छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ कफ सिरप से हुई बच्चों की मौतों को टाला जा सकता था, यदि जिला प्रशासन नागपुर से मिले अलर्ट को सीरियसली लेता। दरअसल, नागपुर के कलर्स अस्पताल के संचालक डॉ. राजेश अग्रवाल ने 16 सितंबर को ही परासिया के स्थानीय पार्षद अनुज पाटकर को बताया था- अलर्ट हो जाइए, बच्चों की किडनी फेल हो रही है। ये किसी दवा का साइड इफेक्ट हो सकता है। इस अलर्ट के बाद स्थानीय पार्षद ने कलेक्टर और एसडीएम को इसके बारे में बताया। परासिया के स्थानीय पत्रकार प्रशांत शेल्के ने भी 18 सितंबर को स्थानीय अखबार में परिजन और इलाज करने वाले डॉक्टरों के हवाले से लिखा- हो सकता है कि परासिया में बच्चों को जो सिरप दिए जा रहे हैं, उनमें ऐसे जहरीले तत्व हो, जो बच्चों की किडनी खराब कर रहे हैं। इसके बाद भी जिला प्रशासन ने जागने में 15 दिन की देरी कर दी और 30 सितंबर को जानलेवा कफ सिरप कोल्ड्रिफ पर बैन लगाया। 15 सितंबर से लेकर आज तक 24 बच्चों की मौत हो चुकी है, जो टाली जा सकती थी। भास्कर ने इस पूरे मामले का रिवर्स इन्वेस्टिगेशन किया। नागपुर जाकर डॉ. अग्रवाल समेत उन लोगों से बात की, जिन्होंने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया था। पढ़िए, रिपोर्ट… डॉ. अग्रवाल बोले- बच्चों की किडनी फेल होना कॉमन बात नहीं
भास्कर की टीम सबसे पहले नागपुर के कलर्स अस्पताल पहुंची। यहां के संचालक डॉ. राजेश अग्रवाल से बात की। डॉ. अग्रवाल ने ही सबसे पहले ये संदेह जाहिर किया था कि बच्चों के किडनी फेलियर की वजह दवा हो सकती है। उनसे पूछा कि इस बात का कैसे पता चला, तो उन्होंने कहा- एक बच्चा गंभीर हालत में अस्पताल में एडमिट हुआ था। मुझे डॉक्टर्स और स्टाफ ने बताया कि बच्चे की किडनी अचानक फेल हुई और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। उनकी बात सुनकर मैं चौंक गया, क्योंकि बच्चों की किडनी फेल होना कोई कॉमन बात नहीं है। इसके पीछे बहुत गंभीर वजह ही हो सकती है। मैंने खुद उस केस में इन्वॉल्व होकर उसका कारण जानने की कोशिश की। मैंने बच्चों के पेरेंट्स से सवाल-जवाब किए। उनसे पूछा कि क्या हुआ था, तो उन्होंने कहा कि बच्चे को बुखार आया था। डॉक्टर के पास ले गए और दो दिन में बुखार उतर गया। उसके बाद मैंने उनसे पूछा- क्या खाया था, कैसा पानी पीया, कहां रहते हैं? आसपास कोई केमिकल फैक्ट्री या दूषित पानी का सोर्स तो नहीं? उन्होंने जो बताया उससे पता चला कि ये सब नॉर्मल था। पेरेंट्स ने बताया कि परासिया के और भी बच्चों को सर्दी- बुखार के बाद ये दिक्कत हो रही है, तब मुझे लगा कि कोई कॉमन वजह है। मगर क्या? ये सबसे बड़ा सवाल था। सभी बच्चों के सिंप्टम्स एक जैसे थे। उसके बाद मैंने उनसे दवा के बारे में पूछा। उन्होंने कहा- हां दवा दे रहे हैं, लेकिन वो दवा के बारे में ठीक से बता नहीं पाए। पार्षद बोले- 16 सितंबर को मामले का पता चला
