राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारतीयों को अपनी ज्ञान परंपरा को समझने और उसकी अहमियत जानने के लिए ‘मैकाले नॉलेज सिस्टम’ के विदेशी प्रभाव से पूरी तरह आजाद होना होगा। मुंबई में ‘आर्य युग’ वॉल्यूम के विमोचन के दौरान रविवार (19 अक्टूबर) को संघ प्रमुख ने कहा, ‘हमें भारतीय सिस्टम में पढ़ाने की जगह मैकाले नॉलेज सिस्टम में पढ़ाया गया। इसलिए हमारी जड़ें, हमारा आधार और ज्ञान की खोज के लिए हमारी बुद्धि उसी हिसाब से बन गई। कहा जाता है कि हम गुलाम थे। हम भारतीय हैं, लेकिन हमारा दिमाग और सोच विदेशी हो गए। हमें इस विदेशी प्रभाव से पूरी तरह आजाद होना होगा। तभी हम अपनी ज्ञान परंपरा तक पहुंच पाएंगे और उसकी अहमियत समझ पाएंगे।’ मोहन भागवत के बयान की पांच बड़ी बातें मैकाले नॉलेज सिस्टम क्या है? मैकाले नॉलेज सिस्टम ब्रिटिश राज के समय भारत में लाई गई। ये एक ऐसी पढ़ाई-लिखाई का तरीका था, जो अंग्रेजों ने 1835 में शुरू किया ताकि भारतीयों को उनकी अपनी संस्कृति और ज्ञान से दूर करके अंग्रेजों जैसा सोचने वाला बना सकें। भारत में ये कब और कैसे आया? 1800 के दशक में भारत पर ईस्ट इंडिया कंपनी का राज था। अंग्रेज सोचते थे कि भारतीयों पर पूरा कंट्रोल के लिए अंग्रेजी और कल्चर सिखाना चाहिए। थॉमस बबिंगटन मैकाले नाम के एक ब्रिटिश अफसर ने 2 फरवरी 1835 को एक रिपोर्ट तैयार किया जिसमें कहा गया कि भारत का पुराना ज्ञान (संस्कृत, फारसी, गुरुकुल सिस्टम) न के बराबर हैं। वहीं, एक अंग्रेजी लाइब्रेरी की एक शेल्फ में जितना ज्ञान है, उतना पूरे भारत के किताबों में भी नहीं मिलेगा। इसी सोच के तहत 1835 में अंग्रेजी शिक्षा अधिनियम पास किया गया और भारतीय स्कूल-कॉलेजों में अंग्रेजी को मेन लैंग्वेज बना दिया गया। भारतीय एजुकेशन सिस्टम पर क्या असर पड़ा? ————————- ये खबर भी पढ़ें… 1. भागवत बोले-RSS जैसी संस्था केवल नागपुर में बन सकती थी: यहां पहले से त्याग-समाज सेवा की भावना; RSS का उद्देश्य अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी बनाना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) चीफ मोहन भागवत ने कहा, ‘देश में कई लोग हिंदुत्व पर गर्व करते थे और हिंदू एकता की बात करते थे, लेकिन RSS जैसी संस्था केवल नागपुर में ही बन सकती थी। यहां पहले से ही त्याग और समाज सेवा की भावना थी।’ पूरी खबर पढ़ें… 2. भागवत बोले- न रिटायर हो रहा, न किसी से कहा: संघ चाहे तो 75 की उम्र के बाद भी काम करूंगा; भाजपा-RSS में मनभेद नहीं मैंने यह नहीं कहा कि मैं रिटायर हो जाऊंगा या किसी और को रिटायर हो जाना चाहिए। मैं 80 की उम्र में भी शाखा लगाऊंगा। हम किसी भी समय रिटायर होने के लिए तैयार हैं। संघ हमसे जिस भी समय तक काम कराना चाहेगा, हम काम करने के लिए तैयार हैं। पूरी खबर पढ़ें…
