकुर, स्वामी ब्रह्मेशानंद, संजय आर्य शास्त्री, स्वामी दिनेश्वरानंद और राज गुरुजी शामिल रहे। इनके साथ काशी, अयोध्या, वृंदावन, पंजाब और हरिद्वार के प्रतिष्ठित संतों ने भी मंच पर पहुंचकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। 100 एकड़ भूमि पर 1000 करोड़ रुपए से तैयार होगा महापीठ
न्यास के संरक्षक एवं परमाध्यक्ष बाबा हठयोगी तथा अध्यक्ष तीर्थाचार्य रामविशाल दास महाराज ने बताया कि यह महापीठ 100 एकड़ भूमि पर लगभग 1000 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया जाएगा। रामविशाल दास महाराज के अनुसार, विश्व सनातन महापीठ को एक वैश्विक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित प्रकल्पों में सनातन संसद भवन, चारों शंकराचार्य पीठों के प्रेरणा-परिसर, तेरह अखाड़ों के उद्देश्य-परिसर, वेद मंदिर एवं वेद स्वाध्याय केंद्र, आवासीय गुरुकुल, 108 संत आवास एवं 1008 भक्त आवास, 108 प्रमुख तीर्थों के दर्शन हेतु परिक्रमा पथ, सनातन टाइम म्यूजियम, ऑडिटोरियम, स्वरोजगार एवं शस्त्र प्रशिक्षण केंद्र, देशी गौसंरक्षण केंद्र और धर्म सभा हॉल शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ये सभी प्रकल्प सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण, संरक्षण, अध्यात्म, शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण के उद्देश्यों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। आखिर 1000 करोड़ रुपए कैसे जुटाएंगे संत? रामविशाल दास महाराज ने बताया कि 1000 करोड़ जुटाने के लिए एक अलग टीम तैयार कर दी गई है, साथ ही उन्होंने बताया की साधु-संत हर सनातनी के घर पहुंचेंगे और उनसे मिलने वाली राशि को जमा कर महापीठ के लिए पैसे जुटाएंगे।
हरिद्वार में आज विश्व सनातन महापीठ का शिला पूजन कार्यक्रम हुआ, जिसमें पूरे देश के कई बड़े संत और कथावाचक पहुंचे हैं। इस दौरान कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने मंच से देश में सनातन बोर्ड के गठन की मांग रखी है। उन्होंने कहा- जिस देश में आजादी के बाद से ही वक्फ बोर्ड है, तो फिर यहां सनातन बोर्ड क्यों नहीं हो सकता। इसके साथ ही देवकीनंदन ठाकुर ने तिलक और कलावा को सनातन संस्कृति का मूल प्रतीक बताते हुए कहा कि यदि किसी स्कूल में बच्चों को तिलक लगाने से रोका जाता है, तो अभिभावकों को स्कूल पहुंचकर संचालकों से जवाब मांगना चाहिए। उन्होंने कहा कि “तिलक और कलावा पहनना हमारा फंडामेंटल राइट है।” उन्होंने यह भी अपील की कि पेरेंट्स केवल बच्चों को सनातन का उपदेश ना दें, बल्कि उन्हें गर्व के साथ सनातनी भी बनाएं। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि देश में 3% क्रिश्चन है, जिन्हें 90% बाइबल का ज्ञान है। बताइए कितने हिन्दुओं के सिर पर तिलक है। ना तो घर में रामायण-गीता का पाठ है। आप उनको ID पर हिन्दू कह सकते हो। जीवन आचरण में हिन्दू नहीं कह सकते। उनके बच्चे मदरसे में जाते है। लेकिन हमारे बच्चे इंग्लिश मीडियम में जाते हैं, जहां पर संस्कार नहीं दिए जाते। हमारे बच्चों को नहीं पता रामकृष्ण की जरूरत क्या है। अगर हमारे बच्चों को राम-कृष्णा, रामायण-गीता का पाठ पता होता तो आज मथुरा में राम मंदिर की तरह भव्य कृष्ण मंदिर बन गया होता। मंच से हुआ शराब बंदी का आह्वान
कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा – हमने धर्म से अधिक पैसे को महत्व दिया, जिस कारण विकास के नाम पर विनाश हुआ। हरिद्वार में मांस मदिरा की दुकानों पर उन्होंने कहा कि हमारे सभी तीर्थों को मांस मदिरा की दुकान से मुक्त होना चाहिए, इस दौरान मंच से आह्वान किया गया की जोर से हाथ उठाकर समर्थन कीजिए ताकी केंद्र और राज्य सरकार के कानों तक आवाज पहुंचे, इसे साथ ही देवकीनंदन ने कहा कि- अगर आप सच्चे हिंदू हैं तो सबसे पहला काम होना चाहिए की तीर्थ स्थलों पर बिक रही शराब बंद हो। देश-विदेश के प्रतिष्ठित संत व महापुरुष शामिल विश्व सनातन महापीठ के शिला पूजन कार्यक्रम में देशभर से संत पहुंचे हैं। प्रमुख उपस्थितियों में डॉ. अनिरुद्धाचार्य, देवकीनंदन ठाकुर, स्वामी ब्रह्मेशानंद, संजय आर्य शास्त्री, स्वामी दिनेश्वरानंद और राज गुरुजी शामिल रहे। इनके साथ काशी, अयोध्या, वृंदावन, पंजाब और हरिद्वार के प्रतिष्ठित संतों ने भी मंच पर पहुंचकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। 100 एकड़ भूमि पर 1000 करोड़ रुपए से तैयार होगा महापीठ
न्यास के संरक्षक एवं परमाध्यक्ष बाबा हठयोगी तथा अध्यक्ष तीर्थाचार्य रामविशाल दास महाराज ने बताया कि यह महापीठ 100 एकड़ भूमि पर लगभग 1000 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया जाएगा। रामविशाल दास महाराज के अनुसार, विश्व सनातन महापीठ को एक वैश्विक आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित प्रकल्पों में सनातन संसद भवन, चारों शंकराचार्य पीठों के प्रेरणा-परिसर, तेरह अखाड़ों के उद्देश्य-परिसर, वेद मंदिर एवं वेद स्वाध्याय केंद्र, आवासीय गुरुकुल, 108 संत आवास एवं 1008 भक्त आवास, 108 प्रमुख तीर्थों के दर्शन हेतु परिक्रमा पथ, सनातन टाइम म्यूजियम, ऑडिटोरियम, स्वरोजगार एवं शस्त्र प्रशिक्षण केंद्र, देशी गौसंरक्षण केंद्र और धर्म सभा हॉल शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ये सभी प्रकल्प सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण, संरक्षण, अध्यात्म, शिक्षा और राष्ट्रनिर्माण के उद्देश्यों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। आखिर 1000 करोड़ रुपए कैसे जुटाएंगे संत? रामविशाल दास महाराज ने बताया कि 1000 करोड़ जुटाने के लिए एक अलग टीम तैयार कर दी गई है, साथ ही उन्होंने बताया की साधु-संत हर सनातनी के घर पहुंचेंगे और उनसे मिलने वाली राशि को जमा कर महापीठ के लिए पैसे जुटाएंगे।