उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के पेपर लीक कांड मामले में CBI ने जांच शुरू कर दी है। CBI की जांच में पेपर लीक से जुड़े मामले में कई संदिग्ध चेहरों के बेनकाब होने की संभावना है। इसमें कुछ फेमस चेहरे भी शामिल है। पुलिस और SIT ने अपनी FIR में परीक्षार्थी खालिद उसकी दो बहने (साबिया, हीना) और एक असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को आरोपी बनाया था। अब CBI ने देहरादून के रायपुर थाने में दर्ज FIR को जांच का आधार बनाया है, जिसकी जांच सहायक अधीक्षक (APC) सीबीआई राजीव चंदोला को सौंपी गई है। इसमें एक एडिशनल एसपी और चार इंस्पेक्टर की टीम शामिल है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि CBI की टीम में मंगलवार को केस दर्ज करने के बाद जया बलूनी के नेतृत्व वाली SIT टीम से मुलाकात की। इसके बाद SIT टीम ने अब तक की जांच किए सभी दस्तावेजों को CBI को सौंप दिए हैं। अब CBI परीक्षा केन्द्र से बाहर आए पेपर की पूरी कहानी सामने लाएगी। CBI हरिद्वार के परीक्षा केंद्र में जाकर जांच करेगी माना जा रहा है कि सीबीआई अब इस केस में शुरू से अपनी जांच करते हुए चारों आरोपियों खालिद उसकी दो बहन हिना और साबिया और असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन से जल्द पूछताछ करेगी। CBI की टीम जांच के लिए हरिद्वार के उसे परीक्षा केंद्र पर भी जाएगी, जहां से 21 सितंबर को हुई परीक्षा के तीन पन्ने बाहर आए थे। दो दिन पहले ही CBI को ये केस मिला है। अब माना जा रहा है कि CBI का दायरा UKSSSC के जुड़े अधिकारियों और पेपर लीक कांड में शामिल और आरोपी तक बढ़ सकता है। इसमें उनकी जांच भी संभव है जो पहले भी उत्तराखंड में पेपर लीक से जुड़े रहे है। जल्द ही कई बड़े नाम इसमें सामने आ सकते हैं। पेपर लीक के बाद प्रदर्शन की तस्वीरें… दून SIT ने खंगाला खालिद मलिक का पुराना रिकॉर्ड CBI की जांच से पहले पेपर लीक कांड में दून SIT एक्टिव थी। SIT ने एक महीने तक की जांच में आरोपी खालिद मलिक का आपराधिक रिकॉर्ड खोज निकाला है। सूत्रों के अनुसार, मेरठ में 2023 में खालिद के खिलाफ नकल का मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि, अब तक यूपी पुलिस को उसका सुराग नहीं मिला था। दून SIT की सूचना के बाद मेरठ पुलिस ने भी आरोपी खालिद मलिक पर कार्रवाई की है। मेरठ और दिल्ली तक फैले पेपर लीक के तार जांच के दौरान SIT को इस मामले में एक बड़े नेटवर्क के होने के प्रमाण मिले हैं, जिसके तार मेरठ और दिल्ली तक जुड़े हुए हैं। इस नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और दस्तावेज मंगलवार को सीबीआई को सौंप दिए गए हैं। CBI को सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि खालिद और साबिया की गिरफ्तारी के दौरान कई अहम साक्ष्य मिले हैं। सर्च वारंट के दौरान खालिद के घर से किसी तरह की पाठ्य सामग्री (पेपर की तैयारी करने वाली कॉम्पिटिटिव बुक) नहीं मिलने पर संदेह और गहराया। दस्तावेजों की जांच से पता चला कि खालिद ने 2023 से 2025 के बीच कुल नौ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवेदन किया, जिनमें से पांच में वह शामिल ही नहीं हुआ था। कुछ परीक्षाओं की शैक्षिक योग्यता भी उसके पास नहीं थी, जिससे उसकी गतिविधियों पर और सवाल खड़े हो