डॉ. अग्रवाल ने परासिया के पार्षद और उनके पारिवारिक मित्र अनुज पाटकर को कॉल किया। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि बच्चों को जो दवा दी जा रही है, वो गलत हो सकती है इसलिए लोगों को जागरूक करो। अनुज पाटकर कहते हैं कि डॉ. अग्रवाल ने मुझे 16 सितंबर को कॉल किया था। उस समय मैं खुद बीमार पत्नी को लेकर नागपुर में ही था। उन्होंने मुझसे कहा कि परासिया के 2 बच्चे उनके अस्पताल में भर्ती हैं। बच्चों की किडनी फेल हो रही है। ये भी कहा कि दूसरे अस्पतालों में भी ऐसे बच्चे पहुंच रहे हैं। उन्होंने बच्चों के परिजन से बात की है, उन्हें संदेह है कि कोई न कोई गलत दवा की वजह से ऐसा हो रहा है। मैंने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए तत्काल ही परासिया एसडीएम शुभम कुमार यादव और तत्कालीन डीएम शीलेंद्र सिंह को कॉल कर ये जानकारी दी। एसडीएम यादव ने मुझसे कहा कि वो दिखवाते हैं। देर शाम को उन्होंने मुझे कॉल किया और बताया कि उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मैसेज करवा दिया है। स्थानीय अखबारों ने भी बताया- दवा हो सकती है मौत की वजह
प्रशांत शेल्के बीते ढाई दशक से छिंदवाड़ा के परासिया में पत्रकारिता कर रहे हैं। शेल्के बताते हैं कि 7 सितंबर को जब अदनान की मौत हुई तो मैंने इस मामले पर नजर रखी। फिर 12 सितंबर को उसेद भी बीमार पड़ा। बच्चों की बीमारी के मामले एक के बाद एक आ रहे थे। मगर, ये बड़ा मामला है ऐसा कोई अंदाजा नहीं था। 17 तारीख को मेरे मित्र और इलाके के पार्षद अनुज पाटकर ने मुझे बताया कि नागपुर के डॉ. अग्रवाल ने कॉल कर बताया है कि उनके अस्पताल में दो-तीन बच्चे भर्ती हैं। मुझे लगा कि अब ये मामला गंभीर होता जा रहा है। मैंने 18 तारीख को सोशल मीडिया पर एक स्टोरी लिखी। उसमें बताया कि नागपुर में जो बच्चे भर्ती हो रहे हैं, उनकी किडनी फेल हुई है। ये भी लिखा था कि किडनी फेल होने से न्यूटन इलाके के एक बच्चे की मौत हो चुकी है और बडकुही, उमरेठ और रिधोरा के बच्चे नागपुर के अस्पतालों में भर्ती हैं। अपनी स्टोरी में ये भी बताया कि नागपुर के डॉक्टरों ने स्थानीय डॉक्टरों से किसी खास दवा के साइड इफेक्ट को लेकर बातचीत की है। मगर, वे इस नतीजे तक नहीं पहुंच पाए हैं कि दवाओं की वजह से बच्चे बीमार हो रहे हैं। नागपुर मेडिकल कॉलेज ने बायोप्सी कराई
नागपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स ने भास्कर को ऑफ कैमरा बताया कि छिंदवाड़ा के बच्चे जब यहां आए तो सभी में एक जैसे लक्षण थे। सभी को सर्दी-खांसी बुखार हुआ था। सबके मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन में कुछ दवाएं एक जैसी थीं। इसमें कोल्ड्रिफ सिरप भी शामिल था। पहले डॉक्टर्स ने बच्चों की मेडिकल हिस्ट्री देखी। फिर इसे पुख्ता करने के लिए इन बच्चों की किडनी की बायोप्सी जांच कराई। इसमें किडनी में एक्यूट ट्यूबलर इंजरी मिली। इसके बाद 2024 की रिसर्च की भी स्टडी हुई। जिसमें डाइएथिलीन ग्लॉयकाल के कंटामिनेशन को किडनी के लिए खतरनाक माना गया है। छिंदवाड़ा के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन नंदुरकर ने कहा- नागपुर के डॉक्टर्स ने बताया कि किडनी फेल होने वाले बच्चों में कोल्ड्रिफ सिरप कॉमन थी। हमने प्रशासन को बताया और फिर छिंदवाड़ा में दवा बैन की गई। कोल्ड्रिफ बनाने वाली कंपनी का डायरेक्टर गिरफ्तार
