पंजाब के तरनतारन उपचुनाव में आम आदमी पार्टी ने भी दलबदलू नेता को टिकट देने का फॉर्मूला अपनाया है। CM भगवंत मान ने शुक्रवार को हरमीत संधू को उम्मीदवार घोषित कर दिया। वह अकाली दल छोड़कर AAP में शामिल हुए हैं। AAP के अलावा भाजपा ने भी अकाली दल से आए हरजीत संधू को उम्मीदवार बनाया है। इधर, कांग्रेस से दविंदर सिंह संधू के नाम की चर्चा है। वहीं अकाली दल ने रिटायर्ड प्रिंसिपल को कैंडिडेट बनाया है। अब सबकी नजर असम जेल में बंद खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल की पार्टी अकाली दल-वारिस पंजाब दे पर है। तरनतारन विधानसभा सीट अमृतपाल के संसदीय क्षेत्र खडूर साहिब में आती है। तरनतारन में AAP के विधायक रहे कश्मीर सिंह सोहल के निधन के बाद यह सीट खाली हुई है। हालांकि अभी यहां उपचुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं हुई है। लेकिन उम्मीद है कि नवंबर में यहां उपचुनाव कराए जा सकते हैं। वहीं पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने तरनतारन उपचुनाव को लेकर दलों को 30 सितंबर को जारी फाइनल वोटर लिस्ट की जानकारी दी। AAP दलबदलू फॉर्मूले से 3 उपचुनाव जीती
साल 2022 में 117 में से 92 सीटें जीतने वाली AAP ने उसके बाद हुए ज्यादातर उपचुनाव में दूसरी पार्टी से नेता लाकर चुनाव लड़ाए और जीते भी। तरनतारन से पहले 3 सीटों पर आप को उपचुनाव में जीत मिली। इनमें जालंधर वेस्ट में मोहिंदर भगत को भाजपा, चब्बेवाल में डॉ. इशांक चब्बेवाल को कांग्रेस और गिद्दड़बाहा में हरदीप डिंपी ढिल्लो को अकाली दल से लाकर AAP सीट जीत गई। यही वजह है कि 3 महीने पहले अकाली दल से लाए हरमीत संधू को उम्मीदवार बनाया गया है। AAP भले ही सत्ता में है। लेकिन यह सीट जीतना आसान नहीं है। 2022 में उनके उम्मीदवार कश्मीर सिंह सोहल ने 40.45% वोट शेयर के साथ सीट जीती थी। मगर, 2024 के लोकसभा चुनाव में अमृतपाल सिंह ने आम आदमी पार्टी के वोट काट लिए थे। हालांकि 3 बार विधायक रह चुके संधू का चेहरा पार्टी को फायदा दे सकता है। कांग्रेस ने सर्वे के बाद कारोबारी को टिकट दी
कांग्रेस ने तरनतारन से दविंदर सिंह संधू (लाली ढाला) को कैंडिडेट बनाया है। वह पेशे से कारोबारी हैं। उनके पास अच्छी एग्रीकल्चर लैंड के साथ अमृतसर के लॉरेंस रोड पर कॉमर्शियल बिल्डिंग भी है। हालांकि उनकी समाजसेवी की छवि भी है। यही वजह है कि 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने आजाद उम्मीदवार के तौर पर ही 18 हजार से अधिक वोट प्राप्त किए थे। दविंदर संधू क्षेत्र की टिकट घोषित करने से पहले कांग्रेस हाईकमान ने दो अलग-अलग सर्वे कराए, जिनमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से उनके नाम पर सहमति दी। उनका कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित पंजाब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उनके नाम पर मुहर लगाई है। भाजपा ने यूथ अकाली नेता रहे संधू को कैंडिडेट बनाया
भाजपा ने यहां से हरजीत सिंह संधू को उम्मीदवार बनाया है। वह दिसंबर 2022 से भाजपा तरनतारन के जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। लोकल पॉलिटिक्स व संगठन में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। हरजीत सिंह संधू ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 2007 में शिरोमणि अकाली दल के यूथ विंग से की, लेकिन 2022 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा जॉइन कर ली थी। वे कृषि और ईंट भट्टे के कारोबार से जुड़े हुए हैं। शैक्षिक रूप से, वे कंप्यूटर एप्लिकेशन में डिप्लोमा धारक हैं। पार्टी के अंदरूनी सर्वे और अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा की सिफारिश पर उन्हें टिकट मिला। यह उनका पहला विधानसभा चुनाव है। अकाली दल ने आजाद ग्रुप की प्रिंसिपल को उम्मीदवार बनाया