गए हैं। जानिए अब तक क्या हुआ… UKSSSC का 21 सितंबर को ग्रेजुएट लेवल भर्ती का पेपर लीक हुआ था, जिसके 20 दिन बाद यानी 11 अक्टूबर को मामले की जांच को लेकर सरकार द्वारा बनाए गए एकल सदस्यीय जांच आयोग ने सीएम धामी को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके कुछ ही घंटों बाद UKSSSC ने एक नोटिफिकेशन जारी कर इस परीक्षा को रद्द कर दिया था। आयोग की रिपोर्ट के बाद UKSSSC ने ये फैसला सुनाया था। इसकी अध्यक्षता उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति यू.सी. ध्यानी ने की थी। रिपोर्ट मिलने के बाद सीएम ने भी कहा था कि आयोग ने कम समय में ज्यादा से ज्यादा जनसुनवाई कर स्टूडेंट्स और संबंधित पक्षों से सुझाव लिए हैं, जो सराहनीय है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट का परीक्षण कर स्टूडेंट्स के हित में निर्णय लिया जाएगा। लेकिन इसके बाद मामले की जांच 27 अक्टूबर को केंद्र (CBI) को सौंपी गई। 4 पॉइंट में समझिए पेपर लीक का पूरा मामला… 1. 21 सितंबर को UKSSSC ने ग्रेजुएट लेवल की परीक्षा कराई- UKSSSC ने 21 सितंबर को ग्रेजुएट लेवल की भर्ती के लिए 11 बजे एग्जाम शुरू किया। एग्जाम 1 बजे तक होना था। लेकिन 11:30 बजे ही पेपर लीक हो गया, जिसके तीन पन्ने वॉट्सऐप से बाहर आ गए थे। आरोपी खालिद मलिक नाम के व्यक्ति ने असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को अपने पेपर भेजे दिए थे, जिसमें खालिद की बहन साबिया भी शामिल थी। फिलहाल खालिद और उसकी बहन साबिया न्यायिक हिरासत में हैं। 2. प्रदेश भर में शुरू हुआ आन्दोलन- इसके बाद प्रदेश भर में आंदोलन शुरू हो गया। काफी लंबे समय तक बेरोजगार संगठन के लोग देहरादून के परेड ग्राउंड के बाहर धरने पर बैठे रहे। फिर सीएम पुष्कर सिंह धामी लगभग 8 दिन के बाद छात्रों से मिलने उनके धरना स्थल पर पहुंचे थे और उन्होंने सीबीआई जांच की बात कही। इसके बाद सीबीआई जांच के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को लिख दिया था। छात्रों ने दूसरी मांग अपनी की थी कि इस परीक्षा को रद्द किया जाए और उसका रोस्टर दोबारा से जारी किया जाए। 3. एकल सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया- छात्रों के बढ़ने प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एकल सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) यूसी ध्यानी को सौंपी गई। इस आयोग को परीक्षा में हुई अनियमितताओं, पेपर लीक की प्रक्रिया, शामिल अधिकारियों और बाहरी नेटवर्क की भूमिका की जांच का अधिकार दिया गया था। आयोग ने प्रदेश के कई जिलों में जाकर छात्रों, अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से जनसंवाद किया और उन्हीं बयानों के आधार पर अपनी अंतरिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपी। 4- सरकार ने आयोग को सौंपी रिपोर्ट, पेपर रद्द- छात्रों की मांग थी कि इस मामले की जांच सीबीआई से करवाई जाए और परीक्षा को रद्द किया जाए। एकल सदस्यीय जांच आयोग की कई बैठकों में भी छात्रों ने इन मांगों को उठाया था। वहीं, जब आयोग ने रिपोर्ट सीएम धामी को सौंपी तो इसके कुछ ही घंटों बाद सरकार ने ये रिपोर्ट यूकेएसएसएसी को सौंपी। और फिर इस रिपोर्ट के आधार पर ही यूकेएसएसएसी ने परीक्षा को रद्द कर दिया था।
