उत्तराखंड के नैनीताल शहर पर चूहों की बढ़ती आबादी खतरा बनती जा रही है। झीलों के लिए फेमस इस मशहूर शहर में बीते कुछ महीनों में 42 लोग चूहे के काटने से बीमार हुए हैं और उन्हें डॉक्टर से दवा लेनी पड़ी है। नैनीताल जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमएस दुग्गल कहते हैं, पहले तो कभी कभार ही रैट बाइट के मरीज आते थे, लेकिन बीते कुछ महीनों से हमारे पास हर हफ्ते कम से कम एक मरीज तो आ ही रहा है। वहीं, शहर में चूहों के आतंक की घटनाएं किसी एक इलाके तक सीमित नहीं हैं- घरों, बाजारों और पार्कों के अलावा चूहे अस्पतालों तक में दिखने लगे हैं। कई स्थानीय लोगों का ये दावा भी है कि इन चूहों का साइज नॉर्मल चूहों से काफी बड़ा है। इतना ही नहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि चूहों के कारण ही भविष्य में शहर के ढलान वाले इलाकों मेंं लैंडस्लाइड का खतरा भी पैदा हो सकता है। डॉ. ने दी चूहों से सावधान रहने की सलाह डॉ. दुग्गल ने इस समस्या को गंभीर बताते हुए कहा कि चूहों से बचने के लिए सबसे जरूरी है घर को हमेशा साफ-सुथरा रखना। कोई भी खाने का आइटम खुले में न छोड़ें, क्योंकि यही चीजें चूहों को आकर्षित करती हैं। अगर घर या आसपास चूहों की संख्या बढ़ने लगे तो चूहा-रोधी केमिकल या स्प्रे का छिड़काव भी कर सकते हैं। इससे न केवल चूहे दूर रहते हैं, बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी कम होता है। डॉ. हिमांशु ने बताया आखिर क्यों दिख रहे बड़े चूहे…. शहर के ही कुछ लोगों का दावा है कि उन्हें घर के अंदर जो चूहे दिखे हैं वो नॉर्मल साइज के नहीं हैं बल्कि वह 4-5 किलो वजनी हैं, इसपर डॉ. हिमांशु पांगती कहते हैं, नैनीताल की जलवायु अब चूहों के लिए अनुकूल हो गई है, जिससे उनकी आबादी यहां लगातार बढ़ती जा रही है, रही बात बड़े आकार के चूहे दिखने की तो ये दो अलग अलग प्रजातियों के चूहों के बीच क्रॉस ब्रीडिंग से भी संभव हो सकता है। भू वैज्ञानिकों की चेतावनी- चूहे बढ़ा रहे खतरा भू-वैज्ञानिक डॉ. बीडी पाटनी ने चूहों की बढ़ती आबादी पर कहा कि, यह जीव पहाड़ों की मिट्टी में गहराई तक बिल बनाते हैं। और फिर इन्हीं सुराखों से बारिश का पानी नीचे रिसता है, जिससे मिट्टी की पकड़ कमजोर होती है और पहाड़ अंदर से खोखले होने लगते हैं। ऐसे में नैनीताल जैसे शहर के लिए भविष्य में चूहों की बढ़ती आबादी बड़ा खतरा है। पहाड़ी पर बसे इस शहर की जमीन में अगर ज्यादा बिल बना दिए गए तो बरसात के समय लैंडस्लाइड का खतरा हो सकता है। विशेषज्ञ बोले- सभी पहाड़ी इलाकों के लिए चेतावनी पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि शहर में हजारों पर्यटक आते हैं, ऐसे में कचरा भी टनों में होता है। होटलों और घरों से कचरा निकल जब ढ़ेर बन जाता है और उसका सही से निस्तारण नहीं होता तो चूहों को फलने फूलने में आसानी होती है। अगर इस समस्या से निजात चाहिए तो कचरा निस्तारण की तरफ भी ध्यान देना होगा। इसके लिए निगम को ठोस कार्रवाई करने की जरूरत है। इसके साथ ही उनका कहना है कि नैनीताल की यह हालत तमाम पहाड़ी शहरों के लिए चेतावनी है कि- साफ-सफाई और जलवायु परिवर्तन की अनदेखी धीरे-धीरे नई आपदा को भी जन्म दे सकती है।
