सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आदेश में कहा, ‘जांच एजेंसियां किसी भी वकील को तब तक समन नहीं कर सकतीं, जब तक पुलिस अधीक्षक (SP) की लिखित मंजूरी न हो। यह कदम वकील और मुवक्किल के बीच की गोपनीयता के अधिकार की रक्षा के लिए जरूरी है। इसके आदेश के साथ ही कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को भेजे गए समन को भी रद्द कर दिया। सीजेआई बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने यह फैसला खुद से नोटिस मामले में सुनाया है। दरअसल, यह मामला ED के वकीलों अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को मनी लॉन्ड्रिंग जांच में समन भेजने से जुड़ा था। इस कदम की सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने आलोचना की थी। इसके बाद ED ने जून में अपने अधिकारियों के लिए आंतरिक दिशा-निर्देश जारी किए थे कि अब किसी वकील को केवल निदेशक की पूर्व अनुमति और धारा 132 के अनुपालन में ही समन किया जा सकेगा। कोर्ट के फैसले की अन्य पॉइंट्स क्या है BSA की धारा 132? इस धारा के तहत कोई भी वकील अपने मुवक्किल से जुड़ी गोपनीय जानकारी या सलाह बिना उसकी अनुमति के सार्वजनिक नहीं कर सकता।यह पेशेवर संवाद की गोपनीयता को कानूनी सुरक्षा देता है। …………………………..
सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…. सुप्रीम कोर्ट बोला-ED ठगों की तरह काम नहीं कर सकती: कानून के दायरे में रहना होगा, 5 साल में 10% से कम मामलों में सजा सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त महीने में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सख्त लहजे में कहा कि वह ठग की तरह काम नहीं कर सकती। उसे कानून की सीमा में रहकर ही कार्रवाई करनी होगी। कोर्ट ने यह टिप्पणी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत ED को गिरफ्तारी की शक्ति देने वाले 2022 के फैसले की समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की। पूरी खबर पढ़ें…
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आदेश में कहा, ‘जांच एजेंसियां किसी भी वकील को तब तक समन नहीं कर सकतीं, जब तक पुलिस अधीक्षक (SP) की लिखित मंजूरी न हो। यह कदम वकील और मुवक्किल के बीच की गोपनीयता के अधिकार की रक्षा के लिए जरूरी है। इसके आदेश के साथ ही कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सीनियर एडवोकेट अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को भेजे गए समन को भी रद्द कर दिया। सीजेआई बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने यह फैसला खुद से नोटिस मामले में सुनाया है। दरअसल, यह मामला ED के वकीलों अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को मनी लॉन्ड्रिंग जांच में समन भेजने से जुड़ा था। इस कदम की सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने आलोचना की थी। इसके बाद ED ने जून में अपने अधिकारियों के लिए आंतरिक दिशा-निर्देश जारी किए थे कि अब किसी वकील को केवल निदेशक की पूर्व अनुमति और धारा 132 के अनुपालन में ही समन किया जा सकेगा। कोर्ट के फैसले की अन्य पॉइंट्स क्या है BSA की धारा 132? इस धारा के तहत कोई भी वकील अपने मुवक्किल से जुड़ी गोपनीय जानकारी या सलाह बिना उसकी अनुमति के सार्वजनिक नहीं कर सकता।यह पेशेवर संवाद की गोपनीयता को कानूनी सुरक्षा देता है। …………………………..
सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…. सुप्रीम कोर्ट बोला-ED ठगों की तरह काम नहीं कर सकती: कानून के दायरे में रहना होगा, 5 साल में 10% से कम मामलों में सजा सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त महीने में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सख्त लहजे में कहा कि वह ठग की तरह काम नहीं कर सकती। उसे कानून की सीमा में रहकर ही कार्रवाई करनी होगी। कोर्ट ने यह टिप्पणी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत ED को गिरफ्तारी की शक्ति देने वाले 2022 के फैसले की समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की। पूरी खबर पढ़ें…