उधर, कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के डायरेक्टर गोविंदन रंगनाथन को गिरफ्तार कर लिया गया है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई SIT की टीम ने बुधवार रात चेन्नई में दबिश देकर रंगनाथन को पकड़ा। SIT ने कंपनी से महत्वपूर्ण दस्तावेज, दवाओं के नमूने और प्रोडक्शन रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं। रंगनाथन पर 20 हजार रुपए का इनाम था। वह अपनी पत्नी के साथ फरार चल रहा था। चेन्नई में रंगनाथन का चेन्नई-बेंगलुरु राजमार्ग पर स्थित 2,000 वर्ग फुट का अपार्टमेंट सील कर दिया गया था, जबकि कोडम्बक्कम स्थित उनका रजिस्टर्ड ऑफिस बंद मिला था। मंत्री ने तमिलनाडु सरकार को बता दिया दोषी
एमपी के स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने तमिलनाडु सरकार और वहां के अधिकारियों पर इस पूरे मामले का ठीकरा फोड़ दिया है। उन्होंने कहा- सीएम डॉ. मोहन यादव खुद पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। पीड़ित बच्चों का इलाज चल रहा है। हमारी सरकार इनके इलाज का खर्च उठाएगी। मंत्री पटेल ने कहा कि इस पूरे मामले के लिए तमिलनाडु सरकार की व्यवस्था दोषी है। फैक्ट्री में दवा बनाने का लाइसेंस राज्य सरकार देती है। जब दवा फैक्ट्री से आती है तो उसकी जांच का जिम्मा भी राज्य के अधिकारियों का ही होता है। हर बैच का लैबोरेटरी में जांच होना जरूरी है। ऐसे में तमिलनाडु सरकार ने अपनी जिम्मेदारियों को ठीक तरह से नहीं निभाया है। ये खबर भी पढ़ें… मां बोलीं-अ अनार का मीठा दाना आखिरी शब्द थे उसके एक महिला दूसरी महिला से कहती है- वो हमारे घर के आंगन में खेलता था। एक दिन उसे थोड़ी सर्दी खांसी थी। मौसम बदलता है तो बच्चों को हो ही जाती है, फिर पता चला कि वो नागपुर में भर्ती है। उसके बाद तो वो जिंदा नहीं लौटा। हम तो हैरान थे। इस समय परासिया में हर कोई केवल कफ सिरप पीने से हुई बच्चों की मौत की ही बात कर रहा है। पढ़ें पूरी खबर…
छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ कफ सिरप से हुई बच्चों की मौतों को टाला जा सकता था, यदि जिला प्रशासन नागपुर से मिले अलर्ट को सीरियसली लेता। दरअसल, नागपुर के कलर्स अस्पताल के संचालक डॉ. राजेश अग्रवाल ने 16 सितंबर को ही परासिया के स्थानीय पार्षद अनुज पाटकर को बताया था- अलर्ट हो जाइए, बच्चों की किडनी फेल हो रही है। ये किसी दवा का साइड इफेक्ट हो सकता है। इस अलर्ट के बाद स्थानीय पार्षद ने कलेक्टर और एसडीएम को इसके बारे में बताया। परासिया के स्थानीय पत्रकार प्रशांत शेल्के ने भी 18 सितंबर को स्थानीय अखबार में परिजन और इलाज करने वाले डॉक्टरों के हवाले से लिखा- हो सकता है कि परासिया में बच्चों को जो सिरप दिए जा रहे हैं, उनमें ऐसे जहरीले तत्व हो, जो बच्चों की किडनी खराब कर रहे हैं। इसके बाद भी जिला प्रशासन ने जागने में 15 दिन की देरी कर दी और 30 सितंबर को जानलेवा कफ सिरप कोल्ड्रिफ पर बैन लगाया। 15 सितंबर से लेकर आज तक 24 बच्चों की मौत हो चुकी है, जो टाली जा सकती थी। भास्कर ने इस पूरे मामले का रिवर्स इन्वेस्टिगेशन किया। नागपुर जाकर डॉ. अग्रवाल समेत उन लोगों से बात की, जिन्होंने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया था। पढ़िए, रिपोर्ट… डॉ. अग्रवाल बोले- बच्चों की किडनी फेल होना कॉमन बात नहीं
