अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ हुई बातचीत के बाद अमृतसर के व्यापारियों में एक बार फिर व्यापार शुरू होने की उम्मीद जाग गई है। व्यापारियों को विश्वास है कि अगर ये व्यापार शुरू हो गया तो अटारी बॉर्डर पर पड़ा सन्नाटा जल्द ही चहलपहल में बदल जाएगा। भारत और अफगानिस्तान के बीच अटारी सीमा मार्ग से व्यापार फिर शुरू हो गया तो सूखे मेवों, ताजे फलों, मसालों और जड़ी-बूटियों की कीमतें जो इन त्योहार के सीजन में आसमान छू रही हैं, 20 प्रतिशत से अधिक सस्ती हो सकती हैं। अटारी बॉर्डर से व्यापार पांच महीने से बंद अफगानिस्तान एक ऐसा देश है, जिसके पास अपना कोई समुद्री पोर्ट नहीं है। भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार का एकमात्र जरिया अटारी-वाघा सीमा ही है। भारत-पाकिस्तान के बीच पैदा हुए विवाद के बाद से इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) लगभग पांच महीने से बंद पड़ा है।
23 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के एक दिन बाद, कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने कई अहम फैसले लिए थे, जिनमें अटारी आईसीपी को तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्णय भी शामिल था। इसके अगले दिन, 24 अप्रैल को पाकिस्तान ने तीसरे देशों के साथ सभी व्यापार, जिसमें ट्रांजिट ट्रेड भी शामिल था, को रोक दिया। 3886 करोड़ रुपए के वार्षिक व्यापार पर पड़ा असर अटारी-वाघा सीमा भारत और अफगानिस्तान के बीच एकमात्र जमीनी ड्राई पोर्ट है। इसके बंद होने से करीब 3,886 करोड़ रुपए के वार्षिक व्यापार पर असर पड़ा। इस कदम का सीधा असर भारतीय बाजार में अफगान उत्पादों की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी के रूप में देखने को मिला। अफगानिस्तान से आने वाले ड्राई फ्रूट, जड़ी बूटियां, मसाले आदि के दाम बढ़ चुके हैं। महंगे हुए बादाम और किशमिश त्यौहारों के सीजन में बादाम की मांग भारतीय बाजार में बढ़ जाती है। लेकिन अफगानिस्तान से आने वाले गुरबंदी बादाम, जो अप्रैल से पहले 700 रुपए प्रति किलो में मिलते थे, अब 900 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं और इसमें लगातार बढ़ौतरी हो रही है।
वहीं, सुंदेखानी किशमिश (किशमिश की विशेष किस्म) की कीमत 400 रुपए से बढ़कर 600 रुपए प्रति किलो से अधिक हो गई है। व्यापारियों को उम्मीद, कीमतें गिरेंगी और बिक्री बढ़ेगी अमृतसर के ताजे फलों के आयातक और कन्फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष राजदीप सिंह उप्पल ने कहा कि अफगान विदेश मंत्री की भारत यात्रा से यह उम्मीद जगी है कि अटारी बॉर्डर से आयात फिर शुरू हो सकता है।
उन्होंने कहा, “यदि व्यापार बहाल होता है, तो अफगान उत्पादों की कीमतें घटेंगी और बिक्री में भी वृद्धि होगी। वर्तमान में त्योहारी सीजन और सर्दियों की शुरुआत को देखते हुए लोग अफगान सूखे मेवे और ताजे फलों को खरीदना पसंद करते हैं।” अफगान फलों की भारत में खास मांग राजदीप उप्पल के अनुसार, अफगान अंगूर, खरबूजे और अनार अपनी अनोखी मिठास और स्वाद के कारण भारतीय बाजार में बेहद लोकप्रिय हैं। यदि सीमा से व्यापार दोबारा शुरू होता है, तो इससे न केवल अमृतसर के व्यापारियों को राहत मिलेगी बल्कि उपभोक्ताओं को भी सस्ते और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल सकेंगे।
