पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक श्री करतारपुर साहिब गुरुद्वारा को आम श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिया गया है। हाल ही में आई बाढ़ से परिसर में 11 फीट तक पानी भर गया था, जिसके चलते गुरुद्वारा बंद करना पड़ा था। अब मरम्मत और सफाई का काम पूरा होने के बाद श्रद्धालु यहां दर्शन कर पा रहे हैं। हालांकि, भारतीय श्रद्धालुओं के लिए कॉरिडोर अब भी बंद है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर की सेवाएं अगले आदेश तक निलंबित हैं। कॉरिडोर 7 मई 2025 से बंद पड़ा है। बता दें कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक बड़े आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद भारत ने 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की, जिसे “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया गया। उसी दिन से भारत ने करतारपुर कॉरिडोर से श्रद्धालुओं की आवाजाही रोक दी। कल डाला जाएगा अखंड पाठ का भोग
पाकिस्तान में करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के हेड ग्रंथी गोबिंद सिंह ने बताया कि इस समय गुरु नानकदेव का 486वां ज्योतिजोत दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है। 20 सितंबर से अखंड पाठ की शुरुआत हुई, जिसका भोग 22 सितंबर को डाला जाएगा। सिख श्रद्धालु पाकिस्तान पहुंचकर गुरुद्वारा परिसर में दर्शन कर रहे हैं, लेकिन भारतीय सिख श्रद्धालु सीमापार नहीं जा पा रहे। इससे श्रद्धालुओं में निराशा और राजनीतिक विवाद दोनों देखने को मिल रहे हैं। सियासी दलों और सिख संगठनों का क्या कहा
पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बलबीर सिंह सिद्धू ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कॉरिडोर खोलने और गुरु नानकदेव के प्रकाश पर्व पर ननकाना साहिब जाने की अनुमति देने की अपील की। AAP विधायक गुरदीप सिंह रंधावा ने केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन सौंपकर कॉरिडोर की मरम्मत और खोलने की मांग की। SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि “जब भारत-पाकिस्तान क्रिकेट खेल सकते हैं तो सिख श्रद्धालुओं को पवित्र स्थलों पर जाने से क्यों रोका जा रहा है?” अकाली दल वारिस पंजाब दे ने भी केंद्र सरकार पर दोहरी नीति का आरोप लगाया। केंद्र सरकार का क्या है पक्ष
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने पत्र में साफ किया है कि सीमा पर तनावपूर्ण हालात के बीच तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान भेजना उचित नहीं है। मंत्रालय का कहना है कि सुरक्षा खतरा अभी भी बरकरार है और इसी कारण से करतारपुर कॉरिडोर की सेवाएं बहाल नहीं की जा सकतीं। पाकिस्तान ने करतारपुर साहिब गुरुद्वारा श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया है, लेकिन भारत ने अब तक कॉरिडोर खोलने का निर्णय नहीं लिया। जिसे लेकर राजनीतिक दलों व धार्मिक संगठनों का दबाव सरकार पर लगातार बढ़ रहा है।
पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक श्री करतारपुर साहिब गुरुद्वारा को आम श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिया गया है। हाल ही में आई बाढ़ से परिसर में 11 फीट तक पानी भर गया था, जिसके चलते गुरुद्वारा बंद करना पड़ा था। अब मरम्मत और सफाई का काम पूरा होने के बाद श्रद्धालु यहां दर्शन कर पा रहे हैं। हालांकि, भारतीय श्रद्धालुओं के लिए कॉरिडोर अब भी बंद है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर की सेवाएं अगले आदेश तक निलंबित हैं। कॉरिडोर 7 मई 2025 से बंद पड़ा है। बता दें कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक बड़े आतंकवादी हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद भारत ने 7 मई को पाकिस्तान और पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की, जिसे “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया गया। उसी दिन से भारत ने करतारपुर कॉरिडोर से श्रद्धालुओं की आवाजाही रोक दी। कल डाला जाएगा अखंड पाठ का भोग
पाकिस्तान में करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के हेड ग्रंथी गोबिंद सिंह ने बताया कि इस समय गुरु नानकदेव का 486वां ज्योतिजोत दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है। 20 सितंबर से अखंड पाठ की शुरुआत हुई, जिसका भोग 22 सितंबर को डाला जाएगा। सिख श्रद्धालु पाकिस्तान पहुंचकर गुरुद्वारा परिसर में दर्शन कर रहे हैं, लेकिन भारतीय सिख श्रद्धालु सीमापार नहीं जा पा रहे। इससे श्रद्धालुओं में निराशा और राजनीतिक विवाद दोनों देखने को मिल रहे हैं। सियासी दलों और सिख संगठनों का क्या कहा
पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बलबीर सिंह सिद्धू ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कॉरिडोर खोलने और गुरु नानकदेव के प्रकाश पर्व पर ननकाना साहिब जाने की अनुमति देने की अपील की। AAP विधायक गुरदीप सिंह रंधावा ने केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन सौंपकर कॉरिडोर की मरम्मत और खोलने की मांग की। SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि “जब भारत-पाकिस्तान क्रिकेट खेल सकते हैं तो सिख श्रद्धालुओं को पवित्र स्थलों पर जाने से क्यों रोका जा रहा है?” अकाली दल वारिस पंजाब दे ने भी केंद्र सरकार पर दोहरी नीति का आरोप लगाया। केंद्र सरकार का क्या है पक्ष
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अपने पत्र में साफ किया है कि सीमा पर तनावपूर्ण हालात के बीच तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान भेजना उचित नहीं है। मंत्रालय का कहना है कि सुरक्षा खतरा अभी भी बरकरार है और इसी कारण से करतारपुर कॉरिडोर की सेवाएं बहाल नहीं की जा सकतीं। पाकिस्तान ने करतारपुर साहिब गुरुद्वारा श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया है, लेकिन भारत ने अब तक कॉरिडोर खोलने का निर्णय नहीं लिया। जिसे लेकर राजनीतिक दलों व धार्मिक संगठनों का दबाव सरकार पर लगातार बढ़ रहा है।