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारतीयों को अपनी ज्ञान परंपरा को समझने और उसकी अहमियत जानने के लिए ‘मैकाले नॉलेज सिस्टम’ के विदेशी प्रभाव से पूरी तरह आजाद होना होगा। मुंबई में ‘आर्य युग’ वॉल्यूम के विमोचन के दौरान रविवार (19 अक्टूबर) को संघ प्रमुख ने कहा, ‘हमें भारतीय सिस्टम में पढ़ाने की जगह मैकाले नॉलेज सिस्टम में पढ़ाया गया। इसलिए हमारी जड़ें, हमारा आधार और ज्ञान की खोज के लिए हमारी बुद्धि उसी हिसाब से बन गई। कहा जाता है कि हम गुलाम थे। हम भारतीय हैं, लेकिन हमारा दिमाग और सोच विदेशी हो गए। हमें इस विदेशी प्रभाव से पूरी तरह आजाद होना होगा। तभी हम अपनी ज्ञान परंपरा तक पहुंच पाएंगे और उसकी अहमियत समझ पाएंगे।’ मोहन भागवत के बयान की पांच बड़ी बातें मैकाले नॉलेज सिस्टम क्या है? मैकाले नॉलेज सिस्टम ब्रिटिश राज के समय भारत में लाई गई। ये एक ऐसी पढ़ाई-लिखाई का तरीका था, जो अंग्रेजों ने 1835 में शुरू किया ताकि भारतीयों को उनकी अपनी संस्कृति और ज्ञान से दूर करके अंग्रेजों जैसा सोचने वाला बना सकें। भारत में ये कब और कैसे आया? 1800 के दशक में भारत पर ईस्ट इंडिया कंपनी का राज था। अंग्रेज सोचते थे कि भारतीयों पर पूरा कंट्रोल के लिए अंग्रेजी और कल्चर सिखाना चाहिए। थॉमस बबिंगटन मैकाले नाम के एक ब्रिटिश अफसर ने 2 फरवरी 1835 को एक रिपोर्ट तैयार किया जिसमें कहा गया कि भारत का पुराना ज्ञान (संस्कृत, फारसी, गुरुकुल सिस्टम) न के बराबर हैं। वहीं, एक अंग्रेजी लाइब्रेरी की एक शेल्फ में जितना ज्ञान है, उतना पूरे भारत के किताबों में भी नहीं मिलेगा। इसी सोच के तहत 1835 में अंग्रेजी शिक्षा अधिनियम पास किया गया और भारतीय स्कूल-कॉलेजों में अंग्रेजी को मेन लैंग्वेज बना दिया गया। भारतीय एजुकेशन सिस्टम पर क्या असर पड़ा? ————————- ये खबर भी पढ़ें… 1. भागवत बोले-RSS जैसी संस्था केवल नागपुर में बन सकती थी: यहां पहले से त्याग-समाज सेवा की भावना; RSS का उद्देश्य अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी बनाना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) चीफ मोहन भागवत ने कहा, ‘देश में कई लोग हिंदुत्व पर गर्व करते थे और हिंदू एकता की बात करते थे, लेकिन RSS जैसी संस्था केवल नागपुर में ही बन सकती थी। यहां पहले से ही त्याग और समाज सेवा की भावना थी।’ पूरी खबर पढ़ें… 2. भागवत बोले- न रिटायर हो रहा, न किसी से कहा: संघ चाहे तो 75 की उम्र के बाद भी काम करूंगा; भाजपा-RSS में मनभेद नहीं मैंने यह नहीं कहा कि मैं रिटायर हो जाऊंगा या किसी और को रिटायर हो जाना चाहिए। मैं 80 की उम्र में भी शाखा लगाऊंगा। हम किसी भी समय रिटायर होने के लिए तैयार हैं। संघ हमसे जिस भी समय तक काम कराना चाहेगा, हम काम करने के लिए तैयार हैं। पूरी खबर पढ़ें…