एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की हिरासत के खिलाफ उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने एक और कदम उठाया है। अंगमो ने इसकी जानकारी साझा करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बताया कि उन्होंने वांगचुक की ओर से राज्य सरकार, केंद्र सरकार और एडवाइजरी बोर्ड को रिप्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया है। उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक को पिछले दिनों NSA के तहत हिरासत में लिया गया था, जिसका देशभर में विरोध और कानूनी चुनौती जारी है। सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले की सुनवाई कर रहा है। जबकि वांगचुक की पत्नी कानूनी लड़ाई की अगुवाई कर रही हैं। गीतांजलि के इस कदम को वांगचुक की जल्द रिहाई की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। गीतांजलि अंगमो ने अपनी पोस्ट में लिखा- वांगचुक की ओर से राज्य, केंद्र सरकार और एडवाइजरी बोर्ड को हिरासत के आधार को चुनौती देने वाला रिप्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया है। प्रक्रियागत खामियों के साथ-साथ वांगचुक के वीडियो के संदर्भ से बाहर, गलत प्रस्तुतीकरण पर आधारित कमजोर और निराधार आरोपों को चुनौती दी! गीतांजलि ने बताया- इस रिप्रेजेंटेशन में न केवल हिरासत के आधारों को चुनौती दी गई है, बल्कि सरकार द्वारा तय प्रक्रिया में हुई खामियों और वांगचुक के बयानों/वीडियो के संदर्भ से बाहर तोड़-मरोड़कर पेश किए गए तथ्यों को भी निराधार बताया गया है। क्या है एडवाइजरी बोर्ड एडवाइजरी बोर्ड (सलाहकार बोर्ड) राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) 1980 के तहत गठित एक विशेष संवैधानिक निकाय है, जो निरोधात्मक हिरासत (Preventive Detention) के मामलों की समीक्षा करता है। हिरासत के आदेश का औचित्य इसी बोर्ड के समक्ष परखा जाता है। जरूरी होने पर व्यक्ति के पक्ष में राहत दी जा सकती है। एडवाइजरी बोर्ड की संरचना: यह बोर्ड तीन सदस्यों से मिलकर बनता है, जो हाईकोर्ट के पूर्व या मौजूदा जज न्यायाधीश होते हैं। इन सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा की जाती है, जिससे बोर्ड की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है। एडवाइजरी बोर्ड का कार्य: जब किसी व्यक्ति को NSA के तहत हिरासत में लिया जाता है, तो सरकार को हिरासत के तीन सप्ताह के भीतर एडवाइजरी बोर्ड के समक्ष निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं: बोर्ड को हिरासत की तारीख से सात सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होती है। बोर्ड की शक्तियां और प्रक्रिया: एडवाइजरी बोर्ड के पास निम्नलिखित अधिकार हैं: सलाहकार बोर्ड का महत्व: यह बोर्ड संविधान के अनुच्छेद 22(4) के तहत एक महत्वपूर्ण संवैधानिक सुरक्षा उपाय है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कार्यपालिका द्वारा निवारक हिरासत की शक्ति का मनमाना उपयोग न हो और व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की रक्षा हो। यदि बोर्ड यह राय देता है कि हिरासत के लिए पर्याप्त कारण नहीं हैं, तो सरकार को उस व्यक्ति को रिहा करना होता है। वांगचुक के मामले में महत्व गीतांजलि अंगमो ने सोनम वांगचुक की ओर से राज्य सरकार, केंद्र सरकार और एडवाइजरी बोर्ड तीनों के समक्ष प्रतिनिधित्व (Representation) प्रस्तुत किया है। यह रिप्रेजेंटेशन हिरासत के आधारों को चुनौती देता है और प्रक्रियात्मक खामियों की ओर ध्यान आकर्षित करता है। एडवाइजरी बोर्ड अब इस मामले की समीक्षा करेगा और यह तय करेगा कि वांगचुक की हिरासत जारी रखने के लिए पर्याप्त कारण हैं या नहीं। वांगचुक से व्यक्तिगत सुनवाई के विकल्प सोनम वांगचुक को बोर्ड द्वारा व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया जा सकता है और इसके लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन विकल्प हो सकते हैं। इसके तहत बोर्ड के सदस्य जोधपुर पहुंचकर सेंट्रल जेल में वांगचुक से विस्तृत बात कर सकते हैं या ऑनलाइन ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी सुनवाई कर सकते हैं। ये भी पढ़ें… जोधपुर जेल में वांगचुक को मिला लैपटॉप:पत्नी गीतांजलि ने 10 दिन में तीसरी बार की मुलाकात, बच्चों की एनसाइक्लोपीडिया दी जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से उनकी पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने गुरुवार को मुलाकात की। वांगचुक से जेल में गीतांजलि की यह तीसरी मुलाकात है। गीतांजलि ने X पर यह जानकारी दी। (पूरी खबर पढ़ें)