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के पेपर लीक कांड मामले में CBI ने जांच शुरू कर दी है। CBI की जांच में पेपर लीक से जुड़े मामले में कई संदिग्ध चेहरों के बेनकाब होने की संभावना है। इसमें कुछ फेमस चेहरे भी शामिल है। पुलिस और SIT ने अपनी FIR में परीक्षार्थी खालिद उसकी दो बहने (साबिया, हीना) और एक असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को आरोपी बनाया था। अब CBI ने देहरादून के रायपुर थाने में दर्ज FIR को जांच का आधार बनाया है, जिसकी जांच सहायक अधीक्षक (APC) सीबीआई राजीव चंदोला को सौंपी गई है। इसमें एक एडिशनल एसपी और चार इंस्पेक्टर की टीम शामिल है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि CBI की टीम में मंगलवार को केस दर्ज करने के बाद जया बलूनी के नेतृत्व वाली SIT टीम से मुलाकात की। इसके बाद SIT टीम ने अब तक की जांच किए सभी दस्तावेजों को CBI को सौंप दिए हैं। अब CBI परीक्षा केन्द्र से बाहर आए पेपर की पूरी कहानी सामने लाएगी। CBI हरिद्वार के परीक्षा केंद्र में जाकर जांच करेगी माना जा रहा है कि सीबीआई अब इस केस में शुरू से अपनी जांच करते हुए चारों आरोपियों खालिद उसकी दो बहन हिना और साबिया और असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन से जल्द पूछताछ करेगी। CBI की टीम जांच के लिए हरिद्वार के उसे परीक्षा केंद्र पर भी जाएगी, जहां से 21 सितंबर को हुई परीक्षा के तीन पन्ने बाहर आए थे। दो दिन पहले ही CBI को ये केस मिला है। अब माना जा रहा है कि CBI का दायरा UKSSSC के जुड़े अधिकारियों और पेपर लीक कांड में शामिल और आरोपी तक बढ़ सकता है। इसमें उनकी जांच भी संभव है जो पहले भी उत्तराखंड में पेपर लीक से जुड़े रहे है। जल्द ही कई बड़े नाम इसमें सामने आ सकते हैं। पेपर लीक के बाद प्रदर्शन की तस्वीरें… दून SIT ने खंगाला खालिद मलिक का पुराना रिकॉर्ड CBI की जांच से पहले पेपर लीक कांड में दून SIT एक्टिव थी। SIT ने एक महीने तक की जांच में आरोपी खालिद मलिक का आपराधिक रिकॉर्ड खोज निकाला है। सूत्रों के अनुसार, मेरठ में 2023 में खालिद के खिलाफ नकल का मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि, अब तक यूपी पुलिस को उसका सुराग नहीं मिला था। दून SIT की सूचना के बाद मेरठ पुलिस ने भी आरोपी खालिद मलिक पर कार्रवाई की है। मेरठ और दिल्ली तक फैले पेपर लीक के तार जांच के दौरान SIT को इस मामले में एक बड़े नेटवर्क के होने के प्रमाण मिले हैं, जिसके तार मेरठ और दिल्ली तक जुड़े हुए हैं। इस नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और दस्तावेज मंगलवार को सीबीआई को सौंप दिए गए हैं। CBI को सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि खालिद और साबिया की गिरफ्तारी के दौरान कई अहम साक्ष्य मिले हैं। सर्च वारंट के दौरान खालिद के घर से किसी तरह की पाठ्य सामग्री (पेपर की तैयारी करने वाली कॉम्पिटिटिव बुक) नहीं मिलने पर संदेह और गहराया। दस्तावेजों की जांच से पता चला कि खालिद ने 2023 से 2025 के बीच कुल नौ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवेदन किया, जिनमें से पांच में वह शामिल ही नहीं हुआ था। कुछ परीक्षाओं की शैक्षिक योग्यता भी उसके पास नहीं थी, जिससे उसकी गतिविधियों पर और सवाल खड़े हो गए हैं। जानिए अब तक