उत्तराखंड के नैनीताल शहर पर चूहों की बढ़ती आबादी खतरा बनती जा रही है। झीलों के लिए फेमस इस मशहूर शहर में बीते कुछ महीनों में 42 लोग चूहे के काटने से बीमार हुए हैं और उन्हें डॉक्टर से दवा लेनी पड़ी है। नैनीताल जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एमएस दुग्गल कहते हैं, पहले तो कभी कभार ही रैट बाइट के मरीज आते थे, लेकिन बीते कुछ महीनों से हमारे पास हर हफ्ते कम से कम एक मरीज तो आ ही रहा है। वहीं, शहर में चूहों के आतंक की घटनाएं किसी एक इलाके तक सीमित नहीं हैं- घरों, बाजारों और पार्कों के अलावा चूहे अस्पतालों तक में दिखने लगे हैं। कई स्थानीय लोगों का ये दावा भी है कि इन चूहों का साइज नॉर्मल चूहों से काफी बड़ा है। इतना ही नहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि चूहों के कारण ही भविष्य में शहर के ढलान वाले इलाकों मेंं लैंडस्लाइड का खतरा भी पैदा हो सकता है। डॉ. ने दी चूहों से सावधान रहने की सलाह डॉ. दुग्गल ने इस समस्या को गंभीर बताते हुए कहा कि चूहों से बचने के लिए सबसे जरूरी है घर को हमेशा साफ-सुथरा रखना। कोई भी खाने का आइटम खुले में न छोड़ें, क्योंकि यही चीजें चूहों को आकर्षित करती हैं। अगर घर या आसपास चूहों की संख्या बढ़ने लगे तो चूहा-रोधी केमिकल या स्प्रे का छिड़काव भी कर सकते हैं। इससे न केवल चूहे दूर रहते हैं, बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी कम होता है। डॉ. हिमांशु ने बताया आखिर क्यों दिख रहे बड़े चूहे…. शहर के ही कुछ लोगों का दावा है कि उन्हें घर के अंदर जो चूहे दिखे हैं वो नॉर्मल साइज के नहीं हैं बल्कि वह 4-5 किलो वजनी हैं, इसपर डॉ. हिमांशु पांगती कहते हैं, नैनीताल की जलवायु अब चूहों के लिए अनुकूल हो गई है, जिससे उनकी आबादी यहां लगातार बढ़ती जा रही है, रही बात बड़े आकार के चूहे दिखने की तो ये दो अलग अलग प्रजातियों के चूहों के बीच क्रॉस ब्रीडिंग से भी संभव हो सकता है। भू वैज्ञानिकों की चेतावनी- चूहे बढ़ा रहे खतरा भू-वैज्ञानिक डॉ. बीडी पाटनी ने चूहों की बढ़ती आबादी पर कहा कि, यह जीव पहाड़ों की मिट्टी में गहराई तक बिल बनाते हैं। और फिर इन्हीं सुराखों से बारिश का पानी नीचे रिसता है, जिससे मिट्टी की पकड़ कमजोर होती है और पहाड़ अंदर से खोखले होने लगते हैं। ऐसे में नैनीताल जैसे शहर के लिए भविष्य में चूहों की बढ़ती आबादी बड़ा खतरा है। पहाड़ी पर बसे इस शहर की जमीन में अगर ज्यादा बिल बना दिए गए तो बरसात के समय लैंडस्लाइड का खतरा हो सकता है। विशेषज्ञ बोले- सभी पहाड़ी इलाकों के लिए चेतावनी पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि शहर में हजारों पर्यटक आते हैं, ऐसे में कचरा भी टनों में होता है। होटलों और घरों से कचरा निकल जब ढ़ेर बन जाता है और उसका सही से निस्तारण नहीं होता तो चूहों को फलने फूलने में आसानी होती है। अगर इस समस्या से निजात चाहिए तो कचरा निस्तारण की तरफ भी ध्यान देना होगा। इसके लिए निगम को ठोस कार्रवाई करने की जरूरत है। इसके साथ ही उनका कहना है कि नैनीताल की यह हालत तमाम पहाड़ी शहरों के लिए चेतावनी है कि- साफ-सफाई और जलवायु परिवर्तन की अनदेखी धीरे-धीरे नई आपदा को भी जन्म दे सकती है।