भास्कर की टीम सबसे पहले नागपुर के कलर्स अस्पताल पहुंची। यहां के संचालक डॉ. राजेश अग्रवाल से बात की। डॉ. अग्रवाल ने ही सबसे पहले ये संदेह जाहिर किया था कि बच्चों के किडनी फेलियर की वजह दवा हो सकती है। उनसे पूछा कि इस बात का कैसे पता चला, तो उन्होंने कहा- एक बच्चा गंभीर हालत में अस्पताल में एडमिट हुआ था। मुझे डॉक्टर्स और स्टाफ ने बताया कि बच्चे की किडनी अचानक फेल हुई और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। उनकी बात सुनकर मैं चौंक गया, क्योंकि बच्चों की किडनी फेल होना कोई कॉमन बात नहीं है। इसके पीछे बहुत गंभीर वजह ही हो सकती है। मैंने खुद उस केस में इन्वॉल्व होकर उसका कारण जानने की कोशिश की। मैंने बच्चों के पेरेंट्स से सवाल-जवाब किए। उनसे पूछा कि क्या हुआ था, तो उन्होंने कहा कि बच्चे को बुखार आया था। डॉक्टर के पास ले गए और दो दिन में बुखार उतर गया। उसके बाद मैंने उनसे पूछा- क्या खाया था, कैसा पानी पीया, कहां रहते हैं? आसपास कोई केमिकल फैक्ट्री या दूषित पानी का सोर्स तो नहीं? उन्होंने जो बताया उससे पता चला कि ये सब नॉर्मल था। पेरेंट्स ने बताया कि परासिया के और भी बच्चों को सर्दी- बुखार के बाद ये दिक्कत हो रही है, तब मुझे लगा कि कोई कॉमन वजह है। मगर क्या? ये सबसे बड़ा सवाल था। सभी बच्चों के सिंप्टम्स एक जैसे थे। उसके बाद मैंने उनसे दवा के बारे में पूछा। उन्होंने कहा- हां दवा दे रहे हैं, लेकिन वो दवा के बारे में ठीक से बता नहीं पाए। पार्षद बोले- 16 सितंबर को मामले का पता चला
डॉ. अग्रवाल ने परासिया के पार्षद और उनके पारिवारिक मित्र अनुज पाटकर को कॉल किया। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि बच्चों को जो दवा दी जा रही है, वो गलत हो सकती है इसलिए लोगों को जागरूक करो। अनुज पाटकर कहते हैं कि डॉ. अग्रवाल ने मुझे 16 सितंबर को कॉल किया था। उस समय मैं खुद बीमार पत्नी को लेकर नागपुर में ही था। उन्होंने मुझसे कहा कि परासिया के 2 बच्चे उनके अस्पताल में भर्ती हैं। बच्चों की किडनी फेल हो रही है। ये भी कहा कि दूसरे अस्पतालों में भी ऐसे बच्चे पहुंच रहे हैं। उन्होंने बच्चों के परिजन से बात की है, उन्हें संदेह है कि कोई न कोई गलत दवा की वजह से ऐसा हो रहा है। मैंने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए तत्काल ही परासिया एसडीएम शुभम कुमार यादव और तत्कालीन डीएम शीलेंद्र सिंह को कॉल कर ये जानकारी दी। एसडीएम यादव ने मुझसे कहा कि वो दिखवाते हैं। देर शाम को उन्होंने मुझे कॉल किया और बताया कि उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मैसेज करवा दिया है। स्थानीय अखबारों ने भी बताया- दवा हो सकती है मौत की वजह
प्रशांत शेल्के बीते ढाई दशक से छिंदवाड़ा के परासिया में पत्रकारिता कर रहे हैं। शेल्के बताते हैं कि 7 सितंबर को जब अदनान की मौत हुई तो मैंने इस मामले पर नजर रखी। फिर 12 सितंबर को उसेद भी बीमार पड़ा। बच्चों की बीमारी के मामले एक के बाद एक आ रहे थे। मगर, ये बड़ा मामला है ऐसा कोई अंदाजा नहीं था। 17 तारीख को मेरे मित्र और इलाके के पार्षद अनुज पाटकर ने मुझे बताया कि नागपुर के डॉ. अग्रवाल ने कॉल कर बताया है कि उनके अस्पताल में दो-तीन बच्चे भर्ती हैं। मुझे लगा कि अब ये मामला गंभीर होता जा रहा है। मैंने 18 तारीख को सोशल मीडिया पर एक स्टोरी लिखी। उसमें बताया कि नागपुर में जो बच्चे भर्ती हो रहे हैं, उनकी किडनी फेल हुई है। ये भी लिखा था कि किडनी फेल होने से न्यूटन इलाके के एक बच्चे की मौत हो चुकी है और बडकुही, उमरेठ और रिधोरा के बच्चे नागपुर के अस्पतालों में भर्ती हैं। अपनी स्टोरी में ये भी बताया कि नागपुर के डॉक्टरों ने स्थानीय डॉक्टरों से किसी खास दवा के साइड इफेक्ट को लेकर बातचीत की है। मगर, वे इस नतीजे तक नहीं पहुंच पाए हैं कि दवाओं की वजह से बच्चे बीमार हो रहे हैं। नागपुर मेडिकल कॉलेज ने बायोप्सी कराई