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की हिरासत के खिलाफ उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने एक और कदम उठाया है। अंगमो ने इसकी जानकारी साझा करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर बताया कि उन्होंने वांगचुक की ओर से राज्य सरकार, केंद्र सरकार और एडवाइजरी बोर्ड को रिप्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया है। उल्लेखनीय है कि सोनम वांगचुक को पिछले दिनों NSA के तहत हिरासत में लिया गया था, जिसका देशभर में विरोध और कानूनी चुनौती जारी है। सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले की सुनवाई कर रहा है। जबकि वांगचुक की पत्नी कानूनी लड़ाई की अगुवाई कर रही हैं। गीतांजलि के इस कदम को वांगचुक की जल्द रिहाई की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। गीतांजलि अंगमो ने अपनी पोस्ट में लिखा- वांगचुक की ओर से राज्य, केंद्र सरकार और एडवाइजरी बोर्ड को हिरासत के आधार को चुनौती देने वाला रिप्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया है। प्रक्रियागत खामियों के साथ-साथ वांगचुक के वीडियो के संदर्भ से बाहर, गलत प्रस्तुतीकरण पर आधारित कमजोर और निराधार आरोपों को चुनौती दी! गीतांजलि ने बताया- इस रिप्रेजेंटेशन में न केवल हिरासत के आधारों को चुनौती दी गई है, बल्कि सरकार द्वारा तय प्रक्रिया में हुई खामियों और वांगचुक के बयानों/वीडियो के संदर्भ से बाहर तोड़-मरोड़कर पेश किए गए तथ्यों को भी निराधार बताया गया है। क्या है एडवाइजरी बोर्ड एडवाइजरी बोर्ड (सलाहकार बोर्ड) राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) 1980 के तहत गठित एक विशेष संवैधानिक निकाय है, जो निरोधात्मक हिरासत (Preventive Detention) के मामलों की समीक्षा करता है। हिरासत के आदेश का औचित्य इसी बोर्ड के समक्ष परखा जाता है। जरूरी होने पर व्यक्ति के पक्ष में राहत दी जा सकती है। एडवाइजरी बोर्ड की संरचना: यह बोर्ड तीन सदस्यों से मिलकर बनता है, जो हाईकोर्ट के पूर्व या मौजूदा जज न्यायाधीश होते हैं। इन सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा की जाती है, जिससे बोर्ड की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है। एडवाइजरी बोर्ड का कार्य: जब किसी व्यक्ति को NSA के तहत हिरासत में लिया जाता है, तो सरकार को हिरासत के तीन सप्ताह के भीतर एडवाइजरी बोर्ड के समक्ष निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं: बोर्ड को हिरासत की तारीख से सात सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होती है। बोर्ड की शक्तियां और प्रक्रिया: एडवाइजरी बोर्ड के पास निम्नलिखित अधिकार हैं: सलाहकार बोर्ड का महत्व: यह बोर्ड संविधान के अनुच्छेद 22(4) के तहत एक महत्वपूर्ण संवैधानिक सुरक्षा उपाय है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कार्यपालिका द्वारा निवारक हिरासत की शक्ति का मनमाना उपयोग न हो और व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की रक्षा हो। यदि बोर्ड यह राय देता है कि हिरासत के लिए पर्याप्त कारण नहीं हैं, तो सरकार को उस व्यक्ति को रिहा करना होता है। वांगचुक के मामले में महत्व गीतांजलि अंगमो ने सोनम वांगचुक की ओर से राज्य सरकार, केंद्र सरकार और एडवाइजरी बोर्ड तीनों के समक्ष प्रतिनिधित्व (Representation) प्रस्तुत किया है। यह रिप्रेजेंटेशन हिरासत के आधारों को चुनौती देता है और प्रक्रियात्मक खामियों की ओर ध्यान आकर्षित करता है। एडवाइजरी बोर्ड अब इस मामले की समीक्षा करेगा और यह तय करेगा कि वांगचुक की हिरासत जारी रखने के लिए पर्याप्त कारण हैं या नहीं। वांगचुक से व्यक्तिगत सुनवाई के विकल्प सोनम वांगचुक को बोर्ड द्वारा व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया जा सकता है और इसके लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन विकल्प हो सकते हैं। इसके तहत बोर्ड के सदस्य जोधपुर पहुंचकर सेंट्रल जेल में वांगचुक से विस्तृत बात कर सकते हैं या ऑनलाइन ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी सुनवाई कर सकते हैं। ये भी पढ़ें… जोधपुर जेल में वांगचुक को मिला लैपटॉप:पत्नी गीतांजलि ने 10 दिन में तीसरी बार की मुलाकात, बच्चों की एनसाइक्लोपीडिया दी जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक से उनकी पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने गुरुवार को मुलाकात की। वांगचुक से जेल में गीतांजलि की यह तीसरी मुलाकात है। गीतांजलि ने X पर यह जानकारी दी। (पूरी खबर पढ़ें)