क्या हुआ… UKSSSC का 21 सितंबर को ग्रेजुएट लेवल भर्ती का पेपर लीक हुआ था, जिसके 20 दिन बाद यानी 11 अक्टूबर को मामले की जांच को लेकर सरकार द्वारा बनाए गए एकल सदस्यीय जांच आयोग ने सीएम धामी को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके कुछ ही घंटों बाद UKSSSC ने एक नोटिफिकेशन जारी कर इस परीक्षा को रद्द कर दिया था। आयोग की रिपोर्ट के बाद UKSSSC ने ये फैसला सुनाया था। इसकी अध्यक्षता उत्तराखंड हाईकोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति यू.सी. ध्यानी ने की थी। रिपोर्ट मिलने के बाद सीएम ने भी कहा था कि आयोग ने कम समय में ज्यादा से ज्यादा जनसुनवाई कर स्टूडेंट्स और संबंधित पक्षों से सुझाव लिए हैं, जो सराहनीय है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट का परीक्षण कर स्टूडेंट्स के हित में निर्णय लिया जाएगा। लेकिन इसके बाद मामले की जांच 27 अक्टूबर को केंद्र (CBI) को सौंपी गई। 4 पॉइंट में समझिए पेपर लीक का पूरा मामला… 1. 21 सितंबर को UKSSSC ने ग्रेजुएट लेवल की परीक्षा कराई- UKSSSC ने 21 सितंबर को ग्रेजुएट लेवल की भर्ती के लिए 11 बजे एग्जाम शुरू किया। एग्जाम 1 बजे तक होना था। लेकिन 11:30 बजे ही पेपर लीक हो गया, जिसके तीन पन्ने वॉट्सऐप से बाहर आ गए थे। आरोपी खालिद मलिक नाम के व्यक्ति ने असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन को अपने पेपर भेजे दिए थे, जिसमें खालिद की बहन साबिया भी शामिल थी। फिलहाल खालिद और उसकी बहन साबिया न्यायिक हिरासत में हैं। 2. प्रदेश भर में शुरू हुआ आन्दोलन- इसके बाद प्रदेश भर में आंदोलन शुरू हो गया। काफी लंबे समय तक बेरोजगार संगठन के लोग देहरादून के परेड ग्राउंड के बाहर धरने पर बैठे रहे। फिर सीएम पुष्कर सिंह धामी लगभग 8 दिन के बाद छात्रों से मिलने उनके धरना स्थल पर पहुंचे थे और उन्होंने सीबीआई जांच की बात कही। इसके बाद सीबीआई जांच के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को लिख दिया था। छात्रों ने दूसरी मांग अपनी की थी कि इस परीक्षा को रद्द किया जाए और उसका रोस्टर दोबारा से जारी किया जाए। 3. एकल सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया- छात्रों के बढ़ने प्रदर्शन को देखते हुए सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एकल सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) यूसी ध्यानी को सौंपी गई। इस आयोग को परीक्षा में हुई अनियमितताओं, पेपर लीक की प्रक्रिया, शामिल अधिकारियों और बाहरी नेटवर्क की भूमिका की जांच का अधिकार दिया गया था। आयोग ने प्रदेश के कई जिलों में जाकर छात्रों, अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से जनसंवाद किया और उन्हीं बयानों के आधार पर अपनी अंतरिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपी। 4- सरकार ने आयोग को सौंपी रिपोर्ट, पेपर रद्द- छात्रों की मांग थी कि इस मामले की जांच सीबीआई से करवाई जाए और परीक्षा को रद्द किया जाए। एकल सदस्यीय जांच आयोग की कई बैठकों में भी छात्रों ने इन मांगों को उठाया था। वहीं, जब आयोग ने रिपोर्ट सीएम धामी को सौंपी तो इसके कुछ ही घंटों बाद सरकार ने ये रिपोर्ट यूकेएसएसएसी को सौंपी। और फिर इस रिपोर्ट के आधार पर ही यूकेएसएसएसी ने परीक्षा को रद्द कर दिया था।