पंजाब के अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल में बंदी छोड़ दिवस मनाया जा रहा है। 1 लाख घी के दीये जलाए गए हैं। थोड़ी देर में यहां भव्य आतिशबाजी की जाएगी। गोल्डन टेंपल के हेड ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह ने बताया कि बंदी छोड़ दिवस केवल रोशनी का नहीं, बल्कि आजादी और न्याय का प्रतीक है। गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने ग्वालियर किले में कैद 52 राजाओं को मुक्त कराया और अमृतसर लौटे थे। उन्होंने बताया कि उनकी वापसी पर संगतों ने घी के दीपक जलाकर और आतिशबाजी के साथ खुशी मनाई थी। तब से यह दिन हर साल बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है। ज्ञानी रघुबीर सिंह ने कहा कि बंदी छोड़ वही है, जो दूसरों को भी मुक्त करे। यह दिन आत्मिक आजादी, मानव अधिकारों की जीत और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सिख पंथ हमेशा शांति, प्रेम और सेवा का संदेश देता है। इस पावन अवसर पर हर व्यक्ति को मानवता की सेवा और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए। बंदी छोड़ दिवस की PHOTOS…
पंजाब के अमृतसर स्थित गोल्डन टेंपल में बंदी छोड़ दिवस मनाया जा रहा है। 1 लाख घी के दीये जलाए गए हैं। थोड़ी देर में यहां भव्य आतिशबाजी की जाएगी। गोल्डन टेंपल के हेड ग्रंथी ज्ञानी रघबीर सिंह ने बताया कि बंदी छोड़ दिवस केवल रोशनी का नहीं, बल्कि आजादी और न्याय का प्रतीक है। गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने ग्वालियर किले में कैद 52 राजाओं को मुक्त कराया और अमृतसर लौटे थे। उन्होंने बताया कि उनकी वापसी पर संगतों ने घी के दीपक जलाकर और आतिशबाजी के साथ खुशी मनाई थी। तब से यह दिन हर साल बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है। ज्ञानी रघुबीर सिंह ने कहा कि बंदी छोड़ वही है, जो दूसरों को भी मुक्त करे। यह दिन आत्मिक आजादी, मानव अधिकारों की जीत और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सिख पंथ हमेशा शांति, प्रेम और सेवा का संदेश देता है। इस पावन अवसर पर हर व्यक्ति को मानवता की सेवा और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए। बंदी छोड़ दिवस की PHOTOS…