खंडवा के गांधवा गांव में झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही के कारण डेढ़ साल के बच्चे की मौत हो गई। पेट दर्द की शिकायत पर परिजन बच्चे को क्लिनिक ले गए थे, जहां झोलाछाप ने सामान्य चेकअप कर उसे निमोनिया बताया और पांच इंजेक्शन का हैवी डोज दे दिया। डॉक्टर यूक्रेन से पढ़ाई अधूरी छोड़कर खंडवा आया था और यहीं इलाज करने लगा। पहले भी गलत इलाज से एक युवती की जान गई थी। बच्चे के पिता लाबु बारेला ने बताया कि गुरुवार को एक रिश्तेदार ने उन्हें गांधवा के डॉक्टर हिमांशु यादव (24) के पास जाने की सलाह दी थी। छोटी दुकान में डॉक्टर ने मिनी अस्पताल खोल रखा था। झोलाछाप ने बच्चे का चेकअप कर कहा कि उसे निमोनिया है और इलाज में पांच दिन लगेगा। आपको पांच दिन यहां आना पड़ेगा। इसके बाद उसने पहले एक छोटी सलाइन दी, फिर बड़ी सलाइन में पांच इंजेक्शन उतार दिए। इलाज के कुछ देर बाद ही बच्चे की हालत बिगड़ने लगी। जब परिजन ने डॉक्टर को बुलाया, तो वह वहां नहीं था। डॉक्टर की पत्नी ने कहा कि बच्चे को घर ले जाओ, नहीं तो पुलिस को बुलाएंगे। आरोप- चौकी पुलिस ने सुनवाई नहीं की
घटना के बाद बच्चे के पिता लाबु बारेला शिकायत लेकर चौकी पहुंचे, लेकिन पुलिस ने सुनवाई नहीं की। इसके बाद पिपलोद थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई गई और बच्चे को जिला अस्पताल भेजा गया। पोस्टमॉर्टम शुक्रवार को हुआ। पिपलोद थाना टीआई एसएन पांडेय का कहना है कि फिलहाल मर्ग कायम किया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद सभी पक्षों के बयान लेंगे। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। युक्रेन से पढ़ाई अधूरी छोड़कर आया है
ग्रामीणों के अनुसार झोलाछाप हिमांशु यादव ने विदेश में पढ़ाई कर रहे होने का दावा किया, लेकिन यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद पढ़ाई अधूरी छोड़कर लौट आया। पिता गणेश यादव सरकारी डिस्पेंसरी में ड्रेसर है। हिमांशु और उसकी पत्नी ने गांव में मिनी अस्पताल जैसा क्लिनिक खोल रखा है। तीन साल पहले युवती की जान ली
झोलाछाप डॉक्टर हिमांशु लॉकडाउन के बाद से प्रैक्टिस कर रहा है। उसने शुरुआत में ही करीब तीन साल पहले गांव की युवती को गलत इंजेक्शन दे दिया था। पीएटी की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के बाद मामले ने काफी तूल पकड़ा था। बाद में छात्रा प्रतिभा पाटीदार के परिजनों और झोलाछाप डॉक्टर के बीच समझौता हुआ था। बीएमओ बोले- झोलाछापों को नोटिस दे रहे
पंधाना क्षेत्र के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर ओमप्रकाश तंतवार ने कहा, निजी क्लिनिक का रजिस्ट्रेशन जिलास्तर से होता है, इसलिए ज्यादा जानकारी नहीं है। मैं गणेश यादव को जानता हूं, जो कि गांधवा के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर ड्रेसर हैं। उसके पास क्लिनिक का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। क्षेत्र में बहुत सारे झोलाछाप है, एक साथ कार्रवाई करना मुश्किल होता है। एक-एक करके सभी को नोटिस थमा रहे हैं। कैसे बता दिया कि निमोनिया है
जानकारों के मुताबिक, झोलाछाप हो या एमडी डॉक्टर, ये स्टेथेस्कोप से मरीजों का चेकअप करते हैं। जिसका उपयोग हृदय, फेफड़े और आंतों की आवाजें सुनने के लिए किया जाता है। सवाल यह है कि निमोनिया की जांच के लिए एक्स-रे किया जाता है। जबकि झोलाछाप हिमांशु ने डेढ़ साल के मासूम बच्चे को नॉर्मल चेकअप से निमोनिया बताकर उसे हैवी डोज दे दिया। परिजन तो पेट दर्द की समस्या लेकर आए थे।