अकाली दल ने प्रिंसिपल सुखविंदर कौर रंधावा को तरनतारन उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया है। उनकी पहचान “आजाद ग्रुप” की प्रमुख नेता के रूप में है। उनकी अगुआई में लोकल ग्रुप ने निकाय चुनाव लड़े थे। जिसके बाद 43 सरपंच, 8 नगर परिषद पार्षद और कई पूर्व चेयरमैन उनके साथ हैं। इसलिए उनका जनाधार काफी मजबूत माना जाता है। सुखविंदर कौर पहले स्कूल प्रिंसिपल रह चुकी हैं। इस वजह से लोकल लोगों में उनकी समाजसेवी और अनुशासित नेतृत्व की छवि है। अमृतपाल की पार्टी भी लड़ेगी चुनाव, उम्मीदवार का इंतजार
तरनतारन सीट का उपचुनाव खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल की पार्टी अकाली दल-वारिस पंजाब दे भी लड़ेगी। हालांकि उन्होंने अभी उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह कह चुके हैं कि जल्द उम्मीदवार की घोषणा करेंगे। हालांकि पहले पार्टी उपचुनाव नहीं लड़ना चाहती थी। पिछले चुनाव में भी उन्होंने उम्मीदवार नहीं उतारा। वह सीधे 2027 में विधानसभा चुनाव की तैयारी में थे। मगर, तरनतारन सीट अमृतपाल के संसदीय क्षेत्र खडूर साहिब का हिस्सा है। ऐसे में यहां सांसद को 2024 में मिले सपोर्ट को कैश करने के लिए उनकी पार्टी इसे विधानसभा में एंट्री का मौका मान रही है। अमृतपाल 1.97 लाख वोटों से चुनाव जीते थे।
पंजाब के तरनतारन उपचुनाव में आम आदमी पार्टी ने भी दलबदलू नेता को टिकट देने का फॉर्मूला अपनाया है। CM भगवंत मान ने शुक्रवार को हरमीत संधू को उम्मीदवार घोषित कर दिया। वह अकाली दल छोड़कर AAP में शामिल हुए हैं। AAP के अलावा भाजपा ने भी अकाली दल से आए हरजीत संधू को उम्मीदवार बनाया है। इधर, कांग्रेस से दविंदर सिंह संधू के नाम की चर्चा है। वहीं अकाली दल ने रिटायर्ड प्रिंसिपल को कैंडिडेट बनाया है। अब सबकी नजर असम जेल में बंद खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल की पार्टी अकाली दल-वारिस पंजाब दे पर है। तरनतारन विधानसभा सीट अमृतपाल के संसदीय क्षेत्र खडूर साहिब में आती है। तरनतारन में AAP के विधायक रहे कश्मीर सिंह सोहल के निधन के बाद यह सीट खाली हुई है। हालांकि अभी यहां उपचुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं हुई है। लेकिन उम्मीद है कि नवंबर में यहां उपचुनाव कराए जा सकते हैं। वहीं पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने तरनतारन उपचुनाव को लेकर दलों को 30 सितंबर को जारी फाइनल वोटर लिस्ट की जानकारी दी। AAP दलबदलू फॉर्मूले से 3 उपचुनाव जीती
साल 2022 में 117 में से 92 सीटें जीतने वाली AAP ने उसके बाद हुए ज्यादातर उपचुनाव में दूसरी पार्टी से नेता लाकर चुनाव लड़ाए और जीते भी। तरनतारन से पहले 3 सीटों पर आप को उपचुनाव में जीत मिली। इनमें जालंधर वेस्ट में मोहिंदर भगत को भाजपा, चब्बेवाल में डॉ. इशांक चब्बेवाल को कांग्रेस और गिद्दड़बाहा में हरदीप डिंपी ढिल्लो को अकाली दल से लाकर AAP सीट जीत गई। यही वजह है कि 3 महीने पहले अकाली दल से लाए हरमीत संधू को उम्मीदवार बनाया गया है। AAP भले ही सत्ता में है। लेकिन यह सीट जीतना आसान नहीं है। 2022 में उनके उम्मीदवार कश्मीर सिंह सोहल ने 40.45% वोट शेयर के साथ सीट जीती थी। मगर, 2024 के लोकसभा चुनाव में अमृतपाल सिंह ने आम आदमी पार्टी के वोट काट लिए थे। हालांकि 3 बार विधायक रह चुके संधू का चेहरा पार्टी को फायदा दे सकता है। कांग्रेस ने सर्वे के बाद कारोबारी को टिकट दी