नागपुर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स ने भास्कर को ऑफ कैमरा बताया कि छिंदवाड़ा के बच्चे जब यहां आए तो सभी में एक जैसे लक्षण थे। सभी को सर्दी-खांसी बुखार हुआ था। सबके मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन में कुछ दवाएं एक जैसी थीं। इसमें कोल्ड्रिफ सिरप भी शामिल था। पहले डॉक्टर्स ने बच्चों की मेडिकल हिस्ट्री देखी। फिर इसे पुख्ता करने के लिए इन बच्चों की किडनी की बायोप्सी जांच कराई। इसमें किडनी में एक्यूट ट्यूबलर इंजरी मिली। इसके बाद 2024 की रिसर्च की भी स्टडी हुई। जिसमें डाइएथिलीन ग्लॉयकाल के कंटामिनेशन को किडनी के लिए खतरनाक माना गया है। छिंदवाड़ा के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन नंदुरकर ने कहा- नागपुर के डॉक्टर्स ने बताया कि किडनी फेल होने वाले बच्चों में कोल्ड्रिफ सिरप कॉमन थी। हमने प्रशासन को बताया और फिर छिंदवाड़ा में दवा बैन की गई। कोल्ड्रिफ बनाने वाली कंपनी का डायरेक्टर गिरफ्तार
उधर, कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के डायरेक्टर गोविंदन रंगनाथन को गिरफ्तार कर लिया गया है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई SIT की टीम ने बुधवार रात चेन्नई में दबिश देकर रंगनाथन को पकड़ा। SIT ने कंपनी से महत्वपूर्ण दस्तावेज, दवाओं के नमूने और प्रोडक्शन रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं। रंगनाथन पर 20 हजार रुपए का इनाम था। वह अपनी पत्नी के साथ फरार चल रहा था। चेन्नई में रंगनाथन का चेन्नई-बेंगलुरु राजमार्ग पर स्थित 2,000 वर्ग फुट का अपार्टमेंट सील कर दिया गया था, जबकि कोडम्बक्कम स्थित उनका रजिस्टर्ड ऑफिस बंद मिला था। मंत्री ने तमिलनाडु सरकार को बता दिया दोषी
एमपी के स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने तमिलनाडु सरकार और वहां के अधिकारियों पर इस पूरे मामले का ठीकरा फोड़ दिया है। उन्होंने कहा- सीएम डॉ. मोहन यादव खुद पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। पीड़ित बच्चों का इलाज चल रहा है। हमारी सरकार इनके इलाज का खर्च उठाएगी। मंत्री पटेल ने कहा कि इस पूरे मामले के लिए तमिलनाडु सरकार की व्यवस्था दोषी है। फैक्ट्री में दवा बनाने का लाइसेंस राज्य सरकार देती है। जब दवा फैक्ट्री से आती है तो उसकी जांच का जिम्मा भी राज्य के अधिकारियों का ही होता है। हर बैच का लैबोरेटरी में जांच होना जरूरी है। ऐसे में तमिलनाडु सरकार ने अपनी जिम्मेदारियों को ठीक तरह से नहीं निभाया है। ये खबर भी पढ़ें… मां बोलीं-अ अनार का मीठा दाना आखिरी शब्द थे उसके एक महिला दूसरी महिला से कहती है- वो हमारे घर के आंगन में खेलता था। एक दिन उसे थोड़ी सर्दी खांसी थी। मौसम बदलता है तो बच्चों को हो ही जाती है, फिर पता चला कि वो नागपुर में भर्ती है। उसके बाद तो वो जिंदा नहीं लौटा। हम तो हैरान थे। इस समय परासिया में हर कोई केवल कफ सिरप पीने से हुई बच्चों की मौत की ही बात कर रहा है। पढ़ें पूरी खबर…