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की नई दिल्ली में भारतीय अधिकारियों के साथ हुई बातचीत के बाद अमृतसर के व्यापारियों में एक बार फिर व्यापार शुरू होने की उम्मीद जाग गई है। व्यापारियों को विश्वास है कि अगर ये व्यापार शुरू हो गया तो अटारी बॉर्डर पर पड़ा सन्नाटा जल्द ही चहलपहल में बदल जाएगा। भारत और अफगानिस्तान के बीच अटारी सीमा मार्ग से व्यापार फिर शुरू हो गया तो सूखे मेवों, ताजे फलों, मसालों और जड़ी-बूटियों की कीमतें जो इन त्योहार के सीजन में आसमान छू रही हैं, 20 प्रतिशत से अधिक सस्ती हो सकती हैं। अटारी बॉर्डर से व्यापार पांच महीने से बंद अफगानिस्तान एक ऐसा देश है, जिसके पास अपना कोई समुद्री पोर्ट नहीं है। भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार का एकमात्र जरिया अटारी-वाघा सीमा ही है। भारत-पाकिस्तान के बीच पैदा हुए विवाद के बाद से इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) लगभग पांच महीने से बंद पड़ा है।
23 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के एक दिन बाद, कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने कई अहम फैसले लिए थे, जिनमें अटारी आईसीपी को तत्काल प्रभाव से बंद करने का निर्णय भी शामिल था। इसके अगले दिन, 24 अप्रैल को पाकिस्तान ने तीसरे देशों के साथ सभी व्यापार, जिसमें ट्रांजिट ट्रेड भी शामिल था, को रोक दिया। 3886 करोड़ रुपए के वार्षिक व्यापार पर पड़ा असर अटारी-वाघा सीमा भारत और अफगानिस्तान के बीच एकमात्र जमीनी ड्राई पोर्ट है। इसके बंद होने से करीब 3,886 करोड़ रुपए के वार्षिक व्यापार पर असर पड़ा। इस कदम का सीधा असर भारतीय बाजार में अफगान उत्पादों की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी के रूप में देखने को मिला। अफगानिस्तान से आने वाले ड्राई फ्रूट, जड़ी बूटियां, मसाले आदि के दाम बढ़ चुके हैं। महंगे हुए बादाम और किशमिश त्यौहारों के सीजन में बादाम की मांग भारतीय बाजार में बढ़ जाती है। लेकिन अफगानिस्तान से आने वाले गुरबंदी बादाम, जो अप्रैल से पहले 700 रुपए प्रति किलो में मिलते थे, अब 900 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं और इसमें लगातार बढ़ौतरी हो रही है।
वहीं, सुंदेखानी किशमिश (किशमिश की विशेष किस्म) की कीमत 400 रुपए से बढ़कर 600 रुपए प्रति किलो से अधिक हो गई है। व्यापारियों को उम्मीद, कीमतें गिरेंगी और बिक्री बढ़ेगी अमृतसर के ताजे फलों के आयातक और कन्फेडरेशन ऑफ इंटरनेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष राजदीप सिंह उप्पल ने कहा कि अफगान विदेश मंत्री की भारत यात्रा से यह उम्मीद जगी है कि अटारी बॉर्डर से आयात फिर शुरू हो सकता है।
उन्होंने कहा, “यदि व्यापार बहाल होता है, तो अफगान उत्पादों की कीमतें घटेंगी और बिक्री में भी वृद्धि होगी। वर्तमान में त्योहारी सीजन और सर्दियों की शुरुआत को देखते हुए लोग अफगान सूखे मेवे और ताजे फलों को खरीदना पसंद करते हैं।” अफगान फलों की भारत में खास मांग राजदीप उप्पल के अनुसार, अफगान अंगूर, खरबूजे और अनार अपनी अनोखी मिठास और स्वाद के कारण भारतीय बाजार में बेहद लोकप्रिय हैं। यदि सीमा से व्यापार दोबारा शुरू होता है, तो इससे न केवल अमृतसर के व्यापारियों को राहत मिलेगी बल्कि उपभोक्ताओं को भी सस्ते और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल सकेंगे।