कांग्रेस ने तरनतारन से दविंदर सिंह संधू (लाली ढाला) को कैंडिडेट बनाया है। वह पेशे से कारोबारी हैं। उनके पास अच्छी एग्रीकल्चर लैंड के साथ अमृतसर के लॉरेंस रोड पर कॉमर्शियल बिल्डिंग भी है। हालांकि उनकी समाजसेवी की छवि भी है। यही वजह है कि 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने आजाद उम्मीदवार के तौर पर ही 18 हजार से अधिक वोट प्राप्त किए थे। दविंदर संधू क्षेत्र की टिकट घोषित करने से पहले कांग्रेस हाईकमान ने दो अलग-अलग सर्वे कराए, जिनमें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से उनके नाम पर सहमति दी। उनका कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी सहित पंजाब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने उनके नाम पर मुहर लगाई है। भाजपा ने यूथ अकाली नेता रहे संधू को कैंडिडेट बनाया
भाजपा ने यहां से हरजीत सिंह संधू को उम्मीदवार बनाया है। वह दिसंबर 2022 से भाजपा तरनतारन के जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। लोकल पॉलिटिक्स व संगठन में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। हरजीत सिंह संधू ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 2007 में शिरोमणि अकाली दल के यूथ विंग से की, लेकिन 2022 विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा जॉइन कर ली थी। वे कृषि और ईंट भट्टे के कारोबार से जुड़े हुए हैं। शैक्षिक रूप से, वे कंप्यूटर एप्लिकेशन में डिप्लोमा धारक हैं। पार्टी के अंदरूनी सर्वे और अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा की सिफारिश पर उन्हें टिकट मिला। यह उनका पहला विधानसभा चुनाव है। अकाली दल ने आजाद ग्रुप की प्रिंसिपल को उम्मीदवार बनाया
अकाली दल ने प्रिंसिपल सुखविंदर कौर रंधावा को तरनतारन उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया है। उनकी पहचान “आजाद ग्रुप” की प्रमुख नेता के रूप में है। उनकी अगुआई में लोकल ग्रुप ने निकाय चुनाव लड़े थे। जिसके बाद 43 सरपंच, 8 नगर परिषद पार्षद और कई पूर्व चेयरमैन उनके साथ हैं। इसलिए उनका जनाधार काफी मजबूत माना जाता है। सुखविंदर कौर पहले स्कूल प्रिंसिपल रह चुकी हैं। इस वजह से लोकल लोगों में उनकी समाजसेवी और अनुशासित नेतृत्व की छवि है। अमृतपाल की पार्टी भी लड़ेगी चुनाव, उम्मीदवार का इंतजार
तरनतारन सीट का उपचुनाव खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल की पार्टी अकाली दल-वारिस पंजाब दे भी लड़ेगी। हालांकि उन्होंने अभी उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह कह चुके हैं कि जल्द उम्मीदवार की घोषणा करेंगे। हालांकि पहले पार्टी उपचुनाव नहीं लड़ना चाहती थी। पिछले चुनाव में भी उन्होंने उम्मीदवार नहीं उतारा। वह सीधे 2027 में विधानसभा चुनाव की तैयारी में थे। मगर, तरनतारन सीट अमृतपाल के संसदीय क्षेत्र खडूर साहिब का हिस्सा है। ऐसे में यहां सांसद को 2024 में मिले सपोर्ट को कैश करने के लिए उनकी पार्टी इसे विधानसभा में एंट्री का मौका मान रही है। अमृतपाल 1.97 लाख वोटों से चुनाव जीते थे।