
बडगाम/श्रीनगर. 1957 के पहले विधानसभा चुनाव से लेकर आज तक जिस बडगाम को नेशनल कॉन्फ्रेंस अपना अजेय किला समझती थी, वह किला आखिरकार धराशायी हो गया. मध्य कश्मीर का यह शिया बहुल इलाक़ा जिस सीट पर नेकां ने कभी हारना सीखा ही नहीं था, वहां इतिहास ने पहली बार करवट ली है और वो भी ज़ोरदार! नेशनल कॉन्फ्रेंस की यह हार सिर्फ एक चुनावी हार नहीं, बल्कि 67 साल पुराने गढ़ के गिरने की गूंज है. जब-जब पार्टी ने इस सीट पर उम्मीदवार उतारा, हर बार जीत उसकी झोली में पड़ी. सिर्फ 1972 में यह सीट हाथ से इसलिए छूटी थी क्योंकि नेकां ने पूरे जम्मू-कश्मीर में चुनावों का बहिष्कार कर दिया था. लेकिन इस बार? परंपरा टूट गई वर्चस्व ढह गया. ‘अजेय’ बडगाम में नेकां को जनता ने पहली बार सख्त संदेश दे दिया कि पुराने किलों की दीवारें अब वोटों से गिरती हैं.
जम्मू-कश्मीर के बडगाम विधानसभा उपचुनाव में शुक्रवार को पीडीपी उम्मीदवार आगा सैयद मुंतजिर ने जीत दर्ज की. इसके साथ ही नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) को बडगाम विधानसभा क्षेत्र में अपनी पहली चुनावी हार का सामना करना पड़ा. मुंतजिर ने उपचुनाव में सत्तारूढ़ नेकां से यह सीट छीन ली. मुंतजिर ने बडगाम विधानसभा उपचुनाव में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार आगा सैयद महमूद को लगभग 4,500 मतों के अंतर से हराया. निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मुंतजिर को 21,576 वोट मिले, जबकि महमूद को 17,098 वोट मिले. भाजपा उम्मीदवार आगा सैयद मोहसिन मात्र 2,619 वोटों के साथ छठे स्थान पर रहे.
अपनी जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए, मुंतजिर ने कहा कि उपचुनाव का फैसला सत्तारूढ़ नेकां द्वारा अपने वादे पूरे न किए जाने पर जनता का जवाब है. मुंतजिर ने मध्य कश्मीर जिले में संवाददाताओं से कहा, “यह फैसला नेशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा अपने राजनीतिक और विकास संबंधी वादे पूरे न किए जाने पर जनता का जवाब है. यह फैसला नेकां को जम्मू-कश्मीर के लोगों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए मजबूर करेगा.”
इस बीच, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) नेता इल्तिजा मुफ्ती ने पार्टी की विजय को जनता की जीत बताते हुए कहा कि मतदाता समझ गए हैं कि सत्तारूढ़ नेकां द्वारा किए गए वादे खोखले साबित हुए. मुंतजिर की जीत के साथ ही जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीडीपी के विधायकों की संख्या चार हो गई है.
वर्ष 1957 में हुए पहले विधानसभा चुनाव के बाद से यह पहली बार है जब नेकां अपने गढ़ मध्य कश्मीर के बडगाम में हारी है. जब भी नेकां ने इस शिया बहुल क्षेत्र से उम्मीदवार उतारा है, उसने बडगाम में हर विधानसभा चुनाव जीता है. नेकां ने इस सीट का प्रतिनिधित्व केवल 1972 में नहीं किया था, जब पार्टी ने पूरे जम्मू-कश्मीर में चुनावों का बहिष्कार किया था.
पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में अपने पारिवारिक गढ़ गांदरबल से चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा सीट खाली किए जाने से इस निर्वाचन क्षेत्र में उपचुनाव कराना आवश्यक हो गया था. बडगाम से अब्दुल्ला के निर्वाचन से पहले, इस सीट का प्रतिनिधित्व श्रीनगर से नेकां के वर्तमान लोकसभा सदस्य आगा रूहुल्लाह मेहदी ने 2002, 2008 और 2014 में लगातार तीन बार किया था.