खंडवा के गांधवा गांव में झोलाछाप डॉक्टर की लापरवाही के कारण डेढ़ साल के बच्चे की मौत हो गई। पेट दर्द की शिकायत पर परिजन बच्चे को क्लिनिक ले गए थे, जहां झोलाछाप ने सामान्य चेकअप कर उसे निमोनिया बताया और पांच इंजेक्शन का हैवी डोज दे दिया। डॉक्टर यूक्रेन से पढ़ाई अधूरी छोड़कर खंडवा आया था और यहीं इलाज करने लगा। पहले भी गलत इलाज से एक युवती की जान गई थी। बच्चे के पिता लाबु बारेला ने बताया कि गुरुवार को एक रिश्तेदार ने उन्हें गांधवा के डॉक्टर हिमांशु यादव (24) के पास जाने की सलाह दी थी। छोटी दुकान में डॉक्टर ने मिनी अस्पताल खोल रखा था। झोलाछाप ने बच्चे का चेकअप कर कहा कि उसे निमोनिया है और इलाज में पांच दिन लगेगा। आपको पांच दिन यहां आना पड़ेगा। इसके बाद उसने पहले एक छोटी सलाइन दी, फिर बड़ी सलाइन में पांच इंजेक्शन उतार दिए। इलाज के कुछ देर बाद ही बच्चे की हालत बिगड़ने लगी। जब परिजन ने डॉक्टर को बुलाया, तो वह वहां नहीं था। डॉक्टर की पत्नी ने कहा कि बच्चे को घर ले जाओ, नहीं तो पुलिस को बुलाएंगे। आरोप- चौकी पुलिस ने सुनवाई नहीं की
घटना के बाद बच्चे के पिता लाबु बारेला शिकायत लेकर चौकी पहुंचे, लेकिन पुलिस ने सुनवाई नहीं की। इसके बाद पिपलोद थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई गई और बच्चे को जिला अस्पताल भेजा गया। पोस्टमॉर्टम शुक्रवार को हुआ। पिपलोद थाना टीआई एसएन पांडेय का कहना है कि फिलहाल मर्ग कायम किया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद सभी पक्षों के बयान लेंगे। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। युक्रेन से पढ़ाई अधूरी छोड़कर आया है
ग्रामीणों के अनुसार झोलाछाप हिमांशु यादव ने विदेश में पढ़ाई कर रहे होने का दावा किया, लेकिन यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद पढ़ाई अधूरी छोड़कर लौट आया। पिता गणेश यादव सरकारी डिस्पेंसरी में ड्रेसर है। हिमांशु और उसकी पत्नी ने गांव में मिनी अस्पताल जैसा क्लिनिक खोल रखा है। तीन साल पहले युवती की जान ली
झोलाछाप डॉक्टर हिमांशु लॉकडाउन के बाद से प्रैक्टिस कर रहा है। उसने शुरुआत में ही करीब तीन साल पहले गांव की युवती को गलत इंजेक्शन दे दिया था। पीएटी की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के बाद मामले ने काफी तूल पकड़ा था। बाद में छात्रा प्रतिभा पाटीदार के परिजनों और झोलाछाप डॉक्टर के बीच समझौता हुआ था। बीएमओ बोले- झोलाछापों को नोटिस दे रहे
पंधाना क्षेत्र के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर ओमप्रकाश तंतवार ने कहा, निजी क्लिनिक का रजिस्ट्रेशन जिलास्तर से होता है, इसलिए ज्यादा जानकारी नहीं है। मैं गणेश यादव को जानता हूं, जो कि गांधवा के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर ड्रेसर हैं। उसके पास क्लिनिक का कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है। क्षेत्र में बहुत सारे झोलाछाप है, एक साथ कार्रवाई करना मुश्किल होता है। एक-एक करके सभी को नोटिस थमा रहे हैं। कैसे बता दिया कि निमोनिया है
जानकारों के मुताबिक, झोलाछाप हो या एमडी डॉक्टर, ये स्टेथेस्कोप से मरीजों का चेकअप करते हैं। जिसका उपयोग हृदय, फेफड़े और आंतों की आवाजें सुनने के लिए किया जाता है। सवाल यह है कि निमोनिया की जांच के लिए एक्स-रे किया जाता है। जबकि झोलाछाप हिमांशु ने डेढ़ साल के मासूम बच्चे को नॉर्मल चेकअप से निमोनिया बताकर उसे हैवी डोज दे दिया। परिजन तो पेट दर्द की समस्या लेकर आए थे।